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पत्रकारिता का पतन और ‘आजतक’ का स्याह-सफेद अध्याय!

विश्व दीपक-

100 करोड़ की उगाही करने वाला, तिहाड़ का पूर्व कैदी सुधीर चौधरी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ पूरे देश को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा था. आज इत्तफाकन वह क्लिप सामने आ गई जिसमें चौधरी अर्पिता मुखर्जी के घर से बराममद 20 करोड़ रुपए की बरामदगी वाली ख़बर का सफेद-स्याह समझा रहा था.

उपदेश देने वाले अंदाज में वह दर्शकों से कहता है कि चूंकि आप भ्रष्टाचार के आदी हो चुके हैं इसीलिए ऐसी ख़बरें आपको विचलित नहीं करती.कोई इससे पूछे कि 100 करोड़ की रकम बड़ी होती है या 20 करोड़ की ?

आजतक के मालिकान और प्रबंधन शायद बता सकते हैं कि जिस उगाहीबाज़ के खिलाफ़ पुख्ता सबूत मौजूद हैं, उसे प्राइम टाइम पर अपने साथ जोड़कर ब्रांड खराब करने की क्या ज़रूरत थी?

इसी शो में आगे चौधरी, सड़क धंसने की तस्वीरें दिखाता है. कहता है कि ये सड़कें भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गईं.

ख़बरों का सफेद-स्याह समझाते हुए चौधरी एक बार भी नहीं बोलता कि अर्पिता मुखर्जी के घर से जो 20 करोड़ का ढेर बरामद हुआ उनमें से ज्यादातर 2000 के वही गुलाबी नोट थे जिनमें चौधरी ने चिप की खोज की थी.

ये 2000 के वही गुलाबी नोट थे जिन्हें नोटबंदी के बाद लाया गया था. चौधरी के मास्टर ने दावा किया था कि भ्रष्टाचार मिट जाएगा. चौधरी को बताना चाहिए कि वह चिप अब कहां गई? भ्रष्टाचार क्यूं नहीं मिटा? अलबत्ता, सर्कुलेशन से 2000 के नोट ज़रूर गायब हो गए.

पूरे शो के दौरान वह एक बार भी नहीं बोलता कि मध्यप्रदेश में 15 साल से ज्यादा वक्त से, यूपी में 6 साल से और केन्द्र में 8 साल से बीजेपी की सरकारे हैं.

अगर एक्सप्रेसवे धंसा जिसका पीएम ने कुछ ही दिन पहले उद्घाटन किया था तो जिम्मेदारी किसकी है?

जब पत्रकारिता के इस सफेद- स्याह युग का विश्लेषण किया जाएगा तो उसमें सब कुछ स्याह ही निकलेगा. पत्रकारिता के पतन में आजतक का योगदान कम नहीं लेकिन यह अध्याय इतना स्याह है कि इसे लोग माफ नहीं कर पाएंगे.

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1 Comment

1 Comment

  1. निरंजन

    July 28, 2022 at 4:47 pm

    वंशवाद के तलवे चाटने के आदि हो चुके सड़े लोगों को सुधीर चौधरी का विरोध करना स्वाभाविक है। सुधीर ही नहीं हर चैनल, अखबार वाले पेड न्यूज और विज्ञापन के लिए पैसे वसूल करती है। नोटबन्दी के समय एक चिप वाली अनुमानित खबर और हो सकता है यैसा वाली खबर पर तंज कसना बेवकूफी है। इस खबर से देश की क्या हानि हुई। खैर उनका दोष नहीं। ये कांग्रेस की गुलाम पीढ़ी का असर है

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