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मजीठिया वेज बोर्ड की लडाई लड़ रहे सभी साथी ऐसा जरूर करें…

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन, भत्ता और प्रमोशन के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे देश भर के पत्रकार साथियों के फोन मेरे पास आ रहे हैं। सवाल चौकाने वाले आ रहे हैं। गाजियाबाद के एक साथी ने मुझे फोन कर बताया कि दैनिक जागरण के कुछ साथियों ने प्रधानमन्त्री कार्यालय में एक शिकायती पत्र दिया था जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी। कोल्हापुर के एक पत्रकार मित्र तो मुझसे मिलने मुम्बई आ गये। उनकी कंपनी मुम्बई में काम करने वालों को 45 दिन साल में छुट्टी देती है जबकि कोल्हापुर में सिर्फ 21 दिन की छुट्टी मिलती है। वेतन भी आधा से कम है। उनके साथ काफी देर समय बिताया।

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन, भत्ता और प्रमोशन के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे देश भर के पत्रकार साथियों के फोन मेरे पास आ रहे हैं। सवाल चौकाने वाले आ रहे हैं। गाजियाबाद के एक साथी ने मुझे फोन कर बताया कि दैनिक जागरण के कुछ साथियों ने प्रधानमन्त्री कार्यालय में एक शिकायती पत्र दिया था जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी। कोल्हापुर के एक पत्रकार मित्र तो मुझसे मिलने मुम्बई आ गये। उनकी कंपनी मुम्बई में काम करने वालों को 45 दिन साल में छुट्टी देती है जबकि कोल्हापुर में सिर्फ 21 दिन की छुट्टी मिलती है। वेतन भी आधा से कम है। उनके साथ काफी देर समय बिताया।

एक साथी ने फोन पर बताया कि मजीठिया में क्लेम करने के लिए उनके एक साथी ने कई लोगों से 15-15 हजार रुपये लिए और अब रोज कहा जा रहा है कि वकील का फोन आयेगा। हरियाणा के साथी ने कहा उन्होंने श्रम विभाग में पत्र लिखा और क्लेम किया मगर श्रम विभाग ने कोई जवाब अब तक नहीं दिया, क्या करूँ।

इन सभी सवालों का मैं उपाय बताता हूँ। जागरण के जो कर्मचारी या देश भर में मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे पत्रकार आरटीआई का सहारा लें। जागरण कर्मचारियों ने जो लेटर प्रधानमन्त्री कार्यालय में भेजा है उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इस पर एक आरटीआई डालकर पीएमओ से जवाब मांगिये। इस पत्र पर किस किस अधिकारी ने क्या क्या और कितने तारीख को रिमार्क लगाया, ये भी पूछिये और सम्बंधित दस्तावेज भी मांगिये। अगर आपका शिकायती पत्र कचरे के डिब्बे में भी फेका गया होगा तो अधिकारी उसे ढूंढ़ने में लग जायेंगे और उसका जवाब जरूर देंगे।

कोल्हापुर के साथी और दूसरे सभी साथी श्रम आयुक्त कार्यालय में आरटीआई डालें और अगर कोई शिकायत की गयी है तो उस पर कार्रवाई का विवरण मांगें। साथ ही अपनी कंपनी का पूरा नाम पता लिखते हुए श्रम आयुक्त कार्यालय से आरटीआई के जरिये कंपनी द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड मामले में जमा कराये गए सभी कागजात, कर्मचारियों की सूची और वर्किंग टाइम, वेतन का विवरण, प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों का विवरण भी मांगें। ये सभी दस्तावेज आपको काम देंगे। आपको ये भी बता दूँ कि जरुरी नहीं है कि कंपनी का ये दस्तावेज आपको मिल ही जाए। बेईमान सूचना अधिकारी ये भी बोल सकते हैं कि दूसरे का डेटा आपको नहीं दिया जा सकता मगर यदि कोई ईमानदार होगा तो जरूर देगा। कंपनी का 2007 से 2010 तक का कुल टर्नओवर भी मांगिये।

अब बात करते हैं पैसे लेने वाले सवाल पर तो आपको बता दूं कि अगर कोई भी आपसे वकील के जरिये क्लेम करने के नाम पर पैसा मांगता है तो बिलकुल मत दीजिये। सिर्फ अपने वकील से बात कीजिये और पहले उन्हें पूरा मामला समझाइये। फिर बहुत जरूरी हो तभी पैसा दीजिये। वो भी सीधे वकील को। पिछले दिनों मेरे पास भी दैनिक भास्कर के एक वरिष्ठ पत्रकार आये थे। मैंने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले की देश भर के पत्रकारो की तरफ से लड़ाई लड़ रहे वकील उमेश शर्मा जी का नंबर उनको दे दिया। आज उमेश सर उनकी पूरी मदद कर रहे हैं।

कुछ और भी सवाल हो तो जरूर पूछें।

शशिकांत सिंह

पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट

मुंबई 

9322411335

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