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प्रेस क्लब आफ इंडिया की ‘पगलेट बीड़ीवाली’ का दोगलापन और ‘भड़ासी यशवंत’ का निष्कासन! देखें मेलबाजी

पगलेट बीड़ी वाली!

प्रेस क्लब आफ इंडिया से अपन को निकाले जाने से पहले जो मेलबाजी हुई, उसे सार्वजनिक करना जरूरी है. साथ ही वो वीडियो भी अब फिर से पब्लिक डोमेन में डालना जरूरी है जिसकी वजह से मुझे निकाला गया… पगलेट बीड़ी वाली का दोगलापन सब तक पहुंचना चाहिए…. पढ़ें खबर… देखें वीडियो… और, दो-चार लोग शेयर तो इसे कर ही दें.

-यशवंत


यशवंत को नोटिस…


यशवंत का जवाब….

श्री संजय जी

नमस्कार

पहले सो काज नोटिस, और फिर मांगने पर कंप्लेन की कापियां भेजने के लिए आपका धन्यवाद.

अपना संक्षिप्त और प्वाइंट वाइज जवाब आपके जरिए मैनेजिंग कमेटी को भेजना चाहता हूं.

1- मैं महुआ चटर्जी जी को नहीं जानता पहचानता था, वीडियो बनाने से पहले. उस रोज जब मुझे एक साथी ने बताया कि ये देखिए, मेन हाल में जहां धूम्रपान लिखित और घोषित तौर पर प्रतिबंधित हैं, महुआ जी खुलेआम धूम्रपान कर रही हैं. जिन साथी ने मुझे बताया और बुला कर दिखाया, वो पहले से ही एक वीडियो व कुछ तस्वीरें महुआ जी की धूम्रपान करते हुए खींच चुके थे. मैंने उनके द्वारा ली गई तस्वीरें और वीडियो देखने के बाद तय किया कि एक बिलकुल साफ वीडियो बनाया जाना चाहिए जिसमें साफ साफ जाहिर हो कि ये मुहआ जी ही हैं जो धूम्रपान कर रही हैं. सो, मैंने इत्मीनान से वीडियो बनाया. मेरे मन में सिर्फ एक ही बात रही कि आखिर प्रेस क्लब आफ इंडिया के एक घोषित नियम का कोई वरिष्ठ साथी कैसे उल्लंघन कर सकता है, खासकर वो जो सेक्रेट्री जनरल पद के लिए उम्मीदवार हो. ज्ञात हो कि अतीत में मेन हाल में धूम्रपान करने के कारण हिंदुस्तान टाइम्स के एक पत्रकार को महीने भर के लिए सस्पेंड भी किया जा चुका है.

2- मैंने वीडियो का निर्माण दो वजहों से किया. एक तो पत्रकार हमेशा पत्रकार होता है. ऐसा नहीं होता कि वह अपने क्लब में नार्मल इंसान हो जाए और क्लब के बाहर निकलते ही पत्रकार हो जाए. हम जहां भी होते हैं, अगर गलत हो रहा है तो उसे कलम या कैमरे के जरिए लिखते-शूट करते हैं. सो, मैंने अपने दोहरे दायित्व का निर्वहन किया. एक तो पत्रकार होने का, दूसरे क्लब के एक बड़े नियम को तोड़े जाने का.

3- प्रेस क्लब आफ इंडिया में फोटोग्राफी अलाऊ नहीं है, यह बात मुझे नहीं पता थी. अगर यह बात मुझे पता होती तो मैं वीडियो को पब्लिक डोमेन में ब्राडकास्ट करने की जगह इलेक्शन कमीशन को एक कंप्लेन के फार्मेट में भेज देता. चूंकि चुनाव का दौर था और इस वीडियो से हम लोगों को एक मुद्दा मिल रहा था, इसलिए हमने इसका प्रसारण पब्लिक डोमेन में किया. मैं फिर से कहना चाहता हूं कि अगर मुझे पता होता कि क्लब के भीतर फोटोग्राफी मना है तो मैं शायद वीडियो न बनाता. अगर बनाता भी तो उसे प्रमाण के तौर पर इलेक्शन कमीशन को ही भेजता, पब्लिक डोमेन में न डालता. मुझे प्रेस क्लब का मेंबर बने तीन साल हुआ और कभी मुझे बताया नहीं गया और न पता चला कि फोटोग्राफी क्लब के भीतर मना है, सो अनजाने में ही वीडियो बना लिया. ये स्वीकार करता हूं.

4- जहां तक निजता और महिला का सवाल है तो मैं खुद निजता का पक्षधर हूं. महिला सम्मान और गरिमा को टाप प्रियारिटी पर रखता हूं. हालांकि क्लब में अतीत में कई साथियों के लड़ने भिड़ने के सीसीटीवी फुटेज क्लब की तरफ से ही सदस्यों को मेल किए जा चुके हैं या लीक किए जा चुके हैं. फिर भी मैं खुद के लिए कहना चाहूंगा कि मैंने किसी महिला का वीडियो नहीं बनाया बल्कि क्लब के एक सदस्य द्वारा प्रतिबंधित इलाके में धूम्रपान करने का वीडियो बनाया. वीडियो से भी जाहिर है कि मेरा फोकस धूम्रपान पर ही ज्यादा है, कौन धूम्रपान कर रहा है, इस पर कम है.

5- प्रेस क्लब की चुनावी बेला में बहुत सारे मुद्दे उठाए जाते हैं. मैंने भी एक मुद्दा उठाया. चुनाव खत्म होते ही वीडियो को यूट्यूब और भड़ास वेबसाइट से हटा दिया, क्योंकि मेरा मानना है कि वाद विवाद प्रतिवाद केवल चुनाव तक चलने चाहिए, चुनाव बाद हम सब एक होते हैं और किसी के दिल में किसी के प्रति कोई मैल नहीं होता. इसी वजह से मैंने वो वीडियो हटा दिया था, एकतरफा तौर पर, बिना किसी को बताए या बिना किसी से पूछे. इससे मेरा इरादा जाहिर होता है कि मेरा मकसद महुआ जी को निजी तौर पर हर्ट करना या उन्हें किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचान नहीं था. ये वीडियो केवल एक धूम्रपान का मुद्दा उठाना भर था, जिसे चुनाव खत्म होते ही पब्लिक डोमेन से हटा दिया.

ये वीडियो दुबारा इसलिए सार्वजनिक कर दिया गया है ताकि यशवंत के नियम विरुद्ध निष्कासन की असली वजह से आम जन रूबरू हो सकें. जी हां, यही वो वीडियो है जिसे शूट कर अपलोड करने के कारण बीड़ी वाली ने यशवंत को मारे खुन्नस के क्लब से निकाल बाहर किया.

6- प्रेस क्लब चुनाव के दिन महुआ जी ने अपनी मौजूदगी में एक महिला पत्रकार के जरिए मेन गेट पर मुझे सबके सामने धमकवाया, थप्पड़ मारने की धमकी दिलवाई लेकिन मैंने इसे इग्नोर किया. इसे भी बस चुनावी प्रकरण मानकर खत्म किया. क्योंकि जब कहीं भी चुनाव होता है तो बहुत सारी चीजें होती हैं, जिसे दिल में नहीं रखा जाना चाहिए.

7- मेरे लिए प्रेस क्लब मेंबरशिप बनाए रखना प्रमुख नहीं है. भड़ास की शुरुआत एक विजन और मिशन के जरिए की, जिसके कारण बहुत सारी दिक्कतों, मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन अपना विजन और मिशन कायम रहा, दिक्कतें कभी बड़ी नहीं हो पाईं. मेरे लिए मेरी आत्मा, ईमानदारी और सच्चाई प्रमुख है. सो, मैंने पूरे दिल से पूरी सच्ची बात रख दी. आप सत्ता में हैं, प्रचंड बहुमत से सत्ता में हैं, लगातार सत्ता में बने हुए हैं, जिसे जब चाहा निकाल बाहर किया, सो जो चाहें निर्णय करें. मुझे आपके निर्णय पर कोई आपत्ति न होगी और न ही आपके निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाऊंगा. क्योंकि, मेरा मानना है कि कोर्ट कचहरी में टाइम वेस्ट करने की जगह उतने वक्त में बहुत कुछ क्रिएटिव किया जा सकता है. वैसे भी मैं अपनी खुद की लड़ाई कभी नहीं लड़ता, इसलिए आप लोग निश्चिंत भाव से फैसला करें, मैं सहर्ष कुबूल करूंगा. प्रेस क्लब साल भर में चार छह बार से ज्यादा नहीं जाता, चुनाव की बेला को छोड़ कर. इतने ही यानि चार-छह दिन पुस्तक मेला लगता है दिल्ली में. सो, निकाले जाने के बाद आगे से रोजाना पुस्तक मेला जा कर मान लूंगा कि इसी में प्रेस क्लब का दौरा भी हो गया. सब कुछ बस परसेप्शन है. अगर आप कुछ मान लेते हैं तो वो आपके लिए मूर्त हो जाता है.

महुआ जी से कहना चाहूंगा कि अगर आप निजी तौर पर आहत महसूस कर रही हैं वीडियो बनाए जाने से तो इसके लिए मैं क्षमा चाहूंगा. मेरा मकसद कभी नहीं रहा कि किसी को निजी तौर पर चोट पहुंचाऊं या दुख दूं. जो कुछ हुआ, वो एक विरोधी पैनल का प्रत्याशी होने के कारण सामने वाले पैनल के खिलाफ एक मुद्दे को उठाने के मकसद के कारण हुआ. इसमें मेरा कोई निजी स्वार्थ या निजी आपराधिक मानसिकता कतई न थी. मेरे लिए प्रेस क्लब मेंबरशिप बचाना प्रमुख नहीं है, मेरे लिए प्रमुख है अपना स्टैंड क्लीयर करना ताकि कोई बेवजह मेरे प्रति नकारात्मक भाव न रखे.

आभार
यशवंत


यशवंत को फिर से नोटिस….


यशवंत का दुबारा जवाब…

मिस्टर संजय सिंह
ज्वाइन्ट सेक्रेटरी

विषय- 18 जनवरी 2019 के नोटिस का जवाब

महोदय,

क्रमवार जवाब यूँ है-

1- मेरे पूर्व में भेजे गए जवाब को ठीक से पढ़ें। महुआ चटर्जी को मैं नहीं पहचानता था। जब बताया गया कि बीड़ी पी रही लेडी महुआ चटर्जी है जो चुनाव में सेक्रेटरी जनरल के लिए खड़ी है तो मैंने अपने साथी द्वारा बनाए गए वीडियो से ज्यादा स्पष्ट और प्रामाणिक वीडियो बनाया ताकि नियम तोड़ने वाली बीड़ीबाजी की इस गतिविधि का सबूत इकट्ठा कर इसे बाकी लोगों में ब्रॉडकास्ट कर सकूं कि कैसे कैसे लोग चुनाव में खड़े हैं जिन्हें अपने ही क्लब का नियम जानबूझकर तोड़ने में मजा आता है। साथ ही चुनाव था तो इसे चुनावी मुद्दा भी बनाना था, जो कि मैंने बनाया भी। इसलिए मेरे बयान में, जवाब में कोई मेलाफाइड इंटेंशन नहीं है। मेरा पूर्ववर्ती जवाब बिल्कुल शफ़्फ़ाफ़ है!

2- नोटिस मेरे द्वारा वीडियो बनाने को लेकर भेजा गया है, इसलिए यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि किसके कहने पर बनाया। वीडियो मैंने बनाया, अनजाने में बनाया क्योंकि मुझे नहीं पता था कि वीडियोग्राफी क्लब में अवैध है। वैसे, बीड़ी पीने वाली को पता तो रहा होगा कि मेन हाल में बीड़ी पीना प्रतिबन्धित है! तो तय करिए किसका अपराध ज्यादा है!

3- सबको अच्छा लगता आप इतनी ही तत्परता से बीड़ी पीने का वीडियो देखने के बाद महुआ को भी नोटिस भेजते औऱ जवाब तलब करते। पर शायद आप लोगों की डिक्शनरी में “लोकतंत्र” नामक शब्द है ही नहीं। जो आपका यस मैन न रहे, जो आप लोगों की करतूतों का भंडाफोड़ करे, उसे ‘दुश्मन’ मानकर एकतरफा तौर पर क्लब से फायर करना ही आप लोगों को आता है।

4- धूम्रपान निषेध वाले एरिया में बीड़ी पीने का भी कोई दण्ड क्लब के moa के किसी क्लॉज में ज़रूर होगा। एक बार झांक लीजिएगा।

बाकी, नोटिस में आपने जिस तरीके से मेम्बरशिप टर्मिनेट किए जाने को लेकर धमकाया है, वह आप लोगों की लोकतांत्रिक चेतना के स्तर को दर्शाता है। देश की राजधानी में पदस्थ पत्रकारों के सबसे बड़े क्लब के संचालक लोग किस मानसिकता में काम कर रहे हैं, किस मनोभाव को जी रहे हैं, ये नोटिस और यह प्रकरण पूरी तरह दर्शाता है।

उम्मीद है इस जवाब के बाद आप लोगों को मेरे बारे में काफी पहले से लिए जा चुके फैसले की घोषणा करने में आसानी हो जाएगी।

गुड बॉय दोस्त! :

आपके क्लब का ही एक साथी

यशवंत


यशवंत को टर्मिनेशन का लेटर….

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