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प्रियंका चोपड़ा की नंगी टांग, मोदी की महिमा अपरंपार और सोनू सूद का तगड़ा पीआर!

गिरीश मालवीय-

आपने कभी प्रियंका चोपड़ा पर गौर किया है ! शायद ही कोई हफ्ता गुजरता है जब उससे जुड़ी कोई न कोई खबर मीडिया में सुर्खियां न बनती हो, जबकि सालो से उसकी कोई फ़िल्म।नही आई है, बीसियों अभिनेत्रियां होंगी ऐसी, लेकिन ऐसा क्या खास है प्रियंका में कि वह हर वक्त लाइम लाइट में रहती है?

दरअसल PR एजेंसियों की सहायता से अपनी सक्रियता के माध्यम से, सेलेब्स वैश्विक नीतियो पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं जो एक एजेंडा को आकार देती है, ओर उस विशिष्ट एजेंडे को उन देशों में जहाँ सेलेब्रिटीज़ का प्रभाव है वहाँ फैलाया जाता है।

आप क्या सोचते है नरेंद्र मोदी के साथ नग्न टांगे फैलाए फोटो कोई अन्य अभिनेत्री खिंचवा सकती है? प्रियंका उस वक्त भारत मे वुमन इम्पोर्वमेंट को प्रदर्शित कर रही थी। प्रभाव हमेशा से राजनीति का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है।

पहले यह होता था सेलेब्रिटीज पीआर फर्मों को किराए पर लेते हैं और उन्हें इंटरनेट प्रसिद्धि के लिए भारी पैसा देते हैं। लेकिन अब PR फर्म सेलेब्रिटीज़ बनाती है वो उनमें इन्वेस्ट करती है ड्रीम एन हसल मीडिया की संस्थापक जशोदा माधवजी के अनुसार, “हमारा काम किसी सेलिब्रिटी की सार्वजनिक छवि को समझदारी से ढालना है, कभी-कभी आप उन्हें सुर्खियों में ला रहे हैं, और कभी-कभी आपको यह जानना होगा कि उन्हें कब बाहर करना है।

भारतीय राजनीति में सेलिब्रिटी का प्रतिनिधित्व कोई नई घटना नहीं है। पहले भी ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब मशहूर हस्तियों ने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रसिद्धि का उपयोग किया है। लेकिन सन 2000 के बाद परिस्थिति पूरी तरह से बदल गयी है।

अब सेलिब्रिटी के उदय में राजनीतिक दलों का भी निवेश होता है। इन मेगास्टारों के प्रभाव को किसी अभियान या राजनीतिक एजेंडे के लिए एक प्रॉपर्टी के रूप में देखा जा सकता है।

2021 में एक नयी मिलेनियल पीढ़ी खड़ी हो गयी है जिसे राजनीति की दुनिया मे फर्स्ट टाइम वोटर कहा जाता है, इसे इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से आसानी से प्रभावित किया जा सकता है।

मिलेनियल्स सोनू सूद के साथ अधिक जुड़ाव महसूस करेंगे बनिस्बत अमिताभ बच्चन के, क्यो कि वह अमिताभ की फिल्में देखते हुए नही बड़े हुए हैं वह सोनू सूद की फिल्में देखते हुए बड़े हुए हैं।

जब हम यह मानते है कि बॉलीवुड की कई फिल्मों को एक विशिष्ट एजेंडे को पुष्ट करने के लिए फाइनेंस किया जाता है! तो हम यह क्यो नही मानते कि ऐसा सेलेब्स के साथ भी किया जा सकता है?

बेशक सोनू सूद ने कोरोना काल मे मजदूरों की।मदद की होगी लेकिन सेकड़ो ऐसे लोग भी होंगे जिन्होंने कोरोना के दौरान सोनू सूद से कही ज्यादा लोगो की मदद की होगी। पर वो हीरो नही बने,……बहुत से लोग इन मजदूरों की यात्रा में लगने वाला पैसा भी देना चाहते थे पर वह मजदूरों को बसों में भेजने के इंटर स्टेट परमिट भी नही बनवा पाए, लेकिन सोनू सूद ने वह परमिट बनवा दिए..….. यह कैसे हुआ ? कभी आपने सोचा?

दो दिन पहले की मेरी पोस्ट उठा कर पढ़ लीजिए, उसमे साफ लिखा है कि सिंगापुर से जो करोड़ो रूपये सोनू सूद के खाते में आए वह काफी सन्देह उत्पन्न कर रहे हैं।

अभी आई इस ताजी खबर के अनुसार सोनू सूद पर आईटी रेड की वजह सामने आ गयी है सूत्रों के मुताबिक सोनू सूद ने विदेशी योगदान विनिमय अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े नियम तोड़े थे। इसको लेकर ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने छापेमारी को अंजाम दिया है सोनूसूद ने एफसीआरए के नियमों का उल्लंघन करके विदेश से धन हासिल किया है ओर इस पैसे को फिल्म अभिनेता ने कई अन्य जगहों पर खर्च किया। सूत्र ने बताया कि इस बात के भी सुबूत मिले हैं कि विभिन्न जरिए से अलग-अलग अकाउंट्स में पैसे मंगाए गए हैं। जबकि वास्तव में इसका फायदा सोनू सूद को मिला है।

यही बात मैं बहुत पहले से उठा रहा था।

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