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सुख-दुख

केला आहार-नलिका से लेकर पेट की म्यूकस परत तक कोटिंग बना देता है जिससे एसिडिटी दूर होती है!

नाज़िया खान-

आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक एसिड तथा पेप्सिन बनते हैं। जब किसी विकृति के कारण आमाशय से ऊपर आहार-नलिका की तरफ एसिड रिफ्लक्स होता है तो आहार-नली में सूजन और घाव हो जाते हैं। इससे सीने में जलन, पेट में जलन, पेटदर्द, खट्टी डकारें, गैस आदि परेशानियां होती हैं। इसे गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिसीज़ या हार्टबर्न/एसिडिटी के नाम से जाना जाता है। खान-पान की ग़लत आदतें इसका कारण हो सकती हैं। डाइट में कुछ चीज़ें बन्द और कुछ चीज़ें शामिल करके इससे राहत पाई जा सकती है।

ये न करें-

सबसे पहले तो ज़्यादा समय तक भूखे न रहें। यह एसिडिटी का बड़ा कारण है। जब आमाशय के एसिड को कुछ पचाने को नहीं मिलता तो पेट की अंदरूनी म्यूकस की परत को ही पतला करने लगता है।

असमय खाकर न सोएं या लेटें।

तेज़ मिर्च-मसालेदार, फ्राइड, पैकेज्ड, स्पाइसी, स्ट्रीट/जंक फूड, विनेगर, अल्कोहल, चाय-कॉफी, स्मोकिंग, कोल्ड्रिंक से दूरी बना लें।

वे सभी चीज़ें, जिनका पीएच कम होता है, मतलब जो एसिडिक(अम्लीय) होती हैं, उन्हें बिल्कुल सीमित मात्रा में लें, जैसे विनेगर, खट्टे फल, टमाटर, अनानास, अंगूर, साइट्रस फ्रूट्स जैसे नींबू, मौसम्बी, संतरा आदि।

नया धान, कुलथी, उड़द, मसूर की दाल, तिल आदि भी एसिडिटी करते हैं। इन्हें कम लें।

इन चीज़ों को अधिकता में लें-

फल- केला पीएच बैलेंस करता है। इसमें भरपूर पोटेशियम, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर होते हैं। साथ ही यह आहार-नलिका से लेकर पेट की म्यूकस परत तक कोटिंग बना देता है। जिससे एसिडिटी दूर होती है।

इसके अलावा सेब, तरबूज़, अनार और पपीता भी फायदेमंद हैं।

पुराना चावल, गेहूँ, जौ, मूंग, करेला, लौकी, बथुआ, अनार, आँवला, खीरा ककड़ी, परवल, पालक, ब्रोकली, तोरई, गिलकी, मिश्री, उबालकर ठण्डा किया हुआ पानी, शहद, सत्तू, एसिडिटी कम करते हैं।

नारियल पानी, ठंडा दूध, बटरमिल्क/छाछ भी नैचुरल एंटासिड हैं। तुरन्त राहत देते हैं।

एलोवेरा जूस- अगर समस्या अधिक हो तो खाना खाने से पहले और बाद में चार-चार चम्मच एलोवेरा का जूस पी लें। इससे एसिडिटी की समस्या ठीक होती है।

आंवला- इसमे विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। खट्टा होकर भी यह एसिडिटी को नियंत्रित करता है। प्रतिदिन दो बार आंवला के 5-10 ग्राम पाउडर का सेवन करें। यह एसिडिटी को शांत करेगा।

लौंग और तुलसी के पत्ते- इनको धीरे-धीरे चबाने से मितली, उल्टी, एसिडिटी में राहत मिलती है।

घरेलू एसिडिटी रिलीवर ड्रिंक-

दो गिलास पानी में 1 चम्मच सौंफ, 5-6 तुलसी के पत्ते, 2 लौंग, आधा चम्मच ज़ीरा, चौथाई चम्मच अजवाइन, चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर, 2 हरी इलाइची के दाने, 1 चम्मच मिश्री और 1 इंच अदरक का टुकड़ा डालें। एक गिलास रह जाने तक उबालें। छानकर गुनगुना रह जाने पर पी लें।

योगासन- वज्रासन, पश्चिमोत्तासन, पवनमुक्तासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, कपाल-भाति, भुजंगासन, मकरासन, उष्ट्रासन, मलासन, आदि योगासनों का नियमित अभ्यास करें।

ज़रूरी बात- एंटासिड दवाओं की आदत न डालें, अधिक समय और मात्रा में लेने से ये भी साइड इफेक्ट्स में पेट की म्यूकस पतली करके अल्सर करती हैं। दिनचर्या और डाइट नियमित करके पहले घरेलू उपाय अपनाएं।

खाना समय पर खाएं, पेट का एक तिहाई भाग ख़ाली रखें। फिर भी लक्षणों में राहत न मिले तो उचित चिकित्सकीय परामर्श लें।

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