दैनिक भास्कर के जालंधर आफिस की कुर्की का आदेश

BHASKAR

मजीठिया वेजबोर्ड का बकाया ना देने के कारण होगी कार्रवाई… ए.एल.सी. द्वारा पास किया 23.52 लाख का क्लेम ब्याज सहित अदा ना किया तो होगी भास्कर कार्यालय की नीलामी…

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां सहायक लेबर कमिश्रर फिरोजपुर की कोर्ट द्वारा भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा को 23 लाख 52 हजार 945 रुपये 99 पैसे की राशि देने के आदेश के बाद भास्कर प्रबंधन द्वारा आनाकानी करने के उपरांत भास्कर के जालंधर कार्यालय की संपत्ति की कुर्की का आदेश हो गया है। भास्कर की प्रॉपर्टी अटैच करके वहां नोटिस भेज दी गयी है। जल्दी ही नीलामी की कार्यवाही शुरू कर कोर्ट राजेन्द्र मल्होत्रा को उसका बकाया हक दिलवाएगी। Continue reading

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भोपाल के कुछ अखबारों ने घोटालेबाज सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल की सचित्र खबर ली, देखें वीडियो

भास्कर ग्रुप से पीड़ित भोपाल के कुछ अखबारों ने घोटालेबाज सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल की सचित्र खबर ली है… इनने विस्तार से खबर प्रकाशित की है. लेकिन दैनिक जागरण हो या अमर उजाला, दैनिक हिंदुस्तान हो या टाइम्स आफ इंडिया… आजतक हो या कलतक, इंडिया टीवी हो या इंडिया न्यूज… इन सब बड़े अखबारों और चैनलों ने इस बड़े घपले-घोटाले में गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने की खबर को दबा-पचा लिया…

पूरे प्रकरण पर एक विशेष रिपोर्ट देखें… नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें….

मूल खबर ये है….

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हजारों करोड़ के घोटाले में दैनिक भास्कर के मालिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

42 कम्पनियों का 7536 करोड़ का घोटाला : सुधीर अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल के ख़िलाफ़ गिरफ्तारी वारंट जारी… EOW ने घोटाले के आरोपियों के नामों का खुलासा किया… पढ़िए आर्थिक अनुसंधान शाखा द्वारा जारी प्रेस रिलीज…

भोपाल । मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष, संचालक मण्डल, प्रबंध संचालक एवं अन्य अधिकारियों ने षडयंत्रपूर्वक बेईमानी के इरादे से छल करते हुए लगभग 42 डिफॉल्टर कम्पनियों के प्रवर्तकों / संचालको से सांठगांठ कर उन्हें अवैध रूप से लाभान्वित किया। इससे शासन और निगम को ब्याज सहित लगभग 719 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हुई थी। दिनांक 31. 09. 2017 की स्थिति में यह हानि बढ़कर ब्याज सहित 7536.57 करोड़ रुपये हो चुकी है।

मध्य प्रदेश राज्य ओैद्योगिक विकास निगम भोपाल के संबंध में प्राप्त घोटाले संबंधी सूचनाओं पर आर्थिक अनुसंधान प्रकोष्ठ में हुई गड़बड़ियों/अनियमितताओं के संबंध में प्रथम सूचना पत्र क्रमांक 25/04 पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। इसमें विवेचना उपरांत आरोपी पांच लोकसेवक 1. श्री राजेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन अध्यक्ष एम.पी.एस.आई.डी.सी. 2. श्री अजय आचार्य, तत्कालीन संचालक एम.पी.एस.आई.डी.सी 3. श्री जे.एस.राममूर्ती, तत्कालीन संचालक एम.पी.एस.आई.डी.सी 4. श्री एम.पी.राजन, तत्कालीन प्रबंध संचालक, 5. श्री नरेन्द्र नाहटा, तत्कालीन अध्यक्ष एम.पी.एस.आई.डी.सी एवं 20 कंपनियों के प्रवर्तक / संचालकगणों के विरूद्ध विवेचना उपरांत पूर्व अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। 

प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान के पश्चात आरोपी कंपनी मेसर्स भास्कर इण्डस्ट्रिज लिमिटेड के श्री सुधीर अग्रवाल, तत्कालीन संचालक, श्री गिरीश अग्रवाल, तत्कालीन संचालक एवं श्री नागेन्द्र मोहन शुक्ला, तत्कालीन कार्यपालिक संचालक एवं निगम के तत्कालीन अध्यक्ष, श्री राजेन्द्र कुमार सिंह एवं श्री नरेन्द्र नाहटा, तत्कालीन संचालक, श्री अजय आचार्य, तत्कालीन प्रबंध संचालक श्री एम.पी.राजन, तत्कालीन महाप्रबंधक लेखा, स्व0 श्री एम.एल.स्वर्णकार के विरूद्ध धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी, भादवि0 एवं 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) भ्रनिअ0 1988 के अंतर्गत माननीय विशेष न्यायालय (एम.पी.एस.आई.डी.सी.), भोपाल के समक्ष आज दिनांक 27.02.2018 को अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है।

आरोपी श्री नागेन्द्र मोहन शुक्ला माननीय न्यायालय में उपस्थित हुए। उनकी ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा जमानत पर रिहा किया गया। आरोपी श्री सुधीर अग्रवाल एवं श्री गिरीश अग्रवाल नोटिस तामीली उपरांत भी उपस्थित नहीं होने से माननीय न्यायालय द्वारा दोनों के विरूद्ध गिरफ्तारी वारण्ट जारी किया गया। 

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फिरोजपुर से भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा के पक्ष में जारी हुयी साढ़े बाईस लाख की आरसी

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां दैनिक भास्कर में कार्यरत ब्यूरो चीफ राजेन्द्र मल्होत्रा के आवेदन को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक भास्कर प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी की है। राजेन्द्र मल्होत्रा ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अपने बकाये की रकम के लिये सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा की देख-रेख में फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त के समक्ष १७ (१) का क्लेम लगाया था।

इसके बाद कंपनी को नोटिस मिली तो दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कार्प ने राजेन्द्र मल्होत्रा का ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया। उसके बाद राजेन्द्र मल्होत्रा ने एडवोकेट उमेश शर्मा के बताये रास्ते पर चलते हुये फिरोजपुर के इंडस्ट्रीयल कोर्ट में केस लगाया और ट्रांसफर पर स्टे की मांग की। इंडस्ट्रीयल कोर्ट के स्थानीय एडवोकेट ने राजेन्द्र मल्होत्रा का मजबूती से पक्ष रखा और इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने राजेन्द्र के ट्रांसफर पर रोक लगा दी।

इसके बाद राजेन्द्र कंपनी में ज्वाईन करने गये तो उन्हे कंपनी ने ज्वाईन नहीं कराया। इसके बाद भी राजेन्द्र मल्होत्रा ने हिम्मत नहीं हारी तथा डीबी कार्प के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल, स्टेट हेड बलदेव शर्मा, कार्मिक विभाग के हेड मनोज धवन, एडिटर नरेन्द्र शर्मा और रोहित चौधरी सहित पांच लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस फाईल किया। इसकी सुनवाई चल रही है।

उधर राजेन्द्र मल्होत्रा के मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार मांगे गये दावे को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी कर दी है। राजेन्द्र मल्होत्रा दैनिक भास्कर में पहले स्ट्रिंगर थे। बाद में उन्हें रिपोर्टर बनाया गया। उसके बाद उन्हें चीफ रिपोर्टर बनाया गया। चीफ रिपोर्टर बनने के बाद उन्हें ब्यूरो चीफ बना दिया गया। मगर जैसे ही उन्होंने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड की मांग की, उनका ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया गया। मगर अब कंपनी के पास बकाया देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक भास्कर के खिलाफ एक और आरसी जारी

मुंबई से खबर आ रही है कि यहां दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लिमिटेड में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे का रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) जारी किया गया है। इस आरसी को मुंबई (उपनगर) के कलेक्टर को भेज कर आदेश दिया गया है कि वह आवेदक के पक्ष में कंपनी से भू-राजस्व की भांति वसूली करें और आवेदक अस्बर्ट गोंजाल्विस को यह धनराशि प्रदान कराएं। आपको बता दें कि इस मामले में अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अपने एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिए मुंबई उच्च न्यायालय में कैविएट भी लगवा दी है।

डी. बी. कॉर्प लि. के मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स वाले कार्यालय में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस का कंपनी ने अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अदालत की शरण ली और उधर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने बकाये की रकम और वेतन-वृद्धि के लिए उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के दिशा-निर्देश पर चलते हुए मुंबई के कामगार विभाग में क्लेम भी लगा दिया था।

करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद लेबर विभाग ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष को सही पाया तथा कंपनी को नोटिस जारी कर साफ कहा कि वह आवेदक को उसका बकाया 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे जमा कराए, परंतु दुनिया के चौथे सबसे बड़े अखबार होने के घमंड में चूर दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लि. ने जब यह पैसा नहीं जमा किया तो सहायक कामगार आयुक्त वी. आर. जाधव ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में आरसी जारी कर दी और कलेक्टर को आदेश दिया कि वह डी. बी. कॉर्प लि. से भू-राजस्व नियम के तहत उक्त राशि की वसूली करके अस्बर्ट गोंजाल्विस को दिलाएं।

गौरतलब है कि इसके पहले डी. बी. कॉर्प लि. के समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के साथ रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख के पक्ष में भी कामगार विभाग ने आरसी जारी की थी… यह संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में जारी हुई पहली आरसी थी, मगर आरसी का विरोध करने के लिए संबंधित कंपनी जब मुंबई उच्च न्यायालय गई तो माननीय उच्च न्यायालय ने डी. बी. कॉर्प लि. को निर्देश दिया कि वह तीनों आवेदकों के बकाये रकम में से सर्वप्रथम 50 प्रतिशत रकम कोर्ट में जमा करे।

मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद डी. बी. कॉर्प लि. सर्वोच्च न्यायालय चली गई, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश पर उसे दखल देने की आवश्यकता नहीं है, अत: डी. बी. कॉर्प लि. के अनुरोध को खारिज किया जाता है। ऐसे में इस कंपनी के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा डी. बी. कॉर्प लि. पुन: मुंबई उच्च न्यायालय आई और धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के बकाये में से 50 फीसदी की राशि वहां जमा करा दिया। सो, माना जा रहा है कि अस्बर्ट गोंजाल्विस के मामले में भी अब डी. बी. कॉर्प लि. को जल्दी ही उनके बकाये की 50 प्रतिशत रकम मुंबई उच्च न्यायालय में जमा करानी होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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डीबी कार्प के खिलाफ पीएफ विभाग ने शुरू की जांच

केन्द्रीय भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय औरंगाबाद ने दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कार्प के खिलाफ इस कंपनी के कर्मचारी सुधीर जगदाले की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त -१ प्रभारी अधिकारी एम एच वारसी ने ८ नवंबर २०१७ को सुधीर जगदाले को लिखे पत्र में यह जानकारी दी है। सुधीर जगदाले का आरोप है कि वे डीबी कार्प के दैनिक अखबार दिव्य मराठी में काम करते हैं और कंपनी उनका पीएफ सिर्फ बेसिक पर काट रही है जो पूरी तरह गलत है।

सुधीर जगदाले का आरोप है कि डीबी कार्प के दैनिक दिव्य मराठी का प्रबंधन अधिकांश कर्मचारियों का बेसिक पर ही पीएफ काट रहा है और उन्हें डीए की सुविधा नहीं दी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि डीबी कार्प इस मामले में जांच के दौरान पीएफ कार्यालय को कोई ठोस सबूत नहीं दे पाया कि वह कर्मचारियों के सिर्फ बेसिक से ही पीएफ कटौती क्यों कर रहा है। इस मामले में सुधीर जगदाले ने आरोप लगाया है कि डीबी कार्प के कार्मिक विभाग के अधिकारी टालमटोल भी कर रहे हैं। सुधीर जगदाले ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड मामले में क्लेम लगा रखा है, जिसकी सुनवाई चल रही है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
९३२२४११३३५   

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मजीठिया मामला : सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक भास्कर प्रबंधन को राहत देने से किया इनकार

धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के मामले में भास्कर प्रबंधन को लगा झटका

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मुंबई उच्च न्यायालय के एक आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट गए दैनिक भास्कर (डी बी कॉर्प लि.) अखबार के प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए उसे वापस मुंबई उच्च न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर कर दिया है। यह पूरा मामला मुंबई में कार्यरत दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह संग मुंबई के उसी कार्यालय की रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया इम्तियाज़ शेख की मजीठिया वेज बोर्ड मामले में जारी रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) से जुड़ा हुआ है… पत्रकार सिंह और रिसेप्शनिस्ट चव्हाण व शेख ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के मार्गदर्शन एवं उन्हीं के दिशा-निर्देश में कामगार आयुक्त के समक्ष 17 (1) के तहत क्लेम लगाया था।

कामगार आयुक्त कार्यालय में यह सुनवाई पूरे एक साल तक चली.. कंपनी की एचआर टीम ने अपने वकील के जरिए वहां तरह-तरह के दांव-पेंचों का इस्तेमाल किया… यहां तक कि धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का सीकर (राजस्थान) और लतिका चव्हाण का मुंबई से काफी दूर सोलापुर (महाराष्ट्र) ट्रांसफर भी कर दिया गया था! इसके विरुद्ध सिंह को इंडस्ट्रियल कोर्ट से स्टे मिल गया, तब भी कंपनी ने उन्हें दफ्तर में लेने में आनाकानी की तो उन्होंने लेबर कोर्ट में अवमानना का मुकदमा दायर कर दिया… दैनिक भास्कर ने अब उन्हें पुन: दफ्तर में एंट्री दे दी है। बहरहाल, लेबर ऑफिस में बकाए के मामले की चली लंबी सुनवाई के बाद सहायक कामगार आयुक्त नीलांबरी भोसले ने 6 जून को ऑर्डर और 1 जुलाई, 2017 को डी बी कॉर्प लि. के खिलाफ आरसी जारी करते हुए वसूली का आदेश मुंबई के जिलाधिकारी को निर्गत कर दिया था।

इस आदेश के बाद डी बी कॉर्प ने मुंबई उच्च न्यायालय में फरियाद लगाई तो उच्च न्यायालय ने 7 सितंबर, 2017 को आदेश जारी किया कि डी बी कॉर्प प्रबंधन सर्वप्रथम वसूली आदेश की 50-50 फीसदी रकम कोर्ट में जमा करे। मुंबई उच्च न्यायालय के इसी आदेश के खिलाफ डी बी कॉर्प प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट गया था, जहां उसे मुंह की खानी पड़ी है… सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी प्रबंधन को राहत देने से इनकार करते हुए वापस मुंबई हाई कोर्ट जाने को विवश कर दिया। इसके बाद कंपनी की ओर से 25 अक्टूबर को मुंबई उच्च न्यायालय को सूचित कर प्रार्थना की गई है कि वह धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के बकाए की 50-50 फीसदी राशि आगामी 6 सप्ताह के अंदर जमा कर देगी…

यह राशि क्रमश: 9 लाख, 7 लाख और 5 लाख है। ज्ञात रहे कि आरसी मामले में जिलाधिकारी द्वारा वसूली की प्रक्रिया बिल्कुल उसी तरह की जाती है, जैसे जमीन के बकाए की वसूली की जाती है… इसमें कुर्की तक की कार्यवाही शामिल है! मुंबई उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस जे काथावाला के समक्ष चल रही है, जबकि उनके समक्ष इन तीनों का पक्ष वरिष्ठ वकील एस पी पांडे रख रहे हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335

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जज की चिट्ठी के बाद मचा हड़कंप, दैनिक भास्कर ने छापा सात कॉलम का खंडन, खेद भी जताया

पिछले दिनों डीबी स्टार के रिपोर्टर के द्वारा जज पर दबाव डालकर फैसला अपने एक परिचित के पक्ष में देने को लेकर उपभोक्ता फोरम के जज इतने भड़क गए कि उन्होंने आईजी को पत्र लिख दिया कि इसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इस खबर के भड़ास में छपने के बाद उच्च प्रबंधन हरकत में आया और बताया जा रहा है कि मामले में भास्कर की किरकिरी होते देख जज के घर संपादक और यूनिट हेड गए, ताकि उन्हें मैनेज किया जा सके। इतना ही नहीं, उन्होंने जज अशोक पाठक को आश्वस्त किया कि वे पुरानी खबरों का खंडन छापेंगे। मंगलवार को उसी डीबी स्टार में सात कॉलम में पुरानी खबरों का खंडन छापा है और एक बॉक्स में पुरानी खबरों के लिए खेद भी प्रकट किया है। भास्कर अपनी विश्वसनीयता की बात करता है, उसके इस खंडन से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। संभवत: बिलासपुर में यह पहला मामला होगा, जिसमें भास्कर ने सात कॉलम में खंडन भी छापा और खेद भी प्रकट किया।

छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर के पत्रकारों पर आरोप लगते ही रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। उपभोक्ता फोरम के जज अशोक कुमार पाठक को दैनिक भास्कर बिलासपुर के रिपोर्टर आशीष दुबे ने दबाव डालकर फैसला अपने परिचित के हक में देने के लिए कहा था। यह आरोप खुद जज ने लगाया है और आईजी को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा था। आशीष दुबे के खिलाफ जज ने जो पत्र लिखा है, उसकी प्रति नीचे है।  जज ने आरोप लगाया है कि एक मामले में आशीष दुबे एकतरफा फैसला करना चाहता था। ऐसा नहीं करने पर देख लेने की धमकी दी और उलजुलूल खबरें छापने लगा। जज के मुताबिक धमकी के बाद आशीष दुबे ने जज को फोन भी किया कि वह उन्हें देख लेगा। इन सारी बातों का जिक्र जज के आईजी को लिखे पत्र में है।

आशीष दुबे मूलत: दैनिक भास्कर में ही टेलीफोन ऑपरेटर था। वह संपादकों के खास होने के साथ साथ उनके घर का भी खास हो जाता था। ऐसा करते करते मनीष दबे ने उसे संपादकीय टीम में शामिल कर लिया। इसके बाद जितने भी संपादक आए, आशीष दुबे एकदम करीबी बना रहा क्योंकि वह संपादकों के लिए हर किस्म का मक्खन लेकर खड़ा रहता था। यही कारण है कि ढेरों शिकायतों के बाद भी उसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे उसे सिटी चीफ तक प्रमोट किए जाने की चर्चाएं हुईं। बहरहाल, जिन लोगों को आशीष दुबे ने साजिश करके निपटाया, अब उनके हाथ ये खबर लगी, वे उन्हें कहां छोड़ने वाले हैं। इस खबर को ऊपर तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं ताकि भास्कर मैनेजमेंट को इसकी असलियत का भी पता चल सके।

लोग कहने लगे हैं कि जिद से दुनिया बदलने निकले दैनिक भास्कर ने अपने अखबार में दल्ले भर डाले हैं। यही वजह है कि ईमानदार, जुझारु और कर्मठ पत्रकारों के लाले पड़े हैं। भास्कर का बिलासपुर एडिशन भी इससे अछूता नहीं है। यहां डीबी स्टार से जुड़े तथाकथित पत्रकार आशीष दुबे द्वारा इरादतन कन्जयूमर फोरम की कार्य प्रणाली के एंटी खबर लगवाकर अपने परिचित के पक्ष में फैसला सुनाने फोरम के अध्यक्ष पर दबाव डालने का मामला सामने आने के बाद यह अखबार घुटनों के बल पर आ गया। दरअसल दुबे जिस कलम को हथियार बनाकर दलाली की दुकान खोले था, जज ने उसी को कठघरे में खड़ा करने के लिए कमर कस ली। फिर हुआ यूं कि भास्कर प्रबंधन ने अपनी फजीहत बचाने के लिए तत्काल पॉजिटिव खबर बनाकर परोसी।

एक नवम्बर की खबर में बताया गया कि फोरम अच्छे से काम नहीं कर रहा जिसके बाद अध्यक्ष महोदय ने पत्रकार दुबे के खिलाफ एसपी को शिकायत दी। इस मामले को प्रेस क्लब के एक नमूने द्वारा दबाने की भनक भी लगी जिसके बाद कुछ पत्रकारों ने भड़ास से सम्पर्क करके मुद्दे को सामने लाने को कहा। इसके परिणामस्वरुप 7 नवम्बर को उसी अखबार के उसी पेज पर खबर छपी कि फोरम जबरदस्त काम कर रहा। लेकिन यह तो फजीहत बचाने की कोशिश है। उस पत्रकार पर क्या कार्रवाई की जायेगी, यह देखना मजेदार होगा।

आशीष चौकसे

एसोसिएट एडिटर, भड़ास4मीडिया

मूल खबर : 

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कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष ने की एसपी से शिकायत- ”दैनिक भास्कर का पत्रकार डाल रहा दबाव”

बिलासपुर : रायपुर, राजनांदगांव के बाद अब बिलासपुर शहर से दैनिक भास्कर के पत्रकार की करतूत सामने आ रही है। इस बार कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष ने एसपी को लिखित शिकायत दी है कि एक पत्रकार आशीष दुबे जो खुद को दैनिक भास्कर में कार्यरत बताता है, उसके द्वारा किसी केस में फैसला अपने परिचित के हक में करवाने दबाव डाला जा रहा है। वायरल हुई इस शिकायत का असर इतना जोरदार हुआ कि खुद प्रेस क्लब के एक बंदे को मामला दबाने तुगलकी फरमान जारी करना पड़ा कि इस खबर को जो भी चैनल या अखबार लगायेगा तो उस पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जायेगी। हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक प्रेस क्लब अध्यक्ष ने ऐसे किसी फरमान से पल्ला झाड़ लिया है।
खबर की भाषा बता रही है इरादे..

1 नवम्बर को डीबी स्टार में फोरम से सम्बंधित खबर छपी है। वायरल हुये शिकायत पत्र में इस खबर का भी जिक्र है कि ऐसी निराधार खबरें दबाव डालने बनाई जा रही हैं। बहरहाल खबर कुछ केसेज का हवाला देकर बनाई गई है। जिसमें पहला केस ही उन महोदय का है जिनके पक्ष में तथाकथित पत्रकार फैसला करवाना चाहते हैं। यही नहीं अगर हम ध्यान दें तो सीधी बात का जो वर्जन फोरम के अध्यक्ष का लिया गया है। वह भी केवल उसी केस से जुड़ा है। खबर की भाषा, केसेज और लिए गए वर्जन को अगर एक सूत्र पिरोएं तो समझ आयेगा की यह खबरें किसी विशेष इरादे से ही लगाई जा रहीं है।

आशीष चौकसे
एसोसिएट एडिटर
भड़ास4मीडिया

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दैनिक भास्कर में ये क्या छप गया! गई दो पत्रकारों की नौकरी

हैडिंग में कोई शायरी नहीं है। बल्कि हकीकत है दैनिक भास्कर के रायपुर एडिशन की। आनंद पांडे जी के जाने के बाद जब से शिव दुबे को रायपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है। भास्कर की छीछालेदर होती जा रही है। ताजा उदाहरण है कि 14 अक्टूबर के सिटी भास्कर में खबर में ऐसे शब्द शामिल हैं जिन पर कड़ी आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की विदाई कर दी गई है।

दरअसल गलती खबर बनाने वालों की नहीं है क्योंकि उन्हें तजुर्बा ही नहीं… उन्हें पता ही नहीं कि किसी ने अपने किरदार का नाम “गाली” रखा हो तो उसे घुमाकर परोसा जाता है। उन्होंने तो सीधे-सीधे किरदारों के नाम लिखकर छाप दिए थे। अब हुआ यूं कि जब ऊपर से शिव दुबे की सिंकाई हुई तो उसने दोनों कर्मियों को तत्काल रिलीव कर दिया।

अंदर की बात यह है कि तन्मय अग्रवाल, शिव दुबे का खास बन्दा था। दुबे को पता था सिटी भास्कर को निकालने और पब्लिक के टेस्ट को पकड़ने का हुनर उसके किसी और खास आदमी में नहीं है। इसीलिए उसने तन्मय को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर भास्कर से जाने नहीं दिया था। लेकिन जब माई बाप से प्रेशर पड़ा तो उसी ने तन्मय की विदाई कर दी। वैसे यह वही शिव दुबे हैं जो सन्डे के दिन IIT का रिजल्ट डिक्लेयर होने की खबर बनवा रहा था जिसे मैंने रुकवाया था। क्योंकि सन्डे को एग्जाम तो कंडक्ट हो सकते हैं लेकिन रिजल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ करते।

नमूनों से भरी है नई टीम

24 अक्टूबर के रायपुर सिटी भास्कर के फ्रंट पेज की लीड खबर में ट्रांसपेरेंट शब्द की बजाय “न्यूड” का बारबार इस्तेमाल किया गया है। अब जाहिर सी बात है ट्रेनी पत्रकारों को या नौसिखियों को कम तनख्वा देकर बिठाओगे तो यही सब तो पढ़ने मिलेगा।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

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होशंगाबाद के वितरकों ने दैनिक भास्कर के शोषण से परेशन होकर कर दिया हड़ताल

होशंगाबाद से खबर आ रही है कि अखबार वितरकों ने दैनिक भास्कर का बहिष्कार करते हुए हड़ताल कर दिया है. इस बाबत एक पर्चा छपवाकर पाठकों में वितरित किया जा रहा है. इस पर्चे में वितरकों ने दैनिक भास्कर द्वारा खुद के शोषण किए जाने की बात का जिक्र किया है. एजेंटों और वितरकों की हड़ताल से दैनिक भास्कर का बंडल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर ही पड़ा रह गया.

वितरकों ने भड़ास4मीडिया से अपील की है कि उनका यह पर्चा पोर्टल पर प्रकाशित किया जाए. तो लीजिए, वितरकों का पर्चा पढ़िए…

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लगता है ‘भास्कर’ के सम्पादक और प्रबंधक पाठकों को मूर्ख समझते हैं!

Krishna Kalpit : ‘भास्कर’ ख़ुद को सबसे विश्वसनीय और नम्बर 1 अख़बार बताता है। आज ‘भास्कर’ के जयपुर संस्करण में जाति-प्रथा के विरोध में एक ख़बर छपी है, जिसमें प्रदेश की सरकारी स्कूलों के रजिस्टर में छात्रों के लिये बने जाति के कॉलम का विरोध किया गया है और जाति-प्रथा को समाज और देश के लिये कलंक बताया गया है। ‘भास्कर’ के इसी अंक में श्री अग्रवाल समाज समिति, जयपुर द्वारा आयोजित श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव का पूरे पेज का विज्ञापन छपा है।

यही नहीं इसी अख़बार में हर रविवार को जो मेट्रीमोनियल के क्लासिफाइड विज्ञापन छपते हैं, वे भी जाति आधारित होते हैं। और आजकल तो ख़बरें भी जाति-आधारित होती हैं। करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, गुर्जर, मीणा इत्यादि। यदि ‘भास्कर’ जाति-प्रथा का विरोधी है तो उसे ऐसे विज्ञापन और ऐसी ख़बरें छापना बन्द करना चाहिये। लेकिन लगता है ‘भास्कर’ के सम्पादक और प्रबंधक पाठकों को मूर्ख समझते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और कवि कृष्ण कल्पित की एफबी वॉल से.

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डा. कफील की असलियत पता करने गोरखपुर पहुंचे पत्रकार अजय प्रकाश की रिपोर्ट पढ़िए

Ajay Prakash : कई बार सच कुछ और होता है और प्रचारित कुछ और होता है। इसी का फायदा सरकार भी उठाती है और दलाल भी। गोरखपुर में कल सुबह जब मैं कफील के निजी अस्पताल पहुंचा तो मुख्यद्वार ‘डॉक्टर के खान मेडिस्प्रिंग चाइल्ड होस्पिटल’ स्वागत कर रहा था। तारीफ में दो स्थानीय अखबारों के विज्ञापन भी पब्लिश थे। लेकिन कुछ घंटे बाद ही सब निशान कफील ने मिटवा दिए। फिर मैं नाम पर सफेदी चढ़ी तस्वीर भी ले आया। वहां उनकी गुंडई से निपटना पड़ा तो निपटा भी।

आप खुद देखिए और तय कीजिये कि विलेन को आपने हीरो कैसे बनाया। यह आदमी सुबह 9 बजे से शाम 9 बजे तक अपने निजी अस्पताल में होता था, जबकि यह मेडिकल कॉलेज में बच्चा और इंसेफ्लाइटिस दोनों ही वार्ड का मुखिया था। इस बारे में दैनिक भास्कर में छपी मेरी रिपोर्ट पढिए… नीचे की न्यूज कटिंग पर क्लिक करिए…

 

लेखक अजय प्रकाश तेजतर्रार और जन सरोकारी पत्रकार हैं. उनका यह लिखा उनकी एफबी वॉल से लिया गया है.

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भास्कर की मजेदार रिपोर्टिंग : चीन सीमा विवाद पर जयपुर के शिप्रापथ थाना प्रभारी कार्रवाई करेंगे!

सोशल मीडिया पर आजकल दैनिक भास्कर में छपी एक खबर की कटिंग धूम मचाते हुए घूम रही है. इस न्यूज कटिंग में चीन सीमा विवाद पर खबर है और लास्ट में जयपुर के शिप्रापथ थाना प्रभारी मुकेश चौधरी का बयान है कि ”अभी मामले की जांच की जा रही है और लापरवाही सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

दो अलग अलग खबरें किन्हीं वजहों से यूं जुड़ गई हैं कि अर्थ का अनर्थ हो रहा है. मीडियाकर्मियों का कहना है कि अपने यहां काम करने वालों का मजीठिया वेज बोर्ड का हिस्सा हड़पने वाला दैनिक भास्कर बदले में ऐसे ही नतीजे पाएगा जिससे उसकी ब्रांड वैल्यू धराशाई होगी. आप भी देखें-पढ़ें न्यूज कटिंग….

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भास्कर की लैंड डील कैंसल करने वाली महिला आईएएस अफसर का तबादला

लगता है रमन सिंह दैनिक भास्कर के सामने दंडवत हो गए हैं. तभी तो उस महिला आईएएस अधिकारी का तबादला कर दिया गया जिसने दैनिक भास्कर की रायपुर में जमीन की लैंडडील रद्द की थी. इस बारे में स्टेट्समैन अखबार में विस्तार से खबर छपी है, जिसे नीचे पढ़ सकते हैं….

मूल खबर ये है….

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दैनिक भास्कर ने अपने कर्मियों से कहा- ”10 लाख नए पाठक जोड़ने हैं, प्रति पाठक 150 रुपये मिलेंगे!”

दैनिक भास्कर ग्रुप ने ऑफिशियल लेटर जारी कर अपने कर्मियों को इस साल 10 लाख नये पाठक जोड़ने का टारगेट बताया है और इसके लिए उसने अपने कर्मियों को ऑफर दिया है कि वे नये पाठक जुड़वायें जिसके लिए उन्हें प्रति पाठक 150 रुपये का कमीशन या प्रोत्साहन राशि मिलेगी। बहरहाल इस ऑफर के बाद कुछ कर्मी यह सोच रहे हैं कि क्या अब पत्रकारिता “टारगेट जॉब” तो नहीं बन जायेगी? हो सकता है कस्टमर न लाने वालों का इंक्रीमेंट/प्रमोशन भी कंपनी रोक दे।

खैर खुद का प्रचार प्रसार विस्तार करने का हक हर ब्रांड को होता है लेकिन, 1 साल में 10 लाख पाठक जोड़ने जैसा बड़ा टारगेट बनाने वाला और खुद को देश का नम्बर 1 अखबार कहने वाले भास्कर ग्रुप ने ऑफिशियल लैटर में खुद को करीब 10 हजार कर्मियों की कंपनी होने का दावा किया है। साथ ही लेटर में विश्व का चौथा सबसे अधिक प्रसार संख्या वाला अखबार भी बताया है। तो फिर अपने कर्मियों को पर्याप्त सेलरी या मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने की बात उठने पर भास्कर की यही “ब्रांड वैल्यू” कम कैसे हो जाती है, यह सोचने वाली बात है।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

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रमन सिंह ने रायपुर से दैनिक भास्‍कर का डेरा-डंडा उखाड़ने का आदेश दिया!

दैनिक भास्‍कर, रायपुर को 1985 में कांग्रेस द्वारा प्रेस लगाने के लिए (अविभाजित मध्‍य प्रदेश में) पट्टे पर दी गई ज़मीन को छत्‍तीसगढ़ प्रशासन ने शुक्रवार 7 जुलाई के एक शासनादेश के माध्‍यम से रद्द कर के उस पर प्रशासनिक कब्‍ज़े का आदेश दे दिया है। ज़मीन का कुल आकार 45725 वर्गफुट और अतिरिक्‍त 9212 वर्ग फुट है यानी कुल करीब 5000 वर्ग मीटर है। नजूल की यह ज़मीन रायपुर भास्‍कर को प्रेस लगाने के लिए इस शर्त पर कांग्रेस शासन द्वारा दी गई थी कि संस्‍थान अगर प्रेस लगाने के विशिष्‍ट प्रयोजन से मिली ज़मीन को किसी और प्रयोजन के लिए इस्‍तेमाल करेगा तो शासन उसे वापस ले लेगा। इस ज़मीन का पट्टा 31 मार्च 2015 को समाप्‍त हो चुका था और दैनिक भास्‍कर ने इसके नवीनीकरण के लिए अग्रिम आवेदन किया था।

छत्‍तीसगढ़ सरकार के राजस्‍व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 7 जुलाई को जारी आदेश कहता है कि कलेक्‍टर रायपुर से प्राप्‍त स्‍थल निरीक्षण प्रतिवेदन में पाया गया है कि ”उक्‍त भूमि पर 7 मंजिला पक्‍का व्‍यावसायिक कांपलेक्‍स बनाया गया है तथा प्रत्‍येक मंजिल पर प्रेस स्‍थापना से भिन्‍न अन्‍य व्‍यावसायिक प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग किया जा रहा है।” इसके बाद शासन ने कई बार अख़बार से इस संबंध में जवाब मांगा लेकिन अखबार प्रबंधन ने जवाब देने के लिए लगातार वक्‍त मांगा और जवाब दाखिल नहीं किया।

आदेश कहता है, ”तदनुसार उक्‍त भूमियों पर निर्मित परिसंपत्तियों को निर्माण सहित नियमानुसार राजसात कर बेदखली की कार्यवाही करने हेतु कलेक्‍टर, रायपुर को आदेशित किया जाता है।” आदेश की प्रति प्रधान संपादक, दैनिक भास्‍कर, रायपुर को भी भेजी गई है। सवाल है कि रमन सिंह किस बात पर बिफर गए हैं कि उन्‍होंने रायपुर से दैनिक भास्‍कर का डेरा-डंडा ही उखाड़ने का आदेश दे डाला? सवाल यह भी उठता है कि करीब तीन दशक से रायपुर शहर के भीतर अपना धंधा चला रहा यह अख़बार अब क्‍या करेगा?

(साभार- मीडिया विजिल)

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इस्तीफा देने को मजबूर करने पर मीडियाकर्मी ने भास्कर प्रबंधन की लेबर आफिस में शिकायत की!

अन्यथा पेमेंट और ग्रेच्यूटी रोकने की धमकी देता है…

जिद से दुनिया बदलने वाले दैनिक भास्कर के बिलासपुर प्रबंधन द्वारा एक मीडियाकर्मी से जबरन इस्तीफा लेने का केस सामने आया है। यह हम उस शिकायत पत्र के आधार पर कह रहे हैं जो सहायक श्रमायुक्त, बिलासपुर को पीड़ित द्वारा दिया गया है। इस शिकायत पर सहायक श्रमायुक्त कार्यालय से जवाब तलब हेतु नोटिस भी जारी किया गया है।

क्या है शिकायती पत्र में…

मैं अमित कश्यप पिता दयाराम कश्यप, 16 सितंबर 2008 से दैनिक भास्कर, बिलासपुर में कार्यरत हूं। 21 फ़रवरी 2017 को यकायक स्थानीय यूनिट हेड अभिक सूर और एच.आर. हेड सुबोध पंडा द्वारा केबिन में बुलाकर नौकरी से इस्तीफा देने बोला गया। जिस पर असहमति जताने पर मेरी पेमेंट और ग्रेजुएटी रोक देने की धमकी दी गई। जिस दबाव के चलते मैंने इस्तीफ़ा दिया है। अतः महोदय से निवेदन है कि प्रबंधन को आदेशित कर मुझे मेरी नौकरी वापस दिलवायें। अथवा नौ साल का मजीठिया वेज बोर्ड के तहत रकम व अन्य सुविधायें दिलवाने की कृपा करें।

अब जो बड़ा सवाल मुंह बायें खड़ा है वो यह कि सर्वोच्च न्यायालय के मुताबिक मीडिया मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड की जानकारी नहीं थी। तो फिर यह छंटाई किस वजह से? या फिर यह समझा जाये कि कर्मचारी कमजोर कड़ी होता है शायद इसलिये इन्साफ का पलड़ा मालिकों की तरफ झुक गया? खैर हकीकत जो भी हो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मजीठिया वेज बोर्ड का खतरा मंडराता देख ही अमित जैसे सैंकड़ों पत्रकारों को घर बिठाया गया है।

पत्रकार आशीष चौकसे की रिपोर्ट. संपर्क : 8120100064 / journalistkumar19@gmail.com

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भास्कर ग्रुप के चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

पेशी से कन्नी काटने पर पंजाब की कोर्ट ने ‘आज़ाद सोच’ के दावे वाले अखबार दैनिक भास्कर ग्रुप चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल के खिलाफ अंततः नॉन बेलएबल वारंट जारी किए. पंजाब से जल्द रवाना होगा विशेष तामीली टीम. हत्थे चढ़े तो लाकर कोर्ट में पेश किए जाएंगे चेयरमैन रमेश अग्रवाल. एक मासूम आरोपी की पहचान उजागर करने के मामले में कोर्ट ने किया है तलब.

आरोपी रमेश ने राहत के लिए हाइकोर्ट में भी लगा रखी है मामला निरस्त करने की याचिका. पूरा मामला क्या है, इसे जानने के लिए नीचे जय हिंद अखबार में प्रकाशित एक खबर की कटिंग दी जा रही है जिसे पढ़ कर सब समझ सकते हैं….

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भास्कर प्रबंधन को तमाचा : लेबर ट्रिब्यूनल ने छह कर्मियों की बर्खास्तगी को गैर-कानूनी करार दिया

दैनिक भास्कर, जालंधर के छह मीडियाकर्मियों को जीत मिली है. लेबर ट्रिब्यूनल ने भास्कर प्रबंधन द्वारा इन छह कर्मियों की बर्खास्तगी को गैरकानूनी करार दिया है. ट्रिब्यूनल ने इनकी सेवाओं को बर्खास्तगी की डेट से ही बहाल करने के आदेश दिए हैं. जिन लोगों को इस आदेश से लाभ मिला है उनके नाम हैं- पत्रकार वीना जोशी, नीलांबर जोशी (अब दिवंगत), अनिल शर्मा, जतिंदर कुमार, जतिंदर चौहान व संजय शर्मा.

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि बिना उचित कारण के किसी कर्मचारी को एक महीने का नोटिस देकर नहीं निकाल जा सकता है. ट्रिब्यूनल ने अखबार प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह इन सभी लोगों को टर्मिनेशन से लेकर अभी तक की सेलरी तुरंत दे. जिन नीलांबर जोशी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, उनके आश्रितों को उनके जीवित रहने तक का लाभ देने के आदेश हुए हैं. इनकी पत्नी वीना जोशी को रिटायरमेंट आयु तक के समस्त लाभ मिलेंगे. हालांकि 4 अन्य कर्मचारियों का केस अभी लंबित है. प्रबंधन ने इन कर्मचारियों को साल 2009 में एकाएक नौकरी से निकाल दिया था. इसके बाद सभी ने प्रबंधन के नाजायज फैसले को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी. प्रबंधन के पास इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का विकल्प खुला है. हालांकि ऐसे मामलों में प्रबंधन की पहले भी हाईकोर्ट में कई बार किरकिरी हो चुकी है.

ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद नौकरी ज्वाइन करने गए कर्मचारियों ने स्थानीय प्रबंधन पर ज्वायनिंग न कराने का आरोप लगाते हुए अवमानना का केस दायर करने की बात कही है. कर्मचारी अनिल शर्मा ने बताया कि वह केस जीतने के बाद कोर्ट के आदेश पर अपने अन्य साथियों के साथ दैनिक भास्कर अखबार में नौकरी ज्वाइन करने गए थे लेकिन डिप्टी मैनेजर नरेश कुमार दुआ ने प्रबंधन का आदेश न होने का हवाला देते हुए वापस लौटा दिया. कर्मचारियों के केसों की पैरवी करने वाले श्रम सलाहकार राम सिंह का कहना है कि प्रबंधन ने ऐसा करके खुद को अदालती अवमानना की श्रेणी में ला खड़ा किया है.

इस पूरे प्रकरण को जालंधर के एक तेवरदार अखबार जय हिंद ने प्रकाशित किया है, जो इस प्रकार है…

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इस ग़ज़ब की खबर के लिए भास्कर के महान मालिकों और संपादकों को एक सलाम तो बनता है :)

दैनिक भास्कर अखबार के मालिक और संपादक लोग महानता की ऐसी राह पर चल पड़े हैं जहां उन्हें लगता है कि वे जो भी कह कर देंगे, वही दुनिया फालो करेगी, उसी राह पर चलेगी और उसी को पत्रकारिता मानेगी. तभी तो इस अखबार के मालिक और संपादक ऐसी ऐसी खबरें छापने लगे हैं जिसे पढ़ देखकर लोग कहते हैं क्या अब ऐसी ही खबरें छापने के लिए अखबार बचे रहेंगे? इससे अच्छा तो है कि ये अखबार बंद हो जाएं ताकि पेड़ पर्यावरण बचे और झूठ की दुकान का कारोबार कम हो जाए.

भास्कर ने ये खबर अखबार के अलावा अपनी वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया है. अखबार और वेबसाइट, दोनों ही जगहों पर प्रकाशित इस खबर का स्क्रीनशाट देखिए….

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‘नो नेगेटिव’ के नाम पर झूठे तथ्य पढवा रहा लुधियाना भास्कर

एक रोज सुबह सैर के बाद हम दोस्त पार्क में चाय पी रहे थे. तभी दैनिक भास्कर अखबार आया. हम सब नियमित पाठक हैं. खासकर सोमवार ‘नो नेगेटिव’ एडिशन के. लेकिन बड़ा अफसोस हुआ पढके. लुधियाना भास्कर में मुख्य खबर लगी कि सिंधवा नहर में विश्व का पहला सोलर‌ प्लांट‌ लग रहा है. हमने जब यह पढा तो गुजरात में कारोबार के सिलसिले में जाने वाला मेरा दोस्त बोला कि ये तो गलत है, गुजरात में तो नर्मदा नदी पर ऎसे‌ अनेक सोलर‌ प्लांट लग चुके हैं वो भी तब जब प्रधानमन्त्री नरेंदर मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे. अब तो वो तीन साल से पीएम हैं.

दूसरे दोस्त ने बताया कि पटियाला में घगर पर भी ऎसा प्लांट है. भास्कर हमेशा हमारा ज्ञान बढाता है लेकिन अब डर लग रहा है कि कहीं हम‌ें झूठी जानकारियां तो नहीं पढ़ाई जा रही हैं.  सकारात्मक खबरों का विचार वाला‌ आइडिया अच्छा है परंतु उसके बहाने झूठ पढाना तो बिल्कुल‌ ही ठीक नहीं लग रहा. हमने कितनों से अखबार के मालिक का नंबर मांगा परंतु एक जानकार ने कहा कि भड़ास को भेज देंगे तो भास्कर के मालिकों तक खुद पहुंच जाएगा. इसलिए हम ये भड़ास के पास भेज रहे हैं.

पहले भी कितने दोस्त बहस करते थे परंतु हम लुधियाना भास्कर में छपे होने की बातें कहते हुए अड़ जाते थे. लेकिन आगे से अड़ने से पहले सोचना पड़ेगा कि लुधियाना भास्कर जो बता रहा है वह कितना सही है. हमें उम्मीद है कि पाठकों की परेशानी आप जरूर भास्कर के मालिक तक पहुंचाएंगे. संबंधित खबर की कटिंग भी भेज रहे हैं.

एक पाठक
लुधियाना

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भास्कर ग्रुप का घोटाला खोलने वाले ‘स्वराज एक्सप्रेस’ चैनल के रिपोर्टर को देना पड़ा इस्तीफा

मेरे सभी सम्मानीय मित्रों एवमं मेरे सभी सहयोगियों… 

यह बताते हुए मुझे अत्यंत ख़ुशी हो रहा है कि मैंने अपने पूरे होश में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रीजनल न्यूज चैनल ‘स्वराज एक्सप्रेस’ के खरसिया रिपोर्टर के पद से त्यागपत्र दे दिया है। कारण यह हैं कि यह चैनल एक समय पत्रकारों का चैनल हुआ करता था किन्तु आजकल इसमें भी कुछ दलाल किस्म के लोग सक्रिय हो गए हैं। मैंने पिछले 1 वर्ष से बिना कोई पेमेंट प्राप्त किये खुद के व्यय से अपना कैमरा, अपना कैमरामेन, अपना इंटरनेट लगाकर काम किया। सबसे ज्यादा कीमती अपना बहुमूल्य एक वर्ष का समय है जिसके मूल्य का आकलन मैं स्वयं नहीं कर सकता हूँ।

मैंने सुबह 6 बजे से रात्रि 12 बजे तक हमेशा सक्रिय होकर लगातार खबर, स्क्रॉल, ब्रेकिंग, पैकेज स्टोरी भेजा लेकिन बदले में हमें आज तक चैनल से एक रुपये भी पारिश्रमिक नहीं मिला। मैंने ग्राम कुनकुनी खरसिया में 300 एकड़ जमीन घोटाला मामले की खबर बनाई। प्रधानमंत्री कार्यालय से मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को कार्यवाही का पत्र भेजा गया। इस पत्र की छाया प्रति मुझे मिली। इसमें कुनकुनी में दैनिक भास्कर ग्रुप की कंपनी डीबी पॉवर द्वारा गरीब भोले भाले आदिवासियों की जमीन को अपने मीडिया हाउस के ड्राइवर के नाम से खरीदे जाने का जिक्र है। गरीब आदिवासियों के ऊपर मीडिया घराने का धौन्स दिखा के अवैध रूप से ब्रिज एवं रेलवे ट्रैक बनाये जाने का मामला उजागर किया। लेकिन चैनल ने मेरे इस साहसिक खबर को नहीं चलाया। उल्टे छत्तीसगढ़ के एडिटर शैलेश पाण्डेय ने कहा कि तुम डी बी पावर मीडिया घराने के खिलाफ खबर कवरेज करते हो। ऐसा झूठा लांछन लगाया गया।

चैनल के एक जिम्मेदार अधिकारी ने मुझे कहा कि दैनिक भास्कर के खिलाफ लिखोगे तो वह हमारे चैनल की बैंड बजा देगा। ऐसे में मुझे अहसास हुआ कि किसी व्यक्ति के द्वारा 100 रु के घोटाला को दिनभर खबर बना के चलाने वाले लोगों के पास सैकड़ों करोड़ के घोटाले की खबर चलाने की हिम्मत नहीं है और ऐसे लोगों के साथ काम करना अपने समय एवं नैतिक मूल्यों की बर्बादी है। जो लोग दूसरे मीडिया हॉउस के 100 एकड़ से ज्यादा के आदिवासी भूमि की बेनामी खरीदी एवं अवैध निर्माण पर पर्दा डालना चाहता हैं, ऐसे लोगों के साथ काम करना बेकार है।

जो व्यक्ति दूसरा चैनल छोड़ के इस चैनल में आया हो उनके द्वारा मुझ पर झूठा लांछन लगाते हुए डीबी के खिलाफ खबर बनाने पर बदनाम करने की धमकी देने वाले को करारा जवाब देते हुए मैं स्वयं स्वराज एक्सप्रेस चैनल के खरसिया रिपोर्टर का पद छोड़ रहा हूँ। चैनल में हमारे साथ 1 वर्ष तक खबर के बदले पारिश्रमिक दिए जाने के नाम पर धोखा ही किया गया। मांड प्रवाह अख़बार एवं सोशल मीडिया के माध्यम से हमेशा गरीबों एवं शोषितों की आवाज उठाता रहूंगा। गरीबों को लूटने वालों का फर्दाफाश करता रहूंगा।

सत्यमेव जयते

आपका

भूपेंद्र किशोर वैष्णव

(स्वतंत्र पत्रकार)

खरसिया

9754160816

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मजीठिया जंग : हेमकांत को स्टे के बावजूद ऑफिस में न घुसने देने वाले दैनिक भास्कर प्रबंधन पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई

मजीठिया मांगने वाले हेमकांत चौधरी को ट्रांसफर पर स्टे के बावजूद ऑफिस में नहीं घुसने देने वाले दैनिक भास्कर के अफसरों पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई… तीन महीने जेल की सजा और 5000 जुर्माना होना तय, भास्कर के अफसरों में हड़कंप… मजीठिया मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक भास्कर के मराठी अखबार दिव्य मराठी से आई है। यहाँ प्रबंधन की लगातार धुलाई कर रहे हेमकांत चौधरी ने अबकी बार प्रबंधन के चमचों को पटखनी देते हुए एक ही दांव में न केवल धूल चटा दी है बल्कि चारों खाने चित्त कर दिया है।

मजीठिया वेजबोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लगाने पर दैनिक भास्कर मैनेजमेंट ने चौधरी का डेपुटेशन के नाम पर रांची ट्रांसफर कर दिया था। इसके खिलाफ औरंगाबाद इंडस्ट्रियल कोर्ट से चौधरी को स्टे मिल गया था। इसके बावजूद ताकत के खोखले नशे में चूर भास्कर के अहंकारी अफसरों ने चौधरी को ऑफिस में घुसने नहीं दिया और धक्के देकर बाहर कर दिया था। इससे आहत चौधरी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया था।

मामले में भास्कर के वकील पिछले लगभग एक साल से तारीख पर तारीख ले रहे थे। कुछ दिन पहले हुई सुनवाई में भी जब भास्कर के वकीलों ने तारीख लेने की कोशिश की तो हेमकांत चौधरी के वकीलों ने जोरदार विरोध करते हुए आरोपियों पर अवमानना कार्रवाई शुरू करने की अपील कोर्ट से की थी। तब कोर्ट ने बाद में आदेश जारी करने की बात कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी। अंततः पिछले हफ्ते कोर्ट ने दिव्य मराठी महाराष्ट्र के सीओओ निशित जैन और सीनियर एचआर एग्जीक्यूटिव अनवर अली को अवमानना का दोषी मानते हुए दोनों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।

आगामी दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और कोर्ट की अवमानना मामले में दोनों को तीन महीने जेल की सलाखों के पीछे काटना पड़ेंगे साथ ही 5 हजार रुपए जुर्माना भी भरना पड़ेगा। उधर, जब से इस आदेश की खबर आरोपियों और कर्मचारियों का शोषण कर रहे भास्कर प्रबंधन के दूसरे चमचों को लगी है उनके खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब उन्हें भी जेल जाने का डर सता रहा है।

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मजीठिया मांगने वाले को फंसाने वाला दैनिक भास्कर का मैनेजर अपने ही बुने जाल में फंसने जा रहा!

खबर जालंधर से है. दैनिक भास्कर के मैनेजर को एक पत्रकार के लिए जाल बुनना महंगा पड़ने जा रहा है. यह खबर दूसरे अखबारों और अन्य मैनेजरों के लिए भी चेतावनी है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के लिए लड़ रहे साहसी मीडियाकर्मियों से टक्कर न लें वरना उन्हें एक न एक दिन ऐसे जाल में फंसना पड़ेगा जिससे वे निकल न सकेंगे और उनके अखबार मालिक भी उनकी कोई मदद न कर पाएंगे.

जालंधर में दैनिक भास्कर के पत्रकार राजेश को फंसाने के लिए एचआर मैनेजर इंद्र सूजी, मैनेजर नरेश दुआ और झूठी गवाही देने वाले एक पत्रकार को कोर्ट ने सम्मन जारी किया है. इन तीनों ने पत्रकार राजेश के खिलाफ साल 2011 में साजिशन झूठी एफआईआर दर्ज करवाई थी. कोर्ट से सम्मन जारी होने के बाद अब तीनों को अपने अपने बेल बांड भरकर ट्रायल फेस करना होगा. पूरी खबर जालंधर के एक अखबार ‘जय हिंद’ ने विस्तार से प्रकाशित की है, जो इस प्रकार है…

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मजीठिया की जंग : झूठ लिख कर बुरा फंसा डीबी कॉर्प!

‘जिद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाला डीबी कॉर्प अब ‘झूठ बोलो और बुरे फंसो’ के पैटर्न पर काम कर रहा है। मंगलवार को मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय में डी बी कॉर्प की महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख के मजीठिया वेज बोर्ड बोर्ड मामले की सुनवाई थी। लतिका और आलिया ने मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतन और एरियर न मिलने पर 17 (1) के तहत रिकवरी का क्लेम श्रम आयुक्त कार्यालय में किया था।

आज कंपनी ने अपने वकील के जरिये सुनवाई में जवाब दिया कि ये दोनों महिला कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में नहीं आती हैं जिस पर इन महिला कर्मचारियों के साथ गए पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह ने तुरंत भारत सरकार की 11 नवंबर 2011 को जारी अधिसूचना की कॉपी का संबंधित पेज खोल कर इस मामले की सुनवाई कर रही असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के सामने रख दिया जिसमें ये साफ लिखा है कि रिसेप्शनिस्ट भी मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में आती हैं।

इसके बाद डीबी कॉर्प और वकील की बोलती बंद हो गयी। उन्होंने अगला डेट लेने का प्रयास किया मगर उस समय मौजूद शशिकान्त सिंह और धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ा एतराज जताया और साफ़ कह दिया कि हमारे दिए गए तथ्य को रिकार्ड में लाया जाए और डीबी कॉर्प को इस मामले को साबित करने के लिए कहा जाय क्योंकि उन्ह लोगों ने लिखित रूप से कहा है कि ये कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में नहीं आतीं। इसके बाद नीलांबरी भोसले ने इसे स्टेटमेंट में नोट किया और डीबी कॉर्प को 48 घंटे बाद का 27 अक्टूबर का डेट दिया और कहा कि आप प्रूफ लेकर आइये कि रिसेप्शनिस्ट मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में नहीं आतीं।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335

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जानिए, आजकल क्यों खुद को मरियल और फिसड्डी बताने में जुटा है दैनिक भास्कर!

जो अपनी क्लास में ही पांचवे या दसवें नंबर पर हो क्या वह शहर में अव्वल आने का दावा कर सकता है? कर तो नहीं सकता लेकिन हिंदी का एक बड़ा अखबार ऐसा ही करता आया है, आज से नहीं लंबे समय से… भारत का सबसे तेज बढ़ता, सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाला और भी न जाने क्या क्या दावा करने वाला अखबार दैनिक भास्कर… पर समय की गति देखिए कि कल तक खुद के बारे में बड़े बड़े दावे करने वाला यह अखबार अब खुद को मरियल और फिसड्‌डी बताने की जुगत में है। यहां तक कि ये अखबार अपने कर्मचारियों को अपनी गरीबी की दुहाई भी देने लगा है। है न अचरज की बात? चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि दैनिक भास्कर जैसा दुनिया के सबसे बड़े अखबारों में खुद को शामिल बताने वाला अखबार अब जगह जगह यह दावा सरकारी विभागों में दावा करता फिर रहा है कि वह तो फलां जगह आठवें और अमुक जगह दसवें नंबर का अखबार है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी (भास्कर समेत कई अखबारों पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का केस चल रहा है) कार्यरत पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से पैसा नहीं दे रहे अखबारों को अब बकाए की भी राशि देना है जो हर कर्मचारी के लिए लाखों रुपए में बन रही है। चूंकि इस वेज बोर्ड की अनुशंसाओं में वर्गीकरण टर्नओवर के हिसाब से है इसलिए अब भास्कर खुद को पिद्दू सा अखबार बताने की चालबाजी कर रहा है। वैसे तो मजीठिया वेतन व बकाया न देने के लिए कई हथकंडे अपनाए जा रहे हैं जिनमें डराने धमकाने से लेकर नौकरी से निकालने और हजारों किलोमीटर की दूरी पर तबादला करना भी शामिल है लेकिन इसके बावजूद बकाया वाला मामला तो सैटल करना ही होगा और यही राशि प्रति कर्मचारी लाखों रुपए तक पहुंच रही है।

ऐसे में अखबार मालिक चाह रहे हैं कि खुद को इतना मरियल, फिसड्‌डी और कंगाल बता दें कि कम से कम पैसा देना पड़े। वैसे अच्छा था कि अखबार किसी भी दबाव के बिना ही खुद की हकीकत पर नजर डालते लेकिन इसी बिंदु पर नया पेंच आ खड़ा हुआ है जहां भास्कर खुद को श्रम विभाग के सामने दीन हीन बता रहा है वहीं सरकारी विज्ञापन लेने के लिए खुद को इतना बड़ा और फैला हुआ बताता है जितना कि वह हकीकत में है ही नहीं। यानी एक ही सरकार के दो अलग अलग विभागों के सामने खुद को अलग अलग तरह से पेश किया जा रहा है।

यही हाल जनता के सामने भी है जब डीबी कॉर्प लिमिटेड अपने शेयरहोल्डर्स के सामने रिपोर्ट पेश करता है तो करोड़ों के मुनाफे और अरबों के नए प्रोजेक्ट्स दिखाता है लेकिन जब अपने ही कर्मचारियों की बारी आती है तो बार बार यही कहा जाता है कि मंदी का असर हो रहा है और  फलां क्वार्टर तो बहुत ही बुरा गया है इसलिए इस बार इंक्रीमेंट भी दिया जा सकेगा या नहीं यह सोचना पड़ेगा। थाेड़ा सा और गहराई में जाएंगे तो पता चलेगा कि भास्कर जितने राज्य और जितने संस्करण बताता है उतने की तो मालिकी ही इनके पास नहीं है, जैसे मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में मालिकी रमेशचंद्र अग्रवाल के चेयरमेन वाले ग्रुप की है लेकिन वहीं जबलपुर सहित कई बड़े एडिशन मनमोहन अग्रवाल के मालिकी वाले हैं।

महाराष्ट्र को डीबी कॉर्प अपनी मालिकी में बताकर कॉर्पोरेट विज्ञापन लेता है लेकिन पूरे महाराष्ट्र में ‘दैनिक भास्कर’ के नाम से सुधीर अग्रवाल हिंदी अखबार नहीं निकाल सकते क्योंकि टाईटल को लेकर समझौता ही ऐसा हुआ है। अब सवाल यह कि किस विभाग को दी गई जानकारी स्टैंडर्ड मानी जाए और किस विभाग को दी गई झूठी जानकारी के आधार पर इस पर केस लगाया जाए? यदि डीएवीपी, शेयरहोल्डर्स और कॉरपोरेट विज्ञापन के लिए दी गई जानकारी को सही मानें तो उन जानकारियों का क्या जो अखबार श्रम विभाग को उपलब्ध करा रहा है और जिसमें वह खुद को फिसड्‌डी बताने में कमाल कर रहा है।

हां, एक दूसरा कमाल भी चल रहा है कि सालोंसाल संपादकीय में रहे व्यक्ति को यह दस्तावेज दिए जा रहे हैं कि वह तो मैनेजर या सुपरवाइजर स्तर का है। कुछ मामले तो ऐसे हो गए हैं जिनमें एक ही व्यक्ति यह साबित करने की स्थिति में आ गया है कि वह एक ही समय में संपादकीय दायित्व भी संभाल रहा था और उसे मैनेजेरियल जिम्मदारियां भी दे दी गई थीं। कोई तो इन्हें बताए कि झूठे दस्तावेज पेश करने की सजा क्या हो सकती है। यदि ये दस्तावेज सुप्रीमकोर्ट में पेश कर दिए जाएं तो इनका खुद को मरियल, फिसड्‌डी और कंगाल बताने वाला झूठ, सच में भी बदल सकता है।

लेखक आदित्य पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क adityanaditya@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

आदित्य पांडेय की अन्य रिपोर्ट्स भी पढ़ें…

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भास्कर को झटके पर झटका, पत्रकार धर्मेंद्र के बाद अब रिसेप्शनिस्ट लतिका के भी ट्रांसफर पर कोर्ट ने लगाई रोक

भारत में ‘ज़िद करो दुनिया बदलो’ का नारा देने वाले डीबी कॉर्प को लगातार झटके लग रहे हैं, किंतु भास्कर प्रबंधन है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगने पर अपने प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का मुम्बई से सीकर (राजस्थान) ट्रांसफर कर दिया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह अदालत की शरण में गए और इंडस्ट्रियल कोर्ट ने इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी। इसके बाद अब भास्कर की सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) अक्षता करंगुटकर ने डी बी कॉर्प के मुम्बई के माहिम स्थित कार्यालय में कार्यरत महिला रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण का सोलापुर में ट्रांसफर कर दिया।

लतिका ने भी मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर तथा प्रमोशन की मांग को लेकर 17(1) के तहत कामगार आयुक्त कार्यालय में रिकवरी क्लेम लगाया हुआ है। इस बात का पता जैसे ही भास्कर प्रबंधन को चला कि लतिका ने रिकवरी क्लेम लगाया है, भास्कर प्रबंधन ने उन्हें कुछ ले-दे कर क्लेम वापस लेने को कहा। जब लतिका ने इनकार कर दिया तो अक्षता करंगुटकर ने उन्हें सीधे तौर पर धमकी दी कि ‘मैं तुम्हारा करियर बर्बाद कर दूंगी!’ यहां बताना आवश्यक है कि लतिका ने इसकी लिखित शिकायत कामगार विभाग में भी की है। यह बात और है कि लतिका के फैसले से गुस्साई अक्षता करंगुटकर ने उसी दिन उनका ट्रांसफर सोलापुर में कर दिया और घर पर ट्रांसफर लेटर भेज दिया।

यही नहीं, अगले दिन से लतिका चव्हाण के डीबी कॅार्प (माहिम) दफ्तर में प्रवेश पर रोक तक लगा दी गई! प्रबंधन के इस मनमाने रवैये से क्षुब्ध लतिका ने मजीठिया वेज बोर्ड हेतु पत्रकारों के पक्ष में लड़ाई लड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा से बात की। तत्पश्चात उन्हीं की सलाह पर इंडस्ट्रियल कोर्ट में डीबी कॉर्प के एमडी सुधीर अग्रवाल और सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) अक्षता करंगुटकर के साथ-साथ डी बी कॉर्प को भी पार्टी बनाते हुए एक केस फ़ाइल कर दिया।

इस मामले में लतिका चव्हाण का इंडस्ट्रियल कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा युवा एडवोकेट महेश शुक्ला ने। मामले की सुनवाई न्यायाधीश सूर्यवंशी जी ने किया। न्यायाधीश ने लतिका आत्माराम चव्हाण के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी। इस आदेश की जानकारी मिलते ही भास्कर कर्मियों में जहां एक बार फिर ख़ुशी फैल गई, वहीं भास्कर प्रबंधन इस दोहरे झटके से सकते में है! वैसे आपको बता दूं कि भास्कर प्रबंधन ने एक साल पहले भी अपने पत्रकार इंद्र कुमार जैन का ट्रांसफर किया था, मगर तब भी उसे मुंहकी खानी पड़ी थी। फिर 10 अक्टूबर को धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के ट्रांसफर और उस पर लगी अदालती रोक के बाद तो भास्कर की पूरे भारत में थू-थू हो रही है!

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
मोबाइल: 09322411335

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भास्कर के पत्रकार ने प्रबंधन को दिया जोरदार झटका, अदालत से ट्रांसफर रुकवाया

मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के कारण भास्कर प्रबंधन ने अपने पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का कर दिया था ट्रांसफर…

मुम्बई के तेज-तर्रार पत्रकारों में से एक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का दैनिक भास्कर ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगे जाने पर राजस्थान के सीकर में ट्रांसफर कर दिया था। मुम्बई में दैनिक भास्कर में एंटरटेनमेंट बीट के लिए प्रिंसिपल करेस्पांडेंट पद पर कार्यरत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को भास्कर प्रबंधन ने पहले उन्हें लालच दिया कि कुछ ले-दे कर मामला ख़त्म करो। फिर उन्हें भास्कर की सहायक महाप्रबंधक अक्षता करंगुटकर (कार्मिक) ने धमकी दी, जिसकी शिकायत धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने श्रम आयुक्त से की।

जब धमकी से भी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह नहीं डरे तो उनका राजस्थान के सीकर में एंटरटेनमेंट पेज के लिए ट्रांसफर कर दिया गया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का ट्रांसफर लेटर ठीक उस दिन उन्हें घर पर मिला, जब वे मजीठिया वेज बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई के लिए दिल्ली गए थे। दिल्ली से वापस आये तो उन्हें दफ्तर में जाने नहीं दिया गया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पत्रकारों की तरफ से मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा से सलाह ले कर इंडस्ट्रियल कोर्ट की शरण ली, जहां इंडस्ट्रियल कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा युवा एडवोकेट महेश शुक्ल ने।

इस बहस के दौरान इंडस्ट्रियल कोर्ट के जज श्री एस. डी. सूर्यवंशी ने मौखिक टिप्पणी की कि मजीठिया वेज बोर्ड आज देश का सबसे गर्म मामला है। माननीय न्यायाधीश ने साफ़ कहा कि डी बी कॉर्प ने धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का ट्रांसफर गलत तरीके से किया है। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने डीबी कॉर्प के एम. डी. सुधीर अग्रवाल और कार्मिक विभाग की सहायक महाप्रबंधक अक्षता करंगुटकर सहित कंपनी को भी अदालत में पार्टी बनाया है। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह की मदद की रविन्द्र अग्रवाल सरीखे देश के दूसरे पत्रकारों ने, जिन्होंने ऐन वक्त पर उन्हें तमाम जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाए। अदालत द्वारा धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के ट्रांसफर पर रोक लगाने से मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की लड़ाई लड़ रहे मीडियाकर्मियों में खुशी का माहौल है, जबकि भास्कर प्रबंधन के खेमे में निराशा है।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता
मुंबई
संपर्क : 9322411335

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चपरासियों से इस्तीफे साइन कराए भास्कर ने

अपने आपको देश का सबसे बड़ा अखबार बताने वाला दैनिक भास्कर भी मजीठिया आयोग से घबराने लगा है। पहले उसने सभी कर्मचारियों से सामूहिक इस्तीफे लिए। कोर्ट ने इसे नामंजूर कर दिया और कहा कि कुछ भी कर लो लेकिन मजीठिया देना पड़ेगा।

अब भास्कर ने वही गलती दोहराते हुए ग्रुप के सभी चपरासियों से इस्तीफे पर साइन करवा लिया है। कुछ चपरासी तो ऐसे हैं जो पिछले 25-30 साल से नौकरी कर रहे हैं। सावधान हो जाइए, अब अगली बारी एडिटोरियल की हो सकती है या प्रोडक्शन पर भी गाज गिर सकती है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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