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उत्तर प्रदेश

इलाहाबाद के नवाबगंज इलाके में ताबड़तोड़ बढ़े अपराध, पुलिस की भूमिका संदिग्ध

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इलाहाबाद। कानून व्यवस्था के पैरोकार और शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों को गंगापार के नवाबगंज इलाके में चरम पर पहुंच चुके अपराध पर ध्यान देना होगा। हालात यह हैं कि इलाकाई लोगों का गुस्सा चरम पर है। यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। आए दिन प्रदर्शन और राजमार्ग पर चक्काजाम हो रहा है। सत्ताधारी नेता, पुलिस अफसर और अपराधियों की साठगांठ के आरोप खुलेआम लगने शुरू हो गए हैं। सूबे में जंगलराज होने की बात पर जिसे ऐतराज हो उसे यहां के केवल एक महीने के भीतर हुए ताबड़तोड़ अपराध और उसमें पुलिस की संदिग्ध भूमिका और प्रशासन के उदासीन रवैये को एकबार जरूर देख लेना चाहिए।

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इलाहाबाद। कानून व्यवस्था के पैरोकार और शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों को गंगापार के नवाबगंज इलाके में चरम पर पहुंच चुके अपराध पर ध्यान देना होगा। हालात यह हैं कि इलाकाई लोगों का गुस्सा चरम पर है। यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। आए दिन प्रदर्शन और राजमार्ग पर चक्काजाम हो रहा है। सत्ताधारी नेता, पुलिस अफसर और अपराधियों की साठगांठ के आरोप खुलेआम लगने शुरू हो गए हैं। सूबे में जंगलराज होने की बात पर जिसे ऐतराज हो उसे यहां के केवल एक महीने के भीतर हुए ताबड़तोड़ अपराध और उसमें पुलिस की संदिग्ध भूमिका और प्रशासन के उदासीन रवैये को एकबार जरूर देख लेना चाहिए।

हाल में प्रमुख वारदातों पर एक नजर

02 जून- लखनऊ-इलाहाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कौडि़हार चैराहे पर जहां पुलिस की पिकेट ड्यूटी हमेशा लगती है, वहां संतोष यादव नामक दुकानदार और उसके बेटे को दबंगों ने जमकर पिटाई करने के बाद गोली मारी। बाजार में दहशत। विरोध में बंद रहीं दुकानें।   

13 जुलाई- भगौतीपुर में दलित युवक बजरंगी को मुफ्त में मजदूरी न करने पर उसी गांव के दबंगों ने पहले पेड़ पर उल्टा लटका कर लाठियों से पीट-पीट कर अधमरा किया फिर उसे जिंदा जमीन पर दफनाने की कोशिश की गई। उसकी मड़ही में तोड़फोड़। पुलिस में शिकायत करने पर परिजनों को शहर से अगवा करने की कोशिश। 

31 जुलाई को मेंडारा में वर्चस्व को लेकर दो गुटों के बीच हुई फायरिंग में अनूप नामक दलित युवक की मौत।

01 अगस्त- कौडि़हार के कछार स्थित करीमुद्दीपुर में दबंगों ने दो सगे भाइयों समेत चार लोगों को गोली मार दी। चौथे युवक अंगद यादव को तो उस समय गोली मारी गई जब गांव में पुलिस तैनात थी।
 
03 अगस्त- लालगोपालगंज में मस्जिद के सामने दलित जाति के ही तीन युवकों को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया।

खास बात यह है कि दिनदहाड़े हुयी इन सभी गंभीर आपराधिक वारदातों को पुलिस ने काफी अनमने ढंग से लिया। अपराधियों की गिरफ्तारी को कौन कहे, भुक्तभोगी को फटकार कर भगाने से लेकर एफआईआर तक दर्ज करने में पुलिस ने काफी हीलाहवाली की। इसमें कोई शक नहीं कि स्थानीय पुलिस कई मामले में उल्टे आरोपियों की ही मदद करते नजर आयी। अफसरों से मिलकर शिकायत करने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं की गई। ऐसे में लोगों का गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक था।

तीन अगस्त को लखनऊ-इलाहाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग कौडि़हार चैराहे पर गुस्साए हजारों ग्रामीणों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। एसपी गंगापार शफीक अहमद, क्षेत्रीय विधायक अंसार अहमद पर आरोपियों को मदद करने काSSP आरोप लगाते हुए दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चार जून को नवाबगंज थाने आए एसएसपी दीपक कुमार ने इलाके के लोगों से मीटिंग कर क्षेत्र में बढ़ते गंभीर आपराधिक वारदातों के बारे में पूछताछ की। मातहत पुलिसकर्मियों को साथ लेकर कछारी इलाके का दौरा भी किया। यहां के एक दर्जन से ज्यादा भुक्तभोगी परिवार बेसब्री से इंसाफ मिलने इंतजार कर रहे हैं। सुन रहे हैं ना सीएम महोदय, डीजीपी साहब और कानून व्यवस्था के पैरोकार!

 

इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार शिवाशंकर पांडेय। लेखक दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान आदि अखबारों में कई साल कार्य कर चुके हैं। संपर्कः मो-9565694757, ईमेलः [email protected] 

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