मनीष दुबे-
मध्य प्रदेश के न्यूज चैनल IBC24 के न्यूजरूम में रामलीला का मंचन हुआ। कैमरे के पीछे रहकर खबरें तैयार करने वाले डेस्क कर्मचारियों ने रामायण के पात्र निभाए और खूब तारीफें बटोरीं। हनुमान की भूमिका तहशीन जैदी ने निभाई, जिसकी भी चर्चा हुई। लेकिन इस आयोजन की तारीफों के बीच एक सवाल भी उठता है—क्या चैनल के स्टूडियो में हुए इस आयोजन से उन सवालों पर पर्दा पड़ जाएगा, जो उसके कामकाज और स्ट्रिंगर्स की आजीविका से जुड़े हैं?
IBC24 के न्यूजरूम में हुई रामलीला को चैनल की टीम की रचनात्मकता और सामूहिक भागीदारी के तौर पर पेश किया जा रहा है। कम समय में तैयारी, कर्मचारियों का अभिनय और तकनीकी टीम की मेहनत की तारीफ हो रही है। चैनल के चेयरमैन भी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
लेकिन किसी न्यूज चैनल की पहचान सिर्फ उसके स्टूडियो में होने वाले आयोजनों से नहीं, बल्कि अपने पत्रकारों और स्ट्रिंगर्स के प्रति उसके व्यवहार से भी तय होती है। अगर स्ट्रिंगर्स की नौकरी जाने के आरोप हैं, तो उनका जवाब भी जरूरी है। आखिर जिन लोगों ने अलग-अलग इलाकों से खबरें जुटाकर चैनल की पत्रकारिता को मजबूती दी, उनकी आजीविका से जुड़े सवालों पर प्रबंधन का क्या रुख है?

रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने वाले तहशीन जैदी की प्रस्तुति को धार्मिक सद्भाव की मिसाल के तौर पर दिखाया गया। लेकिन किसी आयोजन की खूबसूरती और मीडिया संस्थान की जवाबदेही दो अलग-अलग सवाल हैं। एक की तारीफ दूसरे पर उठने वाले सवालों को खत्म नहीं कर सकती।
सवाल यह है कि IBC24 अपने न्यूजरूम की रामलीला की तारीफों के बीच स्ट्रिंगर्स की नौकरी से जुड़े सवालों का जवाब भी देगा या नहीं? बताते चलें कि इसी माह भड़़ास4मीडिया ने इस बाबत एक खबर पब्लिश की थी। जिसमें हटाए गये स्ट्रिंगर्स ने बताया था कि कैसे चैनल इवेंट के नाम पर उनसे धनउगाही करवाता है। बाकायदा स्ट्रिंगर्स ने भड़ास से हुई बातचीत में संबंधित व्यक्ति का नाम भी लिया था।
एक स्ट्रिंगर ने भड़ास को यह भी बताया था कि जिस व्यक्ति का उसने नाम लिया था, उसका फोन उसके पास गया था। और चैनल में वापसी की बात कहकर भड़ास में छपा उसका बयान वापस लेने की बात भी की गई थी। लेकिन स्ट्रिंगर ने यह करने से मना कर दिया।
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