CBI रेड अब सारे आरोपों और असफलताओं से निकाल देगा केजरीवाल को! (पढ़ें सोशल मीडिया पर पक्ष-प्रतिपक्ष में टिप्पणियां)

Amitaabh Srivastava : अरविंद केजरीवाल और उनकी मंडली मन ही मन बहुत प्रसन्न होंगे। शकूरबस्ती झुग्गी कांड के बाद बैकफुट पर आई केंद्र सरकार ने सीबीआई छापे के बहाने इस सर्दी में उन्हें victim politics का एक गरमागरम मुद्दा और मौका दे दिया है। सर्दियों में आम आदमी पार्टी की पालिटिक्स गरमाती भी है। इसी बहाने पंजाब के लिए warm up भी हो लेंगे। अलबत्ता उन्हें राहुल बच्चे हैं और मोदी psychopath – इस तरह की भाषा और जुमलों से हर हाल में बचना चाहिए।

Mohan Guruswamy :  It’s a shame that the Prime Minister has stooped to a new low by having the CBI raid and seal the Delhi CM’s office ostensibly to investigate his Secretary on a 2002 matter during the tenure of Sheila Dikshit and also concerning present LG Najib Jung. The CBI reports directly to the PM this action would not have taken place without his consent. This is utterly revolting and this lends credence to Rahul Gandhi’s charge that the PMO is targeting him.

Shamshad Elahee Shams : देश में आपातकाल लग चुका है, क्योंकि आखिरी सिरे तक कायर हैं, इसलिए घोषणा नहीं करेगा। विरोधी पक्ष पर हमले और तेज होंगे। शुरुआत कागजी शेर, लाला जी से की है।

 

Sanjay Sharma :  केजरीवाल के दफ़्तर पर छापा आपातकाल की पहली शुरुआत है. जो लोग कांग्रेस पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते थे, अब खुद वही काम कर रहे हैं.

ऋषि अजीत पाण्डेय : ज्यादा हल्ला न मचाइये. आखिर पैसा तो पकड़ा गया है न. (केजरीवाल के सीएम दफ्तर पर सीबीआइ का छापा)

Sushant Sareen : If rajender wasnt your secretary, would you have made such a song & dance about the raid?

Sn Vinod : केजरीवाल के दफ्तर पर छापे की कार्रवाई ने मोदी और भाजपा को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है।

Ritesh Mishra : गजब भाई.. जिसने भी ये सोचा कि केजरीवाल के यहाँ CBI रेड पड़वाई जाय, वो केजरीवाल समर्थक ही होगा. ये सारे आरोपों और असफलताओं से निकाल देगा केजरीवाल को. ये चला केजरीवाल झाड़ू लिए पंजाब और अन्य प्रांतों में अब. वाह रे मूर्खों. रहबो भक्त ही –ई प्रधानी नै न साहेब, ई देश है!

Mayank Saxena : हालांकि ये निर्विवाद है कि दिल्ली के सीएम के दफ्तर पर सीबीआई रेड केंद्र द्वारा सोची समझी हरकत है…लेकिन यह भी निर्विवाद है कि राजेंद्र कुमार विवादित अधिकारी हैं….तो श्रीमान केजरीवाल जी, पीएम, केंद्र सबके खिलाफ ट्वीट करते रहें…लेकिन साथ ही राजेंद्र कुमार को फिलहाल लम्बी छुट्टी पर भेंज कर, या निलम्बित कर या फिर किसी और विभाग में भेज कर…उनके खिलाफ जांच की घोषणा तो कर दें… आप इसी का वादा कर के तो सत्ता में आए थे न?

प्रकाश कुकरेती :  सीबीआई छापे की हकीकत… इस कहानी के असली किरदार आशीष जोशी हैं, जिनको आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) का फायनेंस सचिव बनाया था. पर अप्रैल 2015 में इनको किसी कारणवश केजरीवाल सरकार ने पद से हटा दिया था. उसके बाद इन साहब ने एंटी करप्शन ब्यूरो जिसके चीफ मीणा हैं, के पास एक शिकायत दर्ज कराई कि केजरीवाल के सचिव राजेन्द्र कुमार ने 2002 से लेकर 2010 तक कोई भ्रष्टाचार किया है. इस शिकायत पर पर ही सीबीआई ने छापेमारी की है. अब जरा राजेन्द्र कुमार के बारे में भी जान लीजिए. सेल टैक्स विभाग किसी भी राज्य का सबसे भ्रष्ट विभाग होता है. पर जब राजेन्द्र कुमार दिल्ली सेल टैक्स जिसे हम वैट विभाग कहते हैं, के कमिश्नर बने थे तो उन्होंने सबसे पहला काम सेल टैक्स को भ्रष्टाचार मुक्त करने का किया. आन लाइन सेल टैक्स रिटर्न फ़ाइल करना, 2A और 2B (यह कम लोग ही समझ पायेंगें) इन्होंने ही लागू किया था. आन लाइन रिफंड इनके वक़्त ही शुरू हुवा था. राजेन्द्र कुमार की वजह से ही सेल टैक्स विभाग में 80% रिश्वतखोरी रुक गई थी, क्योंकि व्यापारी हर काम आनलाइन कर सकता था. आज भी सेल टैक्स के भ्रष्ट कर्मचारी इनको गाली देते हैं कि राजेन्द्र कुमार की वजह से उनकी दो नंबर की कमाई मारी गई.  अब भाई इन पर मामला 2002 से 2010 के बीच का है, तो सवाल तो बनता ही है न कि आशीष जी इतने साल से क्या सो रहे थे, और 2002 के मामले की शिकायत अगर मई 2015 में हो तो सबसे पहला शक शिकायत करने वाले पर जाएगा कि भाई इतने सालों तक आप सो रहे थे क्या? राजेन्द्र कुमार पर भ्रष्टाचार के जो भी मामले हैं वह 2002 से 2010 के बीच के हैं, अब मामला एंटी करप्शन ब्रांच से सीबीआई के पास कैसे गया?

Asad Jafar : CBI Raid on Delhi CM’s Office.. The CBI raid on the office of the Chief Minister of Delhi is highly condemnable and smacks of a politically motivated act. It is unprecedented that in the name of investigating the accusations against a bureaucrat, the office of the Chief Minister should be sealed and files searched, as alleged by the Chief Minister. In any case, if indeed the CBI was targeting a bureaucrat whose office was on the same floor as the CM’s, as claimed by the CBI, why was the Chief Minister not consulted? This raid is a new low in the Modi Government’s encroachment on the rights and dignity of non BJP elected Governments.

Aditi Gupta : दिल्ली के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के दफ्तर और घर पर आज सी बी आई ने छापेमारी करके लाखों रुपये नकद और बेनामी जायदादों के दस्तावेज बरामद किये है. केजरीवाल ने तुरंत इस छापेमारी का विरोध करते हुये देश के प्रधानमंत्री पर अभद्र भाषा मे गाली गलौज़ की बौछार शुरु कर दी है और उन्हे “कायर और मानसिक रोगी” तक कह डाला है. सवाल यह है कि क्या सीबीआई को उन सभी भ्रष्ट अफ़सरों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे देनी चाहिये, जिनके ऊपर केजरीवाल का वरदहस्त है ? अगर ऐसा नही है तो क्या केजरीवाल जी अपनी चिर परिचित बौखलाहट छोड़कर यह बताने की तकलीफ करेंगे कि सीबीआई ने आखिर गलत क्या किया है? भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन करने की नौटंकी करते हुये और “जनलोकपाल” का झुनझुना बजाते हुये आदरणीय अरविन्द केजरीवाल जी दिल्ली की सत्ता हथियाने मे तो कामयाब हो गये हैं लेकिन उन्हे अपने ही दुष्कर्मों के चलते, आगे की राह काफी कठिन लग रही है. इसी के चलते जबसे उनकी सरकार बनी है, शायद ऐसा कोई भी दिन नही गया जब इन्होंने, इनके साथियों ने या फिर इनकी तथाकथित सरकार ने कोई विवादास्पद काम ना किया हो और उस सबका ठीकरा पीएम मोदी के सिर ना फोड़ा हो. या तो केजरीवाल जी यही समझते हैं कि “भ्रष्टाचार” की परिभाषा वही होगी, जैसी वह चाहते हैं या फिर वह यह स्वीकार करते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आन्दोलन एक नौटंकी मात्र थी और देश की जनता को बेबकूफ बनाकर सत्ता के सिहासन तक पहुंचने का जरिया मात्र था. सीबीआई के छापों पर केजरीवाल की जिस तरह से बौखलाहट भरी और बेचैनी से मिश्रित प्रतिक्रिया आई है, उसके दूरगामी परिणाम होंगे. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का सीबीआई छापों मे सुबूतों के साथ रंगे हाथों पकड़े जाना और मुख्यमंत्री महोदय का देश के पीएम को गाली गलौज करते हुये अपने प्रधान सचिव का बचाव करना देश की जनता को उन्ही दिनो की याद दिला रहा है जब पिछले 60 सालों के कुशासन मे दैनिक रूप से अरबों खरबों के घोटालों से देश मे लूटमार का माहौल बना हुआ था. अभी तो गनीमत है कि दिल्ली पुलिस केजरीवाल जी के अधीन नही है. अगर दिल्ली पुलिस भी केजरीवाल जी के अधीन कर दी जाये तो फिर क्या क्या हो सकता है, इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है.

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