दैनिक भास्कर के आफिस पर पड़ा छापा, बाथरूम में छिपे संपादक और मैनेजर! देखें वीडियो

मजीठिया वेज बोर्ड के एरियर की मांग को लेकर जिन कर्मचारियों ने केस कर रखा है, प्रबंधन कर रहा है उन्हें प्रताड़ित… हिसार दैनिक भास्कर की यूनिट में गुरुवार को काफी कुछ देखने को मिला. यूनिट के विभिन्न ब्यूरो कार्यालयों में तैनात फोटोग्राफरों व सब एडिटर का मई के आखिर में बिहार और गुजरात ट्रांसफर कर दिया गया. Continue reading

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दैनिक भास्कर भोपाल के संपादकीय विभाग में एक साथ चार इस्तीफों से हड़कंप

दैनिक भास्कर भोपाल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. यही कारण है कि कई दिनों की खदबदाहट के बाद आज एक साथ चार लोगों ने इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया. कुछ लोगों का कहना है कि यह स्टेट हेड अवनीश जैन के खिलाफ विद्रोह है तो कुछ अन्य का कहना है कि ये इस्तीफे प्रबंधन के मनमाने रवैये और उत्पीड़न के खिलाफ संपादकीय वालों का एक करारा तमाचा है. Continue reading

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भोपाल के कुछ अखबारों ने घोटालेबाज सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल की सचित्र खबर ली, देखें वीडियो

भास्कर ग्रुप से पीड़ित भोपाल के कुछ अखबारों ने घोटालेबाज सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल की सचित्र खबर ली है… इनने विस्तार से खबर प्रकाशित की है. लेकिन दैनिक जागरण हो या अमर उजाला, दैनिक हिंदुस्तान हो या टाइम्स आफ इंडिया… आजतक हो या कलतक, इंडिया टीवी हो या इंडिया न्यूज… इन सब बड़े अखबारों और चैनलों ने इस बड़े घपले-घोटाले में गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने की खबर को दबा-पचा लिया…

पूरे प्रकरण पर एक विशेष रिपोर्ट देखें… नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें….

मूल खबर ये है….

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हजारों करोड़ के घोटाले में दैनिक भास्कर के मालिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

42 कम्पनियों का 7536 करोड़ का घोटाला : सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल के ख़िलाफ़ गिरफ्तारी वारंट जारी… EOW ने घोटाले के आरोपियों के नामों का खुलासा किया… पढ़िए आर्थिक अनुसंधान शाखा द्वारा जारी प्रेस रिलीज…

भोपाल । मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष, संचालक मण्डल, प्रबंध संचालक एवं अन्य अधिकारियों ने षडयंत्रपूर्वक बेईमानी के इरादे से छल करते हुए लगभग 42 डिफॉल्टर कम्पनियों के प्रवर्तकों / संचालको से सांठगांठ कर उन्हें अवैध रूप से लाभान्वित किया। इससे शासन और निगम को ब्याज सहित लगभग 719 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हुई थी। दिनांक 31. 09. 2017 की स्थिति में यह हानि बढ़कर ब्याज सहित 7536.57 करोड़ रुपये हो चुकी है।

मध्य प्रदेश राज्य ओैद्योगिक विकास निगम भोपाल के संबंध में प्राप्त घोटाले संबंधी सूचनाओं पर आर्थिक अनुसंधान प्रकोष्ठ में हुई गड़बड़ियों/अनियमितताओं के संबंध में प्रथम सूचना पत्र क्रमांक 25/04 पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। इसमें विवेचना उपरांत आरोपी पांच लोकसेवक 1. श्री राजेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन अध्यक्ष एम.पी.एस.आई.डी.सी. 2. श्री अजय आचार्य, तत्कालीन संचालक एम.पी.एस.आई.डी.सी 3. श्री जे.एस.राममूर्ती, तत्कालीन संचालक एम.पी.एस.आई.डी.सी 4. श्री एम.पी.राजन, तत्कालीन प्रबंध संचालक, 5. श्री नरेन्द्र नाहटा, तत्कालीन अध्यक्ष एम.पी.एस.आई.डी.सी एवं 20 कंपनियों के प्रवर्तक / संचालकगणों के विरूद्ध विवेचना उपरांत पूर्व अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। 

प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान के पश्चात आरोपी कंपनी मेसर्स भास्कर इण्डस्ट्रिज लिमिटेड के श्री सुधीर अग्रवाल, तत्कालीन संचालक, श्री गिरीश अग्रवाल, तत्कालीन संचालक एवं श्री नागेन्द्र मोहन शुक्ला, तत्कालीन कार्यपालिक संचालक एवं निगम के तत्कालीन अध्यक्ष, श्री राजेन्द्र कुमार सिंह एवं श्री नरेन्द्र नाहटा, तत्कालीन संचालक, श्री अजय आचार्य, तत्कालीन प्रबंध संचालक श्री एम.पी.राजन, तत्कालीन महाप्रबंधक लेखा, स्व0 श्री एम.एल.स्वर्णकार के विरूद्ध धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी, भादवि0 एवं 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) भ्रनिअ0 1988 के अंतर्गत माननीय विशेष न्यायालय (एम.पी.एस.आई.डी.सी.), भोपाल के समक्ष आज दिनांक 27.02.2018 को अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है।

आरोपी श्री नागेन्द्र मोहन शुक्ला माननीय न्यायालय में उपस्थित हुए। उनकी ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा जमानत पर रिहा किया गया। आरोपी श्री सुधीर अग्रवाल एवं श्री गिरीश अग्रवाल नोटिस तामीली उपरांत भी उपस्थित नहीं होने से माननीय न्यायालय द्वारा दोनों के विरूद्ध गिरफ्तारी वारण्ट जारी किया गया। 

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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक भास्कर के खिलाफ एक और आरसी जारी

मुंबई से खबर आ रही है कि यहां दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लिमिटेड में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे का रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) जारी किया गया है। इस आरसी को मुंबई (उपनगर) के कलेक्टर को भेज कर आदेश दिया गया है कि वह आवेदक के पक्ष में कंपनी से भू-राजस्व की भांति वसूली करें और आवेदक अस्बर्ट गोंजाल्विस को यह धनराशि प्रदान कराएं। आपको बता दें कि इस मामले में अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अपने एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिए मुंबई उच्च न्यायालय में कैविएट भी लगवा दी है।

डी. बी. कॉर्प लि. के मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स वाले कार्यालय में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस का कंपनी ने अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अदालत की शरण ली और उधर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने बकाये की रकम और वेतन-वृद्धि के लिए उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के दिशा-निर्देश पर चलते हुए मुंबई के कामगार विभाग में क्लेम भी लगा दिया था।

करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद लेबर विभाग ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष को सही पाया तथा कंपनी को नोटिस जारी कर साफ कहा कि वह आवेदक को उसका बकाया 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे जमा कराए, परंतु दुनिया के चौथे सबसे बड़े अखबार होने के घमंड में चूर दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लि. ने जब यह पैसा नहीं जमा किया तो सहायक कामगार आयुक्त वी. आर. जाधव ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में आरसी जारी कर दी और कलेक्टर को आदेश दिया कि वह डी. बी. कॉर्प लि. से भू-राजस्व नियम के तहत उक्त राशि की वसूली करके अस्बर्ट गोंजाल्विस को दिलाएं।

गौरतलब है कि इसके पहले डी. बी. कॉर्प लि. के समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के साथ रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख के पक्ष में भी कामगार विभाग ने आरसी जारी की थी… यह संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में जारी हुई पहली आरसी थी, मगर आरसी का विरोध करने के लिए संबंधित कंपनी जब मुंबई उच्च न्यायालय गई तो माननीय उच्च न्यायालय ने डी. बी. कॉर्प लि. को निर्देश दिया कि वह तीनों आवेदकों के बकाये रकम में से सर्वप्रथम 50 प्रतिशत रकम कोर्ट में जमा करे।

मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद डी. बी. कॉर्प लि. सर्वोच्च न्यायालय चली गई, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश पर उसे दखल देने की आवश्यकता नहीं है, अत: डी. बी. कॉर्प लि. के अनुरोध को खारिज किया जाता है। ऐसे में इस कंपनी के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा डी. बी. कॉर्प लि. पुन: मुंबई उच्च न्यायालय आई और धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के बकाये में से 50 फीसदी की राशि वहां जमा करा दिया। सो, माना जा रहा है कि अस्बर्ट गोंजाल्विस के मामले में भी अब डी. बी. कॉर्प लि. को जल्दी ही उनके बकाये की 50 प्रतिशत रकम मुंबई उच्च न्यायालय में जमा करानी होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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दैनिक भास्कर और पीपुल्स समाचार एक दूसरे के काले कारनामों की पोल खोलने में जुटे

व्यापम घोटाले में सीबीआई द्वारा पेश चालान में चौकसे समूह, पीपुल्स ग्रुप और चिरायु के मेडिकल कालेजों मे दाखिले को लेकर उनके मालिकों पर शिकंजा कसा गया है. इनमें चौकसे और पीपुल्स के दैनिक अखबार निकलते हैं. दैनिक भास्कर ने इन ग्रुपों की कारगुजारियों पर विस्तार से लगातार खबर का प्रकाशन किया.

इससे कुपित होकर पीपुल्स समाचार ने भास्कर ग्रुप के खिलाफ मुहिम में देर नहीं की. दोनों अखबारों द्वारा एक दूसरे के काले कारनामों की पोल खोले जाने से आनंद में पाठक वर्ग है. सरकार के लोग चुपचाप तमाशा देख रहे हैं. देखिए पीपुल्स समाचार अखबार में छपी भास्कर समूह के खिलाफ दो खबरें…

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जज की चिट्ठी के बाद मचा हड़कंप, दैनिक भास्कर ने छापा सात कॉलम का खंडन, खेद भी जताया

पिछले दिनों डीबी स्टार के रिपोर्टर के द्वारा जज पर दबाव डालकर फैसला अपने एक परिचित के पक्ष में देने को लेकर उपभोक्ता फोरम के जज इतने भड़क गए कि उन्होंने आईजी को पत्र लिख दिया कि इसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इस खबर के भड़ास में छपने के बाद उच्च प्रबंधन हरकत में आया और बताया जा रहा है कि मामले में भास्कर की किरकिरी होते देख जज के घर संपादक और यूनिट हेड गए, ताकि उन्हें मैनेज किया जा सके। इतना ही नहीं, उन्होंने जज अशोक पाठक को आश्वस्त किया कि वे पुरानी खबरों का खंडन छापेंगे। मंगलवार को उसी डीबी स्टार में सात कॉलम में पुरानी खबरों का खंडन छापा है और एक बॉक्स में पुरानी खबरों के लिए खेद भी प्रकट किया है। भास्कर अपनी विश्वसनीयता की बात करता है, उसके इस खंडन से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। संभवत: बिलासपुर में यह पहला मामला होगा, जिसमें भास्कर ने सात कॉलम में खंडन भी छापा और खेद भी प्रकट किया।

छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर के पत्रकारों पर आरोप लगते ही रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। उपभोक्ता फोरम के जज अशोक कुमार पाठक को दैनिक भास्कर बिलासपुर के रिपोर्टर आशीष दुबे ने दबाव डालकर फैसला अपने परिचित के हक में देने के लिए कहा था। यह आरोप खुद जज ने लगाया है और आईजी को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा था। आशीष दुबे के खिलाफ जज ने जो पत्र लिखा है, उसकी प्रति नीचे है।  जज ने आरोप लगाया है कि एक मामले में आशीष दुबे एकतरफा फैसला करना चाहता था। ऐसा नहीं करने पर देख लेने की धमकी दी और उलजुलूल खबरें छापने लगा। जज के मुताबिक धमकी के बाद आशीष दुबे ने जज को फोन भी किया कि वह उन्हें देख लेगा। इन सारी बातों का जिक्र जज के आईजी को लिखे पत्र में है।

आशीष दुबे मूलत: दैनिक भास्कर में ही टेलीफोन ऑपरेटर था। वह संपादकों के खास होने के साथ साथ उनके घर का भी खास हो जाता था। ऐसा करते करते मनीष दबे ने उसे संपादकीय टीम में शामिल कर लिया। इसके बाद जितने भी संपादक आए, आशीष दुबे एकदम करीबी बना रहा क्योंकि वह संपादकों के लिए हर किस्म का मक्खन लेकर खड़ा रहता था। यही कारण है कि ढेरों शिकायतों के बाद भी उसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे उसे सिटी चीफ तक प्रमोट किए जाने की चर्चाएं हुईं। बहरहाल, जिन लोगों को आशीष दुबे ने साजिश करके निपटाया, अब उनके हाथ ये खबर लगी, वे उन्हें कहां छोड़ने वाले हैं। इस खबर को ऊपर तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं ताकि भास्कर मैनेजमेंट को इसकी असलियत का भी पता चल सके।

लोग कहने लगे हैं कि जिद से दुनिया बदलने निकले दैनिक भास्कर ने अपने अखबार में दल्ले भर डाले हैं। यही वजह है कि ईमानदार, जुझारु और कर्मठ पत्रकारों के लाले पड़े हैं। भास्कर का बिलासपुर एडिशन भी इससे अछूता नहीं है। यहां डीबी स्टार से जुड़े तथाकथित पत्रकार आशीष दुबे द्वारा इरादतन कन्जयूमर फोरम की कार्य प्रणाली के एंटी खबर लगवाकर अपने परिचित के पक्ष में फैसला सुनाने फोरम के अध्यक्ष पर दबाव डालने का मामला सामने आने के बाद यह अखबार घुटनों के बल पर आ गया। दरअसल दुबे जिस कलम को हथियार बनाकर दलाली की दुकान खोले था, जज ने उसी को कठघरे में खड़ा करने के लिए कमर कस ली। फिर हुआ यूं कि भास्कर प्रबंधन ने अपनी फजीहत बचाने के लिए तत्काल पॉजिटिव खबर बनाकर परोसी।

एक नवम्बर की खबर में बताया गया कि फोरम अच्छे से काम नहीं कर रहा जिसके बाद अध्यक्ष महोदय ने पत्रकार दुबे के खिलाफ एसपी को शिकायत दी। इस मामले को प्रेस क्लब के एक नमूने द्वारा दबाने की भनक भी लगी जिसके बाद कुछ पत्रकारों ने भड़ास से सम्पर्क करके मुद्दे को सामने लाने को कहा। इसके परिणामस्वरुप 7 नवम्बर को उसी अखबार के उसी पेज पर खबर छपी कि फोरम जबरदस्त काम कर रहा। लेकिन यह तो फजीहत बचाने की कोशिश है। उस पत्रकार पर क्या कार्रवाई की जायेगी, यह देखना मजेदार होगा।

आशीष चौकसे

एसोसिएट एडिटर, भड़ास4मीडिया

मूल खबर : 

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कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष ने की एसपी से शिकायत- ”दैनिक भास्कर का पत्रकार डाल रहा दबाव”

बिलासपुर : रायपुर, राजनांदगांव के बाद अब बिलासपुर शहर से दैनिक भास्कर के पत्रकार की करतूत सामने आ रही है। इस बार कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष ने एसपी को लिखित शिकायत दी है कि एक पत्रकार आशीष दुबे जो खुद को दैनिक भास्कर में कार्यरत बताता है, उसके द्वारा किसी केस में फैसला अपने परिचित के हक में करवाने दबाव डाला जा रहा है। वायरल हुई इस शिकायत का असर इतना जोरदार हुआ कि खुद प्रेस क्लब के एक बंदे को मामला दबाने तुगलकी फरमान जारी करना पड़ा कि इस खबर को जो भी चैनल या अखबार लगायेगा तो उस पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जायेगी। हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक प्रेस क्लब अध्यक्ष ने ऐसे किसी फरमान से पल्ला झाड़ लिया है।
खबर की भाषा बता रही है इरादे..

1 नवम्बर को डीबी स्टार में फोरम से सम्बंधित खबर छपी है। वायरल हुये शिकायत पत्र में इस खबर का भी जिक्र है कि ऐसी निराधार खबरें दबाव डालने बनाई जा रही हैं। बहरहाल खबर कुछ केसेज का हवाला देकर बनाई गई है। जिसमें पहला केस ही उन महोदय का है जिनके पक्ष में तथाकथित पत्रकार फैसला करवाना चाहते हैं। यही नहीं अगर हम ध्यान दें तो सीधी बात का जो वर्जन फोरम के अध्यक्ष का लिया गया है। वह भी केवल उसी केस से जुड़ा है। खबर की भाषा, केसेज और लिए गए वर्जन को अगर एक सूत्र पिरोएं तो समझ आयेगा की यह खबरें किसी विशेष इरादे से ही लगाई जा रहीं है।

आशीष चौकसे
एसोसिएट एडिटर
भड़ास4मीडिया

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दैनिक भास्कर में ये क्या छप गया! गई दो पत्रकारों की नौकरी

हैडिंग में कोई शायरी नहीं है। बल्कि हकीकत है दैनिक भास्कर के रायपुर एडिशन की। आनंद पांडे जी के जाने के बाद जब से शिव दुबे को रायपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है। भास्कर की छीछालेदर होती जा रही है। ताजा उदाहरण है कि 14 अक्टूबर के सिटी भास्कर में खबर में ऐसे शब्द शामिल हैं जिन पर कड़ी आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की विदाई कर दी गई है।

दरअसल गलती खबर बनाने वालों की नहीं है क्योंकि उन्हें तजुर्बा ही नहीं… उन्हें पता ही नहीं कि किसी ने अपने किरदार का नाम “गाली” रखा हो तो उसे घुमाकर परोसा जाता है। उन्होंने तो सीधे-सीधे किरदारों के नाम लिखकर छाप दिए थे। अब हुआ यूं कि जब ऊपर से शिव दुबे की सिंकाई हुई तो उसने दोनों कर्मियों को तत्काल रिलीव कर दिया।

अंदर की बात यह है कि तन्मय अग्रवाल, शिव दुबे का खास बन्दा था। दुबे को पता था सिटी भास्कर को निकालने और पब्लिक के टेस्ट को पकड़ने का हुनर उसके किसी और खास आदमी में नहीं है। इसीलिए उसने तन्मय को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर भास्कर से जाने नहीं दिया था। लेकिन जब माई बाप से प्रेशर पड़ा तो उसी ने तन्मय की विदाई कर दी। वैसे यह वही शिव दुबे हैं जो सन्डे के दिन IIT का रिजल्ट डिक्लेयर होने की खबर बनवा रहा था जिसे मैंने रुकवाया था। क्योंकि सन्डे को एग्जाम तो कंडक्ट हो सकते हैं लेकिन रिजल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ करते।

नमूनों से भरी है नई टीम

24 अक्टूबर के रायपुर सिटी भास्कर के फ्रंट पेज की लीड खबर में ट्रांसपेरेंट शब्द की बजाय “न्यूड” का बारबार इस्तेमाल किया गया है। अब जाहिर सी बात है ट्रेनी पत्रकारों को या नौसिखियों को कम तनख्वा देकर बिठाओगे तो यही सब तो पढ़ने मिलेगा।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

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होशंगाबाद के वितरकों ने दैनिक भास्कर के शोषण से परेशन होकर कर दिया हड़ताल

होशंगाबाद से खबर आ रही है कि अखबार वितरकों ने दैनिक भास्कर का बहिष्कार करते हुए हड़ताल कर दिया है. इस बाबत एक पर्चा छपवाकर पाठकों में वितरित किया जा रहा है. इस पर्चे में वितरकों ने दैनिक भास्कर द्वारा खुद के शोषण किए जाने की बात का जिक्र किया है. एजेंटों और वितरकों की हड़ताल से दैनिक भास्कर का बंडल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर ही पड़ा रह गया.

वितरकों ने भड़ास4मीडिया से अपील की है कि उनका यह पर्चा पोर्टल पर प्रकाशित किया जाए. तो लीजिए, वितरकों का पर्चा पढ़िए…

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लगता है ‘भास्कर’ के सम्पादक और प्रबंधक पाठकों को मूर्ख समझते हैं!

Krishna Kalpit : ‘भास्कर’ ख़ुद को सबसे विश्वसनीय और नम्बर 1 अख़बार बताता है। आज ‘भास्कर’ के जयपुर संस्करण में जाति-प्रथा के विरोध में एक ख़बर छपी है, जिसमें प्रदेश की सरकारी स्कूलों के रजिस्टर में छात्रों के लिये बने जाति के कॉलम का विरोध किया गया है और जाति-प्रथा को समाज और देश के लिये कलंक बताया गया है। ‘भास्कर’ के इसी अंक में श्री अग्रवाल समाज समिति, जयपुर द्वारा आयोजित श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव का पूरे पेज का विज्ञापन छपा है।

यही नहीं इसी अख़बार में हर रविवार को जो मेट्रीमोनियल के क्लासिफाइड विज्ञापन छपते हैं, वे भी जाति आधारित होते हैं। और आजकल तो ख़बरें भी जाति-आधारित होती हैं। करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, गुर्जर, मीणा इत्यादि। यदि ‘भास्कर’ जाति-प्रथा का विरोधी है तो उसे ऐसे विज्ञापन और ऐसी ख़बरें छापना बन्द करना चाहिये। लेकिन लगता है ‘भास्कर’ के सम्पादक और प्रबंधक पाठकों को मूर्ख समझते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और कवि कृष्ण कल्पित की एफबी वॉल से.

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डा. कफील की असलियत पता करने गोरखपुर पहुंचे पत्रकार अजय प्रकाश की रिपोर्ट पढ़िए

Ajay Prakash : कई बार सच कुछ और होता है और प्रचारित कुछ और होता है। इसी का फायदा सरकार भी उठाती है और दलाल भी। गोरखपुर में कल सुबह जब मैं कफील के निजी अस्पताल पहुंचा तो मुख्यद्वार ‘डॉक्टर के खान मेडिस्प्रिंग चाइल्ड होस्पिटल’ स्वागत कर रहा था। तारीफ में दो स्थानीय अखबारों के विज्ञापन भी पब्लिश थे। लेकिन कुछ घंटे बाद ही सब निशान कफील ने मिटवा दिए। फिर मैं नाम पर सफेदी चढ़ी तस्वीर भी ले आया। वहां उनकी गुंडई से निपटना पड़ा तो निपटा भी।

आप खुद देखिए और तय कीजिये कि विलेन को आपने हीरो कैसे बनाया। यह आदमी सुबह 9 बजे से शाम 9 बजे तक अपने निजी अस्पताल में होता था, जबकि यह मेडिकल कॉलेज में बच्चा और इंसेफ्लाइटिस दोनों ही वार्ड का मुखिया था। इस बारे में दैनिक भास्कर में छपी मेरी रिपोर्ट पढिए… नीचे की न्यूज कटिंग पर क्लिक करिए…

 

लेखक अजय प्रकाश तेजतर्रार और जन सरोकारी पत्रकार हैं. उनका यह लिखा उनकी एफबी वॉल से लिया गया है.

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भास्कर की मजेदार रिपोर्टिंग : चीन सीमा विवाद पर जयपुर के शिप्रापथ थाना प्रभारी कार्रवाई करेंगे!

सोशल मीडिया पर आजकल दैनिक भास्कर में छपी एक खबर की कटिंग धूम मचाते हुए घूम रही है. इस न्यूज कटिंग में चीन सीमा विवाद पर खबर है और लास्ट में जयपुर के शिप्रापथ थाना प्रभारी मुकेश चौधरी का बयान है कि ”अभी मामले की जांच की जा रही है और लापरवाही सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

दो अलग अलग खबरें किन्हीं वजहों से यूं जुड़ गई हैं कि अर्थ का अनर्थ हो रहा है. मीडियाकर्मियों का कहना है कि अपने यहां काम करने वालों का मजीठिया वेज बोर्ड का हिस्सा हड़पने वाला दैनिक भास्कर बदले में ऐसे ही नतीजे पाएगा जिससे उसकी ब्रांड वैल्यू धराशाई होगी. आप भी देखें-पढ़ें न्यूज कटिंग….

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भास्कर की लैंड डील कैंसल करने वाली महिला आईएएस अफसर का तबादला

लगता है रमन सिंह दैनिक भास्कर के सामने दंडवत हो गए हैं. तभी तो उस महिला आईएएस अधिकारी का तबादला कर दिया गया जिसने दैनिक भास्कर की रायपुर में जमीन की लैंडडील रद्द की थी. इस बारे में स्टेट्समैन अखबार में विस्तार से खबर छपी है, जिसे नीचे पढ़ सकते हैं….

मूल खबर ये है….

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दैनिक भास्कर ने अपने कर्मियों से कहा- ”10 लाख नए पाठक जोड़ने हैं, प्रति पाठक 150 रुपये मिलेंगे!”

दैनिक भास्कर ग्रुप ने ऑफिशियल लेटर जारी कर अपने कर्मियों को इस साल 10 लाख नये पाठक जोड़ने का टारगेट बताया है और इसके लिए उसने अपने कर्मियों को ऑफर दिया है कि वे नये पाठक जुड़वायें जिसके लिए उन्हें प्रति पाठक 150 रुपये का कमीशन या प्रोत्साहन राशि मिलेगी। बहरहाल इस ऑफर के बाद कुछ कर्मी यह सोच रहे हैं कि क्या अब पत्रकारिता “टारगेट जॉब” तो नहीं बन जायेगी? हो सकता है कस्टमर न लाने वालों का इंक्रीमेंट/प्रमोशन भी कंपनी रोक दे।

खैर खुद का प्रचार प्रसार विस्तार करने का हक हर ब्रांड को होता है लेकिन, 1 साल में 10 लाख पाठक जोड़ने जैसा बड़ा टारगेट बनाने वाला और खुद को देश का नम्बर 1 अखबार कहने वाले भास्कर ग्रुप ने ऑफिशियल लैटर में खुद को करीब 10 हजार कर्मियों की कंपनी होने का दावा किया है। साथ ही लेटर में विश्व का चौथा सबसे अधिक प्रसार संख्या वाला अखबार भी बताया है। तो फिर अपने कर्मियों को पर्याप्त सेलरी या मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने की बात उठने पर भास्कर की यही “ब्रांड वैल्यू” कम कैसे हो जाती है, यह सोचने वाली बात है।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

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रमन सिंह ने रायपुर से दैनिक भास्‍कर का डेरा-डंडा उखाड़ने का आदेश दिया!

दैनिक भास्‍कर, रायपुर को 1985 में कांग्रेस द्वारा प्रेस लगाने के लिए (अविभाजित मध्‍य प्रदेश में) पट्टे पर दी गई ज़मीन को छत्‍तीसगढ़ प्रशासन ने शुक्रवार 7 जुलाई के एक शासनादेश के माध्‍यम से रद्द कर के उस पर प्रशासनिक कब्‍ज़े का आदेश दे दिया है। ज़मीन का कुल आकार 45725 वर्गफुट और अतिरिक्‍त 9212 वर्ग फुट है यानी कुल करीब 5000 वर्ग मीटर है। नजूल की यह ज़मीन रायपुर भास्‍कर को प्रेस लगाने के लिए इस शर्त पर कांग्रेस शासन द्वारा दी गई थी कि संस्‍थान अगर प्रेस लगाने के विशिष्‍ट प्रयोजन से मिली ज़मीन को किसी और प्रयोजन के लिए इस्‍तेमाल करेगा तो शासन उसे वापस ले लेगा। इस ज़मीन का पट्टा 31 मार्च 2015 को समाप्‍त हो चुका था और दैनिक भास्‍कर ने इसके नवीनीकरण के लिए अग्रिम आवेदन किया था।

छत्‍तीसगढ़ सरकार के राजस्‍व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 7 जुलाई को जारी आदेश कहता है कि कलेक्‍टर रायपुर से प्राप्‍त स्‍थल निरीक्षण प्रतिवेदन में पाया गया है कि ”उक्‍त भूमि पर 7 मंजिला पक्‍का व्‍यावसायिक कांपलेक्‍स बनाया गया है तथा प्रत्‍येक मंजिल पर प्रेस स्‍थापना से भिन्‍न अन्‍य व्‍यावसायिक प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग किया जा रहा है।” इसके बाद शासन ने कई बार अख़बार से इस संबंध में जवाब मांगा लेकिन अखबार प्रबंधन ने जवाब देने के लिए लगातार वक्‍त मांगा और जवाब दाखिल नहीं किया।

आदेश कहता है, ”तदनुसार उक्‍त भूमियों पर निर्मित परिसंपत्तियों को निर्माण सहित नियमानुसार राजसात कर बेदखली की कार्यवाही करने हेतु कलेक्‍टर, रायपुर को आदेशित किया जाता है।” आदेश की प्रति प्रधान संपादक, दैनिक भास्‍कर, रायपुर को भी भेजी गई है। सवाल है कि रमन सिंह किस बात पर बिफर गए हैं कि उन्‍होंने रायपुर से दैनिक भास्‍कर का डेरा-डंडा ही उखाड़ने का आदेश दे डाला? सवाल यह भी उठता है कि करीब तीन दशक से रायपुर शहर के भीतर अपना धंधा चला रहा यह अख़बार अब क्‍या करेगा?

(साभार- मीडिया विजिल)

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इस्तीफा देने को मजबूर करने पर मीडियाकर्मी ने भास्कर प्रबंधन की लेबर आफिस में शिकायत की!

अन्यथा पेमेंट और ग्रेच्यूटी रोकने की धमकी देता है…

जिद से दुनिया बदलने वाले दैनिक भास्कर के बिलासपुर प्रबंधन द्वारा एक मीडियाकर्मी से जबरन इस्तीफा लेने का केस सामने आया है। यह हम उस शिकायत पत्र के आधार पर कह रहे हैं जो सहायक श्रमायुक्त, बिलासपुर को पीड़ित द्वारा दिया गया है। इस शिकायत पर सहायक श्रमायुक्त कार्यालय से जवाब तलब हेतु नोटिस भी जारी किया गया है।

क्या है शिकायती पत्र में…

मैं अमित कश्यप पिता दयाराम कश्यप, 16 सितंबर 2008 से दैनिक भास्कर, बिलासपुर में कार्यरत हूं। 21 फ़रवरी 2017 को यकायक स्थानीय यूनिट हेड अभिक सूर और एच.आर. हेड सुबोध पंडा द्वारा केबिन में बुलाकर नौकरी से इस्तीफा देने बोला गया। जिस पर असहमति जताने पर मेरी पेमेंट और ग्रेजुएटी रोक देने की धमकी दी गई। जिस दबाव के चलते मैंने इस्तीफ़ा दिया है। अतः महोदय से निवेदन है कि प्रबंधन को आदेशित कर मुझे मेरी नौकरी वापस दिलवायें। अथवा नौ साल का मजीठिया वेज बोर्ड के तहत रकम व अन्य सुविधायें दिलवाने की कृपा करें।

अब जो बड़ा सवाल मुंह बायें खड़ा है वो यह कि सर्वोच्च न्यायालय के मुताबिक मीडिया मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड की जानकारी नहीं थी। तो फिर यह छंटाई किस वजह से? या फिर यह समझा जाये कि कर्मचारी कमजोर कड़ी होता है शायद इसलिये इन्साफ का पलड़ा मालिकों की तरफ झुक गया? खैर हकीकत जो भी हो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मजीठिया वेज बोर्ड का खतरा मंडराता देख ही अमित जैसे सैंकड़ों पत्रकारों को घर बिठाया गया है।

पत्रकार आशीष चौकसे की रिपोर्ट. संपर्क : 8120100064 / journalistkumar19@gmail.com

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इस ग़ज़ब की खबर के लिए भास्कर के महान मालिकों और संपादकों को एक सलाम तो बनता है :)

दैनिक भास्कर अखबार के मालिक और संपादक लोग महानता की ऐसी राह पर चल पड़े हैं जहां उन्हें लगता है कि वे जो भी कह कर देंगे, वही दुनिया फालो करेगी, उसी राह पर चलेगी और उसी को पत्रकारिता मानेगी. तभी तो इस अखबार के मालिक और संपादक ऐसी ऐसी खबरें छापने लगे हैं जिसे पढ़ देखकर लोग कहते हैं क्या अब ऐसी ही खबरें छापने के लिए अखबार बचे रहेंगे? इससे अच्छा तो है कि ये अखबार बंद हो जाएं ताकि पेड़ पर्यावरण बचे और झूठ की दुकान का कारोबार कम हो जाए.

भास्कर ने ये खबर अखबार के अलावा अपनी वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया है. अखबार और वेबसाइट, दोनों ही जगहों पर प्रकाशित इस खबर का स्क्रीनशाट देखिए….

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‘नो नेगेटिव’ के नाम पर झूठे तथ्य पढवा रहा लुधियाना भास्कर

एक रोज सुबह सैर के बाद हम दोस्त पार्क में चाय पी रहे थे. तभी दैनिक भास्कर अखबार आया. हम सब नियमित पाठक हैं. खासकर सोमवार ‘नो नेगेटिव’ एडिशन के. लेकिन बड़ा अफसोस हुआ पढके. लुधियाना भास्कर में मुख्य खबर लगी कि सिंधवा नहर में विश्व का पहला सोलर‌ प्लांट‌ लग रहा है. हमने जब यह पढा तो गुजरात में कारोबार के सिलसिले में जाने वाला मेरा दोस्त बोला कि ये तो गलत है, गुजरात में तो नर्मदा नदी पर ऎसे‌ अनेक सोलर‌ प्लांट लग चुके हैं वो भी तब जब प्रधानमन्त्री नरेंदर मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे. अब तो वो तीन साल से पीएम हैं.

दूसरे दोस्त ने बताया कि पटियाला में घगर पर भी ऎसा प्लांट है. भास्कर हमेशा हमारा ज्ञान बढाता है लेकिन अब डर लग रहा है कि कहीं हम‌ें झूठी जानकारियां तो नहीं पढ़ाई जा रही हैं.  सकारात्मक खबरों का विचार वाला‌ आइडिया अच्छा है परंतु उसके बहाने झूठ पढाना तो बिल्कुल‌ ही ठीक नहीं लग रहा. हमने कितनों से अखबार के मालिक का नंबर मांगा परंतु एक जानकार ने कहा कि भड़ास को भेज देंगे तो भास्कर के मालिकों तक खुद पहुंच जाएगा. इसलिए हम ये भड़ास के पास भेज रहे हैं.

पहले भी कितने दोस्त बहस करते थे परंतु हम लुधियाना भास्कर में छपे होने की बातें कहते हुए अड़ जाते थे. लेकिन आगे से अड़ने से पहले सोचना पड़ेगा कि लुधियाना भास्कर जो बता रहा है वह कितना सही है. हमें उम्मीद है कि पाठकों की परेशानी आप जरूर भास्कर के मालिक तक पहुंचाएंगे. संबंधित खबर की कटिंग भी भेज रहे हैं.

एक पाठक
लुधियाना

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भास्कर ग्रुप का घोटाला खोलने वाले ‘स्वराज एक्सप्रेस’ चैनल के रिपोर्टर को देना पड़ा इस्तीफा

मेरे सभी सम्मानीय मित्रों एवमं मेरे सभी सहयोगियों… 

यह बताते हुए मुझे अत्यंत ख़ुशी हो रहा है कि मैंने अपने पूरे होश में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रीजनल न्यूज चैनल ‘स्वराज एक्सप्रेस’ के खरसिया रिपोर्टर के पद से त्यागपत्र दे दिया है। कारण यह हैं कि यह चैनल एक समय पत्रकारों का चैनल हुआ करता था किन्तु आजकल इसमें भी कुछ दलाल किस्म के लोग सक्रिय हो गए हैं। मैंने पिछले 1 वर्ष से बिना कोई पेमेंट प्राप्त किये खुद के व्यय से अपना कैमरा, अपना कैमरामेन, अपना इंटरनेट लगाकर काम किया। सबसे ज्यादा कीमती अपना बहुमूल्य एक वर्ष का समय है जिसके मूल्य का आकलन मैं स्वयं नहीं कर सकता हूँ।

मैंने सुबह 6 बजे से रात्रि 12 बजे तक हमेशा सक्रिय होकर लगातार खबर, स्क्रॉल, ब्रेकिंग, पैकेज स्टोरी भेजा लेकिन बदले में हमें आज तक चैनल से एक रुपये भी पारिश्रमिक नहीं मिला। मैंने ग्राम कुनकुनी खरसिया में 300 एकड़ जमीन घोटाला मामले की खबर बनाई। प्रधानमंत्री कार्यालय से मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को कार्यवाही का पत्र भेजा गया। इस पत्र की छाया प्रति मुझे मिली। इसमें कुनकुनी में दैनिक भास्कर ग्रुप की कंपनी डीबी पॉवर द्वारा गरीब भोले भाले आदिवासियों की जमीन को अपने मीडिया हाउस के ड्राइवर के नाम से खरीदे जाने का जिक्र है। गरीब आदिवासियों के ऊपर मीडिया घराने का धौन्स दिखा के अवैध रूप से ब्रिज एवं रेलवे ट्रैक बनाये जाने का मामला उजागर किया। लेकिन चैनल ने मेरे इस साहसिक खबर को नहीं चलाया। उल्टे छत्तीसगढ़ के एडिटर शैलेश पाण्डेय ने कहा कि तुम डी बी पावर मीडिया घराने के खिलाफ खबर कवरेज करते हो। ऐसा झूठा लांछन लगाया गया।

चैनल के एक जिम्मेदार अधिकारी ने मुझे कहा कि दैनिक भास्कर के खिलाफ लिखोगे तो वह हमारे चैनल की बैंड बजा देगा। ऐसे में मुझे अहसास हुआ कि किसी व्यक्ति के द्वारा 100 रु के घोटाला को दिनभर खबर बना के चलाने वाले लोगों के पास सैकड़ों करोड़ के घोटाले की खबर चलाने की हिम्मत नहीं है और ऐसे लोगों के साथ काम करना अपने समय एवं नैतिक मूल्यों की बर्बादी है। जो लोग दूसरे मीडिया हॉउस के 100 एकड़ से ज्यादा के आदिवासी भूमि की बेनामी खरीदी एवं अवैध निर्माण पर पर्दा डालना चाहता हैं, ऐसे लोगों के साथ काम करना बेकार है।

जो व्यक्ति दूसरा चैनल छोड़ के इस चैनल में आया हो उनके द्वारा मुझ पर झूठा लांछन लगाते हुए डीबी के खिलाफ खबर बनाने पर बदनाम करने की धमकी देने वाले को करारा जवाब देते हुए मैं स्वयं स्वराज एक्सप्रेस चैनल के खरसिया रिपोर्टर का पद छोड़ रहा हूँ। चैनल में हमारे साथ 1 वर्ष तक खबर के बदले पारिश्रमिक दिए जाने के नाम पर धोखा ही किया गया। मांड प्रवाह अख़बार एवं सोशल मीडिया के माध्यम से हमेशा गरीबों एवं शोषितों की आवाज उठाता रहूंगा। गरीबों को लूटने वालों का फर्दाफाश करता रहूंगा।

सत्यमेव जयते

आपका

भूपेंद्र किशोर वैष्णव

(स्वतंत्र पत्रकार)

खरसिया

9754160816

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मजीठिया जंग : हेमकांत को स्टे के बावजूद ऑफिस में न घुसने देने वाले दैनिक भास्कर प्रबंधन पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई

मजीठिया मांगने वाले हेमकांत चौधरी को ट्रांसफर पर स्टे के बावजूद ऑफिस में नहीं घुसने देने वाले दैनिक भास्कर के अफसरों पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई… तीन महीने जेल की सजा और 5000 जुर्माना होना तय, भास्कर के अफसरों में हड़कंप… मजीठिया मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक भास्कर के मराठी अखबार दिव्य मराठी से आई है। यहाँ प्रबंधन की लगातार धुलाई कर रहे हेमकांत चौधरी ने अबकी बार प्रबंधन के चमचों को पटखनी देते हुए एक ही दांव में न केवल धूल चटा दी है बल्कि चारों खाने चित्त कर दिया है।

मजीठिया वेजबोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लगाने पर दैनिक भास्कर मैनेजमेंट ने चौधरी का डेपुटेशन के नाम पर रांची ट्रांसफर कर दिया था। इसके खिलाफ औरंगाबाद इंडस्ट्रियल कोर्ट से चौधरी को स्टे मिल गया था। इसके बावजूद ताकत के खोखले नशे में चूर भास्कर के अहंकारी अफसरों ने चौधरी को ऑफिस में घुसने नहीं दिया और धक्के देकर बाहर कर दिया था। इससे आहत चौधरी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया था।

मामले में भास्कर के वकील पिछले लगभग एक साल से तारीख पर तारीख ले रहे थे। कुछ दिन पहले हुई सुनवाई में भी जब भास्कर के वकीलों ने तारीख लेने की कोशिश की तो हेमकांत चौधरी के वकीलों ने जोरदार विरोध करते हुए आरोपियों पर अवमानना कार्रवाई शुरू करने की अपील कोर्ट से की थी। तब कोर्ट ने बाद में आदेश जारी करने की बात कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी। अंततः पिछले हफ्ते कोर्ट ने दिव्य मराठी महाराष्ट्र के सीओओ निशित जैन और सीनियर एचआर एग्जीक्यूटिव अनवर अली को अवमानना का दोषी मानते हुए दोनों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।

आगामी दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और कोर्ट की अवमानना मामले में दोनों को तीन महीने जेल की सलाखों के पीछे काटना पड़ेंगे साथ ही 5 हजार रुपए जुर्माना भी भरना पड़ेगा। उधर, जब से इस आदेश की खबर आरोपियों और कर्मचारियों का शोषण कर रहे भास्कर प्रबंधन के दूसरे चमचों को लगी है उनके खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब उन्हें भी जेल जाने का डर सता रहा है।

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भास्कर ने केंद्र सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुद को सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाला अखबार बताया

भास्कर समूह ने एक खबर का प्रकाशन किया है, केंद्र सरकार के एक आंकड़े का हवाला देते हुए. इसके जरिए कहा गया है कि दैनिक भास्कर देश का सबसे ज्यादा प्रसारित अखबार है. पढ़िए भास्कर में छपी पूरी रिपोर्ट….

46.15 लाख कॉपी के साथ दैनिक भास्कर देश का सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाला अखबार : केंद्र सरकार की रिपोर्ट

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने गुरुवार को अखबारों और मैगजीन्स के रजिस्ट्रेशन और सर्कुलेशन से जुड़ी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि दैनिक भास्कर देश का सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाला अखबार है। मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट के मुताबिक, हिंदी में 45 एडिशन के साथ प्रकाशित दैनिक भास्कर का कुल सर्कुलेशन 46 लाख 14 हजार 939 है। मल्टी एडिशन समाचार पत्रों के इस वर्ग में दूसरे नंबर पर टाइम्स ऑफ इंडिया है। 33 एडिशन में अंग्रेजी में प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया का सर्कुलेशन 44 लाख 21 हजार 374 है। रिपोर्ट में भास्कर के गुजराती, मराठी और अंग्रेजी के संस्करण शामिल नहीं…

– इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट मंत्री वेंकैया नायडू ने गुरुवार को भारतीय समाचारपत्र पंजीयन 2015-16 की रिपोर्ट जारी की।
– रिपोर्ट में दैनिक भास्कर का आंकड़ा सिर्फ हिंदी में प्रकाशित अखबार का है।
– भास्कर समूह इसके साथ ही गुजराती में दिव्य भास्कर (6 एडिशन), मराठी में दिव्य मराठी (7 एडिशन) और अंग्रेजी में डीएनए (2 एडिशन) व डीबी पोस्ट (एक एडिशन) का भी प्रकाशन करता है।
– इनकी सामूहिक प्रसार संख्या करीब 15 लाख है।
– वैंकेया नायडू ने बताया कि देश में समाचार पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन में 5.13% का इजाफा हुआ है। एक साल में 5423 नई पत्र-पत्रिकाएं रजिस्टर कराई गईं।
आनंद बजार पत्रिका : एक दिन में सबसे ज्यादा सर्कुलेशन
– रिपोर्ट में किसी एक एडिशन में सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाले अखबारों का भी ब्योरा दिया गया है।
– इस मामले में कोलकाता से बांग्ला भाषा में प्रकाशित आनंद बाजार पत्रिका नंबर-1 पर है। उसका रोज का सर्कुलेशन 11 लाख 50 हजार 38 है।
– वहीं, दिल्ली से अंग्रेजी में प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स 9 लाख 92 हजार 239 कॉपी के साथ दूसरे नंबर पर है।
एक दिन में हिंदी में सबसे ज्यादा प्रकाशन
– प्रकाशन के मामले में हिंदी अब भी नंबर एक पर है। हिंदी भाषा में हर प्रकाशन दिवस में 31 करोड़ 44 लाख 55 हजार 106 प्रतियां छपीं।
– दूसरे नंबर पर अंग्रेजी है। उसकी 6 करोड़ 54 लाख 13 हजार 443 प्रतियां प्रकाशित हुईं। उर्दू भाषा 5 करोड़ 17 लाख 75 हजार प्रतियों के साथ तीसरे स्थान पर रही।
– सरकार ने कहा कि 31 मार्च 2016 तक 1 लाख 10 हजार 851 पत्र-पत्रिकाएं रजिस्टर हो चुकी थीं। समाचार पत्र वर्ग में 16,136 और मैगजीन वर्ग में 94,715 पंजीकरण हैं।
– इसमें सबसे ज्यादा 44,577 रजिस्ट्रेशन हिंदी भाषा के लिए है। दूसरे स्थान पर अंग्रेजी भाषा रही। इसमें 14,083 पंजीकरण हैं। सर्कुलेशन के मामले में मलयालम भाषा की पत्रिका वनिता अव्वल है।

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सबसे ज्यादा बददुआ पाने वाली मीडिया कंपनी है डीबी कॉर्प!

राजश्री प्रोडक्शन ने एक से बढकर एक हिट फिल्में दी हैं जिन्हें लोगो ने बार बार देखा और बार बार सराहा। राजश्री प्रोडक्शन के सूरज बड़जात्या से एक बार मैंने सवाल पूछ लिया और जो उत्तर मिला वो आज तक नहीं भुला सका। सवाल था राजश्री प्रोडक्शन की कामयाबी का राज आप क्या मानते हैं? सूरज जी ने उत्तर दिया- हम फिल्में पैसे से नहीं, दुआओं से बनाते हैं। तह तक गया तो पता चला राजश्री प्रोडक्शन में आज भी कई लोग ऐसे हैं जो ‘दोस्ती’ फिल्म के समय से जुड़े और इसी कंपनी के होकर रह गए। कंपनी प्रबंधन उनके हर सुख दुख में साथ देता है।

काश ये बात डीबी कार्प प्रबंधन भी समझ लेता। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर से सबसे ज्यादा शिकायत डीबी कॉर्प के खिलाफ माननीय सुप्रीमकोर्ट और लेबर विभाग में की गयी है। इस कंपनी में शोषण का आलम यह है कि डीबी कार्प के समाचार पत्रों दैनिक भास्कर और दिव्य मराठी से आज भी लोगों के फोन आते हैं। वे मुझसे कहते हैं सर मजीठिया मांगने की सिर्फ किसी साथी से चर्चा कर दी तो कंपनी ने कह दिया आपका परफार्मेंस खराब है और नौकरी से निकाल दिया।

किसी का फोन आता है तो बताता है कि सर मजीठिया माँगा तो महाराष्ट्र से ट्रांसफर करके झारखण्ड भेज दिया। किसी को राजस्थान भेज दिया गया। एक साथी ने बताया इस कंपनी की एच आर हेड ने मुझे कह दिया कि तुम मजीठिया मांगते हो तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर दूंगी।

अब सवाल ये उठता है जिस अखबार का नाम ही भास्कर यानि उगता सूर्य से है, वो अस्त कैसे हो रहा है। जाहिर सी बात है भास्कर को बददुआ लग गयी है। ये बददुआ उन लोगों की है जो इसके कर्मचारी हैं या थे। जो कर्मचारी हैं वो इसलिए बददुआ देते हैं कि कंपनी जो कर रही है, गलत कर रही है और जो बाहर हैं वो इसलिए बददुआ दे रहे हैं कि कंपनी ने जो किया गलत किया। बाहर निकाले गए लोगो के बीवी बच्चे भी बददुआ दे रहे हैं। आज इस कंपनी में लोगों का पेट पालना मुश्किल है। कर्मचारियों ने क्या गलत कर दिया, सिर्फ यही कहा न कि दो जून की रोटी दे दो। आपने क्या किया? आपने उनकी रोटी ही छीन ली।

डीबी कॉर्प प्रबंधन से मेरा सीधा सवाल है आपके पास कोई नौकरी क्यों करेगा। शायद अब आपके यहाँ कोई नौकरी की तलाश में बायोडाटा लेकर भी नहीं जाएगा। अगर गया तो वो भी आपको एक दिन बददुआ देगा। फिर ऐसा काम क्यों करना। उम्मीद है आपकी तरफ से जवाब मुझे जरूर मिलेगा। जवाब का इंतजार रहेगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्टिविस्ट
9322411335
shashikantsingh2@gmail.com

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जानिए, आजकल क्यों खुद को मरियल और फिसड्डी बताने में जुटा है दैनिक भास्कर!

जो अपनी क्लास में ही पांचवे या दसवें नंबर पर हो क्या वह शहर में अव्वल आने का दावा कर सकता है? कर तो नहीं सकता लेकिन हिंदी का एक बड़ा अखबार ऐसा ही करता आया है, आज से नहीं लंबे समय से… भारत का सबसे तेज बढ़ता, सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाला और भी न जाने क्या क्या दावा करने वाला अखबार दैनिक भास्कर… पर समय की गति देखिए कि कल तक खुद के बारे में बड़े बड़े दावे करने वाला यह अखबार अब खुद को मरियल और फिसड्‌डी बताने की जुगत में है। यहां तक कि ये अखबार अपने कर्मचारियों को अपनी गरीबी की दुहाई भी देने लगा है। है न अचरज की बात? चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि दैनिक भास्कर जैसा दुनिया के सबसे बड़े अखबारों में खुद को शामिल बताने वाला अखबार अब जगह जगह यह दावा सरकारी विभागों में दावा करता फिर रहा है कि वह तो फलां जगह आठवें और अमुक जगह दसवें नंबर का अखबार है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी (भास्कर समेत कई अखबारों पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का केस चल रहा है) कार्यरत पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से पैसा नहीं दे रहे अखबारों को अब बकाए की भी राशि देना है जो हर कर्मचारी के लिए लाखों रुपए में बन रही है। चूंकि इस वेज बोर्ड की अनुशंसाओं में वर्गीकरण टर्नओवर के हिसाब से है इसलिए अब भास्कर खुद को पिद्दू सा अखबार बताने की चालबाजी कर रहा है। वैसे तो मजीठिया वेतन व बकाया न देने के लिए कई हथकंडे अपनाए जा रहे हैं जिनमें डराने धमकाने से लेकर नौकरी से निकालने और हजारों किलोमीटर की दूरी पर तबादला करना भी शामिल है लेकिन इसके बावजूद बकाया वाला मामला तो सैटल करना ही होगा और यही राशि प्रति कर्मचारी लाखों रुपए तक पहुंच रही है।

ऐसे में अखबार मालिक चाह रहे हैं कि खुद को इतना मरियल, फिसड्‌डी और कंगाल बता दें कि कम से कम पैसा देना पड़े। वैसे अच्छा था कि अखबार किसी भी दबाव के बिना ही खुद की हकीकत पर नजर डालते लेकिन इसी बिंदु पर नया पेंच आ खड़ा हुआ है जहां भास्कर खुद को श्रम विभाग के सामने दीन हीन बता रहा है वहीं सरकारी विज्ञापन लेने के लिए खुद को इतना बड़ा और फैला हुआ बताता है जितना कि वह हकीकत में है ही नहीं। यानी एक ही सरकार के दो अलग अलग विभागों के सामने खुद को अलग अलग तरह से पेश किया जा रहा है।

यही हाल जनता के सामने भी है जब डीबी कॉर्प लिमिटेड अपने शेयरहोल्डर्स के सामने रिपोर्ट पेश करता है तो करोड़ों के मुनाफे और अरबों के नए प्रोजेक्ट्स दिखाता है लेकिन जब अपने ही कर्मचारियों की बारी आती है तो बार बार यही कहा जाता है कि मंदी का असर हो रहा है और  फलां क्वार्टर तो बहुत ही बुरा गया है इसलिए इस बार इंक्रीमेंट भी दिया जा सकेगा या नहीं यह सोचना पड़ेगा। थाेड़ा सा और गहराई में जाएंगे तो पता चलेगा कि भास्कर जितने राज्य और जितने संस्करण बताता है उतने की तो मालिकी ही इनके पास नहीं है, जैसे मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में मालिकी रमेशचंद्र अग्रवाल के चेयरमेन वाले ग्रुप की है लेकिन वहीं जबलपुर सहित कई बड़े एडिशन मनमोहन अग्रवाल के मालिकी वाले हैं।

महाराष्ट्र को डीबी कॉर्प अपनी मालिकी में बताकर कॉर्पोरेट विज्ञापन लेता है लेकिन पूरे महाराष्ट्र में ‘दैनिक भास्कर’ के नाम से सुधीर अग्रवाल हिंदी अखबार नहीं निकाल सकते क्योंकि टाईटल को लेकर समझौता ही ऐसा हुआ है। अब सवाल यह कि किस विभाग को दी गई जानकारी स्टैंडर्ड मानी जाए और किस विभाग को दी गई झूठी जानकारी के आधार पर इस पर केस लगाया जाए? यदि डीएवीपी, शेयरहोल्डर्स और कॉरपोरेट विज्ञापन के लिए दी गई जानकारी को सही मानें तो उन जानकारियों का क्या जो अखबार श्रम विभाग को उपलब्ध करा रहा है और जिसमें वह खुद को फिसड्‌डी बताने में कमाल कर रहा है।

हां, एक दूसरा कमाल भी चल रहा है कि सालोंसाल संपादकीय में रहे व्यक्ति को यह दस्तावेज दिए जा रहे हैं कि वह तो मैनेजर या सुपरवाइजर स्तर का है। कुछ मामले तो ऐसे हो गए हैं जिनमें एक ही व्यक्ति यह साबित करने की स्थिति में आ गया है कि वह एक ही समय में संपादकीय दायित्व भी संभाल रहा था और उसे मैनेजेरियल जिम्मदारियां भी दे दी गई थीं। कोई तो इन्हें बताए कि झूठे दस्तावेज पेश करने की सजा क्या हो सकती है। यदि ये दस्तावेज सुप्रीमकोर्ट में पेश कर दिए जाएं तो इनका खुद को मरियल, फिसड्‌डी और कंगाल बताने वाला झूठ, सच में भी बदल सकता है।

लेखक आदित्य पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क adityanaditya@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

आदित्य पांडेय की अन्य रिपोर्ट्स भी पढ़ें…

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भास्कर को झटके पर झटका, पत्रकार धर्मेंद्र के बाद अब रिसेप्शनिस्ट लतिका के भी ट्रांसफर पर कोर्ट ने लगाई रोक

भारत में ‘ज़िद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाले डीबी कॉर्प को लगातार झटके लग रहे हैं, किंतु भास्कर प्रबंधन है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगने पर अपने प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का मुम्बई से सीकर (राजस्थान) ट्रांसफर कर दिया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह अदालत की शरण में गए और इंडस्ट्रियल कोर्ट ने इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी। इसके बाद अब भास्कर की सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) अक्षता करंगुटकर ने डी बी कॉर्प के मुम्बई के माहिम स्थित कार्यालय में कार्यरत महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण का सोलापुर में ट्रांसफर कर दिया।

लतिका ने भी मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर तथा प्रमोशन की मांग को लेकर 17(1) के तहत कामगार आयुक्त कार्यालय में रिकवरी क्लेम लगाया हुआ है। इस बात का पता जैसे ही भास्कर प्रबंधन को चला कि लतिका ने रिकवरी क्लेम लगाया है, भास्कर प्रबंधन ने उन्हें कुछ ले-दे कर क्लेम वापस लेने को कहा। जब लतिका ने इनकार कर दिया तो अक्षता करंगुटकर ने उन्हें सीधे तौर पर धमकी दी कि ‘मैं तुम्हारा करियर बर्बाद कर दूंगी!’ यहां बताना आवश्यक है कि लतिका ने इसकी लिखित शिकायत कामगार विभाग में भी की है। यह बात और है कि लतिका के फैसले से गुस्साई अक्षता करंगुटकर ने उसी दिन उनका ट्रांसफर सोलापुर में कर दिया और घर पर ट्रांसफर लेटर भेज दिया।

यही नहीं, अगले दिन से लतिका चव्हाण के डीबी कॅार्प (माहिम) दफ्तर में प्रवेश पर रोक तक लगा दी गई! प्रबंधन के इस मनमाने रवैये से क्षुब्ध लतिका ने मजीठिया वेज बोर्ड हेतु पत्रकारों के पक्ष में लड़ाई लड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा से बात की। तत्पश्चात उन्हीं की सलाह पर इंडस्ट्रियल कोर्ट में डीबी कॉर्प के एमडी सुधीर अग्रवाल और सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) अक्षता करंगुटकर के साथ-साथ डी बी कॉर्प को भी पार्टी बनाते हुए एक केस फ़ाइल कर दिया।

इस मामले में लतिका चव्हाण का इंडस्ट्रियल कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा युवा एडवोकेट महेश शुक्ला ने। मामले की सुनवाई न्यायाधीश सूर्यवंशी जी ने किया। न्यायाधीश ने लतिका आत्माराम चव्हाण के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी। इस आदेश की जानकारी मिलते ही भास्कर कर्मियों में जहां एक बार फिर ख़ुशी फैल गई, वहीं भास्कर प्रबंधन इस दोहरे झटके से सकते में है! वैसे आपको बता दूं कि भास्कर प्रबंधन ने एक साल पहले भी अपने पत्रकार इंद्र कुमार जैन का ट्रांसफर किया था, मगर तब भी उसे मुंहकी खानी पड़ी थी। फिर 10 अक्टूबर को धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के ट्रांसफर और उस पर लगी अदालती रोक के बाद तो भास्कर की पूरे भारत में थू-थू हो रही है!

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
मोबाइल: 09322411335

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भास्कर के पत्रकार ने प्रबंधन को दिया जोरदार झटका, अदालत से ट्रांसफर रुकवाया

मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के कारण भास्कर प्रबंधन ने अपने पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का कर दिया था ट्रांसफर…

मुम्बई के तेज-तर्रार पत्रकारों में से एक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगे जाने पर राजस्थान के सीकर में ट्रांसफर कर दिया था। मुम्बई में दैनिक भास्कर में एंटरटेनमेंट बीट के लिए प्रिंसिपल करेस्पांडेंट पद पर कार्यरत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को भास्कर प्रबंधन ने पहले उन्हें लालच दिया कि कुछ ले-दे कर मामला ख़त्म करो। फिर उन्हें भास्कर की सहायक महाप्रबंधक अक्षता करंगुटकर (कार्मिक) ने धमकी दी, जिसकी शिकायत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने श्रम आयुक्त से की।

जब धमकी से भी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह नहीं डरे तो उनका राजस्थान के सीकर में एंटरटेनमेंट पेज के लिए ट्रांसफर कर दिया गया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का ट्रांसफर लेटर ठीक उस दिन उन्हें घर पर मिला, जब वे मजीठिया वेज बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई के लिए दिल्ली गए थे। दिल्ली से वापस आये तो उन्हें दफ्तर में जाने नहीं दिया गया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पत्रकारों की तरफ से मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा से सलाह ले कर इंडस्ट्रियल कोर्ट की शरण ली, जहां इंडस्ट्रियल कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा युवा एडवोकेट महेश शुक्ल ने।

इस बहस के दौरान इंडस्ट्रियल कोर्ट के जज श्री एस. डी. सूर्यवंशी ने मौखिक टिप्पणी की कि मजीठिया वेज बोर्ड आज देश का सबसे गर्म मामला है। माननीय न्यायाधीश ने साफ़ कहा कि डी बी कॉर्प ने धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का ट्रांसफर गलत तरीके से किया है। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने डीबी कॉर्प के एम. डी. सुधीर अग्रवाल और कार्मिक विभाग की सहायक महाप्रबंधक अक्षता करंगुटकर सहित कंपनी को भी अदालत में पार्टी बनाया है। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह की मदद की रविन्द्र अग्रवाल सरीखे देश के दूसरे पत्रकारों ने, जिन्होंने ऐन वक्त पर उन्हें तमाम जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाए। अदालत द्वारा धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के ट्रांसफर पर रोक लगाने से मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की लड़ाई लड़ रहे मीडियाकर्मियों में खुशी का माहौल है, जबकि भास्कर प्रबंधन के खेमे में निराशा है।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता
मुंबई
संपर्क : 9322411335

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भास्कर प्रबंधन एक जालसाज-वसूलीबाज को बचाने के लिए ब्रांड इमेज भी दांव पर लगाने को तैयार! (पढ़िए डीएनई आदित्य पांडेय की चिट्ठियां)

मीडिया के साथियों….

मैं आदित्य पांडे इंदौर डीबी स्टार में 3 अगस्त 2008 से कार्यरत हूं और फिलहाल डीएनई की पोस्ट पर हूं. लगभग 3 साल पहले संपादक के तौर पर आए श्री मनोज बिनवाल को मैं कभी भी पसंद नहीं रहा क्योंकि वे कमोबेश हर खबर में पैसा बनाने की राह तलाशने को पत्रकारिता मानते हैं. दिसंबर 2015 में मनोज बिनवाल ने मुझे सूचना दी कि न्यू ईयर टीम के साथ मुझे काम करने के लिए नेशनल एडीटर कल्पेश याग्निक ने चुना है. मैंने इस टीम में काम किया और एक जनवरी 2016 से मैं फिर अपने मूल काम यानी डीबी स्टार में लौट आया.

जनवरी 2016 में अचानक एक दिन मुझे कल्पेश याग्निक ने बुलाकर कहा कि आप न हमारे साथ काम कर रहे हैं और न ही डीबी स्टार में काम कर रहे हैं. मैं इस बात पर चौंक गया क्योंकि मैं लगातार अपना काम कर रहा था और आफिस के रिकार्ड से लेकर वीडियो रिकार्डिंग तक सभी से मेरी बात सही साबित हो रही थी लेकिन बिनवाल ने न जाने मेरे खिलाफ कल्पेश को क्या क्या कहा था कि वे सच सुनने को तैयार ही नहीं थे.

मैंने काफी कहा कि बिनवाल को सामने बुलाकर बात साफ कर ली जाए लेकिन इस पर भी कल्पेश राजी नहीं हुए. इस बीच मुझे पता चला कि बिनवाल ने एचआर के पास भी मेरी काफी शिकायतें की हैं लिहाजा मैंने एचआर की तत्कालीन स्टेट हेड जया आजाद से शिकायतों की जानकारी ली और बिनवाल के सारे झूठों की हकीकत एचआर हेड के सामने खुद बिनवाल की मौजूदगी में बता दी. इससे बिनवाल का बौखलाना स्वाभाविक था और इसी रौ में उन्होंने मुझे कह दिया कि अब मैं इंदौर तो क्या मध्यप्रदेश में भी काम नहीं कर सकता. लगभग एक महीने तक मुझे कोई काम नहीं दिया गया और डीबी स्टार में मेरी जगह एक रिटायर व्यक्ति को लाकर बैठा दिया गया.

मार्च अंत तक आते आते मेरा तबादला रायपुर कर दिया गया और इससे पहले यह देख लिया गया कि मेरे वहां जाने की कोई संभावना तो नहीं है. मैंने बजाए इस्तीफा देने के नेशनल एडीटर और एमडी सुधीर अग्रवाल से मिलकर अपनी बात रखने की राह चुनना बेहतर समझा और इसके लिए आवश्यक था कि मैं संस्थान में बना रहूं, इसलिए मैंने रायपुर में ज्वाइनिंग दे भी दी. पिछले छह महीने के समय में मैं एमडी को ई मेल और रजिस्टर्ड लेटर के जरिए सारी जानकारी भेज चुका हूं और हर बार मिलने के लिए समय की मांग भी कर चुका हूं. यही हालत कल्पेश याग्निक के मामले में है. चूंकि बिनवाल तो कल्पेश के खास आदमी हैं और तमाम हेरफेर व जालसाजी के मामलों की जानकारी होते हुए भी उन्हें बचाते रहे हैं इसलिए मुझे उनसे तो कोई उम्मीद भी नहीं थी लेकिन एमडी की तरफ से भी कोई जवाब मुझे नहीं मिला है.

इस पूरे मामले में एक कमाल की बात यह भी है कि बिनवाल पर अदालती आदेश के बाद पुलिस ने जालसाजी के एक मामले में एफआइआर भी दर्ज कर रखी है और भूमाफियाओं से उनके संबंध को लेकर कई सबूत भी कई स्तरों पर पेश किए जा चुके हैं. खुद भास्कर में बिनवाल पर अंदरूनी जांच हुई थी जिसमें महाशय के खिलाफ कई टिप्पणियां थीं लेकिन इस पर सच के पक्ष में जमकर लिखने वाले कल्पेश याग्निक ने ही कभी कार्रवाई नहीं होने दी. बिनवाल ने मेरे खिलाफ लंबी साजिशें कीं लेकिन एक मामले में भी वे कोई ठोस बात नहीं कह सके इसलिए उन्होंने मैनेजमेंट के गले यह बात उतारी कि यह व्यक्ति मजीठिया को लेकर दूसरे कर्मचारियों को प्रभावित कर सकता है और खुद भी संस्थान पर कानूनी कार्रवाई की ताक में है.

यही वजह है कि बिना किसी वजह के मेरा रायपुर तबादला कर दिया गया जबकि जालसाज और हर खबर के एवज में पैसे बनाने वाला बिनवाल मजे कर रहा है और अब भी रिपोर्टर वगैरह को साफ कह रहा है कितनी भी एफआईआर हो जाए, मेरा कोई कुछ बुरा नहीं होगा. आश्चर्य तो भास्कर प्रबंधन पर होता है जो एक जालसाज और वसूलीबाज को बचाने के लिए इस हद तक उतर जाता है कि ब्रांड इमेज को भी दांव पर लगाने को तैयार है और अपने एक ऐसे कर्मचारी के खिलाफ है जिसका अब तक का पूरा मीडिया का करियर बेदाग रहा है.

आदित्य पांडेय
adityanaditya@gmail.com


कुछ पत्राचार….

Dear Aditya Sir,

As discussed kindly deposit your laptop at Raipur IT department.

@Akash,

Kindly take laptop asset master no 420022353  Lenovo B4080, SN MP09C4RE with cordless mouse and send back to us.

Regards,
Ashok Patidar
ashok.patidar@dbcorp.in
IT – Indore
Extension – 2578 | Mobile – 9669393111

Dear ashok ji

first of all i simply want to mention that i deposited said laptop with wireless mouse, charger and other attachments along with my company ID and access card. infact i prebiously offered to deposit company laptop more than 5 times. as soon as i got transfer letter i contacted my senior mr binwal and talked about laptop also. he asked me to check HR policy about this.

HR persons were unaware of any set guideline of laptop policy in transfer case. they asked me to check it with IT. i talked to you in this reagrd and was assured that my asset ‘ll be transferred and there is no requirement for depositing it. it’s really disturbing and hurting that after assuring me i got mail for depositing laptop and that too with 5 persons in Cc and Bcc. i dont know who was the person behind maligning my image in such manner but for any existing employee such incident is hurting and kind of misbehave.

yours faithfully
aditya pandey
p.aditya@dbcorp.in
DNE, DB STAR, RAIPUR

……

आदरणीय सुधीर जी,
एमडी, दैनिक भास्कर

महोदय

गत 30 जनवरी को मैंने (आदित्य पाण्डे, डीएनई डीबी स्टार ) आपको एक पत्र लिखा था जिसमे मैंने अपने साथ हो रहे बर्ताव के बारे में बताया था और इ्सका भी जिक्र किया था कि डीबी स्टार संपादक श्री बिनवाल जो कुछ कर रहे हैं उसके बारे मे सच सुनने से समूह संपादक श्री कलपेश यागनिक साफ इंकार कर चुके हैं। दरअसल मैंने यह तक कहा कि वे श्री बिनवाल को सामने बुला लें ताकि मैं मामले की हक़ीक़त सार्वजनिक तौर पर बता सकूँ। आपको पत्र भेजने के बाद आपके दफ्तर की ओर से तो कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन श्री बिनवाल ने यह कहते हुए मेरा रायपुर ट्रान्सफर कर दिया कि अब मैं इंदौर तो क्या एमपी मे भी काम नहीं कर सकता।

बिनवाल एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनके खिलाफ कई आरोप हैं कुछ मामलों में तो सबूत भी दिये गए हैं और अब तो हालात यहाँ तक पहुँच गए हैं कि खुद अदालत ने आदेश दिया कि पुलिस एफआइआर दर्ज करे, आपको पता ही होगा कि मामला जालसाज़ी और 420 के अलावा क्रिमिनल कोन्स्पिरेसी का है श्री बिनवाल सिर्फ ऐसे लोगों को पसंद करते हैं जो उनके ऐसे कामों मे साथ खड़े हों… इससे पहले खुद भास्कर ने भी इन महाशय पर भ्रस्टचार को लेकर जांच बैठाई थी कमाल कि बात यह है कि उनके भ्रस्टाचार के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई हो चुकी है और यह सूची लंबी है जिसका मैं सबसे ताज़ा उदाहरण हूँ। आश्चर्य है कि व्हिसल ब्लौइंग पॉलिसी के खिलाफ खुद कंपनी ने व्हिसल ब्लौएर्स को प्रताड़ित करने की ताकत ऐसे (बिनवाल जैसे) लोगों को दे रखी है। बात मेरे ट्रान्सफर की नहीं है और मैं उसे लेकर तो कुछ कहना भी नहीं चाहता क्योंकि बिनवाल जी लंबे समय से चाहते रहे हैं कि मैं संस्थान छोड़ दूँ और उनके भ्रस्टाचार के लिए राह खाली कर दूँ।

पिछले दिनों मुझे यह लगने लगा कि शायद भास्कर समूह भी यही चाहता है। जाहिर है कि ऐसा महसूस होने के बाद संस्थान छोडना कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं रह जाता है लेकिन जिस संस्थान को मैंने अपने जीवन के 10 से ज्यादा साल दिए हों और जिस से मेरा 15 साल से ज्यादा का सतत संपर्क रहा हो, उसके शीर्ष प्रबंधन से मैं यह तो कह ही सकता हूँ कि मैंने कभी पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। साथ ही यह भी कि जो भ्रस्टाचारी मेरे दुश्मन बन बैठे हैं वो भी मुझ पर किसी तरह का आक्षेप नहीं लगा सकते हैं। मैंने अपने पिछले पत्र मे भी आपके बहुमूल्य समय में से दो मिनट चाहे थे और आज फिर मैं यही चाहता हूँ कि मुझ जैसे व्यक्ति को संस्थान में रहना चाहिए या नहीं ये खुद आप तय करें। कृपया मुझे दो मिनट का समय दें ताकि मैं अपना पक्ष रख सकूँ और संभव हो तो अपना सक्रिय योगदान संस्थान को देते रहने के बारे मे निर्णय कर सकूँ।

धन्यवाद
आपका स्नेहाकांक्षी
आदित्य पाण्डे (14143)
डीएनई, डीबी स्टार रायपुर

…….

आदरणीय श्री सुधीर अग्रवाल जी
एमडी, दैनिक भास्कर भोपाल

मैं आदित्य पांडे दैनिक भास्कर के डीबी स्टार इंदौर में 1 अगस्त 2008 से यानी इसके प्रकाशन से कुछ पहले से कार्यरत हूं और वर्तमान में डिप्टी न्यूज एडीटर के पद पर हूं। पिछले कुछ समय से मेरे साथ चल रही घटनाओं ने मुझे विचलित किया है और इससे सीधे मेरे कार्यनिष्पादन पर भी असर पड़ रहा है इसलिए मुझे आपको यह पत्र लिखने को मजबूर होना पड़ रहा है। दो महीने पहले मेरे इमीजिएट बॉस और डीबी स्टार(इंदौर मप्र) के मुखिया श्री मनोज बिनवाल किन्हीं संजय मिश्रा नाम के सज्जन को साथ लाए। मुझसे उनका परिचय कराते हुए श्री बिनवाल ने कहा कि मिश्राजी को कल्पेशजी की टीम में काम करने के लिए लाया गया है लेकिन सिटी डीबी स्टार का काम और मेट्रिक्स सॉफ्टवेयर समझाने के लिए उन्हें कुछ समय यहां रखा जाएगा आप इन्हें आवश्यक मदद करते रहें। खुद मिश्राजी का भी यही कथन था जिस पर भरोसा न करने का कोई कारण मेरे पास नहीं था।

दिसंबर के पहले हफ्ते के बाद मुझे श्री बिनवाल की ओर से मेरे वॉट्सएप, मैसेंजर, भास्कर मेल और निजी आईडी और आखिरकार फोन पर बताया गया कि मुझे नए साल के बनाई गई टीम में काम करना है। इस विषय पर मैंने निर्देशों के अनुसार श्री कल्पेश से मुलाकात की और उनसे दो दिन की मोहलत चाही क्योंकि तब मेरी पत्नी को टाइफाइड व कुछ अन्य स्वास्थ्यगत परेशानियां थीं। श्री कल्पेश याग्निक के शब्दों में ‘’मेरे पास काम करने के लिए काफी लोग हैं लेकिन मनोज (बिनवाल ) ने कहा कि डेस्क हेड के तौर पर संजय मिश्रा को रखा जा सकता है इसलिए आदित्य जी का क्या करें। मैंने उन्हें यही कहा है कि मैं आदित्य को कहीं ‘एब्जॉर्ब’ कर सकता हूं।‘’

इस संवाद के बाद मैं नए साल की टीम के सदस्यों के साथ काम में जुट गया जिसमें अमूमन काम के घंटे सामान्य से दोगुना या उससे भी ज्यादा हो जाते थे। यह सिलसिला 31 दिसंबर तक चला। 31 दिसंबर और 1 जनवरी की दरमियानी रात लगभग एक बजे श्री कल्पेश ने पूरी टीम को नए साल की बधाइयां देते हुए अपने अपने कार्यक्षेत्र लौट जाने की इजाजत दे दी। इससे अगले ही कार्यदिवस पर मैं श्री बिनवाल की मौखिक अनुमति के साथ डीबी स्टार में काम पर लौट आया और बाकायदा वे सभी कार्य संपादित करने लगा जो डीएनई के नाते मुझे करने चाहिए। श्री बिनवाल जो कि खबरों के संबंध में लेन देन के विशेषज्ञ माने जाते हैं मुझसे लंबे समय से इस बात को लेकर परेशान हैं कि प्रायोजित खबरें या किसी एक पक्षीय खबर को लेकर मैं कड़ी आपत्ति करता रहा हूं।

नेशनल आइडिएशन रुम में काम करने के बाद श्री बिनवाल का व्यवहार ज्यादा आ्क्रामक हो गया इसी के चलते वो मेरे अधीनस्थों से सीधे संवाद करते हुए मुझे दरकिनार बताने की कोशिश कर रहे थे। यहां तक कि बिटवीन द लाइंस का वह कॉलम जो शुरुआत से अब तक मैंने बिना किसी कांट छांट के स्वयं ही लिखा और इसमें कोई संपादन नहीं किया जाता था वह अब दखलंदाजी का शिकार होने लगा, दुख इ बात का था कि इस प्रक्रिया में काम के स्तर का भी ध्यान नहीं रखा गया। मैं डीबी स्टार में पूरा समय देने व कार्य करने के दौरान कई कई बार श्री बिनवाल से मिलता और संवाद करता रहा और श्री बिनवाल से अनुरोध करता रहा कि वे एचआर को आवश्यक मेल तो डाल दें ताकि यह पता रहे कि मैंने टाइमिंग में कोई कोताही नहीं बरती बल्कि मैं स्पेशल प्रोजेक्ट पर कार्यरत था।

कमाल यह कि नए साल की टीम में चुने जाने की सूचना पांच माध्यमों से देने वाले श्री बिनवाल ने एक भी ऐसा मेल मुझे लेकर एचआर को नहीं किया ताकि मैं प्रताड़ित होता रहूं और एचआर मुझसे सफाई मांगे। मेरे लगातार आने का सिलसिला 16 जनवरी तक चला जबकि मैंने आवश्यक कार्य से मुंबई जाने के लिए तीन दिन अवकाश का आवेदन दिया। श्री बिनवाल से स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि इतनी दूर जाने पर यदि एक दो दिन और रुकने की आवश्यकता हो तो मैं अवकाश बढ़ा दूंगा। मैं इसमें उनकी सदाशयता देख रहा था लेकिन बाद में पता चला कि वे इस समय का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से मुझे हटाकर संजय मिश्रा को मेरी जगह लाने पर करना चाहते थे। मुंबई में मुझे वाकई एक दिन अतिरिक्त छुट्‌टी की जरुरत पड़ी जिसे मैंने बिनवाल के आश्वासन के आधार पर ले लिया और उन्हें इस बाबत जानकारी दे दी।

मुझे 20 तारीख को श्री बिनवाल ने कहा कि मुझे नेशनल एडीटर कल्पेश याग्निक से कल ही मिलना है। निर्देशानुसार मैंने श्री कल्पेश से मुलाकात की जो मुझसे पहले किसी व्यक्ति को डांटने के लिए लगभग पूरे न्यूजरूम के लोगों को एकत्र कर चुके थे जिनमें मैं भी एक था। इसके तुरंत बाद जैसे ही कल्पेशजी ने मुझे देखा तो मुझे कहा आप इस्तीफा लिख दें। मैं अवाक रह गया। मैंने उनका गुस्सा शांत करते हुए वजह समझने की कोशिश की लेकिन इस दौरान मुझे सभी के सामने काफी भला बुरा कहते हुए झूठा, कामचोर और स्वेच्छचारिता करने वाला बताया गया। मैंने कहा कि यदि कहीं कोई गलतफहमी हुई है तो श्री बिनवाल को बुलाकर इसे दूर किया जा सकता है लेकिन इस संभावना से साफ इंकार कर दिया गया। लगभग 15 मिनट तक मुझे अपमानजनक तरीके से काफी कुछ कहा गया और इसी दौरान मुझे यह भी कहा गया कि अब डीबी स्टार में आपकी जगह संजय मिश्रा को रख लिया गया है इसलिए आपको अपनी सीट पर बैठने की इजाजत नहीं है। मुझे तनख्वाह न बनने देने की बात भी कही गई।

बाद में मुझे कहा गया कि आप अपनी ओर से पूरी बात एक पत्र में बताएं कि आपने आदेश क्यों नही माना (जबकि कोई आदेश दिया ही नहीं गया था), इसके बाद ही आपके लिए नई जिम्मेदारी के बारे में सोचा जा सकेगा। हकीकत यह है कि मुझे मेरी जिम्मेदारियों में परिवर्तन संबंधी किसी तरह का कोई निर्देश या आदेश नहीं दिया गया था, न लिखित और न ही मौखिक। नए साल की टीम में शामिल किए जाने संबंधी सूचना के बाद से श्री बिनवाल की ओर से मुझे किसी तरह से इस बारे में बताया नहीं गया। इस बाबत जो मेल मैंने श्री कल्पेश और उनके सहयोगी श्री शक्ति को भेजा उसका जवाब मुझे आज तक नहीं मिल सका है जबकि मैं प्रतिदिन ऑफिस पहुंच रहा हूं और उपयुक्त समय भी दे रहा हूं। मुझे डीबी स्टार में बैठने से इंकार किया गया है और नई जगह नहीं दी गई है इसलिए मुझे ऑफिस कैंपस में यायावर की तरह उपस्थित दर्ज करानी पड़ रही है और इससे भी बढ़कर कि मुझ जैसे कर्मठ व्यक्ति को कोई काम नहीं दिया जा रहा है। कृपया इन स्थितियों में मेरा मार्गदर्शन करें। इससे इतर भी कुछ बातें मैं आपसे साझा करना चाहता हूं, यदि आप मुझ अकिंचन के लिए कुछ समय निकाल पाएं तो मैं महज दो तीन मिनट का समय लेना चाहूंगा। धन्यवाद।

दिनांक 28 जनवरी 2016
आपका
आदित्य पांडे
डीएनई, डीबी स्टार इंदौर

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इस्तीफे का दबाव देने पर सहायक कामगार आयुक्त ने भास्कर प्रबंधन को जमकर लताड़ लगाई

अपने कर्मचारियों को हमेशा तंग करने, कम भुगतान देने, आत्महत्या के लिए उकसाने और जबरन त्यागपत्र मांगने के मामले में बदनाम दैनिक भास्कर प्रबंधन को मुम्बई में मुंहकी खानी पड़ी। यहाँ मुम्बई के सहायक कामगार आयुक्त सीआर राउत के समक्ष दैनिक भास्कर के प्रिंसपल करेस्पांडेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा दायर 40 लाख रुपये के क्लेम मामले की सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान भास्कर प्रबंधन के अधिवक्ता और कार्मिक विभाग के कर्मचारी ने कहा कि उन्हें ये पत्र देर से मिला इसलिए उन्हें जवाब देने के लिए एक महीने का वक्त दिया जाए।

इस पर धर्मेंद्र प्रताप सिंह की तरफ से आये बीयूजे के जनरल सेक्रेटरी एमजे पांडे ने कड़ा एतराज जताया। सहायक कामगार आयुक्त सीआर राउत ने साफ़ कहा कि आपको 15 दिन से ज्यादा समय नहीं दिया जा सकता। इस दौरान धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने श्री राउत से कहा कि भास्कर प्रबंधन और संपादक उन्हें त्याग पत्र देने के लिए दबाव बना रहे हैं। इसके बाद श्री राउत ने भास्कर के कार्मिक प्रबंधन को जमकर लताड़ लगाई और कहा कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। शिकायतकर्ता को इस तरह का दबाव देना बंद कीजिये।

इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 जुलाई को दोपहर 12 बजे रखी गयी है जिसमें दैनिक भास्कर प्रबंधन को अपना जवाब लेकर आने को कहा गया है।  मुंहकी खाने के बाद भास्कर प्रबंधन के लोग काफी टेंशन में नजर आ रहे हैं। फिलहाल आपको बता दूँ कि धर्मेन्द्र प्रताप सिंह मुम्बई के फिल्म पत्रकारों में काफी जुझारू पत्रकार माने जाते हैं और उन्होंने भास्कर प्रबंधन के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड के तहत हक पाने का केस दायर कर रखा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार औरआर टी आई एक्टिविस्ट
9322411335
shashikantsingh2@gmail.com

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आईएएस अफसर की बेटी ने भास्कर वालों के मॉल में बने चेंजिंग रूम से हिडन कैमरा पकड़ा

Praveen Khariwal : भोपाल। डीबी सिटी मॉल के United Colors of Benetton शोरुम में चैंजिंग रूम में मोबाइल कैमरा फिट करने वाले आरोपी ने पुलिस को बताया है कि मॉल के कई शोरूमों में हिडन कैमरे लगे हैं और लड़कियों की वीडियो बनाई जाती है। उसने बताया कि उसने भी कई लड़कियों के वीडियो बनाए हैं। बता दें कि मप्र के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की बेटी ने ट्रायल रूम में लगा कैमरा पकड़ा था। उसके बाद यह मामला सामने आया और आरोपी को गिरफ्तर किया गया।

पुलिस पूछताछ में आरोपी रघु ने मॉल के विभिन्न दुकानों के ट्रायल रुम में महिलाओं के वीडियो बनाने के बारे में कई सनसनी खेज खुलासे किए हैं। आरोपी रघुनाथ ने पुलिस को बताया कि डीबी मॉल के दूसरे शोरुम के सेल्समेन भी ट्रायल रूम में युवतियों के इस तर के वीडियो बनाते हैं। आरोपी के इस खुलासे से पुलिस सकते में है। पुलिस का मानना है कि ट्रायल रूम में वीडियोग्राफी एक रैकेट की तरह आपरेट हो रही है।

इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण खारीवाल की एफबी वॉल से.

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आहत पत्रकार ने नौकरी छोड़कर दैनिक भास्कर के मालिकान और संपादक पर किया मानहानि का केस

दैनिक भास्कर की एक खबर से मर्माहत झारखंड के गिरिडीह जिले के प्रतिष्ठित अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा ने अखबार के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल समेत स्टेट हेड ओम गौड़ और धनबाद यूनिट के प्रभारी स्थानीय संपादक राकेश पाठक पर मानहानि का केस किया है। मालूम हो कि 23 अप्रैल 2016 को एक खबर में अधिवक्ता को आरोपी लिखा गया था। किसी मामले में उनके घर पुलिस गयी थी, मगर खबर में श्री सिन्हा को आरोपी बताया गया था।

इस खबर के छपने पर अखबार के विधि संवाददाता और अधिवक्ता अंजनी कुमार सिन्हा (अजय कुमार सिन्हा के छोटे भाई) ने अखबार को बाय बाय बोल दिया। खबर से पूरा परिवार इतना मर्माहत हुआ कि अखबार को लीगल नोटिस भेजा गया था। मगर, अखबार प्रबंधन ने कोई पहल नहीं की तो आखिरकार 31 मई को दैनिक भास्कर प्रबंधन पर गिरिडीह मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में केस दर्ज किया।

क्या थी खबर?

मालूम हो कि कोई शरारती तत्व भास्कर के विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा, उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा के नाम से पिछले एक साल से फर्जी धमकी भरी चिट्ठियां हाई प्रोफाइल लोगों को भेजा करता था। इसी तरह की एक चिट्ठी में एयरपोर्ट और पटना जंक्शन व विधानसभा अध्यक्ष को उड़ाने की धमकी दी गयी थी। इस चिट्ठी में निवेदक की जगह विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा, उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा का नाम था।

दोनों भाईयों को चिट्ठी में नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का लीडर लिखा गया था। इस चिट्ठी पर सच्चाई जांचने पहुंची पुलिस वाली खबर में सभी अखबारों ने विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा, उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा का पक्ष भी लिया था। गया पुलिस को गिरिडीह पुलिस से ये जानकारी मिली कि इस परिवार को कुछ शरारती लोग पिछले एक साल से फर्जी चिट्ठी भेज कर परेशान कर रहे हैं। जबकि खुद विधि संवाददाता अंजनी सिन्हा के अखबार में जो खबर छपी उसमें उनका या उनके भाई अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा का पक्ष नहीं लिया गया। साथ ही उन्हें आरोपी बताया गया। इसी बात से सिन्हा परिवार नाराज था और अखबार प्रबंधन के खिलाफ केस किया गया।

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