स्टार वालों के लिए नए सीरियल का आइडिया- ”क्यूंकि वह अपनी ही बेटी की सास कैसे बनती!”

Sanjaya Kumar Singh : स्टार टीवी और ऐसे दूसरे विदेशी चैनलों के भारत आने का विरोध करने वालों का सबसे मजबूत तर्क था – इससे भारतीय संस्कृति खराब होगी। चैनल आया, संस्कृति क्या खराब होती चैनल का चाल चलन और रूप रंग ही बदल गया। किसी को अनुमान नहीं रहा होगा कि भारतीय संस्कृति को खराब करने का आरोप जिस चैनल पर लगाया जा रहा है उसके कर्ता-धर्ता के जरिए भारतीय संस्कृति का छिपा हुआ रंग-रूप इस तरह दिख जाएगा।

शीना और इंद्राणी

ना मुखर्जी साब के बेटे को अपनी मौसी या आधी या सौतेली बहन से प्रेम होता ना मामला खुलता। अब भाई लोग मौसी से प्रेम करेंगे और संस्कृति की बात करेंगे तो कितने दिन गंदगी छिपा लोगे। बदबू तो आएगी ही। संस्कृति रक्षक पीटर मुखर्जी के हिन्दुत्व की छानबीन ना करें नहीं तो बिहार यूपी के भी उदाहरण मिल जाएंगे।

अभी तक की कहानी के अनुसार हत्या हुई, “क्यूंकि वह अपनी ही बेटी की सास कैसे बनती”। स्टार पर आने वाला नया सीरियल हो सकता है।

और हां…

सावधानी हटी दुर्घटना घटी
प्रेम में चूक – बेटा दामाद बना।

जनसत्ता अखबार में लंबे समय तक काम कर चुके और इन दिनों बतौर उद्यमी सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.


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