मोदी राज की ‘उपलब्धि’! सत्तर साल में पहली बार हुआ है…. केंद्रीय जांच एजेंसी की भी जांच होगी!

Anil Saxena : सीबीआई प्रकरण…. देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी की भी अब जांच होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने आज रिटायर्ड जज की निगरानी में सीवीसी को 2 हफ्ते में घूसखोरी के पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। नए अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को कोई भी नीतिगत फैसला लेने पर रोक लगा दी गई है। पिछले 70 सालों में सीबीआई पर करोड़ों की रिश्वत के ऐसे आरोप नहीं लगे। Continue reading

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करप्ट CBI का सच सब जान गए… यहां बड़े मामले बेनतीजा रख कर फाइल क्लोज कर दी जाती है!

Paramendra Mohan : भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है, सब जानते हैं, लेकिन सीबीआई में भ्रष्टाचार का मौजूदा खुलासा वाकई देश की आंखें खोलने वाला है। भ्रष्टाचार की जांच करने वाली जांच एजेंसी का खुद हद दर्जे की भ्रष्टाचारी होना एक हिला देने वाला खुलासा है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब खुद सीबीआई निदेशक और स्पेशल निदेशक ने इस सबसे बड़ी जांच एजेंसी में होने वाली रिश्वतखोरी, पैसे लेकर मामलों के सेटलमेंट, फैब्रिकेटेड रिपोर्ट बनाने के आरोपों पर मुहर लगाई है। Continue reading

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मोदी के मीडिया प्रबंधन पर भारी पड़ा जेटली का मीडिया प्रबंधन : ओम थानवी

Om Thanvi : जेटली पर राहुल के आरोप की खबर नहीं ही दी अखबारों ने… इससे जाहिर है कि जेटली का मीडिया प्रबंध बड़ा गहरे पैठा हुआ है! मोदी का कुछ कमज़ोर पड़ गया है। Continue reading

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रॉ, आईबी, ईडी और सीबीआई सब के सब एक दूसरे के पीछे पड़ी हैं : अजीत अंजुम

Ajit Anjum : देश की प्रीमियर एजेंसियों का गजब हाल हो गया है… सरकार ने जिस CBI चीफ को जबरन छुट्टी पर भेजा, उसी घर जासूस तैनात हो गए. धरे गए तो पता चला आईबी वाले थे… सीबीआई के नंबर एक वर्मा के एक के पीछे सरकारी जासूस हैं.. नंबर दो अस्थाना भी छुट्टी पर. नंबर तीन शर्मा भी किनारे. सीबीआई अब नंबर चार के सहारे .. Continue reading

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रवीश कुमार ने पूछा- सीबीआई की ‘पार्वती’ और ‘पारो’ में से किसे चुनेंगे देवदास हुज़ूर!

आपने फ़िल्म देवदास में पारो और पार्वती के किरदार को देखा होगा। नहीं देख सके तो कोई बात नहीं। सीबीआई में देख लीजिए। सरकार के हाथ की कठपुतली दो अफ़सर उसके इशारे पर नाचते नाचते आपस में टकराने लगे हैं। इन दोनों को इशारे पर नचाने वाले देवदास सत्ता के मद में चूर हैं। नौकरशाही के भीतर बह रहा गंदा नाला ही छलका है। राजनीति का परनाला वहीं गिरता है जहाँ से उसके गिरने की जगह बनाई गई होती है। चार्जशीट का खेल करने वाली सीबीआई अपने ही दफ़्तर में एफ आई आर और चार्जशीट का खेल खेल रही है। महान मोदी कैलेंडर देख रहे हैं ताकि किसी महान पुरुष की याद के बहाने भाषण देने निकल जाएँ। Continue reading

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सीबीआई में गैंगवार की इनसाइड स्टोरी क्या है?

Girish Malviya 

सीबीआई : एन इनसाइड स्टोरी…

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ‘पिंजरे में बंद तोता’ और ‘मालिक की आवाज़’ बताया था. ऐसा नही है कि मोदी राज में कुछ परिवर्तन आया. परिस्थितियां आज भी वही हैं. लेकिन कल एक अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है. Continue reading

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CBI ने CBI पर रेड मार दी… DSP गिरफ्तार… मोदी के यहां दोनों ‘युद्धरत’ IPS तलब!

Sheetal P Singh : CBI ने CBI पे रेड मारी… सात अजूबे थे दुनिया में… आठवीं अपनी जोड़ी! CBI RAW ED CVC PMO और पुलिस सब दो फाड़. आला अफ़सर एक दूसरे को भ्रष्ट साबित करने में जुटे. ऐसा तमाशा कभी न हुआ. वाह परधान जी वाह.

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सीबीआई में घूसखोरी के भयंकर खुलासे को अखबारों ने भ्रष्टाचार के सामान्य मामले की तरह पेश किया!

इंडियन एक्सप्रेस ने आज पहले पेज पर छह कॉलम में सीबीआई की खबर छापी है जो कल ही सोशल मीडिया पर खूब घूम रही थी। सीबीआई के नंबर वन बनाम नंबर टू के इस मामले में एक्सप्रेस के शीर्षक का हिन्दी होगा, सीबीआई में एक दूसरे पर कीचड़ फेंके गए, दर्जन भर से ज्यादा शिकायतों के साथ अस्थाना ने वर्मा के खिलाफ सूची भेजी। इस मुख्य शीर्षक के नीचे दो कॉलम में ऋतु सरीन की बाईलाइन खबर है, सीबीआई प्रमुख के खिलाफ शिकायत विशेष निदेशक ने मंत्रिमंडल सचिव को भेजी थी। इसके साथ ही तीन कॉलम में सुशांत सिंह की एक्सक्लूसिव खबर है जिसका शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, मोइन कुरैशी मामले के अभियुक्त के बयान के बाद सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ एफआईआर कराई।

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केंद्र का तोता, लगा रहा भ्रष्टाचार में गोता!

Jagdish Jha : केंद्र का तोता, लगा रहा भ्रष्टाचार में गोता… CBI के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने रिश्वत का केस दर्ज होने पर कहा- चीफ ने खुद लिए हैं 2 करोड़ रुपये …. मोदी राज में मची है लूट ….जितना सको उतना तू भी लूट….. Continue reading

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मैंने नहीं, सीबीआई चीफ ने लिए हैं दो करोड़ रुपये : राकेश अस्थाना (स्पेशल डायरेक्टर, सीबीआई)

Sheetal P Singh : सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने रिश्वत का केस दर्ज होने पर कहा- चीफ ने खुद लिए हैं 2 करोड़। इस तरह से राकेश अस्थाना (स्पेशल डायरेक्टर सीबीआई) ने अपना पक्ष रखा। वे कैबिनेट सेक्रेट्री को पहले से अवगत कराते रहे हैं कि खुद सीबीआई चीफ एक अभियुक्त से पैसे लेकर उसका केस ढीला करवा दे रहे हैं। Continue reading

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वर्मा को अस्थाना ने ठीक करने की कोशिश की, अस्थाना को वर्मा ने ठीक कर दिया… मोदी देखते रह गए!

Sanjeev Chandan : वर्मा को अस्थाना ने ठीक करने की कोशिश की, अस्थाना को वर्मा ने ठीक कर दिया… मोदी देखते रह गये… सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की लड़ाई जगजाहिर है. मोदी जी ने गुजरात कैडर के अस्थाना को अपनी खुली कृपा दे रखी थी. इस कृपा का ताप पिछले दिनों मोदी को ही झुलसाने को लपका था, जब नाराज आलोक वर्मा राफेल डील के शिकायत कर्ताओं से मिले. Continue reading

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देश में वाकई भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई चल रही है मितरों! देखें कुछ सीन

Sulabh Chaturvedi : सीन 1 – पी के मिश्रा (प्रिंसिपल सेक्रेटरी, pmo) राकेश अस्थाना की सीबीआई में नियुक्ति करते हैं। सीबीआई नम्बर 1 आलोक वर्मा इस नियुक्ति के विरुद्ध pmo को पत्र लिखते हैं। Continue reading

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सीबीआई रिश्वतकांड : छप्पन इंच के गुब्बारे में एक और छेद हो गया मितरों!

Prashant Tandon : छप्पन इंच के गुब्बारे में एक और छेद… मोदी अपने चहेते और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को सीबीआई प्रमुख नहीं बना पायेंगे. सीबीआई द्वारा अपने ही दूसरे नंबर के अधिकारी के खिलाफ घूसखोरी कांड की एफआईआर में मुख्य अभियुक्त बनाने के बाद ये लगभग तय हो गया है. Continue reading

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मोदी के अधीन काम करने वाली CBI ने 600 करोड़ के डिफ़ॉल्टर को विदेश भागने में मदद की!

Samar Anarya : और अब सीबीआई ने एयरसेल प्रमोटर और 600 करोड़ के डिफ़ॉल्टर सी शिवशंकरन के खिलाफ लुक आउट नोटिस हल्की कर उसके विदेश भागने में मदद की। सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री मोदी के अंदर काम करती है। Continue reading

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CBI में तैनात मोदी के खास अफसर के खिलाफ दो करोड़ रुपये घूस लेने की एफआईआर, मीडिया ने साधी चुप्पी

Sheetal P Singh : CBI ने अपने ही वरिष्ठता क्रम में डायरेक्टर के बाद दूसरे स्थान पर नियुक्त अफसर को दो करोड़ की घूस लेने के आरोप में बुक किया। यह अफसर गुजरात कैडर के आईपीएस हैं और मोदी जी के प्रिय बताए जाते हैं। वर्तमान डायरेक्टर सीबीआई से इनका लंबा विवाद चल रहा है। इनके और ED के एक बहुचर्चित अफसर राजेश्वर सिंह के बीच भी भारी विवाद हैं। CBI catches its insider thief Rakesh Asthana for accepting Rs.2 crores from dubious meat exporter Moin Qureshi to settle cases. Continue reading

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सृजन घोटाले में नेताओं-अफसरों की गिरफ्तारी के लिए वारंट मांगने वाले सीबीआई अधिकारी पर गिरी गाज

नाम है एसके मलिक. सीबीआई में एएसपी हैं. ये बिहार के सृजन घोटाले की जांच करने वाली बीस सदस्यीय सीबीआई टीम के अगुवा हैं. सृजन घोटाला पंद्रह सौ करोड़ रुपये का है और इसमें नेता, अफसर, पत्रकार सब शामिल हैं. कहा जा रहा है कि यह घोटाला चारा घोटाले से भी बड़ा है. इस घाटाले की तह तक जा चुके सीबीआई आफिसर एसके मलिक ने पुख्ता प्रमाण जुटाने और पूछताछ के वास्ते जब सीबीआई कोर्ट से घोटाले में शामिल कुछ नेताओं व अफसरों की गिरफ्तारी के लिए वारंट मांगा तो फौरन उन पर कार्रवाई हो गई. उनका तबादला कर दिया गया.

उन्हें दिल्ली बुलाकर सीबीआई मुख्यालय से अटैच कर दिया गया. उनकी जगह सीबीआई अधिकारी एन. महतो को भेजा गया है. इस सृजन घोटाले में चार बड़े नेता सीबीआई के राडार पर हैं जिनमें से एक केंद्रीय मंत्री है. दूसरा बीजेपी का झारखंड से लोकसभा सदस्य है. तीसरा एक पूर्व भाजपा सांसद है. चौथा जनता दल यूनाइटेड का एक नेता है जो इस स्कैम में शामिल होने की चर्चा के बाद अब पार्टी से सस्पेंड किया जा चुका है. इसी तरह कुल पांच आईएएस अधिकारी इस घोटाले में शामिल हैं जिन पर सीबीआई की निगाह है. ये सारे आईएएस अफसर भागलपुर में जिला मजिस्ट्रेट रह चुके हैं. इनमें से एक ने वीआरएस लेकर 2014 का लोकसभा चुनाव जद यू के टिकट पर लड़ा और हार गया.

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बैंक वाले, सीबीआई और सिस्टम की कृपा से एक और छोटा-मोटा विजय माल्या जनता का धन हड़पने को तत्पर, जानिए पूरी कहानी

To,
THE EDITOR-IN-CHIEF
Bhadas4Media
India

SUBJECT : SCAM/ECONOMIC OFFENCE IN LOAN DEPARTMENT BY CONSORTIUM BANK AGAINST THE LOAN ACCOUNT OF SHREE SHYAM PULP & BOARD MILLS LIMITED

Respected Sir,

A company namely Shree Shyam Pulp & Board Mills Limited having its manufacturing plant in Kashipur (Uttarakhand) (here-in-after SSPBML) was established by Mr. Naresh Kumar Gupta and presently running by Mr. Naresh Kumar Gupta and his son Amit Kumar alias Amit Gupta. SSPBML is engaged in manufacturing of various kinds of writing and printing papers as well as cardboards, copier and other papers. During their regular course of business, SSPBML applied for loan before the consortium of bank; led by UCO Bank, 5 Sansad Marg, New Delhi, with the heading to EXPAND THEIR PLANT and on this ground the bank passed their loan application and passed their loan without the complete verification of their papers. It is pertinent to mention here that the loan which was granted is of more than Rs. 700 Crores (Seven Hundred Crores Only) but the complete worth of machines are not more than Rs. 200 crore (Rupees Two Hundred Crores) and therefore the disbursed amount is much more than the worth value of the machines.

Sometimes in the year 2013, the company SSPBML failed to repay and seeking some time to repay their loan EMI and bank granted. After sometimes, the consortium again asked to SSPBML to repay their loan EMI but SSPBML refused to repay their loan EMI with a very interested reason i.e. “Due to suffering from the cloud burst in the Uttarakhand, he is not in the condition to repay their loan EMI and therefore SSPBML seeking some time to establish their plant to repay their loan EMI and referred the notification of Indian Bank Association (here-in-after IBA)”. It is pertinent to mention here that from the perusal of the governments records, it is too much obvious that SSPBML was never been affected by the cloud burst in Uttarakhand but without any enquiry, the consortium granted time to repay the loan EMI. It is also pertinent to mention here that SSPBML is also defaulter for their EPF and ESIC account though deducted the amount from their employees salary and instead to take action by the EPF and ESIC department, both the departments are only granting the time to SSPBML with the reason known to himself only. It is also pertinent to mention here SSPBML is also not disbursing the salary of their employes since long long time and no one is ready to take appropriate action against the SSPBML.

That after the completion of IBA notification time period, the consortium again asked to repay the loan EMI but SSPBML started to make excuses on one pretext to another and the consortium granted the time to SSPBML. Sometimes in the year 2014, when the consortium felt that SSPBML is cheating them, the consortium declares the account of SSPBML as NPA and proceeded to audit the account of SSPBML through Anil Shalini & Company. During the audit, an interesting fact has been come out that the company have misused the disbursed loan amount. No any machine or other machinery is existing at ground for which the complete loan amount was disbursed even the submitted bills of the machineries are false and fabricated. It is pertinent to mention here that during the submission of the adutior’s report, the auditor clearly stated that they have not found any machine at ground and the claim of the company that they are affected from the natural calamity, is completely false and fabricated as during the audit, the company could not show any paper or document in support of their claim. In their report, the auditor clearly stated that the company is fully involved in illegal activities. The directors of SSPBML misused the letter head, address and signatures of the genuine companies and prepared false and fabricated documents to avail the loan facility. The directors and their family members are involved in illegal activities as they incorporate the false and fabricated to avail the loan facility. The auditor submitted their report to the consortium of the bank with the complete documents which was confirming the diversion of funds. They further said that SSPBML is engaged in diversion of funds and after the finalization of the report, the auditor clearly written that there is a diversion of Rs. 390.94 Crores (Rupees Three Hundred Ninety Crores Ninety Four Lacs Only), done by the company SSPBML but the bank did not take any action against the concerned person. Sometimes in the year 2015, when the consortium came to know that there are two FIR has been lodged against Mr. Naresh Kumar Gupta and Mr. Amit Kumar alias Mr. Amit Gupta and Mr. Amit Kumar and their family members and Mr. Amit Kumar alias Mr. Amit Gupta has already been arrested by the police and sent to the jail, the consortium immediately lodged a complaint before the CBI in the month of September, 2015 with the complete documents.

After the registration of the complaint, the CBI remain silent till date and the complaint has not been converted into the FIR which is completely violation of the guidelines of the Hon’ble Supreme Court of India. It is pertinent to mention here that the bank consortium has also not been take care of the complaint and till date the complaint is still pending with the CBI and the CBI is also saving themselves to take any further action against the accuseds because the accuseds.

Now the condition is this that having ulterior motive and malafide intention, the consortium is ready to settle the loan amount only in Rs. 300-400 crores which is completely wrong and cheating with the tax payers of the nation. It is also pertinent to mention here that the consortium filed a recovery case before the Debt Recovery Tribunal, New Delhi and the tribunal passed the order that SSPBML cannot sell or create an third party interest in the properties but without informing to the tribunal, SSPBML selling/transferring/creating third party interest with the consent of the tribunal which is a crime but the consortium is neither ready to consider the fact nor ready to follow the law. It is also pertinent to mention here that SSPBML is also in the defaulter’s list of the Hon’ble Supreme Court of India but The Consortium has no fear of law and doing as per their wishes. If the consortium settled the loan amount only in Rs. 300-400 crores which is only 40-50 percent of the loan amount instead of 100% i.e. more than Rs. 800 Crores (Rupees Eight Hundred Crores Only), it shall be a big hit on our economy as well as cheating with the tax payers of our country.

By this letter, I humbly request you to kindly consider my letter and highlight this fraud and the corporate scam/economic offence which is a type of scam/economic offence by which the amount of tax payers is going in vein and the government is not doing anything to recover the NPA debt. It is also pertinent to mention here that the company SSPBML has also been in wilful defaulter’s list of Hon’ble Supreme Court of India and still the silence of government is a surprise to the public. I think that the present government is again waiting for the another Vijay Malya case and thereafter they(The government) will show that they are very serious to recover the amount because the government is busy to use The CBI to settle their political rivals which is showing their interest of the public benefits. It is also pertinent to mention here that the CBI has neither been informed to The Enforcement Director about this huge diversion of public money nor taken any action themselves against the concerned persons.

Thanking You.

Regards :-

Amrit Anand

amrit001anand@gmail.com

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सीबीआई की एफआईआर में एस्टर स्कूल के मालिक और उनके बेटे के नाम हैं

ये है वो एफआईआर जिसमें वीके शर्मा और वैभव शर्मा के नाम हैं. वीके शर्मा एस्टर स्कूल के मालिक हैं. इनसे सीबीआई पूछताछ कर रही है. फिलहाल हेमंत का नाम न तो एफआईआर में आया और न ही कहीं सीबीआई डाक्यूमेंट्स में दर्ज है. Continue reading

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हाईकोर्ट ने मथुरा जवाहर बाग कांड की सीबीआई जांच के आदेश दिए

लखनऊ : आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने मथुरा के जवाहर बाग प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है। प्रेस को जारी विज्ञप्ति में आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एस0 आर0 दारापुरी ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय अपने अधीन गठित जांच टीम से जांच कराता जिसमें मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय की संवैधानिक-प्रशासनिक भूमिका की भी जांच होती तो बेहतर होता।

गौरतलब है कि आइपीएफ की टीम ने जून 2016 में घटित मथुरा प्रकरण की जांच की थी और यह पाया था कि मथुरा में राज्य सरकार के सरंक्षण में रामवृक्ष यादव के गिरोह ने वन विभाग के जवाहर बाग को दो वर्षों से बंधक बनाकर समानांतर सत्ता चला रहा था।

आइपीएफ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर उच्च न्यायालय द्वारा गठित जांच टीम से जांच कराने की मांग की थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका में आइपीएफ ने यह मांग की थी कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि खुलेआम भारतीय संविधान और नागरिकों की नागरिकता को चुनौती देने वाले और कानून के शासन को  नकारने वाले रामवृक्ष टीम की कार्यवाहियों की मुख्यमंत्री को यदि सूचना नहीं थी तो वे किस प्रकार उ0 प्र0 में शासन चला रहे है और यदि थी तो उसके विरूद्ध विधिक व प्रशासनिक कार्यवाही न करने की वजह क्या थी?

आइपीएफ ने यह भी मांग की थी कि सार्वजनिक जमीन और अन्य सम्पत्ति सम्प्रदाय विशेष के लोगों को देना राज्य के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के साथ यदि संगत नहीं है तो मथुरा में जय गुरूदेव और साध्वी ऋतंम्भरा के वात्सल्य आश्रम को किस आधार पर सरकार द्वारा सार्वजनिक जमीन दी गयी है, को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

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बोफोर्स फाइल छुपाने के बयान के बाद मुलायम सिंह से पूछताछ करे सीबीआई

मुलायम सिंह ने कहा है कि राजनेताओं पर आपराधिक मुकदमे नहीं चलाये जाने चाहिये. उनके अनुसार इसीलिए भारत के रक्षामंत्री रहते उन्होंने बोफोर्स की फाइल छुपा दी थी. इस कथन से दो निष्कर्ष निकलते हैं. एक तो ये कि नेताजी की जानकारी में था कि कोई राजनेता बोफोर्स में शामिल है और वे उसे बचाना चाहते थे. अच्छा होगा वे उसका नाम देश को बताएं. वर्ना सीबीआई, जिसने इस मामले की जांच की थी, वह उनसे पूछताछ करे.

दूसरी बात यह है कि फाइल छुपाकर मुलायम सिंह ने न्याय-प्रक्रिया को बाधित किया. वे खुद ही ऐसा दावा कर रहे हैं. लिहाजा भारतीय दंड संहिता की सक्षम धाराओं के अंतर्गत उन्हें हिरासत में लेकर उनके विरुद्ध कार्रवाही की जानी चाहिए. किसी क्रिमिनल मुक़दमे में सबूत छुपाना या मिटाना गंभीर अपराध है. अंतिम बात कहनी है कि राजनेताओं को आपराधिक कानून से ऊंचा मानकर नेताजी ने भारतीय संविधान के प्रति ली गयी शपथ तोड़ी है क्योंकि संविधान की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं, कोई कानून से ऊपर नहीं है. केवल तानाशाही में सत्ताधीश विधि से ऊपर माने जाते हैं, लोकतंत्र में नहीं; इसमें तो न्यायपालिका ही अपराधी-निरपराधी तय कर सकती है, कोई मुलायम सिंह नहीं.

अजय मित्तल

खंदक, मेरठ 

ajay.mittal97khandak@gmail.com

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जानिए, दीपक चौरसिया समेत कई पत्रकारों के खिलाफ सीबीआई ने क्यों दर्ज की एफआईआर

Vishwanath Chaturvedi : धरा बेच देगे, गगन बेंच देगे, कलम बिक चुकी है, वतन बेच देगे! पैसे खाकर फर्जी खबर चलाने के आरोपी दीपक चौरसिया, भूपेंद्र चौबे, मनोज मित्ता सहित अन्य के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज की एफ़आईआर… मुलायम के आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 फ़रवरी 2009 को सुनवाई से पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुलायम कुनबे को क्लीन चिट दिए जाने की खबर प्राइम टाइम में प्रमुखता से चलाकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने और सीबीआई की इमेज को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सीबीआई की डीआईजी रहीं तिलोतिमा वर्मा ने लिखाई एफआईआर.

मीडिया द्वारा बिना सबूतों के अमर सिंह के टुकड़ों पर पलने वाले कथित अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय जो कि फोन टेपिंग और ब्लैक मेलिंग, फर्जी रिपोर्ट तैयार करने के मास्टर हैं, 2005 में भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे एसबी सिन्हा का बेटा बताकर गोवा राज भवन में गोवा के राज्यपाल की सीडी बनाने की नीयत से रुके. असलियत खुलने पर पणजी थाने में राज भवन द्वारा एफआईआर दर्ज कराकर प्रदीप राय को पुलिस को सौंप दिया गया. उक्त प्रकरण आज भी विचाराधीन है.

सीबीआई की डीआईजी रहीं तिलोतिमा वर्मा के फर्जी हस्ताक्षर से पैसे के साथ प्रदीप राय द्वारा बांटी गई रिपोर्ट को बिना कनफर्म किये, चैनलों द्वारा मनमाने तरीके से चलाई गई ख़बर के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में हमने 20 फरवरी 2009 को अप्लीकेशन फ़ाइल कर एसआईटी गठित कर फर्जी रिपोर्ट चलाने वालों की जाँच कराने की मांग कर दी. घबराई सीबीआई ने आनन फानन में प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया, सचिव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सचिव डीओपीटी को शिकायती पत्र लिखकर उक्त पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की. सुप्रीम कोर्ट में 30 मार्च की डेट फिक्स थी, सीबीआई ने 16 मार्च 2009 को एफआईआर दर्ज करा दी. इसे District new Delhi ps Cbi/stf year 2009 FirNo rc/Dst/2009/s/0001 date: 16.3.2009… act Ipc section 120b/r/w 465,469/500&471 and the subatantive offences thereof other acts& sections. suspected offences: criminal conspiracy forgery, forgery for the purpose of harming reputation use ing as genuine a fored document and printing or engrabing matter know to be defamatory के जरिए खोजा देखा पढ़ा जा सकता है.

जाने-माने वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी के एफबी वॉल से.

इस प्रकरण से संबंधित सीबीआई के कई पन्नों के दस्तावेजों को पढ़ने के लिए अगले पेज पर जाने हेतु नीचे क्लिक करें…

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जानिए, मोदी का मूड बिगड़ा तो किस तरह चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम!

ये ‘सीबीआई प्रमाड़ित ईमानदार’ क्या होता है नेताजी?

सौदेबाज मुलायम का कुनबा 26 अक्टूबर 2007 से वाण्टेड है, क़ानूनी रूप में सीबीआई की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 40 दिनों में एफआईआर हो जानी चाहिए थी. चूँकि सीबीआई सत्ता चलाने का टूल बन चुकी है, सो सीबीआई कोर्ट पहुँच गई एफआईआर की परमीशन मांगने। उस वक्त मुलायम के पास 39 सांसदों की ताकत थी। खुली लूट की आजादी में रोड़ा बन रहे वामपंथियों से मनमोहन का गिरोह छुटकारा चाहता था और अपने आकाओं के इशारे पर हरहाल में न्यूक्लियर डील कराने पर आमादा था।

इसी बीच नवम्बर 07 में वामदलों ने सरकार को चेतावनी देकर कहा कि यदि सरकार ने डील की तो समर्थन वापस ले लूंगा। मनमोहन गिरोह के मैनेजरों को मुलायम के डीए केस पर निगाह लग गयी।  यहीं से शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का सिलसिला जो कि 2014 तक जारी रहा। न्यूक्लियर डील हो जाने के बाद मेरे निजी उत्पीड़न का दौर शुरू हुआ। पैसे के आफर दिए गए, सुरक्षा छीन ली गई, जान से मारने की धमकी दी गई। ये सारे दांव कोर्ट में सीबीआई का केस वापसी का हलफनामा दायर कराने के लिए आजमाए गए। सन 2009 के लोकसभा चुनावों में सपा से गठबन्धन कर चुनाव लड़ने का ख़्वाब देखने वाले मनमोहन गिरोह को उस वक्त हताशा हुई जब कोर्ट में केस वापसी का मैंने विरोध किया।

उसी दौरान सीबीआई की डीआईजी के फर्जी हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट मीडिया में हेडलाइन बनाकर चलाकर कोर्ट को दबाव में लेने का असफ़ल प्रयास किया गया लेकिन कोई दाव काम नहीं आया और 10 फरवरी 20009 को कोर्ट ने फ़ैसला रिजर्व कर लिया। 2009 के चुनावों से पहले सपा ने गठबंधन तोड़ने का एलान कर दिया। 2009 के लोकसभा चुनावो में उप्र में स्थानीय कारणों से कांग्रेस को 21 सीटों पर सफलता मिली। अब मेरे उत्पीड़न की धार तेज हो चुकी थी। संसद में कट मोशन, जेपीसी, राष्ट्रपति चुनाव सहित जब कोई बड़ा सवाल हुआ, फ़ौरन कोर्ट में केस लिस्ट हुआ और सरकार व मुलायम के वकील एक स्वर में मेरे ऊपर पिल पड़ते थे। एक बार तो एटार्नी जनरल वाहनवती से कोर्ट को पूछना पड़ा कि आप मुलायम के वकील हो या केंद्र सरकार के।

2014 में सत्ता परिवर्तन हुआ। मोदी जी प्रधानमंत्री बने। मुलायम की बांछे खिल गई क्योंकि असल में मुलायम की धोती के नीचे खाकी है। 1977 में जनता पार्टी में संघ के साथ काम कर चुके हैं। 1989 और 2003 में भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री रह चुके हैं। अब मोदी वंदना जेल जाने से बचने के लिए कर रहे हैं। यदि मुलायम में हिम्मत है तो मोदी के ख़िलाफ़ एक लफ्ज बोलकर दिखाएं। मुलायम को मालूम है कि कोर्ट ने एफआईआर किये जाने के लिए रोक नहीं लगाई है। यदि मोदी का मूड बिगड़ा तो चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम।

मुलायम को यह भी मालूम है कि जब कोर्ट के निर्देश पर जाँच हो रही है तो कोर्ट ही जेल भेजेगी या केस खत्म करेगी। समर्थन की कीमत वसूल चुके मुलायम मीडिया से भी वसूली कर रहे हैं। भारतीय मीडिया तीन बार केस क्लोज कर चुकी है। एकतरफा बयानों के आधार पर केस का क्लोजर रिपोर्ट चलाने वाली मीडिया को भी मालूम है कि इस प्रकरण में 3 पक्षकार हैं। मुलायम का कुनबा, कोर्ट और याचिका कर्ता, लेकिन दो पक्ष फायदे का सौदा नहीं है। मुलायम के पास सत्ता है, देने के लिए बहुत कुछ है, सो जब मन किया क्लोजर कर दिया। वैसे भी मीडिया के बारे में आम राय बन गई है कि यह सत्ता की चेरी है, भाट वंदना में माहिर है, फील्ड में खपने वाले पत्रकार लाचारी और बेचारगी की स्थिति में हैं।

The certified copy of supreme court on mulayam Singh’s DA case 15/09/2015 and this is the the last affidavit filed by cbi in supreme court on 30/03/2009.

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
CIVIL APPELETE JURISDICTION
WRIT PETITION ( C ) NO. 633 OF 2005
IN THE MATTER OF:
Vishwanath Chaturvedi Petitioner
Versus
Union of India & Ors. Respondents
Affidavit on behalf of Central Bureau of Investigation

I, S.R. Majumdar, aged about 57 years, son of Shri B.B. Majumdar, working as Supdt. Pf Police, Central Bureau of Investigation, Anti-Corruption Unit-IV, 8th Floor, Lok Nayak Bhawan, Khan Market, New Delhi, do hereby state on oath, affirm and declare as under:
1. That I am Supervisory Officer in the enquiry in the present case and I am conversant with and aware of the facts of the case as derived from the records, which I believe to be true, and am competent to depose this Affidavit.

2. It is respectfully submitted that this affidavit is being filed on behalf of Central Bureau of Investigation (CBI) to place on record before this

Hon’ble Court certain vital facts and in order to allay misgiving / erroneous impressions, in certain quarters, and to highlight that CBI has proceeded in this matter with utmost dedication and integrity as warranted and expected in terms of the judgement of this Hon’ble Court in the aforesaid matter.

3. It is respectfully submitted that this Hon’ble Court had issued certain directions to CBI in a Writ Petition (Civil) No. 633/2005 and in particular craves leave to highlight Paras 34, 37 and 42 of the Judgement of this Hon’ble Court reported in (2007) 4 SCC 380. These paras road as follows:
Para 34:
“…………We, therefore, direct the CBI to conduct a preliminary enquiry into the assets of all the respondents and after scrutinizing if a case is made out then to take further action in the matter”.
Para 37:
“The ultimate test, in our view, therefore, is whether the allegations have any substance. An enquiry should not be shut out at the threshold because a political opponent of a person with political difference raises an allegation of commission of offence. Therefore, we mould the prayer in the writ petition and direct the CBI to enquire into alleged acquisition of wealth by respondent Nos. 2-5 and find out as to whether the allegations made by the petitioner in regard to disproportionate assets to the known source of income of respondent Nos. 2-5 is correct or not and submit a report to the Union of India and on receipt of such report, the Union of India may take further steps depending upon the outcome of the preliminary enquiry into the assets of respondent Nos. 2-5”.
Para 42:
“The Registry is directed to send in sealed cover the documents market as ‘A’ to ‘H’ and all the copies of the sale deeds and other statements etc. filed by the parties to the CBI. The CBI may take the
preliminary enquiry, CBI had received documents sent by this Hon’ble Court referred to in Para 42 of the said Judgement.

5. It is respectfully submitted that after careful scrutiny of the documents received from this Hon’ble Court, CBI issued requisitions to Banks where accounts of the respondents no. 2 to 5 were maintained, to Sub Registrar office within whose jurisdiction the immovable properties which were subject matter of the enquiry were situated, the Income Tax Department and also to the Chartered

Accountant of respondents no. 2 to 5 and other concerned authorities.

6. It is respectfully submitted that the required documents as sought for from the Banks, Income Tax Department and the Sub Registrar office and other authorities were obtained. CBI faced non-cooperation in collecting documents from office of the Chartered Accountants of respondents no. 2 to 5.

7. It is respectfully submitted that the immovable properties which were subject matter of the enquiry were sought to be evaluated through the Valuation Cell of Income Tax Department and even through the CBI wanted respondents 2 and 3 to be present either in person or through their authorized representative and had given notice regarding the date and time if the evaluation, none from their side were present on two occasions. Therefore, the evaluation work could not be undertaken. The other issues which were required to be examined have been mentioned in the Status Report.

8. It is respectfully submitted that a Preliminary Enquiry Report was prepared with the available evidence pursuant to the direction of this Hon’ble Court and the enquiry in this regard was concluded on 26th October, 2007 as per the procedure laid down in the CBI Crime Manual, 2005. A Status Report was prepared which can
be placed before this Hon’ble Court for perusal.

9. It is respectfully submitted that thereafter on conclusion of enquiry, an Interlocutory Application being I.A. No. 12 of 2007 was filed in the present matter on 26.10.2007 with the following prayer:-
(a) Pass an order/ direction permitting the applicant (CBI) to proceed further reference in the matter in accordance without any further reference to the Union Government or State Government: and
(b) Pass such other further orders, as this Hon’ble Court may deem fit and proper in the facts and circumstances of the case and in the interests of justice.
10. It is respectfully submitted that the matter came up before this Hon’ble Court on 29.10.2007 and directions were given for issue of notice to all the parties for filling of replied within 4 weeks. No replies were filed. An interlocutory application being I.A. No. 13 of 2008 was filed on 12th March 2008, with the prayer for early hearing of I.A. No. 12 of 2007. The Hon’ble Registrar of Hon’ble Supreme Court granted another four weeks time to all the respondents for filing of counter affidavits. Since no reply was files, the matter came up for hearing on 7.5.2008 and the Hon’ble

Registrar directed that the matter be put up before the Hon’ble Bench.

11. It is respectfully submitted that after a lapse of nearly nine months from the date of conclusion of Preliminary Enquiry, representations were sent on behalf of respondents no. 2 to 5, starting from July 2008 (representation dated 14.7.2008, 18.9.2008 and 29.10.2008) by Smt. Dimple Yadav through Department of Personnel Training (DOP&T) for taking into account additional facts pertaining to clubbing of income of all the four respondents and to accept the determination of value of property, wealth and income as accepted by the competent authorities. The copies of the representations are on the file of CBI and the same can be produced before the Hon’ble Court, if so warranted.

12. It is respectfully submitted that there were divergent views within the CBI as to whether at this stage the representations so received could be looked into. Therefore, the matter was sought to be referred for legal opinion of a high ranking Law Officer of Government of India, through the nodal Ministry i.e., Department of Personal and Training (DOP&T). The matter was sent for the opinion of Law Officer on 7.11.2008. the legal opinion from the LD. Solicitor General of India dated 21.11.2008 was received through the Department of Personal and Training Government of India.

13. It is respectfully submitted that based on the legal opinion received through the Department of Personal and Training, Government of India, CBI files an interlocutory application being I.A. No. 14 of 2008 on 6.12.2008 for withdrawal of I.A. No. 12 of 2007.

14. It is respectfully submitted that CBI stands by its recommendations made in the Status Report of 26.10.2007 as informed to this Hon’ble Court vide IA no. 12/2007.

15. It is respectfully submitted that another representation from respondent Smt. Dimple Yadav was received through Department of Personal and Training on 27.1.2009 subsequent to the hearing which took place before the Hon’ble Court on 6.1.2009. This representation has also been kept on record.

16. It is respectfully submitted that some print media have published false/fabricated news related to this matter on 9.2.2009 just a day prior to the scheduled hearing in this matter before this Hon’ble Court on 10.2.2009. This false/fabricated news was also aired through some of the channels of the electronic media, which continued to be telecast till 13.2.2009. It was also mentioned before this Hon’ble Court that the respondents have copies of some documents of CBI, Specific reference being made to the news-item published in The Times of India dated 9.2.2009 related to this enquiry. It is respectfully submitted in this regards that the news report mentioned above is totally false and fabricated.

Complaints have already been lodged with the Press Council of India and the Secretary, Ministry if Information & Broadcasting, Government of India, New Delhi in this regard. Copies of complaints lodged by CBI with the Press Council of India, the Secretary, Ministry if Information & Broadcasting, Government of India and letter dated 18.2.2009 sent to Department of Personal & Training for permitting filing of a criminal case a Civil Suit against The Times of India, Star News, CNN-IBN for slanderous, incorrect and false news report/telecast are appended herewith as Annexure A, B & C respectively.

17. It is respectfully submitted further that as the matter called for an in-depth investigation to find out as to who are responsible for the publication of false and fabricated reports related to the aforementioned enquiry with a view to malign and tarnish the reputation of the CBI as well as defaming the CBI officials to whom these non-existent reports dates 30.7.2007 and 20.8.2007 and so called 17-page internal review note dated 2.2.2009 were attributed, a Regular Case has been registered by CBI against unknown person u/s 120B r/w 465, 469/500 & 471 of IPC and the substantive offences thereof which is under investigation vide FIR copy enclosed as Annexure – D.

18. It is respectfully submitted that as far as the CBI is concerned, it has acted in utmost good faith in the present matter and is placing these facts only to highlight that CBI has strictly complied with the directions of this Hon’ble Court and still stands by its Status Report dated 26.10.2007.

DEPONENT
VERIFICATION
I, S.R. Majumdar, Supdt. Of Police, ACU-V, 8th Floor, Lok Nayak Bhawan, Khan Market, New Delhi, son of Shri B.B. Majumdar, the above named deponent do hereby verify that the contents of the above affidavit are true and correct to the best of my knowledge based on the official records.

Verified and signed on this _______ day of March, 2009 at New Delhi.

जाने माने वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी के एफबी वॉल से.

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पर्ल ग्रुप की संपत्तियों की नीलामी के लिए सुप्रीम कार्ट ने कमेटी बनाई

हाल ही में करीब 50,000 करोड़ रूपये की हेराफरी के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू को गिरफ्तार किया था. उन पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगा था. अब खबर आ रही है कि पर्ल ग्रुप की संपत्तियों की नीलामी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बना दी है. कोर्ट ने पूर्व जज आर एम लोढा की अध्यक्षता में कमेटी बनाई. सेबी के जरिये लोगों को पैसे लौटाया जाएगा और यह कमेटी इस बात की निगरानी रखेगी कि किस तरह अगले 6 महीनों में लोगों के कर्ज को चुकाया जा सके. सेबी को इस केस से जुड़े सारे दस्तावेज़ इस कमेटी को सौंपना होगा.

कंपनी पर पोन्जी योजना के जरिए निवेशकों के 55 हजार करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है. P7 न्यूज़ चैनल और पर्ल्स ग्रुप के चेयरमैन निर्मल सिंह भंगू के साथ सीबीआई ने 4 दूसरे लोगों को भी गिरफ्तार किया है. कंपनी पर आरोप है कि इसने करीब 6,00,00,000 निवेशकों से 49,100 करोड़ रुपए जुटाये हैं. सेबी के आदेश के मुताबिक अगर पीएसीएल ब्याज समेत ये रकम रिफंड करती है तो उसे करीब 55,000 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी.

इस मामले की जांच सेबी के अलावा सीबीआई और ईडी भी कर रहे हैं. सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कंपनी के चारों कार्यकारियों को सीबीआई के मुख्यालय पर गहन पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उन्होंने बिना तालमेल वाले जवाब देने शुरू किए और साथ ही सहयोग करना भी बंद कर दिया, जिसके बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। इनके खिलाफ IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश) तथा 420 (धोखाधड़ी) की धाराओं में मामला दायर किया गया है। निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच देकर उनसे धन जुटाया गया था.

सीबीआई ने 19 फरवरी, 2014 को पर्ल्स के 60 साल के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू पर देश के इतिहास में सबसे बड़े चिटफंड घोटाले को चलाने की आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। करीब 2 साल बाद अब उसे सीबीआई गिरफ्तार करने में सफल हुई है। घोटाले की रकम 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 5 करोड़ से ज्यादा छोटे निवेशकों से पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड और पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट लिमिटेड के नाम पर धोखे से ली गई थी। पर्ल्स की ये दोनों कंपनियां जमीन-जायदाद का कारोबार करती दिखाई गईं थीं।

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मुबारक हो, सीबीआई आजाद हो गई है, यूपी के पॉवरफुल सत्ताधारी नेता का बेटा भी अरेस्ट होगा!

Narendra Nath : मुबारक हो। आज से सीबीआई आजाद हो गया। “पिंजरे में बंद तोता” वह नहीं रहा। अब आकाओं के आदेश की प्रतीक्षा नहीं होगी। सीधा एक्शन होगा। कोई कितना पॉवरफुल हो, बचेगा नहीं। फंसने वाला किस झंडे का है या उसका राजनीतिक झुकाव क्या है, इस बारे में सीबीआई एक बार भी नहीं सोचेगी। उम्मीद करते हैं कि…

-कल उत्तर प्रदेश के उस बड़े नेता के बेटे को अरेस्ट कर लिया जाएगा जिसके बारे में सब जानते हैं कि सीबीआई ने सारे सबूत जुटाकर उसे डील के रूप में कही जमा कर दिया। उसके बाद उनका पूरा कुनबा “मुलायम” हो गया है।

-बहुत जल्द मध्य प्रदेश में उन सभी बड़े लोगों को अंदर कर लेगी जिन्होंने व्यापम में न सिर्फ एक के बाद एक कई मर्डर कर दिये बल्कि अरबों रुपये का स्कैम कर वहां ऐसे डॉक्टर तैयार किये जिसे आला तक पकड़ने नहीं आता है। सुना है सारे दस्तावेज सीबीआई के पास महीनों से हैं।-2जी में फंसे सारे बड़े-बड़े उद्योगपति से जुड़े सबूत भी सीबीआई सामने ला देगी जिसमें कई सफेदपोशों के नाम हैं। सब जानते हैं कि किस तरह एकबहुत बड़े उद्योगपति का टेप राडिया टेप में सुनकर सीबीआई के हाथ कांप गये थे। आज भी वह उद्योगपति देश के सबसे सम्मानित शख्सियत में शामिल हैं।

-सीबीआई पता लगाकर रहेगी कि ललित मोदी और क्रिकेट का क्या घोटाला है और इसका राजनीतिक नेक्सस है। इससे सभी जुड़े लोगों के यहां इसी तरह रेड मार सारे सबूत ले लेगी। हाथ नहीं कापेगा।

-छत्तीसगढ़ में चावल घोटाला हो या एस्सार जासूसी मामला सीबीआई अब नहीं झुकेगी। ब्लैक मनी होल्डर के नाम को पब्लिक करेगी और उनपर एक्शन लेगी। यह लिस्ट सीबीआई के पास पिछले 5 सालों से है लेकिन अब तक सारे आका,इस लिस्ट को सामने लाने से रोकते रहे हैं।

-सोनिया गांधी-राहुल गांधी, राबर्ट वाड्रा के मामले से जुड़े केस को हैंडल करने में हाथ नहीं कांपेगे और बिना डील किये जांच सील होगी।

सीबीआई डरेगी नहीं। जिस तरह निष्पक्ष तरीके से एक सीएम के ऑफिस को सील कर उनके सेक्रेटरी के ऑफिस में रेड मारा गया, उससे उसके प्रति विश्वास बढ़ गया है। आगे बढ़ो सीबीआई।

 

टाइम्स आफ इंडिया में कार्यरत पत्रकार नरेंद्र नाथ के फेसबुक वॉल से

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CBI रेड अब सारे आरोपों और असफलताओं से निकाल देगा केजरीवाल को! (पढ़ें सोशल मीडिया पर पक्ष-प्रतिपक्ष में टिप्पणियां)

Amitaabh Srivastava : अरविंद केजरीवाल और उनकी मंडली मन ही मन बहुत प्रसन्न होंगे। शकूरबस्ती झुग्गी कांड के बाद बैकफुट पर आई केंद्र सरकार ने सीबीआई छापे के बहाने इस सर्दी में उन्हें victim politics का एक गरमागरम मुद्दा और मौका दे दिया है। सर्दियों में आम आदमी पार्टी की पालिटिक्स गरमाती भी है। इसी बहाने पंजाब के लिए warm up भी हो लेंगे। अलबत्ता उन्हें राहुल बच्चे हैं और मोदी psychopath – इस तरह की भाषा और जुमलों से हर हाल में बचना चाहिए।

Mohan Guruswamy :  It’s a shame that the Prime Minister has stooped to a new low by having the CBI raid and seal the Delhi CM’s office ostensibly to investigate his Secretary on a 2002 matter during the tenure of Sheila Dikshit and also concerning present LG Najib Jung. The CBI reports directly to the PM this action would not have taken place without his consent. This is utterly revolting and this lends credence to Rahul Gandhi’s charge that the PMO is targeting him.

Shamshad Elahee Shams : देश में आपातकाल लग चुका है, क्योंकि आखिरी सिरे तक कायर हैं, इसलिए घोषणा नहीं करेगा। विरोधी पक्ष पर हमले और तेज होंगे। शुरुआत कागजी शेर, लाला जी से की है।

 

Sanjay Sharma :  केजरीवाल के दफ़्तर पर छापा आपातकाल की पहली शुरुआत है. जो लोग कांग्रेस पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते थे, अब खुद वही काम कर रहे हैं.

ऋषि अजीत पाण्डेय : ज्यादा हल्ला न मचाइये. आखिर पैसा तो पकड़ा गया है न. (केजरीवाल के सीएम दफ्तर पर सीबीआइ का छापा)

Sushant Sareen : If rajender wasnt your secretary, would you have made such a song & dance about the raid?

Sn Vinod : केजरीवाल के दफ्तर पर छापे की कार्रवाई ने मोदी और भाजपा को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है।

Ritesh Mishra : गजब भाई.. जिसने भी ये सोचा कि केजरीवाल के यहाँ CBI रेड पड़वाई जाय, वो केजरीवाल समर्थक ही होगा. ये सारे आरोपों और असफलताओं से निकाल देगा केजरीवाल को. ये चला केजरीवाल झाड़ू लिए पंजाब और अन्य प्रांतों में अब. वाह रे मूर्खों. रहबो भक्त ही –ई प्रधानी नै न साहेब, ई देश है!

Mayank Saxena : हालांकि ये निर्विवाद है कि दिल्ली के सीएम के दफ्तर पर सीबीआई रेड केंद्र द्वारा सोची समझी हरकत है…लेकिन यह भी निर्विवाद है कि राजेंद्र कुमार विवादित अधिकारी हैं….तो श्रीमान केजरीवाल जी, पीएम, केंद्र सबके खिलाफ ट्वीट करते रहें…लेकिन साथ ही राजेंद्र कुमार को फिलहाल लम्बी छुट्टी पर भेंज कर, या निलम्बित कर या फिर किसी और विभाग में भेज कर…उनके खिलाफ जांच की घोषणा तो कर दें… आप इसी का वादा कर के तो सत्ता में आए थे न?

प्रकाश कुकरेती :  सीबीआई छापे की हकीकत… इस कहानी के असली किरदार आशीष जोशी हैं, जिनको आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) का फायनेंस सचिव बनाया था. पर अप्रैल 2015 में इनको किसी कारणवश केजरीवाल सरकार ने पद से हटा दिया था. उसके बाद इन साहब ने एंटी करप्शन ब्यूरो जिसके चीफ मीणा हैं, के पास एक शिकायत दर्ज कराई कि केजरीवाल के सचिव राजेन्द्र कुमार ने 2002 से लेकर 2010 तक कोई भ्रष्टाचार किया है. इस शिकायत पर पर ही सीबीआई ने छापेमारी की है. अब जरा राजेन्द्र कुमार के बारे में भी जान लीजिए. सेल टैक्स विभाग किसी भी राज्य का सबसे भ्रष्ट विभाग होता है. पर जब राजेन्द्र कुमार दिल्ली सेल टैक्स जिसे हम वैट विभाग कहते हैं, के कमिश्नर बने थे तो उन्होंने सबसे पहला काम सेल टैक्स को भ्रष्टाचार मुक्त करने का किया. आन लाइन सेल टैक्स रिटर्न फ़ाइल करना, 2A और 2B (यह कम लोग ही समझ पायेंगें) इन्होंने ही लागू किया था. आन लाइन रिफंड इनके वक़्त ही शुरू हुवा था. राजेन्द्र कुमार की वजह से ही सेल टैक्स विभाग में 80% रिश्वतखोरी रुक गई थी, क्योंकि व्यापारी हर काम आनलाइन कर सकता था. आज भी सेल टैक्स के भ्रष्ट कर्मचारी इनको गाली देते हैं कि राजेन्द्र कुमार की वजह से उनकी दो नंबर की कमाई मारी गई.  अब भाई इन पर मामला 2002 से 2010 के बीच का है, तो सवाल तो बनता ही है न कि आशीष जी इतने साल से क्या सो रहे थे, और 2002 के मामले की शिकायत अगर मई 2015 में हो तो सबसे पहला शक शिकायत करने वाले पर जाएगा कि भाई इतने सालों तक आप सो रहे थे क्या? राजेन्द्र कुमार पर भ्रष्टाचार के जो भी मामले हैं वह 2002 से 2010 के बीच के हैं, अब मामला एंटी करप्शन ब्रांच से सीबीआई के पास कैसे गया?

Asad Jafar : CBI Raid on Delhi CM’s Office.. The CBI raid on the office of the Chief Minister of Delhi is highly condemnable and smacks of a politically motivated act. It is unprecedented that in the name of investigating the accusations against a bureaucrat, the office of the Chief Minister should be sealed and files searched, as alleged by the Chief Minister. In any case, if indeed the CBI was targeting a bureaucrat whose office was on the same floor as the CM’s, as claimed by the CBI, why was the Chief Minister not consulted? This raid is a new low in the Modi Government’s encroachment on the rights and dignity of non BJP elected Governments.

Aditi Gupta : दिल्ली के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के दफ्तर और घर पर आज सी बी आई ने छापेमारी करके लाखों रुपये नकद और बेनामी जायदादों के दस्तावेज बरामद किये है. केजरीवाल ने तुरंत इस छापेमारी का विरोध करते हुये देश के प्रधानमंत्री पर अभद्र भाषा मे गाली गलौज़ की बौछार शुरु कर दी है और उन्हे “कायर और मानसिक रोगी” तक कह डाला है. सवाल यह है कि क्या सीबीआई को उन सभी भ्रष्ट अफ़सरों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे देनी चाहिये, जिनके ऊपर केजरीवाल का वरदहस्त है ? अगर ऐसा नही है तो क्या केजरीवाल जी अपनी चिर परिचित बौखलाहट छोड़कर यह बताने की तकलीफ करेंगे कि सीबीआई ने आखिर गलत क्या किया है? भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन करने की नौटंकी करते हुये और “जनलोकपाल” का झुनझुना बजाते हुये आदरणीय अरविन्द केजरीवाल जी दिल्ली की सत्ता हथियाने मे तो कामयाब हो गये हैं लेकिन उन्हे अपने ही दुष्कर्मों के चलते, आगे की राह काफी कठिन लग रही है. इसी के चलते जबसे उनकी सरकार बनी है, शायद ऐसा कोई भी दिन नही गया जब इन्होंने, इनके साथियों ने या फिर इनकी तथाकथित सरकार ने कोई विवादास्पद काम ना किया हो और उस सबका ठीकरा पीएम मोदी के सिर ना फोड़ा हो. या तो केजरीवाल जी यही समझते हैं कि “भ्रष्टाचार” की परिभाषा वही होगी, जैसी वह चाहते हैं या फिर वह यह स्वीकार करते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आन्दोलन एक नौटंकी मात्र थी और देश की जनता को बेबकूफ बनाकर सत्ता के सिहासन तक पहुंचने का जरिया मात्र था. सीबीआई के छापों पर केजरीवाल की जिस तरह से बौखलाहट भरी और बेचैनी से मिश्रित प्रतिक्रिया आई है, उसके दूरगामी परिणाम होंगे. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का सीबीआई छापों मे सुबूतों के साथ रंगे हाथों पकड़े जाना और मुख्यमंत्री महोदय का देश के पीएम को गाली गलौज करते हुये अपने प्रधान सचिव का बचाव करना देश की जनता को उन्ही दिनो की याद दिला रहा है जब पिछले 60 सालों के कुशासन मे दैनिक रूप से अरबों खरबों के घोटालों से देश मे लूटमार का माहौल बना हुआ था. अभी तो गनीमत है कि दिल्ली पुलिस केजरीवाल जी के अधीन नही है. अगर दिल्ली पुलिस भी केजरीवाल जी के अधीन कर दी जाये तो फिर क्या क्या हो सकता है, इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है.

फेसबुक से.

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सीबीआई का कांग्रेस से भी भयंकर दुरुपयोग कर रही है मोदी सरकार, जानिए पूरा सच…

Sheetal P Singh : सब “डिफ़ेन्स” में आ गये हैं। सीबीआई की प्रवक्ता भी लगभग राजनैतिक बयान पेश कर गईं जिसे भाजपाई पत्रकारों ने फट से रीट्वीट किया। शिवसेना, भाजपा, केन्द्रीय सरकार, सी बी आई, प्रशान्त भूषण एक तरफ़ हैं। मुलायम सिंह, मायावती, जयललिता तटस्थ हैं। कांग्रेस सदन में मुख़ालिफ़ है पर सड़क पर स्तब्ध है! सीपीएम, जदयू, ममता बनर्जी “आप” के साथ हैं! नया अनुभव है। पहले तीस्ता सीतलवाड पर सीबीआई ने हमला करने की कोशिश की पर कोर्ट आड़े आ गई।

फिर “यादव सिंह” मामले में सीबीआई जाँच के “लीक” ने रामगोपाल यादव को अमित शाह के शरणागत किया और ताज़ी ताज़ी रिश्तेदारी भी मुलायम सिंह यादव को बिहार में राजनैतिक आत्महत्या से रोक न पाई। अगला हमला वीरभद्र सिंह पर हुआ। लोग चौंके कि क्यों हिमाचलों के मुख्यमंत्री पर तेज़ है सीबीआई? पर एक तो वे बदनाम थे दूसरे सुदूर पहाड़ी राज्य, लोगों को सच का पता न चला। दरअसल वीरभद्र सिंह की बड़ी बेटी गुजरात हाईकोर्ट की जज रही हैं। उन्होंने अमित शाह को जमानत नहीं दी थी। इसका बदला लेने के लिये सिंह साहब की बेटी की शादी के दिन सीबीआई ने मुख्यमंत्री के घर छापा मारा।

दरअसल देश को उस समय इसका विरोध करना था पर कांग्रेस तक ने कुछ न किया। नतीजा यह है कि 2002 के एक मामले में 2015 में केजरीवाल के दफ़्तर में सीबीआई घुस गई। पर केजरीवाल और वीरभद्र सिंह में ज़मीन आसमान का फ़रक है। अटल जी की इशटाइल में कहें तो “ये अच्छी बात नंई ऐ”!

वरिष्ठ पत्रकार और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट शीतल पी. सिंह के फेसबुक वॉल से.

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यादवगेट में फंस रहे कुछ बड़े टीवी चैनल और पत्रकार, पीएमओ को रिपोर्ट भेजी गई

दलाली करते थे नोयडा-लखनऊ के कई मीडियाकर्मी

नई दिल्ली:  नोयडा के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने ठेकेदारी में कमीशनखोरी और कालेधन को सफेद करने के लिए कागज़ी कंपनियों का संजाल बिछाकर उसमें मीडिया को भी शामिल कर लिया था। इस राज का पर्दाफाश कर रही है, यादव सिंह से बरामद डायरी। यादव सिंह से तीन चैनलों के नाम सीधे जुड़ रहे हैं। एक में तो उनकी पत्नी निदेशक भी है। डायरी में मिले सफेदपोशों, नौकरशाहों और पत्रकारों के नामों को लेकर सीबीआई काफी संजीदा है और उसकी रिपोर्ट सीधे पीएमओ को भेजी जा रही है। इस सिलसिले में यादव सिंह और उसके परिवार से कई परिवार से कई बार पूछताछ हो चुकी है। समाज को सच का आईना दिखाने का दम भरने वाले ये पत्रकार अपने लिए मकान-दुकान लेने के अलावा ठेका दिलाने को भी काम करते थे और उसके लिए मोटी करम वसूलते थे।

पत्रकारिता की आड़ में दलाली और भवन भूखंड लेने की बात कोई नई नहीं है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहते हुए नकदी व भवन-भूखंड देकर पत्रकारों को उपकृत करते थे। मुलायम की दरियादिली तब सुर्खियां बनी थी। सांसद रिश्वतकांड से लेकर टू जी तक नामचीन पत्रकारों की कारस्तानी किसी से छिपी नहीं है। मौजूदा दौर में शायद ही ऐसा कोई घपला घोटाला हो जिसमें पत्रकारों की प्रत्यक्ष भूमिका निकलकर न आती हो। यादवगेट में भी कई बड़े चैनलों और नोयडा व लखनऊ के पत्रकारों के नाम आ रहे हैं। नबंर वन चैनल का दावा करने वाले चैनल से जुड़ी कंपनी पर भूखंड की कीमत कम दिखाकर राजस्व चोरी करने का आरोप है। दूसरे एक बड़े चैनल के पत्रकार चर्चा में है। इस चैनल पर ब्लैकमेलिंग को लेकर पहले से मामला चल रहा है। इसके एक स्टेट हेड पर अपने रसूख का इस्तेमाल कर यादव सिंह से लाभ लेने की बात सामने आई है।

इनका नाम बाक़ायदा यादव सिंह की डायरी में दर्ज है। इनकी लखनऊ में अच्छी धमक है और वहां से राजनेताओं और नौकरशाहों से फोन कराकर प्राधिकरण के अधिकारियों से लाभ लेते रहते हैं। इससे संबंधित दस्तावेज सन स्टार के पास मौजूद हैं और दस्तावेज कभी झूठ नहीं बोलते। इसका खुलासा आगे के अंकों में करेंगे। इनके अलावा यादव की डायरी में नोयडा के ऐसे कई पत्रकारों के नाम हैं, जिनकी पत्रकारिता प्राधिकरण के इर्द-गिर्द चलती है। इसमें एक परिवार से दो लोग भी हैं। इन लोगों ने प्राधिकरण से भवन भूखंड के अलावा शेड लिया और प्राधिकरण की बदौलत करोड़पति बन गये। कुछ पत्रकार तो ऐसे हैं जो ग्रुप बनाकर दबाव डालते थे। प्राधिकरण से ठेका दिलवाते थे और बाद में कमीशन में मिले पैसे को बांट लेते थे। कुछ की नजदीकी पूर्व मुख्यमंत्री के भाई से थी, जिनकी एक ज़माने में तूती बोलती थी। ये जनाब आजकल गुमनामी में आनंद ले रहे हैं। जांच एजेंसियां यादव सिंह और उसकी डायरी से मिली जानकारी को अपने तरीके से सत्यापित करने में जुटी हैं, इस वजह से कई पत्रकारों के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं।

राष्ट्रीय हिंदी दैनिक सन स्टार में प्रकाशित विद्याशंकर तिवारी की रिपोर्ट.

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अक्षय सिंह व्यापम घोटाले से जुड़े किन सूत्रों के पीछे थे, जानने के लिए सीबीआई करेगी आजतक वालों से पूछताछ

व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने पत्रकार अक्षय सिंह की मौत के कारण पर से पर्दा उठाने के लिए उनकी मेडिकल रिपोर्ट को जांच के लिए भेजा है। केंद्रीय एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि कहीं अक्षय को पहले से तो कोई बीमारी नहीं थी, जो उनकी मौत का कारण बन सकती हो। अक्षय घोटाले से जुड़ी स्टोरी कवर कर रहे थे। मृत पत्रकार के परिवार वालों से सभी मेडिकल रिपोर्ट लेकर एक मेडिकल बोर्ड के पास भेज दी गई है। बोर्ड अक्षय की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पता लगाएगा। अक्षय व्यापम घोटाले की आरोपी नम्रता दामोर की स्टोरी कवर कर रहे थे।

घोटाले से जुड़े जिन दर्जनों लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है, उनमें नम्रता भी शामिल है। नम्रता की लाश उज्जैन में रेल की पटरियों पर मिली थी। अक्षय इसी सिलसिले में अपने दो साथियों के साथ मृतक के परिजनों से बातचीत करने झाबुआ गए थे, जहां उनकी अचानक मौत हो गई। अक्षय घोटाले से जुड़े किन सूत्रों के पीछे थे, यह जानने के लिए जांच एजेंसी चैनल के ऑफिस स्टाफ से भी पूछताछ कर सकती है। हालांकि अभी मेडिकल विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और अक्षय के केस में प्रारंभिक छानबीन शुरू कर दी गई है। केंद्रीय एजेंसी दामोर की मौत की भी जांच कर रही है। इस सिलसिले में उन दो डॉक्टरों से भी पूछताछ संभव है, जिन्होंने विरोधाभासी पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी हैं।

चैनल के कर्मचारियों से भी यह पता लगाने के लिए पूछताछ की जा सकती है कि सिंह जिस समाचार को लेकर काम कर रहा था क्या उसे उसमें कोई सफलता हाथ लगी थी या नहीं। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि जांच के किसी अन्य पहलू पर आगे बढ़ने से पूर्व सीबीआई चिकित्सा विशेषज्ञों की राय का इंतजार करेगी। डामोर मामले को लेकर काम कर रहा सिंह उसके माता पिता का साक्षात्कार करने के बाद उसके ही घर में बेहोश हो गया था और बाद में उसकी मौत हो गयी। डामोर का शव उज्जैन में रेल पटरियों पर पाया गया था जिसके बाद ये अटकलें लगायी गयी थीं कि उसकी मौत में कोई पेंच है क्योंकि वह कथित रूप से व्यापमं घोटाले की लाभार्थी थी। सिंह उन 35 लोगों में शामिल थे जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से घोटाले से संबद्ध थे और अलग अलग समय पर रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का शिकार हुए थे।

एजेंसी सूत्रों ने बताया कि एजेंसी रहस्यमय मौतों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सिंह के मामले में प्रारंभिक जांच पहले ही शुरू कर दी गयी है। डामोर के पिता मेहताब सिंह डामोर ने बताया था कि अक्षय और दो अन्य लोग चार जुलाई को दोपहर बाद मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में उनके घर आए थे। साक्षात्कार समाप्त होने के बाद एक व्यक्ति को कुछ कागजों की फोटोकापी करवाने के लिए भेजा गया। अक्षय डामोर के घर के बाहर इंतजार कर रहा था कि अचानक उसके मुंह से झाग निकलने लगे। उसे सिविल अस्पताल और बाद में एक निजी अस्पताल में ले जाया गया लेकिन डॉक्टर उसे होश में लाने में विफल रहे। वहां से उसे गुजरात के दाहोद में समीप के एक अन्य अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

सीबीआई डामोर की रहस्यमय मौत के मामले की भी जांच कर रही है और उसके संबंध में विरोधाभासी पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने वाले दो डाक्टरों से भी पूछताछ कर सकती है। डॉ. बीबी पुरोहित की पहली टीम ने रिपोर्ट में कहा था कि उसकी मौत ‘‘हिंसक रूप से दम घोंटे’’ जाने का परिणाम थी जो हत्या का संकेत देती है लेकिन मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. डीएस बारकुर की रिपोर्ट में इसे खारिज करते हुए कहा गया था कि यह एक हादसा था और संभवत: आत्महत्या क्योंकि पटरियों पर गिरने से पूर्व डामोर जिंदा थी।

उधर, पत्रकार अक्षयसिंह की विसरा रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। नेशनल फॉरेंसिक लैब दिल्ली ने दो दिन पहले झाबुआ एसपी को पत्र लिखा है। एसपी आबिद खान ने बताया कि पत्र के माध्यम से सूचना मिली थी कि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, पुलिस दिल्ली आकर रिपोर्ट ले जाए। लेकिन मामला सीबीआई के पास होने से एसपी ने सीबीआई को लिखित में सूचना दे दी। विसरा रिपोर्ट सीबीआई नेशनल फारेंसिक लैब से लेगी। दिल्ली के पत्रकार अक्षयसिंह की मौत 4 जुलाई को जिले के मेघनगर में हो गई थी। वे यहां व्यापमं घोटाले की रिपोर्टिंग करने आए थे। एमजीएम कॉलेज इंदौर की छात्रा नम्रता डामोर की उज्जैन जिले के कायथा थाना क्षेत्र में हत्या हो गई थी। अक्षयसिंह यहां उसके परिवार से मिलने गए थे। नम्रता के घर पहुंचने के कुछ देर बाद अक्षयसिंह की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। बाद में गुजरात के दाहोद भी ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। अक्षय का पोस्टमार्टम दाहोद के सरकारी अस्पताल में किया गया था। मामला मेघनगर थाने में दर्ज हुआ और मेघनगर पुलिस विसरा जांच के लिए सैंपल दिल्ली की नेशनल फारेंसिक लैब लेकर गई थी।

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पत्रकार चंद्रिका राय के तीन हत्यारों को अब तक नहीं ढूंढ पाई सीबीआई

मध्य प्रदेश के उमरिया के चन्द्रिका राय हत्याकांड में सीबीआई ने छह मे से तीन आरोपियों को तो पहचान कर पकड़ लिया है किन्तु तीन को वह अभी तक नहीं पहचान पायी है। तीन आरोपियों का स्केच जारी करना पड़ा है। यह स्केच सीबीआई ने कोर्ट में आरोपपत्र पेश करने के एक दिन पहले जारी किया है। बिना नाम-पते के जारी इस स्केच में पप्पू, रज्जू और सलीम का नाम जरूर दिया गया है। सीबीआई ने 10 अगस्त 2015 को सीजेएम उमरिया जेएस श्रीवास्तव के कोर्ट में चालान पेश किया।

गौरतलब है कि 17 फ़रवरी 2012 की रात कुछ लोगों ने नवभारत और हरिभूमि जबलपुर के स्थानीय एजेन्ट चन्द्रिका राय के घर में घुस कर उनकी पत्नी दुर्गाराय, पुत्र जलज राय एवं पुत्री निशा राय की सोते समय नृशंस ढंग से कमानी पट्टे से सिर पर वार करके हत्या कर दी थी और बाहर से ताला लगा दिया था। 

घटना के 16 से 18 घन्टे बाद लोगों को जानकारी हो पायी। जिस ढंग और जिन परिस्थितियों में यह हत्याकांड हुआ था, वह लूटपाट की ओर इशारा कर रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर पहले कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया। कुछ को बैठा लिया, बाद में छोड़ दिया। प्रदेश भर में हल्ला होने पर भोपाल से एसआईटी बनी। फिर कुछ लोगों को पकड़कर छोड़ दिया गया।

चन्द्रिका राय के एटीएम कार्ड से शहडोल आकर पैसा निकालते फोटो आने पर ड्राइवर रमेश यादव को गिरफ्तार किया गया। बाद में उसकी बहन के घर से चंद्रिका राय के कुछ जेवर जब्त किये गए। आलोचना से घबराकर पुलिस ने लीपापोती की और रमेश यादव को ही चारो हत्याओं का दोषी बताकर उसके विरुद्ध चालान पेश कर दिया।

इधर पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्यवाही से असंतुष्ट चंद्रिकाराय के साले और भाई ने शिकायते कीं। जब पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की तो दोनों ने अलग -अलग याचिका दायर करके मामले की सी बी आई जाँच की माँग कर डाली। एक याचिका में म प्र उच्च न्यायालय ने सी बी आई को जाँच का आदेश दे दिया। डेढ़ वर्ष पूर्व सी बी आई ने जाँच का काम प्रारम्भ किया तो मामले के पीछे एक इंजीनियर झारिया के पुत्र के अपहरण का मामला सामने आया, जिसमे 65 लाख रुपये का लेनदेन हुआ था। सी बी आई ने जब घटना स्थल पर जाँच की तो कई ऐसी चीज़ें मिली जिसे पुलिस ने छोड़ दिया था। आलमारी के फिंगरप्रिंट ,चाय के कप आदि की जाँच के बाद जब सी बी आई ने घटना के समय के मोबाइल काल डिटेल चेक किये तो मामला लूट का लगा।

इनसब सुराग के साथ जब सी बी आई टीम ने उमरिया जेल में बंद रमेश यादव से पूछताछ की तो लूट की पुष्टि हो गयी। पूरे कांड और जाँच पर नजर रखने वाले एक मीडिया सूत्र ने बताया कि घटनास्थल से बरामद 3 उपयोग किये कंडोम, एक आरोपी के खाते में 25 लाख रुपये मिलना, एक आरोपी का 3 दिनों तक मोबाइल बंद मिलना ऐसे प्रमाण थे, जिससे आरोपियों को ढूँढने में काफी मदद मिली। एक दो आरोपियों का नार्को टेस्ट भी कराया गया तो मामला खुलता चला गया। मामले में मई 15 में धरणीश सिंह की गिरफ़्तारी के बाद जाँच में तेजी आई। इसके बाद 10 अगस्त को चालान ही पेश हो गया।

तीन आरोपियों के बयानों के आधार पर स्केच बनाकर 3 अरोपियों को फरार घोषित करके सी बी आई ने तो क़ानूनी खानापूरी तो कर दी है किन्तु यह रहस्य कब खुलेगा कि झारिया अपहरण काण्ड के 65 लाख का इस हत्याकांड से क्या सम्बन्ध था और पैसा गया कहाँ ? पत्रकारिता और अपहरण की इस चर्चा में पुलिस ने जाँच के नाम पर जो लीपापोती की, क्या उसकी भी कोई जाँच होगी।    

पत्रकार रामावतार गुप्ता से संपर्क : rguptasdl001@gmail.com

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महाभ्रष्टाचारी यादव सिंह को बचाने की यूपी सरकार की कोशिश नाकाम, एससी का झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के सस्पेंड इंजीनियर-इन-चीफ यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया है। अखिलेश सरकार को इससे तगड़ा झटका लगा है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यादव ने पूरी व्यवस्था को अपना दास बना लिया है। पिछली 16 जुलाई को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस एसएन शुक्ला ने सीबीआई जांच कराने के आदेश किए थे। इसके बाद अखिलेश सरकार ने यादव सिंह पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

गौरतलब हैं कि नोएडा अथॉरिटी में चीफ इंजीनियर के तौर पर तैनात यादव सिंह पर आय से ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप था. घोटाले के आरोपी इंजीनियर यादव सिंह के ठिकानों से अरबों की संपत्ति का खुलासा हुआ था. प्रदेश सरकार ने  शुरुआत में यादव सिंह के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की.

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.नूतन ठाकुर का कहना है – ”मैं यादव सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सत्य और न्याय की जीत के रूप में स्वागत करती हूँ और उत्तर प्रदेश सरकार से इस अवांछनीय और गैर-जरुरी याचिका दायर करने वालों की जिम्मेदारी तय करने की मांग करती हूँ।”

अब उत्तर प्रदेश सरकार को यह जवाब देना होगा कि वह कौन सी वजह थी, जिसके लिए यादव सिंह को बचाने के प्रयास किए जा रहे। कानून और राजनीति के पंडितों का मानना है कि अगर सीबीआई ने यादव सिंह से ऐसा कुछ उगलवा दिया जिसमें सपा और बसपा दोनो के नेताओं का नाम हुआ तो 2017 विधानसभा चुनावों में इनको खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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