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इस्तीफा देने को मजबूर करने पर मीडियाकर्मी ने भास्कर प्रबंधन की लेबर आफिस में शिकायत की!

अन्यथा पेमेंट और ग्रेच्यूटी रोकने की धमकी देता है…

जिद से दुनिया बदलने वाले दैनिक भास्कर के बिलासपुर प्रबंधन द्वारा एक मीडियाकर्मी से जबरन इस्तीफा लेने का केस सामने आया है। यह हम उस शिकायत पत्र के आधार पर कह रहे हैं जो सहायक श्रमायुक्त, बिलासपुर को पीड़ित द्वारा दिया गया है। इस शिकायत पर सहायक श्रमायुक्त कार्यालय से जवाब तलब हेतु नोटिस भी जारी किया गया है।

अन्यथा पेमेंट और ग्रेच्यूटी रोकने की धमकी देता है…

जिद से दुनिया बदलने वाले दैनिक भास्कर के बिलासपुर प्रबंधन द्वारा एक मीडियाकर्मी से जबरन इस्तीफा लेने का केस सामने आया है। यह हम उस शिकायत पत्र के आधार पर कह रहे हैं जो सहायक श्रमायुक्त, बिलासपुर को पीड़ित द्वारा दिया गया है। इस शिकायत पर सहायक श्रमायुक्त कार्यालय से जवाब तलब हेतु नोटिस भी जारी किया गया है।

क्या है शिकायती पत्र में…

मैं अमित कश्यप पिता दयाराम कश्यप, 16 सितंबर 2008 से दैनिक भास्कर, बिलासपुर में कार्यरत हूं। 21 फ़रवरी 2017 को यकायक स्थानीय यूनिट हेड अभिक सूर और एच.आर. हेड सुबोध पंडा द्वारा केबिन में बुलाकर नौकरी से इस्तीफा देने बोला गया। जिस पर असहमति जताने पर मेरी पेमेंट और ग्रेजुएटी रोक देने की धमकी दी गई। जिस दबाव के चलते मैंने इस्तीफ़ा दिया है। अतः महोदय से निवेदन है कि प्रबंधन को आदेशित कर मुझे मेरी नौकरी वापस दिलवायें। अथवा नौ साल का मजीठिया वेज बोर्ड के तहत रकम व अन्य सुविधायें दिलवाने की कृपा करें।

अब जो बड़ा सवाल मुंह बायें खड़ा है वो यह कि सर्वोच्च न्यायालय के मुताबिक मीडिया मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड की जानकारी नहीं थी। तो फिर यह छंटाई किस वजह से? या फिर यह समझा जाये कि कर्मचारी कमजोर कड़ी होता है शायद इसलिये इन्साफ का पलड़ा मालिकों की तरफ झुक गया? खैर हकीकत जो भी हो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मजीठिया वेज बोर्ड का खतरा मंडराता देख ही अमित जैसे सैंकड़ों पत्रकारों को घर बिठाया गया है।

पत्रकार आशीष चौकसे की रिपोर्ट. संपर्क : 8120100064 / [email protected]

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1 Comment

1 Comment

  1. sohan kag

    June 24, 2017 at 2:46 pm

    मिडिया संस्थान पत्रकारों को पत्रकार नहीं हज्जाम समझते हैं जिसमें यदि वह क्रेडिट वर्क कोई करता है तो संस्थान का नाम पड़ता है और यदि किसी बाहुबली का शिकार होता है बस यही सोतेला व्यवहार अनादिकाल से पत्रकारों पर होता आया है जो आज भी आना व्रत रुप से जारी जिसे बदलना होगा

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