इन अखबारों और चैनलों ने नहीं दिया अपने कर्मचारियों को बोनस

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के तहत मीडियाकर्मियों का जितना एरियर बना, उसे डकार चुके कई अखबारों के मालिकों ने अब अपनी कई यूनिटों में कर्मचारियों का बोनस का पैसा भी हजम कर लिया और उन्हें एक ढेला तक बोनस के नाम पर नहीं दिया। बोनस न देने वालों में कुछ चैनलों का नाम भी सामने आ रहा है जिनमें टाइम्स नाऊ और इंडिया न्यूज़ भी शामिल है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक टाइम्स नाऊ और जूम ने मुम्बई के अपने कर्मचारियों को इस बार दीपावली पर बोनस नहीं दिया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से खबर है कि यहाँ इंडिया न्यूज़ ने अपने कर्मचारियों को बोनस नहीं दिया।

मजीठिया क्रान्ति : लोकमत के पांच और मीडिया कर्मियों ने लगाया क्लेम

मुंबई : महाराष्ट्र में इन दिनों मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और प्रमोशन मांगने वाले मीडियाकर्मियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मीडियाकर्मी जोश खरोश के साथ अखबार मालिकों के खिलाफ अपने हक़ के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। यहाँ लोकमत के 5 और मीडियाकर्मियों ने रिकवरी क्लेम लगाया है।ये सभी कर्मचारी लोकमत की अकोला यूनिट में कार्यरत हैं। इन पांच कर्मचारियों ने असिस्टेंट लेबर कमिश्नर अकोला के यहाँ 17(1) के तहत रिकवरी क्लेम लगाया है।

मजीठिया क्रांतिकारियों से अपील, हम सभी आरटीआई को हथियार बनाएं

दोस्तों मैं एक बार फिर आप सब से अपील कर रहा हूँ कि आप आरटीआई को हथियार बनाइये। श्रम विभाग के पास अखबार मालिकों द्वारा मंत्रियों से फोन करा कर उन पर दबाव डलवाया जा रहा है। उनके पास मंत्री हैं। हमारे पास आरटीआई है। इसी आरटीआई ने सुरेश कलमाणी को जेल डलवा दिया। शीला …

मुम्बई के दो पत्रकारों ने श्रम आयुक्त कार्यालय में किया ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ (देखें वीडियो)

पत्रकारों की छापेमारी से घबराए अधिकारियों ने गिफ्ट के पैकेट बाहर फेंके, गिफ्ट के पैकेटों का आरटीआई से माँगा गया जवाब, घटनाक्रम हुआ कैमरे में शूट

मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और प्रमोशन की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे मुम्बई के दो पत्रकारों शशिकान्त सिंह और धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने शनिवार को महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त कार्यालय में ऐसा सर्जिकल स्ट्राइक किया कि श्रम अधिकारी भी हक्के बक्के रह गए। ये दोनों पत्रकार काफी दिनों से देख रहे थे कि महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त और मुम्बई शहर कार्यालय में अखबार मालिकान सहित कई दूसरी कंपनी के लोग श्रम अधिकारियों को बड़े बड़े गिफ्ट के पैकेट दे रहें हैं, जो पूरी तरह गलत है। इन दोनो पत्रकारों ने तय किया कि इस मामले का भंडाफोड़ किया जाय।

मजीठिया की जंग : झूठ लिख कर बुरा फंसा डीबी कॉर्प!

‘जिद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाला डीबी कॉर्प अब ‘झूठ बोलो और बुरे फंसो’ के पैटर्न पर काम कर रहा है। मंगलवार को मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय में डी बी कॉर्प की महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख के मजीठिया वेज बोर्ड बोर्ड मामले की सुनवाई थी। लतिका और आलिया ने मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतन और एरियर न मिलने पर 17 (1) के तहत रिकवरी का क्लेम श्रम आयुक्त कार्यालय में किया था।

मजीठिया मामला : मुम्बई के 22 अखबार मालिकों को एफिडेविड देने का निर्देश

पत्रकारों के वेतन, एरियर और प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आज मुम्बई शहर के श्रम उपायुक्त ने एक बड़ा निर्देश जारी कर 22 अखबार मालिकों को नोटिस भेज कर उन्हें 19 अक्टूबर तक एफिडेविड देने को कहा है। ये एफिडेविड 300 रुपये के स्टाम्प पेपर पर देना होगा और इस एफिडेविड में अखबार मालिकों को साफ़ तौर पर ये लिख कर देना पड़ेगा कि उन्होंने अपने सभी कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया दे दिया है। साथ ही ये भी कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार ही वे कर्मचारियों को वेतन दे रहे हैं। अब अगर अखबार मालिकों ने झूठा एफिडेविड दिया और अगर ये झूठ सिद्ध हो गया तो उनके खिलाफ फर्जी एफिडेविड देने का नया मामला दर्ज होगा।

भास्कर को झटके पर झटका, पत्रकार धर्मेंद्र के बाद अब रिसेप्शनिस्ट लतिका के भी ट्रांसफर पर कोर्ट ने लगाई रोक

भारत में ‘ज़िद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाले डीबी कॉर्प को लगातार झटके लग रहे हैं, किंतु भास्कर प्रबंधन है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगने पर अपने प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का मुम्बई से सीकर (राजस्थान) ट्रांसफर कर दिया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह अदालत की शरण में गए और इंडस्ट्रियल कोर्ट ने इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी। इसके बाद अब भास्कर की सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) अक्षता करंगुटकर ने डी बी कॉर्प के मुम्बई के माहिम स्थित कार्यालय में कार्यरत महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण का सोलापुर में ट्रांसफर कर दिया।

भास्कर के पत्रकार ने प्रबंधन को दिया जोरदार झटका, अदालत से ट्रांसफर रुकवाया

मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के कारण भास्कर प्रबंधन ने अपने पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का कर दिया था ट्रांसफर…

मुम्बई के तेज-तर्रार पत्रकारों में से एक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगे जाने पर राजस्थान के सीकर में ट्रांसफर कर दिया था। मुम्बई में दैनिक भास्कर में एंटरटेनमेंट बीट के लिए प्रिंसिपल करेस्पांडेंट पद पर कार्यरत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को भास्कर प्रबंधन ने पहले उन्हें लालच दिया कि कुछ ले-दे कर मामला ख़त्म करो। फिर उन्हें भास्कर की सहायक महाप्रबंधक अक्षता करंगुटकर (कार्मिक) ने धमकी दी, जिसकी शिकायत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने श्रम आयुक्त से की।

मजीठिया मांगने पर जिन साथियों का ट्रांसफर, टर्मिनेशन या निलंबन हुआ, वे अपना विवरण भेजें

….ताकि सुप्रीमकोर्ट के संज्ञान में लाया जा सके… 

दोस्तों, मजीठिया वेज बोर्ड के तहत मीडियाकर्मियों की सुनवाई माननीय सुप्रीमकोर्ट में तेजी से चल रही है। अगर आपने या आपके किसी साथी ने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत लाभ के पाने के लिये 17(1) का रिकवरी क्लेम लेबर विभाग में लगाया है और इस क्लेम को लगाने के बाद आपका या आपके किसी साथी का कंपनी प्रबंधन ने ट्रांसफर, टर्मिनेशन या निलंबन किया है तो आप अपना पूरा विवरण मुझे मेल पर भेजिये ताकि पता चल सके कि कितने लोगों के साथ मीडिया मालिकों ने अन्याय किया है। सभी लोगों का विवरण आने के बाद इसकी सूची बनायी जायेगी और इस ट्रांसफर, टर्मिनेशन या निलंबन के मुद्दे को सबूत के साथ माननीय सुप्रीमकोर्ट में एडवोकेट के जरिये रखा जायेगा। साथ ही माननीय सुप्रीमकोर्ट को बताया जायेगा कि किस तरह मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ  कर्मचारियों को ना देना पड़े, इसके लिये कंपनी प्रबंधन दमन की नीति अपना रही है।

ये क्या, सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश में जागरण के मालिकों को तलब करने का जिक्र ही नहीं!

सुप्रीमकोर्ट के लिखित आदेश से समाचारपत्र कर्मियों में निराशा : माननीय सुप्रीमकोर्ट में 4 अक्टूबर को हुयी मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई के बाद लिखित आदेश कल 6 अक्टूबर को आया। लेकिन इस आदेश में दैनिक जागरण के मालिकों संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता को तलब किए जाने का जिक्र ही नहीं है। न ही इन दोनों का नाम किसी भी संदर्भ में लिया गया है। यानि संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता को अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट में उपस्थित नहीं रहना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट में भास्कर को सबसे ज्यादा नंगा किया गया

शशिकांत सिंह

मंगलवार को मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा नंगा किया गया दैनिक भास्कर को। इस सुनवाई के दौरान सभी सीनियर वकीलों ने दैनिक भास्कर की सच्चाई से माननीय सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया। देश भर के पत्रकारों की मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे सीनियर एडवोकेट उमेश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को विस्तार से बताया कि एक हजार करोड़ से ज्यादा टर्न ओवर की इस कंपनी ने आज तक किसी भी वेज बोर्ड का पालन नहीं किया, चाहे वो पालेकर वेज बोर्ड हो, बछावत हो, मणिसाना वेज बोर्ड हो या फिर मजीठिया वेज बोर्ड।

सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कमिश्नरों को दिया सख्त निर्देश- आरसी काटिये और वेज बोर्ड की सिफारिश लागू कराइए

सुप्रीम कोर्ट से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट…

सभी लेबर कमिश्नरों को अखबार मालिकों की रिकवरी काटने का सख्त आदेश… लेबर कमिश्नरों को आज माननीय सुप्रीमकोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू ना करने पर जमकर लताड़ा और दैनिक जागरण के मालिकों संजय गुप्ता और महेन्द्र मोहन गुप्ता को अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में तलब कर लिया है। साथ ही सभी लेबर कमिश्नरों को सख्त आदेश दिया कि आप इस मामले की रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करा कर इस सिफारिश को अमल में लाइए।

सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

मजीठिया मामला : डीबी कार्प को शोकॉज नोटिस जारी, नहीं चेते तो कटेगी आरसी

महाराष्ट्र से खबर आ रही है कि दैनिक भास्कर और दिव्य मराठी की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प को उपनगर मुंबई सहित महाराष्ट्र के श्रम विभाग ने लताड़ लगायी है। 26 सितंबर को कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच आयोजित बैठक में प्रबंधन की तरफ से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। इस बैठक में कर्मचारियों का पक्ष रखने के लिये महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त कार्यालय ने मजीठिया संघर्ष मंच के अध्यक्ष शशिकांत सिंह को भी आमंत्रित किया था। इस बैठक में जब डी बी कॉर्प की तरफ से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ तो सहायक कामगार आयुक्त नीलांबरी भोषले ने उपायुक्त शिरिन लोखंडे से अग्रिम कदम की चर्चा की। अब महाराष्ट्र के श्रम विभाग ने पुष्टि कर दी है कि डीबी कॉर्प प्रबंधन को शोकॉज नोटिस भेजा गया है।

काश, मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर मीडिया में भी होती सर्जिकल स्ट्राइक!

भारतीय सेना के जांबाज जवानों द्वारा पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की खबर से देश झूम रहा है, नाच रहा है। इसी बीच मुम्बई मिरर में आज धोनी पर बनी फिल्म का रिव्यू पढ़ा। शीर्षक था सर्जिकल स्ट्राइकर। इस रिव्यू ने काफी कुछ सोचने को मजबूर कर दिया। काश हमारे लेबर अधिकारी माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मीडिया के दफ्तरों में भी जाकर मजीठिया वेज बोर्ड का पालन करने पर कागजातों के साथ सर्जिकल स्ट्राइक करते। उन्हें पता चल जाता कि कहाँ कहाँ गड़बड़ी है।

मजीठिया मामला : 38 हजार बकाये का चेक लेकर आये लोकमत प्रबंधक को सहायक कामगार आयुक्त ने लौटाया

मुंबई : लोकमत के अकोला संस्करण से सर्कुलेशन अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुये सुभाष आर तायड़े को सेवानिवृति के बाद भी मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन, एरियर और अंतरिम राहत नहीं मिला तो उन्होंने अकोला के श्रम आयुक्त कार्यालय में 17 (1) के तहत लोकमत प्रबंधन के खिलाफ रिकवरी क्लेम लगा दिया। इस क्लेम की सुनवाई के दौरान लोकमत प्रबंधन 38 हजार रुपये का एक चेक उस कर्मचारी के नाम का लेकर उपस्थित हुआ और दावा किया कि इस कर्मचारी का मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार यही बकाया निकल रहा है।

यूपी के श्रमायुक्त ने जारी किया फार्मेट, मजीठिया का लाभ चाहिए तो इसे जरूर भरें

16 सितंबर को भी हो सकती है सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई…

पत्रकारों और समाचार पत्र कर्मियों के वेतन, एरियर, अंतरिम राहत तथा प्रमोशन के मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की फटकार का उत्तर प्रदेश में असर दिखने लगा है। अपनी खाल बचाने के लिए अब वहां का लेबर डिपार्टमेंट असल जांच करने लगा है। वहीं अखबार मालिकों की शामत आ गयी प्रतीत होती है। गत 23 अगस्त को सुप्रीम कोट॔ की झिड़की के बाद यूपी के श्रमायुक्त ने 27 अगस्त को आदेश जारी किया है, जिसके बाद यूपी के सभी क्षेत्रों के उप/अपर श्रमायुक्तों ने संबंधित जिलों से प्रकाशित अखबारों के प्रबंधनों को छह पृष्ठों का प्रपत्र भेजकर तत्काल पूरी कुंडली तलब कर ली है।

मजीठिया मामले में वकीलों के खिलाफ घोषित वॉकयुद्ध बंद कीजिये प्लीज़

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हम इन दिनों एक तरफ जहाँ खुश होकर सुप्रीम कोर्ट के 23 अगस्त के फैसले की तारीफ़ के कसीदे पढ़ रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं वहीँ पत्रकारों का एक समूह कुछ वकीलों की तारीफ और मैनेजमेंट के इशारे पर दूसरे वकीलों के खिलाफ सोशल मीडिया पर वॉक युद्ध कर रहा है। फेसबुक पर स्टोरी चल रही थी कि अमुक वकील तो सुप्रीम कोर्ट में कुछ नहीं बोले। एक ने ‘हिन्दुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स के रिटायरमेंट हुए लोगों को मिले लाखों रुपये’ पर कमेंट लिखा है कि हिन्दुस्तान के कर्मचारियों को जितना पैसा बताया गया,  उतना नहीं मिला। यानि सीधे सीधे कहें तो आरोप हिन्दुस्तान टाइम्स कर्मचारियों के वकील उमेश शर्मा जी पर लगा दिया। साथ ही मेरी लेखनी पर भी।

सुप्रीम कोर्ट की डांट-फटकार और वारंट के बाद राइट टाइम हुआ श्रम विभाग, सुनिए भोपाल का हाल

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 23 अगस्त को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश के पांच कामगार आयुक्तों को लताड़ लगाने और वारंट जारी करने के बाद देश भर के श्रम विभाग के अधिकारी राइट टाइम होते दिख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से प्रिंट मीडिया के पत्रकारों में ख़ुशी की लहर है. भोपाल में श्रम आयुक्त कार्यालय ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में बहुत तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. इस तेजी के लिए इस विभाग का नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज होना चाहिए.

हिन्दुस्तान टाइम्स के टर्मिनेट कर्मचारियों ने किया 65-65 लाख का रिकवरी क्लेम

प्रबंधन इस कर्मचारी को मनाने में जुटा… एक दर्जन से ज्यादा रिटायर कर्मचारी बनवा रहे हैं क्लेम : मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट में हिन्दुस्तान टाईम्स नयी दिल्ली प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दायर करने वाले 3 टर्मिनेट कर्मचारियों में दो ने अपना वास्तविक हिसाब बनवाकर लगभग 65-65 लाख रुपये का रिकवरी क्लेम श्रम आयुक्त के यहाँ किया है। एक अन्य टर्मिनेट कर्मचारी ने अपना फुल एंड फाइनल हिसाब कंपनी से ले लिया। इस 65 लाख के क्लेम में अंतरिम, एरियर और ब्याज भी शामिल है। लगभग एक दर्जन सेवानिवृत कर्मचारी अपना रिकवरी क्लेम करने की तैयारी कर चुके हैं जिनमे प्रत्येक 50-50 लाख का क्लेम करने जा रहे हैं।

जानिये मुम्बई के किस समाचार पत्र में कितने कर्मचारी काम करते हैं

मिड डे में काम करते हैं सबसे ज्यादा 432 कर्मचारी, प्रातःकाल तथा आपला महानगर निकलता है सिर्फ 8 कर्मचारियों से, आर टीआई से हुआ खुलासा

मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने की सख्ती के बाद मुम्बई के समाचार पत्रों में कर्मचारियों की संख्या को लेकर खूब उलटफेर हो रहा है। यहाँ श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा किये गए सर्वे का ताजा आंकड़ा तो यही संकेत दे रहे हैं। जानिये मुम्बई के कौन से समाचार पत्र में कितने कर्मचारी काम करते हैं और उनमे कितने परमानेंट और कितने ठेका पर काम करने वाले कर्मचारी हैं। ये सारी सूचना मुम्बई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने आरटीआई के जरिये हासिल किया है।

मजीठिया मामले में प्रबंधन से मोटी फीस लेकर बिना तैयारी के सुनवाई में आ रहे वकील

मुम्बई में डीबी कार्प के खिलाफ मजीठिया मामले में दैनिक भास्कर के प्रिंसपल करस्पांडेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा 17 (1) के तहत दायर की गयी शिकायत के मामले में शनिवार को श्रम आयुक्त कार्यालय मुम्बई शहर में सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान प्रबंधन की तरफ से अधिवक्ता बिना किसी कागजात के चले आये और ऐसा उन्होंने दूसरी बार किया। इस मामले में अब तक तीन तारीख लग चुकी है लेकिन भास्कर प्रबंधन अब तक कोई कागजात उपस्थित नहीं कर पाया और न ही वकील की तरफ से वकालतनामा ही दाखिल किया गया है। इस पर सहायक कामगार आयुक्त सीए राउत ने कड़ा एतराज जताया।

कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़क रहा है अमर उजाला!

नोएडा से एक साथी ने सूचना दी है कि अमर उजाला प्रबंधन अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी व बकाया तो दे नहीं रहा है ऊपर से जले पर नमक छिड़क रहा है। इस साथी ने सूचना दी है कि यहाँ अमर उजाला के नंबर वन होने का जश्न मनाया गया लेकिन अमर उजाला के नंबर 1 होने का जश्न सिर्फ बड़े लोगों ने ही जोर शोर से मनाया। संपादक, जनरल मैनेजर, मैनेजर जैसे खास लोग 10-12 दिन के विदेश टूर पर भेजे गए और वहां से मौज मस्ती करके लौट आए हैं।

मजीठिया मामले में सभी साथी आरटीआई के जरिये स्टेटस रिपोर्ट, जरूरी कागजात और ट्रांसफर टर्मिनेशन के नियम मंगाएं

दोस्तों, मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तिथि 23 अगस्त तय की है। इस दिन माननीय सुप्रीम कोर्ट में उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों के श्रम आयुक्तों को तलब किया गया है। उसके बाद दूसरे राज्यों के श्रमायुक्त सुप्रीम कोर्ट में तलब होंगे। हमारे पास एक महीने से ज्यादा समय है। सभी साथी श्रम आयुक्त कार्यालय में एक आरटीआई लगायें और उसमें निवेदन करें कि इस कार्यालय द्वारा माननीय सुप्रीमकोर्ट में भेजी गयी मजीठिया वेजबोर्ड से जुडी स्टेटस रिपोर्ट की पूरी प्रमाणित प्रति दें। इसके साथ ही आप अपनी कंपनी द्वारा जमा कराये गए कर्मचारियों की पूरी सूची, अन्य दस्तावेज भी मंगाएं।

हे भड़ास वालों, कभी ठेके पर काम कर रहे मीडियाकर्मियों के बारे में भी बात कर लो

भड़ास के एक पाठक अभिषेक सिंह जी ने एक मेल भेजा है। इसमें पत्रकार बंधु अभिषेक ने बहुत अच्छा सवाल उठाया है जिसके लिए उनको धन्यवाद। अभिषेक जी ने इस मेल में लिखा है- ”आज मजीठिया को हव्वा बनाया जा रहा है। आज जितने पत्रकार पेरोल पर हैं? उससे कहीं ज्यादा ऐसे पत्रकार हैं जो पक्के नहीं हैं यानि वो ठेका पर हैं। ऐसे पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ तो मिलेगा नहीं। भड़ास पढ़ने के बाद दिल में एक ठसक सी हो जाती है क़ि हम पत्रकार हैं की नहीं।”

मजीठिया मांगा तो ‘पत्रिका’ ने कर दिया दामाद की दुकान पर ट्रांसफर, बाद में किया टर्मिनेट

भोपाल : देश में हिंदी के नामचीन अखबारो में एक राजस्थान पत्रिका में मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगना भोपाल के एक कर्मचारी के मानसिक तनाव का कारण बन गया है। इस कर्मचारी ने राजस्थान पत्रिका के प्रबंधन के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और भत्ते न देने पर माननीय सुप्रीमकोर्ट में शिकायत की थी। भोपाल के महेंद्र नारोलिया का आरोप है कि उन्होंने सुप्रीमकोर्ट में शिकायत करने के कारण उनका ट्रांसफर कोलकाता कर दिया गया। वह कोलकाता पहुंचे तो उन्हें राजस्थान पत्रिका के मालिक के दामाद की दुकान में काम पर लगा दिया गया। नरेंद्र का कहना है कि उनका 4 हजार रुपये वेतन भी कम कर दिया गया जिसके कारण वह मानसिक रूप से बीमार हो गए और वहां से वापस लौट आए।

मजीठिया : सुप्रीम कोर्ट ने सही नब्ज पकड़ा है, यूपी-उत्तराखंड वालों के लिए आखिरी मौका, जानिए कैसे किया जाता है क्लेम

शशिकांत सिंह

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 19 जुलाई को माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश से देश भर के बेईमान श्रम आयुक्तों का उल्टा लटकना तय है। कितनी बार श्रम आयुक्तों को माननीय सुप्रीमकोर्ट ने साफ़ निर्देश दिया था कि आप स्टेटस रिपोर्ट भेजें। स्टेटस रिपोर्ट भेजी भी गयी श्रम आयुक्त कार्यालयों द्वारा लेकिन वही ढाक के तीन पात। दो-दो बार रिपोर्ट भेजी गयी लेकिन हर बार आंकड़ों का खेल किया गया। हर बार उल्टे आंकड़े दिए गए।

टाइम्स समूह ने नहीं सौपा श्रम अधिकारी को कर्मचारियों की सूची और एरियर का डिटेल

शशिकांत सिंह

हो सकती है कानूनी कार्यवाई, आरटीआई से हुआ खुलासा…

मुंबई : देश के नंबर वन समाचार पत्र समूह बेनेट कोलमैन एन्ड कंपनी लिमिटेड अपने कर्मचारियों का ना सिर्फ जमकर शोसण कर रहा है बल्कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को भी ठेंगे पर रखता है। इस समूह के समाचार पत्रों टाइम्स आफ इंडिया, मुम्बई मिरर, नवभारत टाइम्स और महाराष्ट्र टाइम्स में काम करने वाले हजारों लोग भले गर्व से कहते हों मैं टाइम्स समूह का कर्मचारी हूँ मगर इन्हें शायद ये जानकार काफी दुःख पहुंचेगा कि इस कंपनी ने श्रम अधिकारी को अपने कर्मचारियों की लिस्ट ही नहीं सौंपी है।

चुल्लू भर पानी में डूब मरो पत्रकार संघटनों के पदाधिकारियों

सुबह सुबह सोकर उठने के बाद हमेशा की तरह वाट्सअप और मेल चेक किया तो मुम्बई के एक पत्रकार संघ का मेल था फोटो के साथ। न्यूज़ थी कि इस पत्रकार संघ ने किया वृक्षारोपण। इस अवसर पर कई पुलिस वाले और अधिकारी भी मौजूद थे। सही कहूँ तो ऐसी कोई प्रेस रिलीज देखता हूँ तो माथा भन्ना जाता है। आज देश भर में पत्रकारों के ऊपर जुल्म हो रहे हैं। किसी पत्रकार से जबरी रिजाइन माँगा जा रहा है तो प्रशांत जैसा जुझारू हमारा साथी आत्महत्या की कोशिश में नासिक के अस्पताल में पड़ा है। किसी पत्रकार का ट्रांसफर हो रहा है। किसी को मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतन मांगने पर प्रबंधन गुंडों से धमका रहा है। ऐसे में देश भर में कुछ पत्रकार संघटनो और यूनियनों को छोड़कर बाकि कागजी शेर पुलिस और नेताओं के तलवे चाट रहे हैं।

डीबी कार्प के साथियों, मत दो इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करो

जिद करो दुनिया बदलो का नारा देने वाले डीबी कार्प के देश भर के पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों के फोन मेरे पास आ रहे हैं। सबका एक ही रोना है- टर्मिनेशन या ट्रांसफर। रात को 12 बजे तक  जितने भी फोन आ रहे उनमें सबसे ज्यादा डीबी कोर्प के कर्मचारियो और पत्रकारों के फोन होते हैं। मैं खुद पत्रकारों को काल बैक करता हूँ ताकि मेरे साथियों का पैसा ना कटे। आप को बता दूं मालिक लोग अभी आपको और ज्यादा परेशान करेंगे। डरिये नहीं। कुछ साथियों ने बताया कि 21 मई 2016 का डेट डलवाकर आज साइन कराया गया है।

काश, मोदी जी ‘मन की बात’ में पत्रकारों के मन की बात ‘मजीठिया’ की भी चर्चा कर देते!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लाकर और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अपनी पीठ थपथपाने का प्रयास कर रहे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने में सबसे ज्यादा हाथ पत्रकारों का है। साफ़ तौर पर कहें तो प्रधानमन्त्री बनने से पहले मोदी जी ने पत्रकारिता जगत में खूब भौकाल टाइट किया था लेकिन अब वे पत्रकारो के लिए यूज एन्ड थ्रो की नीति अपना रहे हैं।

मजीठिया वेज बोर्ड न देने के लिए अपने कर्मियों को प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर रहा राजस्थान पत्रिका प्रबंधन!

वाचमैनों की तरह घूम घूम कर नौकरी करेंगे पत्रकार…. मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतन, भत्ते और सुविधाएं न देना पड़े इसके लिए अखबार मालिक इस हद तक जा रहे हैं कि अपने ही कर्मचारियों को प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर दे रहे हैं और ये कर्मचारी बेचारे बिलकुल एक गुलाम की तरह हंटर के खौफ से प्लेसमेंट एजेंसी में काम करने को मजबूर हैं। इस तरह का मामला सामने आया है देश के एक बड़े समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सभी मीडियाकर्मी इस पत्र को भरकर चीफ सेक्रेटरी और श्रम आयुक्त को जरूर भेजें

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सभी पत्रकार और गैर पत्रकार बंधु इस पत्र को भरकर चीफ सेक्रेटरी और श्रम आयुक्त को जरूर भेजें। इस पत्र में सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले का उल्लेख किया गया है। इस पत्र से संबंधित अधिकारीर दबाव में तो आएंगे ही, सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूत होगा। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के पत्रकारों और गैर पत्रकारों की सुप्रीमकोर्ट में लडाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने इस पत्र को जारी कर अपील  किया है कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और भत्ते पाने के इच्छुक पत्रकार और गैर पत्रकार इस पत्र को भरकर राज्य  के चीफ सेक्रेटरी और श्रम आयुक्त कार्यालय को जरूर भेजें।

मजीठिया वेज बोर्ड की लडाई लड़ रहे सभी साथी ऐसा जरूर करें…

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन, भत्ता और प्रमोशन के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे देश भर के पत्रकार साथियों के फोन मेरे पास आ रहे हैं। सवाल चौकाने वाले आ रहे हैं। गाजियाबाद के एक साथी ने मुझे फोन कर बताया कि दैनिक जागरण के कुछ साथियों ने प्रधानमन्त्री कार्यालय में एक शिकायती पत्र दिया था जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी। कोल्हापुर के एक पत्रकार मित्र तो मुझसे मिलने मुम्बई आ गये। उनकी कंपनी मुम्बई में काम करने वालों को 45 दिन साल में छुट्टी देती है जबकि कोल्हापुर में सिर्फ 21 दिन की छुट्टी मिलती है। वेतन भी आधा से कम है। उनके साथ काफी देर समय बिताया।

पत्रकार बंधु जान लें.. आपकी छुट्टी और ड्यूटी टाइम क्या होनी चाहिए

शशिकांत सिंह

कल एक मराठी दैनिक के पत्रकार भाई का फोन आया। उन्होंने बताया प्रबंधन उनसे 9 घंटे ड्यूटी कराता है। क्या करना चाहिए। ऐसे तमाम सवाल पूछे जाते हैं। कुछ के जवाब तुरंत देता हूँ लेकिन कुछ के लिए डॉटा खोजना पड़ता है। दोस्तों आपको बता दें कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट का चैप्टर 3 साफ़ कहता है कि दिन में 6 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं ली जा सकती और चार घंटे से ज्यादा लगातार काम नहीं कराया जा सकता। दूसरी चीज, चार घंटे के बाद कर्मचारी को 30 मिनट का रेस्ट मिलना चाहिए।

मुंबई में नवभारत का सबसे ज्यादा सर्कुलेशन, हमारा महानगर दूसरे स्थान पर!

प्रातःकाल तीसरे, जागरूक टाइम्स चौथे, नवभारत टाइम्स पांचवे और यशोभूमि छठवें स्थान पर

आरटीआई से हुआ खुलासा, अंग्रेजी में टाइम्स आफ इंडिया और मराठी में महाराष्ट्र टाइम्स टॉप पर

पत्रकारो और गैर पत्रकारों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड को अमल में लाने के लिए माननीय सुप्रींम कोर्ट के आदेश के बाद  भले समाचार पत्र मालिक घाटे का दुखड़ा रो रहे हैं वही भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण के तहत कार्यरत डी ए वी पी ने  मुंबई के निर्भीक पत्रकार और और आर टी आई कार्यकर्त्ता शशिकांत सिंह को मुंबई के हिंदी समाचार पत्रो के बारे में जो आर टी आई के तहत मांगे जाने पर जानकारी उपलब्ध करायी है वह चौकाने वाली है। इस सूचना के मुताबिक मुंबई में हिंदी में नवभारत का सबसे ज्यादा सर्कुलेशन है, हमारा महानगर दूसरे स्थान पर, प्रातःकाल तीसरे, जागरूक टाइम्स चौथे, नवभारत टाइम्स पांचवे स्थान पर और यशोभूमि छठवें स्थान पर है। सरकारी विज्ञापन रिपोर्ट के मुताबिक़ ये सभी हिंदी के समाचार पत्र बड़े श्रेणी के समाचार पत्र हैं।

महाराष्ट्र में अख़बार मालिकों को भेजा जा रहा है कारण बताओ नोटिस, होंगे मुक़दमे

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए गठित मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र से एक अच्छी खबर आने की पुष्टि बीयूजे महासचिव एमजे पांडे और इंद्रकुमार जैन ने की है। महाराष्ट्र सरकार के श्रम विभाग की ओर से मजीठिया वेतन आयोग पर अमल न करने वाले अखबार मालिकों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके खिलाफ मुक़दमे दायर करने की प्रक्रिया भी की जा रही है।

महाराष्ट्र में दिव्य मराठी ले रहा है जबरी त्यागपत्र, गुजरात में दिव्य भास्कर भरवा रहा है 20 जे फार्म

महाराष्ट्र से खबर आ रही है कि दैनिक भास्कर समूह की कंपनी डी बी कोर्प का प्रबंधन अपने मराठी दैनिक दिव्य मराठी के औरंगाबाद और नासिक आफिसों में कार्यरत और गुजरात से प्रकाशित दिव्य भास्कर में कार्यरत कर्मचारियों से जबरी त्यागपत्र ले रहा है. साथ ही इनसे फ़ार्म 20 जे साइन करा रहा है. औरंगाबाद में और नासिक में दिव्य मराठी के एक कर्मचारी ने फोन पर बताया कि उससे प्रबंधन जबरी रिजाइन मांग रहा है. ऐसा न करने पर दूर कहीं ट्रांसफर या टर्मिनेट की धमकी दे रहा है.

श्री अम्बिका प्रिंटर्स से 442 कर्मचारियों के नाम गायब, आरटीआई से हुआ खुलासा

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए गठित मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन, भत्ते और प्रमोशन कर्मचारियों को न देना पड़े इसके लिए महाराष्ट्र में समाचार प्रबंधन कंपनिया तरह-तरह से दांव खेल रही हैं। कुछ कम्पनियों में परमानेंट कर्मचारियों को ठेका पर लाया जा रहा है वहीँ जबरी रिजाइन लिखवाकर छुट्टी भी की जा रही है। ताजा मामला मुम्बई के श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशन्स में सामने आया है जहाँ कंपनी प्रबंधन ने अपने 442 कर्मचारियों का नाम हटा दिया है। यानी ये कर्मचारी काम भले इस कंपनी में करें लेकिन वे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और भत्ता नहीं पा सकेंगे। मुम्बई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने आरटीआई के जरिये ये खुलासा किया है।

मजीठिया वेज बोर्ड चाहिए तो पत्रकार संघों / यूनियनों की नींद उड़ा दो

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन, भत्ते व प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड को अमल में लाने सम्बंधित माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पांच जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रेषित किया जाना है मगर अभी भी देश भर के पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लगातार फोन आ रहे हैं कि उनके समाचार पत्र कार्यालय में और ब्यूरो में श्रम आयुक्त कार्यालय की टीम सर्वे करने नहीं पहुंची। कुछ पत्रकारो का फोन था कि टीम तो पहुंची मगर किसी पत्रकार का स्टेटमेंट नहीं लिया गया।

मजीठिया मामले में पत्रकार और गैर पत्रकार श्रम आयुक्त कार्यालय में अपना स्टेटमेंट फार्म 48 घंटे में जरूर भरें

मुंबई : पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन, भत्ते तथा प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर में सर्वे का काम चल रहा है। इस सर्वे के दौरान भी श्रम अधिकारियों की आँखों में प्रबंधन धूल झोंक रहा है। कई जगह से ऐसी शिकायते आ रही हैं कि सर्वे के दौरान पत्रकारों का या मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे पत्रकारों का पक्ष श्रम अधिकारी नहीं ले रहे हैं। ताजा उदाहरण एक देता हूँ। श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशन्स लालबाग के मुम्बई कार्यालय में मजीठिया जाँच टीम पहुंची तो वहाँ बता दिया गया कि उनके यहाँ सुबह का समाचार पत्र छपता है इसलिए पत्रकार रात को काम पर आते हैं। इस कंपनी ने अपने लोगों का स्टेटमेंट श्रम अधिकारियो से दिला दिया और रट्टू तोते की तरह सबने वही लिखित स्टेटमेंट दिया जो प्रबंधन चाहता था।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में बड़ी कार्रवाई, दैनिक भास्कर और अम्बिका प्रिंटर्स पब्लिकेशन्स को 17 (1) से जुड़ी नोटिस जारी

मुम्बई : देश भर के प्रिंट मीडिया के पत्रकारों के लिए उम्मीद की किरण बने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय ने एक और कदम उठाया है। रिकवरी से जुड़े मामले में श्रम आयुक्त कार्यालय ने दैनिक भास्कर समाचार-पत्र समूह की प्रबंधन कंपनी डी बी कॅार्प के मुम्बई कार्यालय को तथा श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशन्स को उनके कर्मचारियों की शिकायत पर वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17 (1) के मामले में नोटिस भेजा है।

महाराष्ट्र सरकार ने जारी किया वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के तहत 17(1) और 17(2) की अधिसूचना और अधिकारियों की सूची

पत्रकार कर सकते हैं मजिठिया मामले में क्लेम

महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर आ रही है। पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन और भत्ता तथा प्रमोशन मामले से जुड़े मजिठिया वेज बोर्ड मामले के लिये महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के 17 (1) और 17 (2) के तहत  महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारियों का वर्गीकरण करते हुये अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के तहत समिति बनाने का जो आदेश प्राप्त हुआ था उसमें अधिकारियों का दो तरह से वर्गीकरण किया गया है। पहले वर्ग में अधिकारियों का वर्गीकरण है और दूसरे वर्ग में उनके कार्य क्षेत्र के बारे में बताया गया है। अब जो भी पत्रकार या गैर पत्रकार मजिठिया वेज बोर्ड के मुताबिक अपना एरियर, वेतन, सुविधायें आदि चाहता है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों के यहां क्लेम करना पड़ेगा।

महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजी पत्रकार हित की आवाज, अखबार मालिकों को मजीठिया देने के लिए किया जाएगा मजबूर

मुंबई : सालों से चल रहे मीडिया समूहों के पत्रकारों के अधिकार और उनके वेतन तथा भत्ते को लेकर आज महाराष्ट्र विधानसभा से जोर-शोर से आवाज बुलंद की गई। पत्रकारों को मजीठिया आयोग के तहत वेतन और भत्ते दिये जायें इसके लिए सभी दलों के नेताओं ने अपनी सहमति दर्ज कराई। करीब आधा घंटे चले विचार-विमर्श के बाद राज्य के श्रम मंत्री प्रकाश मेहता ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही एक बड़ी बैठक बुलाएंगे और उसमें पत्रकारों के हितों को लेकर उचित निर्णय लिया जाएगा।

हत्या की स्टोरी कवर करते समय कैमरामेन की हार्टअटैक से मौत

ठाणे। हत्याकांड की रिपोर्टिंग के लिए गए समाचार चैनल के कैमरामैन रतन राधेश्याम भौमिक की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गयी है. भौमिक कल सुबह कासर वडवली हत्याकांड का कवरेज करने सिविल अस्पताल में गए. उसी समय सुबह करीब पौने नौ बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा.

पत्रकार हेमंत राजपूत को दैनिक दिव्य मराठी के प्रबंधन से खतरा! मेल भेजकर किया आगाह

मजिठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में प्रबंधन को धूल चटा देने वाले दैनिक दिव्य मराठी के औरंगाबाद में कार्यरत जुझारू पत्रकार हेमंत राजपूत ने एक पत्र मेल के जरिये आज मुझे भेजा। पत्र में हेमंत ने अपने उपर खतरे का अंदेशा जताया है। इस पत्र को पढ़ने के बाद हेमंत के हौसले को सलाम करता हूं। हेमन्त की कहानी किसी को भी इनके हौसले को सलाम करने को मजबूर कर देगी कि किस तरह अदने से हेमंत ने पूरे डीबी कार्प की चूल हिला दी है।

शर्मनाक : उत्तर प्रदेश सरकार ने मुंबई के मराठी दैनिक में प्रकाशित कराया यह घटिया विज्ञापन

मुंबई के एक मराठी दैनिक लोकमत में ७ फरवरी को प्रकाशित उत्तर प्रदेश सरकार का एक सरकारी विज्ञापन मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीयों को काफी चुभ रहा है। इस मराठी दैनिक में दिये विज्ञापन में उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों से यूपी आने का आग्रह किया है और आग्रह के लिये जो विज्ञापन तैयार कराया गया है उसमें एक फेरीवाले को दिखाया गया है जो गुलाब जामुन बेच रहा है। इस विज्ञापन में स्लोगन दिया गया है ‘गुलाब जामुन खाईयेगा, चासनी भी मत छोड़ियेगा, यूपी जरूर आईयेगा’।

मजीठिया मामले में फर्जी रिपोर्ट तैयार करने पर मुंबई के श्रम आयुक्त की होगी लोकायुक्त से शिकायत

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय को फर्जी रिपोर्ट भेजे जाने के मामले में मुंबई के पत्रकार शशिकांत सिंह ने श्रम आयुक्त को एक पत्र लिखकर साफ शब्दों में आग्रह किया है कि वे इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की कृपा करें और एक सप्ताह के अंदर मुझे सूचित करें अन्यथा लोकायुक्त से शिकायत की जायेगी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय से भी गुहार लगाई जायेगी।