इंडियन एक्सप्रेस का आज का अंक स्टडीज़ टेबल या सोफ़े पर रखकर मत पढ़िएगा

Mukesh Kumar : पनामा लीक्स ने देश ही नहीं दुनिया भर के समूचे प्रभु वर्ग के चेहरे से नकाब उठा दी है। ये वर्ग सत्ता में है या सत्ता से जुड़ा हुआ है। पिछले पाँच साल में ये चौथा खुलासा है जिसने देश का धन विदेश में गैर कानूनी ढंग से जमा करने वाले ढेरों नाम उजागर किए हैं। लेकिन इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि अभी तक एक भी शख्स जेल के अंदर नहीं गया है और न ही किसी का धन देश में आया है। यहां तक कि जो सरकार काला धन वापस लाने के वायदे के साथ आई थी उसका भी रवैया ठंडा है और ये स्वाभाविक भी है क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई हैं। अलबत्ता इंडियन एक्सप्रेस और उस अंतरराष्ट्रीय खोजी टीम (International consortium of investigative journalists) को जिसकी रीतू सरीन और उनकी टीम हिस्सा है, शुक्रिया कहा जाना चाहिए, जो लगातार भ्रष्टाचार की परतें उघाड़ती जा रही है। बाक़ी स्वनामधन्य मीडिया घराने तो सत्ता के चाकर हो चुके हैं या उनकी नसबंदी कर दी गई है।

Vineet Kumar : आज इंडियन एक्सप्रेस स्टडीज़ टेबल या सोफ़े पर रखकर मत पढ़िएगा. मेरी तरह फ़र्श पर रखकर पढ़िएगा..जिससे कि ब्लास्ट हो भी तो आपके फ़र्नीचर सुरक्षित रह जाएं. फ़र्श के लिए मकान मालिकन से सॉरी बोल लीजिएगा..

Mahendra Mishra : अब पनामा पेपर्स। माफिया डॉन, बॉलीवुड एक्टर से लेकर पूंजीपतियों और राजनेताओं के बाहर जमा पैसों का नया खुलासा। अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय से लेकर केपी सिंह और इक़बाल मिर्ची समेत तमाम चेहरे हैं शामिल। सरकार के एक और चहेते भी पनामा के पानी में डूबे हुए हैं । इस काली कोट के लिए अब अपनी इज्जत बचाना भी मुश्किल हो रहा है। सबको आज के जनसत्ता की लीड स्टोरी पूरी पढ़नी चाहिए।

Pushya Mitra : अमिताभ-ऐश्वर्या और दूसरे लोगों के नाम तो इंडियन एक्सप्रेस ने अपने सोर्स से निकाले होंगे… वैसे पनामा की अपनी साइट पर जिन दो भारतीयों के नाम हैं, उनमे से एक लोकसत्ता पार्टी के दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग केजरीवाल हैं. रोचक बात यह है कि लोकसत्ता पार्टी का गठन भी राजनीति में शुचिता और सिद्धांतों की वापसी के मकसद से ही की गयी थी…

Pervaiz Alam : Another milestone for Indian journalism! The Indian Express has published the much awaited story of the year- Panama Papers. In July 2015, The Indian Express signed an agreement with ICIJ for being the Indian partner for The Panama Papers project. Since then, a team of 25 reporters, led by the newspaper’s investigative team, joined 375 journalists in 76 countries.

Prabhat Ranjan : मुझे याद आ रहा है जब अमिताभ बच्चन 50 साल के हुए थे. तब उन्होंने पहली बार एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि उनके बाल सफ़ेद हो चुके हैं और वे बूढ़े हो रहे हैं. तब सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने ‘नवभारत टाइम्स’ में अमिताभ को भगवान का दर्जा देते हुए यह लिखा था कि हमारे भगवान कभी बूढ़े नहीं होते इसलिए आप बूढ़े होने की बात मत कीजिए. अमिताभ बच्चन एस. पी. की उस टिप्पणी को संभाल कर रखते थे और मिलनेवालों को पढवाते भी थे. मैं सोच रहा हूँ एस. पी. सिंह आज होते तो क्या लिखते?

Sanjaya Kumar Singh : राष्ट्रवादी सरकार तो जुमला बताकर देशभक्ति सिखाने लगी। इंडियन एक्सप्रेस अपने काम में लगा रहा।

Manish Jha : कटघरे में खड़े होकर सफाई देने में बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते है, चाहे वो देश का सबसे बड़ा वकील ही क्यों ना हो! पनामा के एक लॉ फर्म के लीक दस्तावेजों में हरीश साल्वे भी उन भारतीयों में शुमार है जिन्होंने फर्जी “शेल” कंपनी के जरिये करोड़ों रूपये विदेशी खाते में जमा किये थे। आज सुप्रीम कोर्ट में जैसे ही मैंने उनसे इस पर बात शुरू कि तो उनकी हालत देखने वाली थी। पिछले 10 सालों से अधिक समय से उन्हें मै जजों को महत्वपूर्ण मामले में सलाह देने के रोल में देखता आया था, लेकिन आज वो 20 मिनट से अधिक समय तक मुझे सफाई देते रहे। निसंदेह उनके जवाबों में आज वो दम ख़म नहीं दिख रहा था। वैसे भी किसी का वकील बनना अलग बात है और आरोपी बनकर जवाब देना अलग । सर जी बात बस इतनी सी है कि- आपका पैसा है जहाँ चाहे रखो, लेकिन नए काले धन कानून के मुताबिक 30 सितम्बर 2015 से पहले आपने सरकार को इस बारे में जरूर बताया होगा वरना अब ये किसी फांसी के फंदे से कम नहीं। दूसरी बात, जैसा कि आपने मुझे समझाने की कोशिश कि- ये पैसे लन्दन में टैक्स से बचने के लिए पनामा भेजे गए तो मेरा सवाल बस इतना ही है कि- आख़िरकार बदनाम गली में जाना क्यों? सबसे पते की बात ये है कि बकौल हरीश साल्वे ये एक अमेरिकी साजिश है।

सौजन्य : फेसबुक

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