जमीन विवाद में कोर्ट पहुंचे प्रेस क्लब आफ इंडिया ने मोदी सरकार को नोटिस भिजवाया

HC seeks Centre’s reply on plea by Press Club… The Delhi High Court has sought a response from the government on a plea by the Press Club of India (PCI), seeking possession of a plot, which it claimed was allotted to it in March 2002 to construct a club. Continue reading

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कौन है ये अंचा राव, जिसने प्रेस क्लब आफ इंडिया की ज़मीन रद्द करवा दी?

इंडियन एक्सप्रेस में बीते दिनों कूमी कपूर ने प्रेस क्लब आफ इंडिया को लेकर एक मजेदार खुलासा किया. उनने बताया कि किन्हीं अंचा राव ने प्रेस क्लब आफ इंडिया की जमीन के सौदे को कैंसल करवा दिया. Continue reading

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पैसा जमा कर प्रेस क्लब आफ इंडिया ने अपनी स्वायत्तता गिरवी रखे जाने से बचा लिया

प्रेस क्लब आफ इंडिया ने शहरी विकास मंत्रालय को 1.75 करोड़ रुपए की राशि जमा करा दी है। इस मामले में राज्य सभा के एडीशनल सेकेट्री ए.ए.राव और प्रेस क्लब आफ इंडिया के अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी और उनकी टीम सक्रिय थी और चाहती थी कि 80 करोड़ व्यय करके राज्य सभा टीवी पूरी इमारत बनवाए और जमीन का मालिकाना हक क्लब औऱ राज्य सभा दोनों के नाम पर हो जाये। Continue reading

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एनडीटीवी में भयंकर छंटनी पर प्रेस क्लब आफ इंडिया ने लिखा प्रणय रॉय को पत्र

To

Dr. Prannoy Roy,
Founder-Chairperson, NDTV
NEW DELHI

Dear Dr. Roy,

Warm Greetings from the Press Club of India.

As this year comes to an end, there are disturbing reports emanating from the NDTV which refer to massive reduction and lay-offs of employees connected with the news operations of your organisation.

As you are aware, the Press Club of India has been in the lead role of organising protest meets whenever NDTV was targeted by the government or curbs were sought to be put on it. The PCI has led the struggle for upholding the freedom of the press and expression. There is considerable concern among journalistic community over the current reported move of your organisation which might have been taken considering economic viability of running the news channel.

We would like to invite you over to the Press Club of India to address a meet and make the stance of NDTV clear so that the journalistic community can understand the logic and reason behind any such move of large scale retrenchment. As you have been forthcoming in your approach, we are sure you would accept our invitation to address a meet at PCI which we plan to hold over the next few days.

Looking forward to your response.

With Warm Regards

(Gautam Lahiri)
President

(Vinay Kumar)
Secretary General

मूल खबर….

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राम बहादुर राय को वोटिंग का अधिकार देना पड़ा, प्रेस क्लब प्रबंधन झुका, देखें वीडियो

प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में राम बहादुर राय को वोट देने का अधिकार क्लब प्रबंधन को देने के लिए मजबूर होना पड़ा. ड्यूज न जमा करने का हवाला देकर राय साहब की सदस्यता रद्द कर दी गई थी. इसके खिलाफ राय साहब ने प्रेस क्लब चुनाव के दौरान विरोध का ऐलान कर दिया था. वे चुनाव के दिन मौके पर पहुंचे और वोट देने का अधिकार मांगा. इससे हड़बड़ाए क्लब प्रबंधन ने तुरंत उनका ड्यूज जमा कराने के बाद उन्हें वोटिंग का राइट दे दिया.

देखें मौके से तैयार किया गया वीडियो….

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पीसीआई चुनाव : यशवंत को आख़िर क्यों जितायें दिल्ली के पत्रकार!

Naved Shikoh : यशवंत को आख़िर क्यों जितायें दिल्ली के पत्रकार! क्योंकि ये ऐसा पत्रकार ने जो ब्रांड अखबारों की नौकरी छोड़कर शोषित पत्रकारों की लड़ाई लड़ रहा है। इस क्रान्तिकारी पत्रकार ने अपने कॅरियर को दांव पर लगाकर, वेतन गंवाया.. तकलीफें उठायीं. मुफलिसी का सामना किया.. जेल गये.. सरकारों से दुश्मनी उठायी… ताकतवर मीडिया समूहों के मालिकों /उनके मैनेजमेंट से टकराये हैं ये। छोटे-बड़े अखबारों, न्यूज चैनलों में पत्रकारों का शोषण /महीनों वेतन ना मिलना/बिना कारण निकाल बाहर कर देना.. इत्यादि के खिलाफ कितने पत्रकार संगठन सामने आते हैं? कितने प्रेस क्लब हैं जहां पत्रकारों की इन वाजिब समस्याओं के समाधान के लिए कोई कदम उठाया जाता है!

यशवंत सिंह जी ने बिना संसाधनों और बिना किसी सपोर्ट के खुद के बूते पर भड़ास फोर मीडिया जैसा देश का पहला और एकमात्र प्लेटफार्म शुरु किया। जहां से पत्रकारों के हक़ की आवाज बुलंद होती है। जहां पत्रकारों का शोषण करने और उनका हक मारने वालों का कच्चा चिट्ठा खोला जाता है। यशवंत के भड़ास ने ना जाने कितने मीडिया समूहों की तानाशाही पर लगाम लगाई। शोषण की दास्तानों को देश-दुनिया तक फैलाकर दबाव बनाया। नतीजतन सैकड़ों मीडिया कर्मियों को यशवंत के भड़ास ने न्याय दिलवाया। मीडिया कर्मियों का वाजिब हक दिलवाया। देश में सैकड़ों बड़े-बड़े पत्रकार संगठन है। इनमें से ज्यादातर को आपने सत्ता और मीडिया समूहों के मालिकों की दलाली करते तो देखा होगा, लेकिन जरा बताइये, कितने संगठन पत्रकारों के शोषण के खिलाफ लड़ते हैं? दिल्ली सहित देशभर के छोटे-बड़े प्रेस क्लबों में क्या हो रहा है आपको बताने की जरुरत नहीं।

मैं 24 बरस से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरन्तर संघर्ष कर रहा हूँ। आधा दर्जन से अधिक छोटे-बड़े मीडिया ग्रुप्स में काम किया है। मैंने देखा है किस तरह सरकारों और अखबार- चैनलों के मालिकों के काले कारनामों की कालक एक ईमानदार पत्रकार को किस तरह अपने चेहरे पर पोतनी पड़ती है। नैतिकता-निष्पक्षता-निर्भीकता और पत्रकारिता के सिद्धांतों-संस्कारों की बात करने वाले ईमानदार पत्रकार के चूतड़ पर चार लातें मार के भगा दिया जाता है। आज के माहौल ने मिशन वाली पत्रकारिता को तेल लेने भेज दिया है। ये तेल शायद मिशन की पत्रकारिता करने की चाहत रखने वाले भूखे पत्रकारों की मज़ार पर चराग के काम आ जाये।

कार्पोरेट और हुकूमतों की मोहताज बन चुकी पत्रकारिता को तवायफ का कोठा बना देने की साजिशों चल रही हैं। पत्रकार का कलम गुलाम हो गया है। अपने विवेक से एक शब्द नहीं लिख सकता। वैश्या जैसा मजबूर हो गया पत्रकार। पैसे देने वाला सबकुछ तय करेगा। पत्रकारिता को कोठे पर बिठाने वालों ने कोठे के दलालों की तरह सत्ता की दलाली करने वालों के चेहरे पर पत्रकार का मुखौटा लगा दिया है। इस माहौल के खिलाफ लड़ रहे हैं यशवंत सिंह और उनका भड़ास। साथ ही यशवंत का व्यक्तित्व और कार्यशैली इस बात का संदेश भी देता है कि कार्पोरेट घराने या हुकूमतें के इशारे पर यदि आपसे पत्रकारिता का बलात्कार करवाया जा रहा है तो ऐसा मत करें। अपना और अपने पेशे का ज़मीर मत बेचो। इसके खिलाफ आवाज उठाओ। नौकरी छोड़ दो। बहुत ही कम खर्च वाले वेब मीडिया के सहारे सच्ची पत्रकारिता के पेशे को बरकरार रख सकते हैं।

कितना लिखूं , बहुत सारे अहसान हैं। जब हमअपने मालिकों/मैनेजमेंट की प्रताड़ना का शिकार होते हैं। अपने हक की तनख्वाह के लिए सटपटा रहे होते हैं। बिना कारण के निकाल दिये जाते हैं। तो हम लेबर कोर्ट नहीं जाते। पत्रकारों की यूनियन के पास भी फरियाद के लिए नहीं जाते। मालुम है लेबर कोर्ट जाने से कुछ हासिल नहीं होता। पत्रकार संगठनों के पत्रकार नेताओं से दुखड़ा रोने से कोई नतीजा नहीं निकलता। प्रेस क्लबों में दारू – बिरयानी और राजनीति के सिवा कुछ नहीं होता। पीड़ित का एक ही आसरा होता है- यशवंत का भड़ास। इस प्लेटफार्म से मालिक भी डरता है- मैनेजमेंट भी और सरकारें भी। पत्रकारिता के जीवन की छठी से लेकर तेहरवीं का सहारा बने भड़ास में नौकरी जाने की भड़ास ही नहीं निकलती, नौकरी ढूंढने की संभावना भी पत्रकारों के लिए मददगार साबित होती हैं।

वेबमीडिया की शैशव अवस्था में ही पत्रकारों का मददगार भड़ास पोर्टल शुरु करके नायाब कॉन्सेप्ट लाने वाला क्या दिल्ली प्रेस क्लब की सूरत नहीं बदल सकता है। आगामी 25 नवंबर को प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव के लिए लखनऊ के एक पत्रकार की गुज़ारिश पर ग़ौर फरमाएं :- दिल्ली प्रेस क्लब के चुनाव में मैंनेजिंग कमेटी के सदस्य के लिए क्रान्तिकारी पत्रकार यशवंत सिंह को अपना बहुमूल्य वोट ज़रूर दीजिएगा। यशवंत सिंह का बैलेट नंबर 33 है।

नवेद शिकोह
पत्रकार ‘लखनऊ
वरिष्ठ सदस्य
उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति
8090180256 9918223245
Navedshikoh@rediffmail.com

प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव से संबंधित अन्य खबरें…

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Jatin Gandhi बता रहे, वो पीसीआई में क्यों लड़ रहे हैं वाइस प्रेसीडेंट पद पर चुनाव


A PERSONAL MANIFESTO

(Or, why I am contesting for the post of vice-president in the Press Club of India on Saturday, November 25)

Friends,

The IWPC, that enviously cosy and clean club for women journalists down the road from us, will over the next weekend host a film appreciation course of the FTII, Pune, for its members. A few days ago, it had collaborated with the Indian Council for Cultural Relations to celebrate its annual day in one of the best auditoriums in Lutyens’ Delhi.

The Chandigarh Press Club — arguably one of the best run press clubs in the country — recently went to court against the Haryana government seeking compensation for media personnel and organisations who were hit by the violence that followed rapist Gurmeet Ram Rahim’s arrest in Panchkula. The government had promised compensation but did not keep its word and the CPC did not waste time.

That, my friends, is the kind of role a modern press club should play.

A press club is not just a building with a bar and a kitchen. It is a space where journalists can unwind at the end of a busy day. During the course of a working day, we should be able to utilise the space to connect with others, read newspapers and magazines, browse the internet, drop in for a quick bite or a beer.

In short, the club building should be an extension of your home that you can access on a working day.

But, idea of a press club is also much bigger. It should serve as an umbrella for the press corps. It is an organisation that journalists’ unions can collaborate with, working to make things better for us and journalism.

But the Press Club of India is none of this. Why?

THE BACKROOM CAUCUS
No doubt, it has a much bigger footfall than any other press club and managing it is a mammoth task. But at the core of the problem is the fact that the club managing committee’s focus is on the elections for most part of the year.

And worse, there is an un-elected caucus active in running the club, imposing itself on the elected representatives. The faces in the committee change but the backroom manipulators remain the same.

Why do those office bearers from the current team managing the club who did not even attend the meetings want to get elected again? Why did the team not choose new faces? Why do they want to cling on? Please ask them when they come to seek your votes.

STINKING KITCHEN, SPANKING NEW TOILETS
The kitchen stinks and is in urgent need of pest control but the committee is busy face-lifting the toilets. Why? Because most members do not go near the kitchen area and never get to see the state it is in. All we access is the rooms and the toilets. So closer to the election, the committee goes ahead and rebuilds the toilets yet again.

THE GYM SCAM AND MISUSE OF MPLADS FUNDS
Rs 32 lakhs of MPLADS funds were used for putting together a gym, just three years ago. That equipment has now been dumped in what used to be a place to rest for the staff. The erstwhile gym is a lounge that you have to book and pay for before you can use it. If MPLAD funds were misultilised in a scam by any other organisation, would it not have made news?

TIME FOR CHANGE
There is a lot that needs to change. We can usher in that change using the power of our vote. We are going to start with the basics. And here are a few things that the Badshah Sen-Shahid Faridi-Jatin Gandhi panel is going to focus on:

1. A modern kitchen, regular pest control and proper waste and scrap disposal. Reducing prices.

2. Transparency: A right to information mechanism for members.

3. An excellence in journalism award in the name of the PCI. (Isn’t it sad that there is none so far?)

4. A complaint/suggestion box.

5. Involving ordinary members in running the press club by constituting committees for different verticals like bar, kitchen, reading room, events etc.

6. A broad-based membership screening committee including prominent journalists.

If having a decent club sounds Utopian, remember the two clubs mentioned above have done it. Away from the din of the SMS-wars, these are serious issues that need our attention, as members. Please see the accompanying pictures. These are not wild allegations.
Do come and vote tomorrow. See you there.

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अनिकेंद्र-शाहिद पैनल से लड़ रहे जतिन गांधी, प्रवीण जैन और निर्मिमेष कुमार के बारे में जानिए

Vice President
Jatin Gandhi

Published author and journalist with 21 years in the profession across different media. At present Associate Editor with Hindustan Times. Before that Jatin worked with The Hindu, The Indian Express, India Today magazine, Open, Star News (now ABP), Times Now, NDTV convergence and wahindia.com.

Joint Secretary
Praveen Jain

Associate Editor(Photo) at the Indian Express. Formerly worked as the National Photo Editor for the Indian Express and also worked for the Pioneer, Sunday Mail and several other companies. Praveen has covered almost all the big events in India in the 80’s and 90’s – from the riots in Bhagalpur and Hashimpura to the Delhi pogrom in 1984 ; from the demolition of the Babri Masjid and it’s rehearsal to the plague in Surat. Praveen has twice served as senior vice president of the Press Club and has been on the managing committee several times as well. He has taken the initiative to get several amenities installed at the Press Club including the air conditioning and media center.

Treasurer
Nirnimesh Kumar

In journalism for the past three decades. I started my career with stingership in Hindi daily Navbharat Times at Patna, and then He joined Hindi daily Prabhat Khabar at Ranchi. He rejoined Navbharat Times at Jaipur as a regular employee. At present He is working with English daily The Hindu and has been working there for more than two decades.

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प्रेस क्लब चुनाव : बैलट पेपर में सबसे आखिरी पायदान पर है यशवंत का नाम

प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव कल यानि पच्चीस नवंबर को होने वाले हैं. भड़ास के संपादक यशवंत भी मैनेजिंग कमेटी पद के लिए अनिकेंद्र सेन उर्फ बादशाह, शाहिद फरीदी और जतिन गांधी पैनल से चुनाव लड़ रहे हैं. यशवंत का बैलट नंबर 33 है. नाम अल्फाबेटिकली लिखा जाता है बैलट पेपर पर इसलिए यशवंत का नाम सबसे आखिर में है. मतदाताओं से अपील है कि वे बैलट पेपर के सबसे आखिरी नाम से मुहर मारना शुरू करें ताकि इस चुनाव में यशवंत और उनके पैनल को विजयी बनाकर प्रेस क्लब आफ इंडिया में बदलाव की मुहिम को अंजाम तक पहुंचाया जा सके.

Yashwant Singh (Ballot No. 33)

(For Managing Committee member)

Yashwant completed two decade in media. He has held positions like chief sub-editor and Chief Reporter in Amar Ujala and Dainik Jagran. He was Editor of tabloid newspaper ‘inext’ published by Jagran group at the time of launching. Yashwant is founder editor of bhadas4media.com, a portal dedicated news related to media. As media activist he struggle for benifit of media professional and also taken lead in court cases related wage board.

मैनेजिंग कमेटी के लिए अनिकेंद्र सेन-शाहिद फरीदी-जतिन गांधी पैनल के अन्य सदस्यों का विवरण इस प्रकार है :

Anita Choudhary (Ballot No. 5)
(For Managing Committee member)
At present Anita is working with National Voice news Channel as Political Editor. She has completed more than one decade in Journalism. Before her present assignment she has worked with News24, News Nation
Past: News24, News Nation, Sahara. She is a member in present Managing Committee of the club. She has raised many important issue in the managing committee for the betterment of the club. Anita always stood for non- politicization of the Press Club against the will of present Managing Committee.

Anjali Bhatia (Ballot No. 6)
(For Managing Committee member)
Anjali has completed more than a decade in Journalism. At present she is working with
“The political and business daily” as Bureau chief. Before her present assignment Anjali worked with Hindustan hindi, Punjab Kesari, Rajasthan Patrika,mahamedha, Express magazine, TV 100, total tv.

Atul Krishan (Ballot No.7)
(For Managing Committee member)
Atul has completed a decade in journalism. He has worked for The Statesman, Mid-Day.At Present he is  working with The Asian Age/Deccan Chronicle group of newspapers.

JOGENDER SOLANKI (B.No. 9)
(For Managing Committee member)
29 year successful journey of Journalism Print and Visual Media
With Dainik jagran, Veer Arjun, Navbharat Times, Jansatta, Dainik Hindustan, punjab kesari, Ankho Dekhi, India News, India tv and Currently Working As Special Correspondent in Dainik Deshbandhu.

Pramod Kumar-I (Ballot No.17)
(For Managing Committee member)
Editor “Sunday Indian” for more than a decade. More than Thirty years in Active Journalism had worked  with Aaj,Rashtriya Sahara Amar Ujala Daink Jagran. Got elected several times in PCI elections in past.

Rahil Chopra (Ballot No19)
(For Managing Committee member)
Rahil is a media professional with 18 years of experience. He has worked  with Jain TV,  Sahara TV, Aajtak, NDTV, P7 News and is currently working with Rajya Sabha TV and writing political columns for Indian Press Agency  (IPA).

Sanjay Dwivedi( Ballot No.21)
(For Managing Committee member)
Sanjay Dwivedi has completed 35 years in media. His initially worked in print media for 9 years and remaining years in news television industry. At present he is associated with around dozen tv channels in various capacity. Presently working as Director- media for an upcoming niche tv news channel for rural India.

Sushil Vakil (Ballot No 26)
(For Managing Committee member)
Sushil is Editor of Samachar Post. He has vast experience of 25 year experience in journalism. He has been writing exclusive articles on Kashmir terrorism and role of Pakistan in fomenting terror activities in India.

Ujjwal Kumar (Ballot No.27)
(For Managing Committee member)
Having experience of more than 15 years in journalism, Ujjwal has worked will almost all form of news media Newspaper, News channel and wire agency. At present He is Senior Finance Correspondent with NewsRise which feed to Reuters and Japanese news agency Nikkei. Before that Ujjwal worked with Zee Business, TotalTv, Dainik Jagran newspaper. He has been elected twice for Managing committee in past. Being a committee member was never ornamental to him. He always raised important issue in interest of Journalist and club in managing committee in his past tenures.

Vikash Mishra (ballot No. 31)
(For Managing Committee member)
Vikash has completed 22 years in Journalism. He has vast experience in print and electronic media. He worked work reputed Hindi daily Amar Ujala and Dainik Jagran. After quitting print he worked with News24, Channel 7 and Mahua News. From last 6 years Vikash is working with Aajtak. He is an alumni of IIMC.

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पत्रकारों के सामने मौजूदा चुनातियों पर यशवंत लड़ते हैं, प्रेस क्लब पदाधिकारी दुम दबाए रहते हैं…

इन बातों से आप सहमत हों तो पीसीआई इलेक्शन में बैलट नंबर 33 पर मुहर मार कर यशवंत को सबसे ज्यादा वोटों से विजयी बनाइए…

अपनी प्रासंगिकता खो रहे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में इस बार नई बयार देखी जा रही है. मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए 33 नंबर पर चुनाव लड़ रहे यशवंत सिंह उन पत्रकारों के लिए आशा की नई किरण हैं, जो अपनी नौकरी के चक्कर में मीडिया मालिकों और कुछ कारपोरेट संपादकों की मनमानी सहने पर मजबूर रहते हैं. उनसे बातचीत के आधार पर यह लेख लिख रहा हूं…

देश के बड़े मीडिया हाउस जिसमें आनंद बाजार पत्रिका से लेकर हिंदुस्तान और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे नामी बैंड शामिल हैं, मंदी का हवाला देकर अक्सर छंटनी शुरू कर देते हैं. एक तुगलकी फैसले से सैकड़ों/हजारों पत्रकार सड़क पर आ जाते हैं. लेकिन पत्रकारों के हितों के लिए बनी प्रेस क्लब ऑफ इंडिया कभी अपनी जुबान नहीं खोलती. मीडिया संस्थानों के अत्याचार का शिकार कई बार प्रेस क्लब के मौजूदा सदस्य भी हो जाते हैं. लेकिन इस संस्था के कर्णधारों ने तो मानो पत्रकारों की ओर से आंख ही मूंद लिया है.

इंसाफ के लिए आवाज उठाने का दंभ भरने वाले प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के मौजूदा पदाधिकारियों का एकमात्र एजेंडा है होटल मैनेजर की तरह क्लब को चलाना ताकि पीने-खाने वालों को कोई दिक्कत नहीं हो. वैचारिक विमर्श के लिए कभी कभी प्रोग्राम रखा जाता है. लेकिन पत्रकारों के सामने मौजूदा चुनातियों पर कोई भी पदाधिकारी जुबान नहीं खोलता. क्योंकि इसके लिए आंदोलन और संघर्ष की लंबी राह पकड़नी होगी.

मैं (यशवंत सिंह की जुबानी) मांग करता हूं कि प्रेस क्लब का चुनाव लड़ने वाले सभी पैनल के लोग घोषणा करें कि…

1. जीतने पर हम उन मीडिया हाउस का विरोध करेंगे जो बिना ऑफर/ज्वाइनिंग लेटर दिये पत्रकारों को बेगारी मजदूर की तरह रखते हैं. ऐसे मीडिया संस्थानों की भरमार हैं.
2. छंटनी के लिए उसी तरह के नियम बने जैसे भारत सरकार के केंद्रीय कर्मचारियों के लिए हैं.
3. दूरदर्शन, लोकसभा टीवी और राजसभा टीवी में रखे गए सभी मीडिया कर्मियों को नियमित किया जाये और उन्हें एक ग्रेड की सैलरी दी जाये.
4. संपादकों की नियुक्ति और उनसे लिए जाने वाले काम के संबंध में मीडिया संस्थान अपनी नीति घोषित करें ताकि बैकडोर से संपादकों पर अनुचित कार्यों के लिए दबाव हटाया जा सके.
5. प्रेस क्लब में आने वाले सभी मेंबर को तुरंत और बेहतरीन सुख-सुविधायें देंगे.
6. किसी भी पत्रकार की नौकरी में रहते हुए मृत्यु होने पर सरकार की तरफ से आश्रित बीबी-बच्चों को वो सभी सुविधायें मिलें, जिससे उनका दैनिक जीवन सुगमता से चलता रहे.

इन मांगों को कोई पैनल माने या नहीं माने, यशवंत जीतते हैं तो इसके लिए एक लंबी लड़ाई जरूर लड़ेंगे, भले ही इसके लिए यशवंत सिंह भड़ास को सड़क पर उतरना पड़े.

लेखक ए राम पांडेय पत्रकार हैं और फिलहाल एक निजी विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के छात्रों को पढ़ाते हैं. उनसे संपर्क arampandey@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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ये है सत्ताधारी गौतम-विनय पैनल, देखिए संजय सिंह से खास बातचीत

प्रेस क्लब आफ इंडिया चुनाव में कई सालों से लगातार जीत रहे लोगों का पैनल भी मैदान में उतरा है. इस पैनल का नाम है गौतम-विनय पैनल. गौतम लाहिरी प्रेसीडेंट और विनय कुमार सेक्रेट्री जनरल पद के वास्ते लड़ रहे हैं. ये दोनों वर्तमान में भी इसी पद पर काबिज हैं और आगे भी इसी पद पर बने रहने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. इस पैनल से राष्ट्रीय सहारा अखबार के संजय सिंह अबकी ज्वाइंट सेक्रेट्री पद के लिए लड़ रहे हैं.

मोहुआ चटर्जी ट्रेजरार पद के लिए लड़ रही हैं. वाइस प्रेसीडेंट पद के लिए एनडीटीवी वाले मनोरंजन भारती को रिपीट किया गया है. इनके अलावा सोलह लोग मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए इस पैनल से लड़ रहे हैं. इस पैनल की तरफ से संजय सिंह ने भड़ास के संपादक यशवंत सिंह से बात की और अपने पैनल को जिताने के लिए अब तक किए गए कामों का उल्लेख किया. पूरी बातचीत का वीडियो सुनने-देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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प्रेस क्लब आफ इंडिया इलेक्शन में मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए भड़ास वाले यशवंत ने भरा पर्चा

इसी नवंबर महीने की पच्चीस तारीख को होने वाले प्रेस क्लब आफ इंडिया के सालाना चुनाव की गहमागहमी तेज हो गई है.  भड़ास फॉर मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल किया. यशवंत मैनेजिंग कमेटी के सदस्य पद हेतु चुनाव लड़ेंगे. दैनिक जागरण, अमर उजाला और आई-नेक्स्ट जैसे अखबारों में सब एडिटर से लेकर चीफ रिपोर्टर और संपादक पद पर आसीन रह चुके यशवंत फिलहाल कई न्यूज चैनलों और अखबारों के सलाहकार के रूप में भी कार्यरत हैं. साथ ही साथ वह दशक भर से भड़ास फार मीडिया के जरिए मीडिया इंडस्ट्री की अच्छी-बुरी हलचलों को जनता के सामने लाने का काम कर रहे हैं.

इस बाबत यशवंत का कहना है-

”प्रेस क्लब आफ इंडिया में बहुत कुछ किया जाना बाकी है. इस क्लब में रचनात्मक गतिविधियां शून्य के बराबर हैं. मीडियाकर्मियों को टेक्नालजी और कंटेंट के बदलते दौर के बारे में अपडेट रखने के लिए वर्कशाप किए जाने की जरूरत है. वेबसाइट्स, ब्लाग, यूट्यूब आदि के जरिए पैसे कमाने के बारे में मीडियाकर्मियों को ट्रेंड किए जाने की जरूरत है ताकि वह नौकरी जाने की स्थिति में खुद के दम पर परिवार का खर्च चला सकें तथा मिशनरी एप्रोच से सच्चाई को सामने रखने वाली पत्रकारिता को बिना दबाव जारी रख सकें. प्रिंट मीडिया के सिकुड़ते परिदृश्य और न्यू मीडिया के बढ़ते जोर के इस दौर में प्रेस क्लब आफ इंडिया में नए किस्म के समझदार पत्रकारों को भेजे जाने की जरूरत है जो समय के साथ प्रेस क्लब की कदमताल करा सकें.  प्रेस क्लब आफ इंडिया के सदस्यों के जन्मदिन पर एक सकारात्मक पहल करते हुए ‘जन्मदिन मुबारक’ नामक एक छोटा-सा कार्यक्रम कराए जाने की जरूरत है ताकि आपसी इंटरैक्शन पढ़ सके.  मुझे उम्मीद है कि प्रेस क्लब आफ इंडिया के सभी सम्मानित सदस्य मेरी दावेदारी को अपने वोट के जरिए संस्तुत करेंगे ताकि प्रेस क्लब आफ इंडिया को देश का मॉडल प्रेस क्लब बनाया जा सके.”

 

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प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव घोषित, 13 तक नामांकन, 25 को पड़ेंगे वोट

प्रेस क्लब आफ इंडिया का चुनाव घोषित कर दिया गया है. 13 नवंबर तक नामांकन कर सकते हैं. 25 नवंबर को वोट पड़ेंगे और 26 नवंबर को नतीजे आएंगे. इस बारे में जो नोटिस पीसीआई के सूचना पट पर चिपकाया गया है, वह इस प्रकार है-

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प्रेस क्लब आफ इंडिया में अलोकतंत्र : बिना नोटिस या वार्निंग के चंदन यादव की सदस्यता खत्म कर दी!

Satyendra PS : आज Chandan Yadav ने बताया कि प्रेस क्लब आफ इंडिया ने उनकी सदस्यता निलम्बित कर दी है। उनसे पूछा कि काहे ऐसा किया है भाई? उन्होंने कहा कि मैंने सवाल उठा दिया था कि हल्दीराम से भी महंगा रसगुल्ला प्रेस क्लब में क्यों मिलता है? कुछ लोगों ने यह भी कहा कि चन्दन संघी है। वो अपना एजेंडा चलाने के लिए फेसबुक पर प्रेस क्लब के खिलाफ लिखा, इसलिए सदस्यता से निलंबित कर दिया। अब जरा प्रेस क्लब के वामपंथ और संघीपन्थ को समझें, जो मुझे समझ में आया।

अभी जो प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं, वो इसके पहले जब चुनाव लड़े थे तो दक्षिणपंथी, संघी थे और अबकी वामपंथी बनकर लड़े और चुनाव जीत गए। मतलब यह समझें कि मौजूदा अध्यक्ष जी पिछले चुनाव में दक्षिण पंथी थे, उनको मैंने वोट नहीं दिया, वो चुनाव हार गए। अबकी इलेक्शन में वो वाम पंथी हो गए, मैंने उनको वोट किया और अबकी चुनाव जीत गए! इसके पहले जो अध्यक्ष थे वो वामपंथी कश्मीरी पंडित थे। जब जेएनयू राष्ट्रद्रोह वाला कांड चल रहा था तो एक सदस्य को प्रेस क्लब की सदस्यता से इसलिए निलम्बित कर दिया कि उन्होंने अपनी सदस्यता संख्या से एक “राष्ट्रद्रोही कश्मीरी मुसलमान” की प्रेस कांफ्रेंस बुक करा दी थी।

यह भी सुनते हैं कि इस समय प्रेस क्लब पर ndtv की दबंगई है। संटूआ, छेनूआ, मंगरुआ तनी बताव त, ई कौन झामपन्थ चल रहा है? अपन के दिमाग का तो दही हो गया सोचकर… अगर आप लोगों में से किसी के पास एवररेडी सेल लगा 5 सेल वाला टॉर्च हो तो जरूर प्रकाश डालें कि प्रेस क्लब में वामपंथी और संघी का ये खेला क्या है!

बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र पी सिंह की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं….

Ujjwal Bhattacharya निकाला ही जाएगा. प्रेस क्लब क्या रसगुल्ला खाने के लिये बना है?

Chandan Yadav बात सिर्फ रोसोगुल्ले की नही है दा। बात है नेचुरल जस्टिस की। क्या आप सत्ता के अहंकार में इतने चुर हो जायेंगें कि सामनेवाला आपको तुच्छ लगने लगेगा और उसे बिना अपना पक्ष रखने देने का मौका दिये, एक्सपेल कर देंगें ? ये तो हिटलर को भी मात दे रहे हैं।

Satyendra PS यह भी सही है कि रसगुल्ला खाने के लिए नहीं बना है। लोग उसे बार के रूप में ही जानते हैं। लेकिन अगर बच्चे के मन मे सवाल आ ही गया तो वामपंथी तर्कशास्त्र लगाकर उसे समझा देना चाहिए था कि साथी देखो, तुम अहीर आदमी हो। समझो कि दूध महंग हो गया है! हमारा रसगुल्ला असली होता है आदि आदि! संघी कहकर निकालने का क्या तुक था…

Ujjwal Bhattacharya तुक नहीं, आसान है. संघी होने से प्रेस क्लब से निकाल दिया जाता है – यही संदेश देना था.

Satyendra PS मतलब जैसे किसी को राष्ट्रद्रोही कहा जा सकता है वैसे ही किसी को संघी कहकर उसकी मोब लिंचिंग की जा सकती है! मेरी पत्नी और बिटिया तो कई बार खारिज कर चुकी हैं कि प्रेस क्लब का खाना निहायत घटिया होता है। मैंने अपने तमाम मित्रों को बताया भी कि कभी घर में प्रेस क्लब में चलकर खाने को कह दूं तो बवाल हो जाए! शुक्र है कि मैंने वहां के कामरेडों के सामने यह मसला न उठाया। एक रसगुल्ला सदस्यता ले लिया। हम तो कहते हैं कि वहां कुछो खाने लायक नहीं है!

Mahendra K. Singh वामपंथ की यह दुर्गति यूँ ही नहीं हुई है। पिछले ३० – ४० सालों में इन्ही सुविधाभोगी और इलीट वामपंथियों और समाजवादियों ने अपने इसी तरह के कुकर्मों से इतना ग़दर काटा है कि लोग झांसाराम मोदी जी से भी उम्मीद पाल बैठे और अभी भी देश का आर्थिक बलात्कार करवाने के बाद भी दक्षिणपंथियों की तरफ ही उम्मीद भरी नज़रों से देख रहे हैं।

Satyendra PS हम तो वहां की राजनीति जानते ही नहीं हैं, मेरे एक बहुत अच्छे मित्र हैं। जिसको कहते हैं उसको वोट कर देता हूँ। उन्हीं से एक बार कहा कि महाराज कम से कम रोटी फ्री होनी चाहिए। दाल, सब्जी दो आयटम कम से कम खाने लायक हो। लेकिन कुछ नही। बस ऐसे ही है! अब तो जाना भी बहुत रेयर होता है। किसी से मिलना हो तभी।

Mahendra K. Singh मैं भी कुछ नहीं जानता इन लोगों के बारे में पर इतना तो है कि विचारधारा के प्रति सारी प्रतिबद्धता आम लोगों में होती है। बड़े पदों पर बैठे लोग या फिर उन पदों तक पहुँचने वाले लोग सुविधानुसार विचारधारा बदलते देर नहीं लगाते।

Chandan Yadav भाई Satyendra PS जी, दिल से आभार पोस्ट के लिये। हम क्या हैं… ये हमारे साथ जितने लोग जुड़े हैं उन सबको पता है और मैंने कभी छुपाया भी नहीं। बात यह है कि क्या किसी सदस्य को बिना अपना पक्ष रखने का मौका दिये आपने तानाशाही रवैय्यै के तहत मुझे एक्सपेल कर दिया। क्लब किसी की बपौती नहीं है, हम सबका है और नियम कानून से चलेगा या इनकी तुनुकमिजाजी से ? मुद्दा यह है। लोगों को इस पर सोचना चाहिये कि आज इनके भ्रष्टाचार पर बोलने से मुझे निकाला गया, कल आप कुछ बोलेंगे आपको निकाल फेंका जायेगा। क्या क्लब ऐसे ही चलेगा ? एक्सपेल करने से पहले क्या इन्हे मुझे मौका नहीं देना चाहिये था अपना पक्ष रखने का?

Chandan Yadav POSTED ON 1ST OCTOBER — रावण को जलाने के साथ विजयादशमी खत्म हुआ। उम्मीद करता हूं कि प्रेस क्लब के रुलिंग पैनल के हुक्मरानों ने भी कल अपने अंदर अहंकार रुपी रावण को जलाया होगा कल। क्लब जितना रुलिंग पैनलवालों का है उतना मेरा भी और सभी मेंबरों का है। यह सिर्फ अहंकार था जिसके कारण क्लब के हुक्मरानों ने मुझ जैसे साधारण सदस्य द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने और क्लब को लेफ्ट और राइट में बांटकर क्लब के राजनीतिकरण करने का विरोध करने पर सच का मुंह बंद करने के मकसद से तानाशाही रवैय्या अपनाते हुये मुझे अपना पक्ष रखने का मौका दिये बगैर सीधे क्लब से बाहर कर दिय। लोकतंत्र यह नहीं है जैसा हुआ मेरे साथ। आपलोग खुद के लेफ्टिस्ट होने का दावा करते हैं लेकिन आपलोगो के तानाशाही रवैय्ये को देखकर हिटलर भी उपर करवटें बदल रहा होगा। अहंकार और तानाशाही कभी भी और कहीं भी टिका नही है। इसलिये बेहतर है समय रहते हुये मेरे अवैध एक्सपल्सन पर आपलोग पुनर्विचार करें। कल विजयादशमी के दिन अगर आपलोगों के अंदर का अहंकार रूपी रावण जल गया हो तो अपनी गलती सुधारें नहीं तो हमारे पास भी विकल्प खुले हैं। मैं भी १२०० किलोमीटर दूर बिहार के भागलपुर से आया हुं, अपमान और मान सम्मान के साथ समझौता नहीं करुंगा। लड़ाई कितनी भी लंबी या कठिन क्यूं न हो, अकेले क्युं नहीं लड़ना पड़े, लडु़गा जरूर। मैंने भी दस दिन मां दुर्गा की पूजा की है और उन्होने मुझे शक्ति दी है आपके अंदर के अहंकारी और तानाशाही प्रवृत्ति के खिलाफ लड़ने की तो मैं लड़ूंगा। और तमाम सदस्यों से आग्रह है कि मेरी लड़ाई में मेरा साथ दें क्युंकि आज मेरे साथ हुआ, कल आपके साथ भी हो सकता है अगर आपने विरोध में आवाज उठाया तो। अगर अब साथ नहीं खड़े हुये तो शायद आपके साथ भी लोग खड़े न हों अगर आपके साथ ऐसा कुछ होता है तो। आप भले मेरा साथ न दें लेकिन प्रेस क्लब को अहंकार और तानाशाही से तो बचाने का आपका फर्ज बनता है। धन्यवाद।

Chandan Yadav इन लोगों को तब से मैं खटक रहा था जब तेरह सितंबर को हमने बिना किसी नेता को बुलाये सिर्फ पत्रकारों के साथ अब तक हुये शहीद पत्रकारों के लिये श्रद्धांजलि सभा की थी‌। इनके पहले की सभा जो सिर्फ गौरी लंकेश के लिये थी और जिसमें नेताओं को बुलाकर इसे पत्रकार सभा नहीं बल्कि चुनावी सभा बना दिया था। यहाँ तक की कन्हैया कुमार को भी बुलाकर क्लब में स्टेज दिया गया था और हमारे वरिष्ठ पत्रकार खड़े दिखे। कई वरिष्ठ पत्रकार तो नाराज होकर निकल गए थे वहाँ से। इसके विरोध में हमने देश के विभिन्न हिस्से में अब तक शहीद हुए सभी पत्रकारों के लिए बिना किसी नेता के सिर्फ पत्रकारों की शोक सभा तेरह सितंबर को करायी थी प्रेस क्लब में। इस कार्यक्रम के आयोजन में भी उन्होंने बड़ी आनाकानी की थी लेकिन किसी तरह हमने वो कार्यक्रम किया। जिसकी बहुत तारीफ़ हुई थी ये अच्छा हुआ की सिर्फ पत्रकारों को बुलाया। तब से येलोग बहाना खोज‌ रहे‌ थे। और बहाना भी खोजा तो कैसा ? इनके घोटालों के बारे में हमने‌ सवाल करना शुरू किया तो इन्होने अपने को घिरता देख मुझे बाहर करने का मनमाना फैसला किया ताकि और कोई बाहर होने के डर से न बोल सके। खैर, इनकी कोशिश बेकार जायेगी। कोई मुगलिया राज है क्या जो ये सवाल करने पर‌ जीभ काट देंगे? भाइसाहब अब देश आजाद है और लोकतंत्र में राज पाट कानून से चलता है न कि तानाशाही के दस्तखत से।

Chandan Yadav अगर मैंने गलत किया है तो निकालिये लेकिन बिना शोकाज दिये या वार्निंग जारी किये बिना‌ सीधे एक्सपेल करना कहां तक जायज है? जिस पत्रकारिता के धंधे में हम अन्याय के खिलाफ लोगों की आवाज उठाते हैं वहीं हमारा मूंह बंद करने की कोशिश की जाती है जो शर्मनाक है।

Narendra Tomar इसे वाम या दक्षिणपंथी नहीं हरामपंथी खेल कहना चाहिये।

Puneet Chawla एक राजा था। उसने दस खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे। उसके दरबारियों और मंत्रियों से जब कोई मामूली सी भी गलती हो जाती तो वह उन्हें उन कुत्तों को ही खिला देता। एक बार उसके एक विश्वासपात्र सेवक से एक छोटी सी भूल हो गयी, राजा ने उसे भी उन्हीं कुत्तों के सामने डालने का हुक्म सुना दिया। उस सेवक ने उसे अपने दस साल की सेवा का वास्ता दिया, मगर राजा ने उसकी एक न सुनी। फिर उसने अपने लिए दस दिन की मोहलत माँगी जो उसे मिल गयी। अब वह आदमी उन कुत्तों के रखवाले और सेवक के पास गया और उससे विनती की कि वह उसे दस दिन के लिए अपने साथ काम करने का अवसर दे। किस्मत उसके साथ थी, उस रखवाले ने उसे अपने साथ रख लिया। दस दिनों तक उसने उन कुत्तों को खिलाया, पिलाया, नहलाया, सहलाया और खूब सेवा की। आखिर फैसले वाले दिन राजा ने जब उसे उन कुत्तों के सामने फेंकवा दिया तो वे उसे चाटने लगे, उसके सामने दुम हिलाने और लोटने लगे। राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसके पूछने पर उस आदमी ने बताया कि महाराज इन कुत्तों ने मेरी मात्र दस दिन की सेवा का इतना मान दिया…. …बस महाराज ने वर्षों की सेवा को एक छोटी सी भूल पर भुला दिया। राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया…. …और उसने उस आदमी को तुरंत भूखे मगरमच्छों के सामने डलवा दिया।  सीख:- आखिरी फैसला मैनेजमेंट का ही होता है, उस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।

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यशवंत की गुरिल्ला छापामार पत्रकारिता और प्रेस क्लब में दो दलाल/भक्तनुमा पत्रकारों का हमला करना…

Anil Jain : गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित सभा में कुछ वामपंथी नेताओं के आ जाने पर कुछ ‘राष्ट्रवादी’ पत्रकार मित्रों के पेट में काफी दर्द हुआ, जिसका इजहार करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रेस क्लब वामपंथियों और नक्सलियों का अड्डा बनता जा रहा है। लेकिन उसी सभा के दो दिन पहले प्रेस क्लब में न्यूज पोर्टल भडास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर हुए हमले को लेकर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित किसी ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की। प्रेस क्लब के ‘नक्सलियों का अड्डा’ बन जाने की काल्पनिक चिंता में दुबले हुए पत्रकार मित्रों की संवेदना भी पता नहीं कहां चली गई दक्ष-आरम और ध्वज प्रणाम करने!

सब जानते हैं कि यशवंत सिंह गुरिल्ला छापामार की तरह काम करते हुए अपने पोर्टल के माध्यम से दुर्दांत मीडिया घरानों के मालिकों और उनके पाले हुए दलालनुमा संपादकों तथा पत्रकारों की गुंडागर्दी को आक्रामक तरीके से जब-तब उजागर करते रहते हैं। इसीलिए कई बार उन पर हिंसक हमले हो चुके हैं और एक बार तो वे लंबी जेल यात्रा भी कर चुके हैं। पिछले दिनों प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में भी दो दलाल और भक्तनुमा पत्रकारों ने यशवंत पर उनकी लिखी किसी पुरानी खबर को लेकर उनके साथ मारपीट की जिसमें उन्हें गंभीर चोंटे आईं और उनका चश्मा भी टूट गया।

ये हैं दोनों हमलावर…

हालांकि इस घटना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रेस क्लब भक्तनुमा पत्रकारों या शाखा बटुकों का अड्डा बन गया है लेकिन ऐसी घटनाओं की निंदा तो होनी ही चाहिए। मैं घटना का चश्मदीद नहीं हूँ। कुछ लोग इस घटना में दोनों पक्षों की गलती बता रहे हैं। अगर ऐसा है तो प्रेस क्लब को अपने स्तर पर इस घटना की जांच करके जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए।

पत्रकार अब दलाल ही नहीं बल्कि कातिल भी हो गए हैं….

Chaman Mishra : भड़ास4मीडिया के संपादक Yashwant Singh सर, पर दिल्ली में हमला हुआ। ये हमला किसी और ने नहीं पत्रकारों ने ही किया। अब भी आपको लगता है, कि पत्रकार ‘दलाल’ हैं, नहीं अब वो ‘क़ातिल’ भी हैं। पूरी हिंदी न्यूज़ इंडस्ट्री में ऐसा कौन है जो भड़ास को नहीं पढ़ता। बड़े से बड़ा, छोटे से छोटा और अदना पत्रकार या फिर पत्रकार बनने की प्रक्रिया में जो हैं, वो भी भड़ास को पढ़ते हैं, और हर दिन पढ़ते हैं। फिर भी मीडिया इंडस्ट्री भड़ास के संपादक के साथ उस तरह नहीं खड़ी है जैसे होना चाहिए। कोई नहीं ‘जेल जानेमन’ ऐसे ही गर्दिश के दिनों की उपलब्धि थी। हमें कुछ और रचानात्मक मिलेगा। लेकिन मैं तो कहता हूं, सर उन हमलावर गधों को जेल में जरूर डलवाइए, और उनका जेल वाला फ़ोटो भड़ास पर लगाइए। उसे Sponser भी कराइए।
इससे पहले-
गौरी लंकेश को मार दिया।
पंकज मिश्रा पर गोली चला दी।
इंडिया टीवी के रिपोर्टर सुनील को खूब पीटा।
फिर भी सब-सरकारें चुप्प हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन और युवा पत्रकार चमन मिश्रा की एफबी वॉल से.

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इन 315 पत्रकारों पर है प्रेस क्लब आफ इंडिया का बकाया, देखें लिस्ट

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के तीन सौ पंद्रह सदस्यों पर क्लब का पैसा बकाया है. क्लब की प्रबंधन समिति ने सभी को मेल भेज कर बकाया जमा करने का अनुरोध किया है. कुछ पत्रकारों पर क्लब की सालाना सदस्यता शुल्क बकाया है तो कइयों पर खाने-पीने का पैसा बाकी है.

प्रेस क्लब आफ इंडिया का कहना है-

” कुल 315 सदस्यों ने पत्र और फोन के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं की. पैसे न देने वाले डिफाल्टर सदस्यों की लिस्ट जारी की जा रही है. पिछले सालों के सदस्यता शुल्क चुकाने की आखिरी तारीख 15 अप्रैल 2017 है. अब वार्षिक सदस्यता शुल्क अप्रैल में ही देना होगा. जो सदस्य अप्रैल में वार्षिक सदस्यता शुल्क नहीं चुकाएंगे उन्हें क्लब की सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा.”

डिफाल्टर पत्रकारों के नाम और बकाया राशि देखें…

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काक्रोच क्लब आफ इंडिया में तब्दील हो गया पीसीआई! (देखें वीडियो)

प्रेस क्लब आफ इंडिया को अगर काक्रोच क्लब आफ इंडिया भी कह लें तो कोई बुरा न मानेगा क्योंकि एक तो वैसे ही होली नजदीक है और दूजे प्रेस क्लब की टेबल पर सरेआम काक्रोच घूमते टहलते और आपके खाने में मुंह मारते मिल जाएंगे. सबकी दुर्व्यवस्था की खोज खबर रखने वाले पत्रकारों के अपने ही क्लब का क्या हाल है, इसे देखने लिखने वाला कोई नहीं.

पिछले दिनों भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह जो प्रेस क्लब आफ इंडिया के सदस्य भी हैं, क्लब पहुंचे और खाने-पीने का आर्डर किया तो देखा कि एक काक्रोच बार-बार टेबल के बीच में आकर उन्हें सलामी देकर वापस नीचे चला जा रहा है. कई बार जान-बूझ कर अनदेखा करने के बावजूद जब काक्रोच जिद पर अड़ा रहा कि वीडियो बनाकर न्यूज छापो तो यशवंत को मजबूरन अपना मोबाइल कैमरा आन करना पड़ा और गवाह के बतौर क्लब के एक वेटर को सामने खड़ा करके सवाल करना पड़ा ताकि कोई यह न कह सके कि वीडियो फेक है.

हालांकि खुद के घर की गंदगी को दबाने, तोपने, ढंकने की जिम्मेदारी घर के सदस्यों पर रहती है और घर की बात घर में ही रह जाए टाइप भावना जोर मारती रहती है, लेकिन जब गंदगी इतनी हो जाए कि बदबू आने लगे तो इसे दुनिया समाज के सामने लाना जरूरी हो जाता है ताकि गंदगी और बदबू की सफाई के लिए कोई अभियान चल सके.

भड़ास के एडिटर यशवंत ने फेसबुक पर कुछ यूं लिखा है :

Yashwant Singh : प्रेस क्लब इंडिया या काक्रोच क्लब आफ इंडिया! परसों प्रेस क्लब गया. खाने-पीने का आर्डर किया. अचानक एक छोटे जीव ने ध्यान खींचा. एक प्यारा-सा काक्रोच बार-बार टेबल के बीच में आकर मुझे सलामी देकर वापस नीचे चला जाता, इठलाते हुए. कई बार अनदेखा किया. पर नटखट और पब्लिसिटी का भूखा यह चुलबुल काक्रोच जिद पर अड़ा रहा कि हे यशवंत, वीडियो बनाकर मेरी न्यूज छापो, दुनिया को मेरे अस्तित्व और विकास के बारे में बताओ. आखिरकार मुझे मजबूरन अपना मोबाइल कैमरा आन करना पड़ा. गवाह के बतौर क्लब के एक वेटर को सामने खड़ा करके इस प्राणी के क्लब में ठाठ से वास करने के बारे में जानकारी हेतु सवाल किया. आप भी देखें वीडियो..

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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प्रेस क्लब आफ इंडिया चुनाव 2016 : ये है फाइनल लिस्ट, देखिए कौन कितने वोट से हारा, कौन जीता

प्रेस क्लब आफ इंडिया चुनाव 2016 में हार जीत की फाइनल लिस्ट आ गई है. निवर्तमान महासचिव नदीम अहमद काजमी द्वारा समर्थित लाहिरी-विनय पैनल को भारी जीत मिली है. सिर्फ मैनेजिंग कमेटी में तीन सदस्य इस पैनल से बाहर के जीते हैं जिसमें एक अनीता चौधरी हैं जो बाला-कृष्णा पैनल से थीं. समृद्धि भटनागर और रवि बत्रा निर्दल लड़े और जीते. इन तीन के अलावा सभी वो जीते जो लाहिरी-विनय पैनल के थे. लाहिरी-विनय पैनल ने काफी मतों से अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ा. मतगणना का काम आज सुबह चार बजे खत्म हुआ. ये है हार जीत की पूरी लिस्ट…

कल शाम सात बजे तक आए रुझान के आधार पर भड़ास ने जिस खबर / आकलन का प्रकाशन किया था, वह अनुमान सच निकला, देखें क्या लिखा गया था…

पिछले साल यानि वर्ष 2015 में हुए चुनाव में कौन कितने वोट से हारा जीता था, जानने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें :

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प्रेस क्लब आफ इंडिया में नदीम अहमद काजमी का जंगलराज

अमित भनोट पीआईबी एक्रेडेटेड जर्नलिस्ट हैं. दिल्ली में नौ साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. दलाल स्ट्रीट मैग्जीन में डिप्टी एडिटर हैं. बावजूद इसके कई साल से प्रयास करने पर भी उन्हें प्रेस क्लब आफ इंडिया की मेंबरशिप नहीं दी गई. ऐसा इसलिए क्योंकि नदीम अहमद काजमी का जंगलराज प्रेस क्लब आफ इंडिया में चलता है. हाल फिलहाल बनाए गए पांच सौ नए मेंबर्स की डिटेल अगर निकलवा ली जाए तो आपको सैकड़ों ऐसे मेंबर मिलेंगे जिनका बैकग्राउंड पत्रकारिता का नहीं है. लेकिन उन्हें अपने धर्म या जाति का होने के कारण सदस्य बना दिया गया है ताकि प्रेस क्लब में वोटबैंक का राजनीति में पलड़ा भारी रहे.

सोचिए, इतने पढ़े लिखे और इतने बड़े प्रेस क्लब के नेता लोग जब वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं तो वो किस मुंह से राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को वोट बैंक की पालिटिक्स के नाम पर देश और समाज को तबाह करने का आरोप लगा सकते हैं. नीचे एक पत्र है जो अमित भनोट ने भड़ास4मीडिया को लिख भेजा है. ऐसे ढेरों जेनुइन पत्रकार साथी हैं जिन्हें प्रेस क्लब की सदस्यता सिर्फ इसलिए नहीं दी गई क्योंकि वो नदीम अहदम काजमी नामक शख्स के करीबी नहीं हैं या उनकी जाति या धर्म के नहीं हैं.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


Yashwant ji

press club of India ke baare me Aawaz uthane ke liye badhai. Mai pichle 9 saal se dilli me patrakarita kar Raha hu aur ek Dalal Street magazine me dy editor hu. sath me PIB accredited journalist bhi hu (no1136). Bavjood iske pichle Kai saalo ke prayas ke Baad bhi mujhe press club ki membership nahi mil Saki hai.

Mai jab bhi Apne kisi varishth patrakar Sathi se bolta hu ki pib hone ke bavjood bhi kyo membership nahi di ja Rahi to wo ashcharya vyakt Karta hai but kuch kar nahi pata. Mera form bhi PCI me filed hai per membership kyo nahi Mili koi nahi batata. Kai log membership ke liye rishwat Dene ki baat bhi keh chuke hai but wo Mai Dena nahi chahata.

Jaha tak office bearers ka sawal hai to wo to Cabinet Sectary se bhi jyada busy rehte hai aur kabhi kuch nahi karte. Aur to aur PCI ke bahar bouncer jaise log Khade rete hai Jo hum jaise patrakaro Ko chor thahrate hai aur ghusne se rokte hai..kripya bataye ki mujhe Kya karna chahiye. Vaise mai kai Baar kisi niji company ke managers ke sath press club ja Chuka hu Jo iske member Kai saalo se hai aur kuch paisa Dene ke Baad mujhe bhi member banane ki baat karte hai. Kya mujhe membership ke liye rishwat Deni chahiye…?

Amit Bhanot
Deputy Editor
Dalal Street Magazine

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प्रेस क्लब आफ इंडिया : किसी ज़माने में यहां का खाना अच्छा होता था, आज लगा ये मयखाना ही अच्छा…

Ajit Anjum : मैं आमतौर पर प्रेस क्लब जाता नहीं क्योंकि मैं पीता नहीं… साल में दो तीन दिन चाहे अनचाहे चला जाता हूं… कुछ दोस्तों की ज़िद पर या तो वोट देने या किसी के साथ खाने के लिए.. पिछले साल वोट देने तो नहीं जा पाया लेकिन आज अपने मित्र राजीव कुमार और शिल्पा जी के कहने पर ना ना करते हुए कुछ खाने के लिए प्रेस क्लब पहुँच गया और एक एक करके पाँच तरह का स्नैक्स मंगवाकर खाने की नाकाम कोशिश करता रहा…

मोमो, चिली पनीर, तंदूरी चिकन, फ़िश फ्राई और चिकन चिली.. एक भी आइटम ऐसा नहीं था, जो मुँह का ज़ायक़ा ख़राब करने में सक्षम न हो.. शिल्पा-राजीव को कोसता भी रहा और तय किया कि भूख से निजात का कोई दूसरा विकल्प जब तक होगा, यहाँ खाने तो नहीं आऊँगा… हाँ, पीने वालों को ये मयखाना मुबारक… किसी ज़माने में यहाँ का खाना अच्छा होता था आज लगा कि ये मयखाना ही अच्छा.. प्रेस क्लब के आसपास फुटपाथ पर या जंतर मंतर के ढाबे पर इससे लाख गुना बेहतर खाना आपको मिल जाएगा..

इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम की एफबी वॉल से.

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प्रेस क्लब आफ इंडिया अब सेफ जगह नहीं, सीसीटीवी फुटेज लीक होने से हड़कंप (देखें वीडियो)

बिल्डरों से अपवित्र रिश्ते रखने समेत कई किस्म के गंभीर आरोपों में घिरे प्रेस क्लब आफ इंडिया के महासचिव नदीम अहमद काजमी जो इस बार भी चुनाव में इसी पद के लिए उम्मीदवार हैं, पर एक नया आरोप ये लगा है कि उनके नेतृत्व में प्रेस क्लब आफ इंडिया के भीतर होने वाली सीसीटीवी रिकार्डिंग के चुनिंदा फुटेज अपने विरोधियों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से लीक करा दिए गए हैं. इसी तरह का एक फुटेज भड़ास4मीडिया के भी हाथ लगा है जिसमें प्रेस क्लब चुनाव के दो प्रत्याशियों में किसी बात पर कहासुनी हो रही है.

सवाल ये है कि ये सीसीटीवी फुटेज लीक कैसे हुआ. अगर जानबूझ कर कराया गया है तो फिर ये गंभीर मामला है. सैकड़ों मीडियाकर्मी बेहद सहज भाव से यहां बैठता, खाता पीता है, बिना चिंता किए हुए कि उसकी प्राइवेसी रिकार्ड हो रही है या नहीं. पर जिस तरह प्रेस क्लब के सत्ताधारी पैनल के कुछ लोगों ने ये फुटेज लीक किया है, उससे सारे प्रेस क्लब सदस्यों के कान खड़े हो गए हैं. फुटेज लीक करते हुए आरोप लगाया गया है कि इसमें दिख रहे दो सदस्य नियमों का उल्लंघन कर पब्लिक प्लेस में स्मोकिंग कर रहे हैं. साथ ही लड़ झगड़ रहे हैं. अगर ऐसा है तो प्रेस क्लब की कमेटी की बैठक बुलाकर आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए, न कि फुटेज लीक कर प्रेस क्लब की प्राइवेसी भंग करने जैसा घृणित काम करना चाहिए.

भड़ास को फारवर्ड किए गए इस फुटेज के साथ एक लेटर भी पहुंचा है जिसमें किन्हीं रवि बत्रा नामक फोटो जर्नलिस्ट ने लिखा है- ”This is a demonstration of Mr. Pradip srivastav, the General-Secretary candidate, breaking the law pertaining to smoking in public and his presidential running mate Mr. Gautam Lahiri bursting out in violence. Do you want this unruly behavior to be your vote for change? Certainly not. Please watch this video, showing presidential and sec-gen candidates not only violating laws, but also getting into public spat.”

‎आप भी देखिए सीसीटीवी फुटेज और तय करिए कि क्या प्रेस क्लब की प्राइवेसी इसी तरह भंग करने की छूट नदीम अहमद काजमी एंड कंपनी को देते रहना चाहिए… जो लोग खाते पीते समय गलत कर दिख रहे हैं, उन पर तो आंतरिक बैठक बुलाकर एक्शन हो सकता है. लेकिन जो लोग प्रेस क्लब की प्राइवेसी लीक कर रहे हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए. उनकी सबसे बड़ी सजा यही है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करते हुए उनके खिलाफ वोट देने का आह्वान करना चाहिए. बाकी प्रेस क्लब सदस्यों की मर्जी. सीसीटीवी फुटेज लिंक यूं है…

https://www.youtube.com/watch?v=nSjUJYEqUww

इस फुटेज को देखने के बाद तत्काल प्रेस क्लब प्रबंधन को जांच कर यह बताना चाहिए कि किसने यह सीसीटीवी फुटेज लीक किया है. इस फुटेज को देखने के बाद से कहा जाने लगा है कि दिल्ली स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया अब खाने-पीने के लिहाज से सेफ स्थान नहीं रह गया है. यहां सुरक्षा और अनुशासनात्मक कारणों से भले ही सीसीटीवी कैमरा लगा है जो बिलकुल उचित है लेकिन क्लब के कुछ पदाधिकारी इन सीसीटीवी फुटेज को अपने निहित स्वार्थ के हिसाब से लीक करके दूसरे मीडियाकर्मियों को बदनाम करने कराने का काम रहे हैं. विरोधियों का आरोप है कि यह ताजा फुटेज भी प्रेस क्लब चुनाव में कुछ लोगों को बदनाम करने के इरादे से सत्ताधारी पदाधिकारियों नदीम अहमद काजमी एंड कंपनी की तरफ से लीक किया गया है. अगर ऐसे ही प्रेस क्लब में बैठे लोगों की रिकार्डिंग लीक होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब लोग प्राइवेसी बचाने के लिए प्रेस क्लब जाना ही छोड़ देंगे. आप भी प्रेस क्लब जाने से पहले एक बार जरूर सोच लें कि कहीं ऐसा न हो कि आपका खाना गाना हंसना बोलना लड़ना झगड़ना एक दिन लीक हो जाए और आपको पता तक न चले यह लीक किसने कब क्यों किया.

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प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के तानाशाह बने नदीम को हटाने के लिए पत्रकारों ने की बड़ी लामबंदी

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प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में इस बार बिल्डर लॉबी जबरदस्त एक्टिव है!

Sunil Verma : कई साथी जिक्र कर रहे थे कि प्रेस क्लब के चुनाव में इस बार बिल्डर लॉबी जबरदस्त एक्टिव है… कान लगाकर सुना तो ज्ञान मिला कि बिल्डर लॉबी ने नई बिल्डिंग का ठेका मिलने के लालच में चुनाव लड़ रहे कई पत्रकार भाई लोगों को एक लाख रूपए दिए हैं…. मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा, पर हो भी सकता है! किसी मित्र के पास और जानकारी हो तो मेरा भी ज्ञान बढ़ाना।

प्रेस क्लब आफ इंडिया के सदस्य सुनील वर्मा के फेसबुक वॉल से.

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नदीम अहमद काजमी ने बिल्डर से कांट्रैक्ट साइन करने की इच्छा के कारण प्रेस क्लब इलेक्शन टलवाया?

: Raise a voice against delay in elections and demand immediate elections : New Delhi : On March 23, 2015, the office bearers and managing committee of the PRESS CLUB OF INDIA (PCI) held a meeting in which it was decided to postpone the Club’s elections, which were originally scheduled to take place in March. 

It is learnt that this is all the game-plan of the Club’s current Secretary General Nadeem Ahmad Kazmi, who wants to inordinately postpone the elections, so that he gets the chance to sign the contract with a builder to construct the new building for the Press Club, and, pocket hefty commission amount. I urge upon all the Press Club members to raise a voice against this (delay in elections), and demand immediate elections.

Press Club’s Assange… a whistle-blower…

(एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित)

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पंकज श्रीवास्तव की प्रेस कांफ्रेंस के लिए केजरीवाल ने जुटा दी मीडिया वालों की भीड़!

अगर फिक्सिंग होती है तो हर कदम पर दिखने लगती है. नाकारापन और अकर्मण्यता के आरोपों में आईबीएन7 से निकाले गए पंकज श्रीवास्तव ने तयशुदा रणनीति के तहत अपने संपादक को एक मैसेज भेजा. उस मैसेज का स्क्रीनशाट लिया. उसे क्रांतिकारी भाषण के साथ फेसबुक पर लगा दिया. ‘आप’ वालों ने फेसबुक और ट्विटर पर पंकज को शहीद बताते हुए उनके मसले को वायरल करना शुरू किया. ‘आप’ नेता आशुतोष, जो कभी आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं, ने पंकज के मसले को जोरशोर से सोशल मीडिया पर उठाया.

पंकज ने आज चार बजे प्रेस क्लब आफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस करने की घोषणा की. इसके पहले केजरीवाल ने आज दिन में दो बजे प्रेस क्लब आफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस करने की घोषणा की थी. लेकिन केजरीवाल ने ऐन वक्त, जब मीडिया के लोग प्रेस क्लब में जुट गए थे, अपनी प्रेस कांफ्रेंस रद्द कर दी. इस तरह सारे मीडिया वालों के सामने पंकज श्रीवास्तव नमूदार हुए. आशुतोष भी आ गए. इनने अपनी-अपनी भड़ास निकाली. लंबे लंबे सिद्धांत पेले. देखते जाइए, चुनाव भर शहीद बनते घूमने के बाद पंकज श्रीवास्तव चुनाव बाद आम आदमी पार्टी के साथ सक्रिय हो जाएंगे और 2017 के यूपी विधानसभा इलेक्शन में विधायक का चुनाव लड़ जाएंगे.

इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय समर उर्फ समर अनार्या ने फेसबुक पर कुछ लिखा है, जो इस तरह है….

Samar Anarya : आप नेता आशुतोष आईबीएन7 से पंकज श्रीवास्तव भाई की बर्खास्तगी पर मार लालपीले हो रहे हैं. बाकी इनके अपने मैनेजर काल में 200 (पूरे समूह से 350) लोग निकाले गए थे तब भाई कुछ नहीं बोले थे! इधर वाली जनता अभी मोदिया नहीं हुई है आशुतोष भाई.

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Samar Anarya : पंकज श्रीवास्तव की आईबीएन 7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्तगी दुखद है, पर न जाने क्यों इसी आईबीएन 7 (और नेटवर्क 7 समूह के बाकी चैनलों) से अगस्त 2013 में 320 से ज्यादा पत्रकारों को एक साथ निकाल दिया जाना याद आ गया.(अब) आप नेता आशुतोष के गुस्से भरे ट्वीट देखते हुए उनका इतनी बड़ी छंटनी के बाद सड़क पर आ गये पत्रकारों के बीच ऐम्बीअन्स मॉल में मद्रास कैफ़े का ‘प्रीव्यू’ देखना भी. ये मुट्ठियाँ तब भिंची होतीं तो शायद बात यहाँ तक न पंहुचती. अपने ऊपर न होने तक हमलों पर भी क्रांतिकारिता जागती तो बात यहाँ तक न पंहुचती, शायद. खैर, जब भी शुरू हो, लड़ाई में साथ देना बनता है. पर बहुत कुछ याद रख के. उस दौर के दो स्टेटस लगा रहा हूँ. ताकि सनद रहे वाले अंदाज में-
https://www.facebook.com/samar79/posts/10201740504700560
https://www.facebook.com/samar79/posts/10201728758446911

पूरी कहानी जानने के लिए इस मूल पोस्ट को पढ़ें….

आईबीएन7 में कचरा हटाओ अभियान जारी, अबकी पंकज श्रीवास्तव हुए बर्खास्त

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