मोदी की ‘वादा-फरामोशी’ पर 3 पत्रकारों ने मिलकर लिख दी किताब, केजरीवाल ने कर दिया लांच

नई दिल्ली : देश अगले महीने होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले जोरदार राजनीतिक विवादों की चपेट में हैं, और इसी दौरान RTI कार्यकर्ता-लेखक संजॉय बसु, नीरज कुमार और शशि शेखर ने अपनी नई लॉन्च की गई किताब, ‘वादा-फरामोशी’ (फैक्ट्स, फिक्शन नहीं , RTI अधिनियम पर आधारित) को जनता के सामने प्रस्तुत किया है। पिछले …

यह कोई मान नहीं सकता कि केजरीवाल ने पैसे खाकर दो गुप्ताओं को राज्यसभा टिकट दिए होंगे…

लेकिन ये टिकट क्यों दिए गए, यह बताने में आम आदमी पार्टी असमर्थ है… केजरीवाल भूल सुधार करें….

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
यह तो कोई मान ही नहीं सकता कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पैसे खाकर दो गुप्ताओं को राज्यसभा के टिकिट दे दिए होंगे लेकिन ये टिकिट उन्हें क्यों दिए गए, यह बताने में आम आदमी पार्टी असमर्थ है। उन दोनों में एक चार्टर्ड एकाउंटेट है और दूसरा शिक्षा और चिकित्सा के धंधे में है, जो आज देश में लूट-पाट के सबसे बड़े धंधे हैं। जो चार्टर्ड एकाउंटेंट है, वह अभी कुछ दिन पहले तक कांग्रेस में था और केजरीवाल का घनघोर विरोधी था।

केजरी-लालू के बेमेल मिलन में रोड़ा बनेंगे कुमार विश्वास, देखें वीडियो

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा के इस बयान पर कि आम आदमी पार्टी और राजद में चुनावी गठबंधन संभव है,  पर आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य डॉ कुमार विश्वास का बयान पढ़िए-देखिए :  मैं आश्वस्त करता हूँ कि किसी भी हालत में हमारी पार्टी का लालू के साथ खड़े होने का कोई प्रश्न ही नहीं है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का सिपाही और आम आदमी पार्टी का संस्थापक सदस्य होने के नाते मैं पूरी ज़िम्मेदारी से इस ख़बर का खंडन करता हूँ। We can’t and we won’t even think of political alliance with Lalu Prasad Yadav ever, this I assure you as a founder member of the party and as a foot-soldier of the anti-corruption movement.Rebutting this news with full responsibility.

2019 में मोदी के लिए असली सिरदर्द केजरीवाल बनेंगे!

Vikram Singh Chauhan : अरविंद केजरीवाल बहुत बहादुर है, शेर हैं। वे मोदी के सामने झुके नहीं। दिल्ली में रहकर मोदी के 56 इंच के सीने पर मूंग दल रहे हैं। मोदी जहाँ गए वहां जाकर चुनाव लड़ने की चुनौती दी और बिना पहले के जनाधार और संगठन के चुनाव लड़कर मोदी का होश उड़ा दिया, हिंदुत्व ने उसे हरा दिया। वे भारत के एक अकेले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिसके साथ वर्तमान ने अन्याय किया पर इतिहास न्याय करेगा। मीडिया पहले दिन से उनकी सुपारी ली हुई है।

केजरीवाल यानि हर रोज नया बवाल

अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उससे राजनीतिज्ञों के प्रति अविश्वास और गहरा हुआ है। वे उम्मीदों को तोड़ने वाले राजनेता बनकर रह गए हैं। साफ-सुथरी राजनीति देने का वादा करके बनी आम आदमी पार्टी को सत्ता देने में दिल्ली की जनता ने जितनी तेजी दिखाई, उससे अधिक तेजी केजरीवाल और उनके दोस्तों ने जनता की उम्मीदें तोड़ने में दिखाई है।

केजरी में हवा मत भरिए, गुब्बारे को फूटने दें : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : केजरीवाल में ज्यादा हवा भरने की गुंजाइश नहीं बची है Madan Tiwary जी. नहीं मानिएगा और भरते रहिएगा तो अप्राकृतिक दुर्घटना हो जाएगी और वो फट जाएगा…जिससे अंग प्रत्यंग छितरा जाएगा… देखिएगा, कार्यकाल पूरा होते वह खुदे राजनीति छोड़ कर भाग जाएगा… कहेगा कि कहां फंस गया था, एनजीओ वाला कमवा ही ठीक था 🙂

केजरीवाल जैसों की नियति है नष्ट हो जाना!

Yashwant Singh : केजरीवाल जैसों की नियति है नष्ट हो जाना. एक अच्छे खासे आंदोलन की माकानाकासाका करने के बाद यह आदमी अब खुद और अपनी पार्टी की वाट लगाने लगा है. भाजपा को क्यों कोस रहे हैं साहिब. सियासत में पार्टियां ऐसे ही दूसरे दलों पर निशाना साधा करती हैं. सवाल ये है कि आज आपके बचाव में कोई खड़ा क्यों नजर नहीं आ रहा. हम जैसे प्रचंड समर्थक तो सरकार बनने के कुछ माह बाद ही बदले रंग ढंग देखकर अलग हो लिए थे.

ये वही कपिल मिश्रा है जो केजरी के इशारे पर शांति भूषण और प्रशांत भूषण को भरी सभा में मारने दौड़ा था

देश की जनता को ईमानदारी और नए लोकतंत्र का झुनझुना थमाकर अरविंद केजरीवाल बनने तो सिकंदर चले थे, पर औकात इतनी हो पाई कि वह अपने ही पाले हुए संपोलों को बस में रख सकें। उन्हीं संपोलों में से एक हैं कपिल मिश्रा, जिनको अरविंद ने अपना दूध पिलाकर किंग कोबरा बनाया था। किंग कोबरा अब फुंफकार रहा है और अरविंद हैं कि उनको जादू—मंतर का कोई सम्मोहनी मंत्र सूझ नहीं रहा! दिल्ली से भूपेंदर चौधरी की रिपोर्ट…

एक था केजरीवाल… एक थी आम आदमी पार्टी…

Sheetal P Singh : आम आदमी पार्टी…  वे चौराहे पर हैं और उनकी याददाश्त जा चुकी है। चौराहे पर कोई साइनबोर्ड नहीं है न किसी क़िस्म का मील का पत्थर! भारतीय मध्यम वर्ग के २०११-२०१७ के दौरान जगमगाये और बुझ रहे दियों के मानिंद दिवास्वप्न हैं। उनकी समस्यायें अनंत हैं पर उनमें संभावनायें भी कम नहीं पर निश्चित ही वे एक ऐसी बारात हैं जिनमें कोई बूढ़ा नहीं जो बिना साइनबोर्ड के चौराहे पर फँस जाने पर रास्ता सुझा सके। उन्होंने ऐतिहासिक काम हाथ में लिये पर उनके सारे काम अधूरे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य में उनके आउट आफ बाक्स फ़ैसलों से वामपंथी तक एकबारगी चकरा गये पर उनके पास फालोअप न था और ब्यूरोक्रेसी वे पहले ही मोदी के हाथ LG को हार चुके थे।

इन 10 कारणों से MCD चुनाव हारेंगे केजरीवाल

एक कहावत है अति भक्ति, चोरस्य लक्षणम्। यानी बहुत विनम्र इंसान, घातक
होता है। अरविंद केजरीवाल इस कहावत के लिए बिल्कुल सटीक उदाहरण बन गए
हैं। कैसे ? जनता को ऐसा लगता है कि उन्होंने जो कहा, वह किया नहीं।
मसलन, बेहद लाचार व शरीफ बन कर बार बार खांसते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार
और नेताओं की मनमानी से अजिज आ चुकी दिल्ली की जनता को कहा कि हम लाल
बत्ती वाली गाड़ी नहीं लेंगे। सरकारी मकानों में नहीं रहेंगे।
सुरक्षाकर्मियों का घेरा नहीं रखेंगे। जनता का पैसा बर्बाद नहीं करेंगे।
लाेकपाल लाएंगे। सरकार के कामकाज में पारदर्शिता लाएंगे। शीला दीक्षित
काे जेल पहुंचवाएंगे। आैर क्या क्या गिनवाएं..आप खुद ही गिन लीजिए।
दिल्लीवाले उनके झांसे में आ गए।

सुभाष चंद्रा ने केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा ठोंका, कोर्ट ने नोटिस भेजा

Sheetal P Singh : सुभाष चन्द्रा ‘जी’ टेलिविज़न के विभिन्न अवतारों के मालिक हैं। इसके अलावा इनके तरह तरह के बिज़नेस हैं! पता चला कि उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र हरियाणा और कुछ अन्य जगहों पर इनकी कंपनियाँ बड़ी सड़कों के निर्माण का काम भी करती हैं जो आजकल की मंदी के दौर में दुधारू गाय है! वे ख़बरों के जरिये ब्लैकमेल के एक आरोपी भी हैं पर देश के उन समर्थ लोगों में हैं जिन्हे क़ानून पकड़ने से पहले परिभाषा बदल लिया करता है!

दिल्ली में ‘आप’ सरकार को न कुचला गया तो बीस वर्षों तक भाजपा यहां सत्ता में न आ पाएगी!

Om Thanvi : दिल्ली में आप सरकार के दो वर्षों के कामकाज पर हिंदुस्तान टाइम्स में छपा वृहद सर्वे बताता है कि लोग मानते हैं राजधानी में भ्रष्टाचार घटा है और शिक्षा, चिकित्सा, जल-आपूर्ति और बिजली-प्रबंध के क्षेत्रों में बेहतर काम हुआ है। और, दिल्ली सरकार की यह छवि दो वर्षों तक नजीब जंग की अजीब हरकतों के बावजूद बनी है, जिन्होंने केंद्र सरकार की गोद में बैठकर निर्वाचित शासन के काम में भरसक रोड़े अपनाए।

केजरीवाल महोदय को ये एक श्रेय तो जरूर जाता है….

Rajiv Nayan Bahuguna : अरविन्द केजरीवाल को एक श्रेय तो जाता है कि उसने धुर विरोधी कांग्रेस और भाजपा को कम से कम एक मुद्दे पर एकजुट कर दिया। एक दूसरे से फुर्सत पाते ही वे दोनों केजरीवाल पर टूट पड़ते हैं। क्यों? उदाहरण से समझाता हूं।

नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल : इन दो नेताओं का घमंड तो देखो…

Sheel Shukla : ये घमंडी! अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि अभी नरेंद्र मोदी इतने शिक्षित नहीं है कि देश के अर्थ शास्त्र को समझ सके। अरविन्द केजरीवाल के ऐसा बोलते समय एक बू आ रही थी कि मैं तो IRS रहा हूँ और मेरी किताबी शिक्षा की कोई तुलना नरेंद्र मोदी की शिक्षा से नहीं है। यह कोई राष्ट्रहित या नोटबंदी के खिलाफ दिया गया बयान नहीं था बल्कि ये अरविन्द केजरीवाल का दम्भ था, घमंड था।

चेहरा चमकाने के लिए लाइक्स पाने का चक्कर : केजरीवाल जनता के लाखों रुपये रोजाना देते हैं गूगल और फेसबुक को!

प्रशांत भूषण ने खोली पोल…. दिल्ली सरकार ने टॉक टू एके नामक जो प्रोग्राम कराया, उसके लिए सोशल मीडिया पर पूरे 1.58 करोड़ रुपये लुटाए. ये पैसे आम आदमी पार्टी के नहीं बल्कि जनता के थे. केजरीवाल सोशल मीडिया पर लाइक्स खरीदने के लिए हर दिन 10-10 लाख रुपये गूगल और फेसबुक आदि को दिए. इसी तरह केजरीवाल ने ताज पैलेस होटल से 12 हजार रुपये प्रति थाली के हिसाब से सैकड़ों थाली खरीद कर अपने नेताओं कार्यकर्ताओं को दिल्ली सरकार के दो साल पूरे होने पर पार्टी दी थी. यहां भी जो पैसा खर्च हुआ वह जनता का था, आम आदमी पार्टी का नहीं.

गुजरात में ‘आप’ की लहर, सूरत की सफल रैली से भाजपा नेताओं को आए पसीने

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह सूरत में हैं. वहां से उन्होंने जो हालात बयान किया उससे तो यही लगता है कि आम आदमी पार्टी की अंदरखाने गुजरात में लहर है. भारतीय जनता पार्टी के कुशासन, भ्रष्टाचार और दमन से सिहरे हुए गुजरात के लोग अब केजरीवाल के शरण में जा रहे हैं. सूरत रैली में उमड़ी भीड़ ने काफी कुछ स्पष्ट कर दिया है. शीतल कहते हैं- ”इस भीड़ का असर मौक़े पर मौजूद लोगों से सैकडों गुना ज्यादा उस अवाम पर होगा जो डराया हुआ है और दूर से बैठकर इसकी कामयाबी की दुआएँ पढ़ रहा है”.

केजरीवाल जी, नई राजनीति करने की बात करते हुए सत्ता में आए थे इसलिए आप तो मिसाल कायम कीजिए

Amitabh Thakur : क्या दिल्ली के पूर्व परिवहन मंत्री गोपाल राय ‘सत्ता भ्रष्ट करती है और पूर्ण सत्ता पूरी तरह भ्रष्ट करती है” के एक और उदहारण हैं या अभी अंतिम टिप्पणी देना जल्दीबाज़ी होगी? इस मामले में सच्चाई का सामने आना नितांत आवश्यक है, अतः मैं एसीबी दिल्ली से जाँच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करता हूँ.

सम-विषम के खिलाफ ट्वीट करने वाले दैनिक जागरण के राजकिशोर की नौकरी अरविंद केजरीवाल के चलते गई?

फेसबुक पर सुगबुगाहट है कि अरविंद केजरीवाल की सम विषम योजना के खिलाफ दैनिक जागरण के नेशनल ब्यूरो चीफ राजकिशोर को ट्वीट करना महंगा पड़ा है और अरविंद केजरीवाल की जिद के कारण राजकिशोर को दैनिक जागरण प्रबंधन ने नौकरी से हटा दिया है. फेसबुक पर लोग अरविंद केजरीवाल को कोसने में लगे हैं लेकिन असल अपराधी तो दैनिक जागरण प्रबंधन है जो दिल्ली सरकार के विज्ञापन के लालच में राजकिशोर को बलि का बकरा बनाने को तैयार हो गया. दैनिक जागरण हमेशा ऐसा करता रहा है. पटना हो या लखनऊ हो या दिल्ली, वह सत्ता के आगे घुटने टेक कर अपने पत्रकारों की बलि देते हुए रेवेन्यू का रास्ता साफ करने की परंपरा कायम रखता है. नीचे एफबी के दो वो पोस्ट हैं जिससे पता चलता है कि राजकिशोर, दैनिक जागरण और केजरीवाल के बीच कुछ न कुछ तो हुआ है….

राहत का सोमवार : odd-even फॉर्मूले ने तौबा करवा दी

Sarjana Sharama : इस बार सोमवार राहत का सोमवार होगा। ऑटो या टैक्सी खोजने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के श्री अरंविंद केजरीवाल के odd-even फॉर्मूले ने तौबा करवा दी। इतनी भीषण गरमी में लोग तपती धूप में 20-20 मिनट ऑटो का इंतज़ार करते रहे। रेडियो टैक्सी के अपने नखरे हैं। अभी इस रूट पर कोई टैक्सी नहीं मिल सकती। दो घंटे से पहले नहीं आ सकते आदि आदि।

जूते तो केजरीवाल पर फेंके गए लेकिन पिट गए दर्जनभर से भी ज़्यादा न्यूज़ चैनल

Vineet Kumar : जूते तो केजरीवाल पर फेंके गए लेकिन पिट गए दर्जनभर से भी ज़्यादा न्यूज़ चैनल. एक भी चैनल के पास जूते फेंकनेवाले की फ्रंट से तस्वीर नहीं है. साभार, इंडियन एक्सप्रेस लिखकर तस्वीर इस्तेमाल करनी पड़ रही है. आप सोचिये, न्यूज़ चैनलों के पल-पल की खबर, सबसे तेज जैसे दावे कितने खोखले हैं. लाइव में भी प्रिंट से साभार कंटेंट इस्तेमाल करने की ज़रुरत पड़ जाए, न्यूज़ चैनल के लिए इससे ज़्यादा बुरा क्या हो सकता है? अब लूप की दालमखनी इसी फ्रंट स्टिल के बूते बन रही है..

केजरीवाल जी, आपभी मोदी की तरह जुमलेबाजी की सियासत कर रहे हो?

Vishwanath Chaturvedi : जुमले बाजों ने बिगाड़ा देश मिज़ाज़. बड़े मिया तो बड़े मिया छोटे मियां सुभानल्लाह. जुमलेबाज़ो ने बदरंग किया सियासी चेहरा. केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा सरकार को समर्थन करते हुए दिल्ली की जनता का कर्ज उतार दिया. अब बारी थी पंजाब चुनाओं में लड़ रही पार्टी के लिए फर्ज पूरा करने की. सो केजरीवाल ने शाम होते-होते वकील को बलि का बकरा बनाते हुए यू टर्न लिया और कहा ये वकील तो कांग्रेसी था, इसे मैंने हटा दिया.

दिल्ली विधानसभा के केबल टीवी और यूट्यूब चैनल के लिए कर्मचारियों की भर्ती शुरू

दिल्ली विधानसभा अब निजी केबल टीवी और यूट्यूब के जरिए अपनी कार्यवाही और दूसरे कार्यक्रमों के प्रसारण की योजना बना रही है. केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से अपने लिए अलग टीवी चैनल स्थापित करने से जुड़े प्रस्ताव पर केंद्र से जवाब ना मिलने के बाद यह फैसला किया है. दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि सदन ने इसे लेकर सलाहकार रखने शुरू कर दिए हैं और दूसरे कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है. गोयल ने कहा, ‘पिछले साल नवंबर में मैंने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर लोक सभा टीवी और राज्य सभा टीवी की तर्ज पर दिल्ली विधानसभा का खुद का टीवी चैनल स्थापित करने के लिए उनके मंत्रालय की मंजूरी मांगी थी.’

‘आप’ तो ऐसे न थे : केजरी वही सब टोटके कर रहे जो भ्रष्ट नेता करते रहे हैं

-मनोज कुमार-

एक साथ, एक रात में पूरी दुनिया बदल डालूंगा कि तर्ज पर दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी के हुक्मरान जनाब अरविंद केजरीवाल ने मुझे तीन दिनों से परेशान कर रखा है। आगे और कितना परेशान करेंगे, मुझे नहीं मालूम लेकिन हाल-फिलहाल मेरी बड़ी शिकायत है। सुबह अखबार के पन्ने पलटते ही दो और चार पन्नों का विज्ञापन नुमाया होता है। इन विज्ञापनों में केजरीवाल अपनी पीठ थपथपाते नजर आते हैं। केजरीवाल सरकार इन विज्ञापनों के जरिये ये साबित करने पर तुले हैं कि उनसे बेहतर कौन? ऐसा करते हुए केजरीवाल भूल जाते हैं कि दिल्ली के विकास को जानकर मध्यप्रदेश का कोई भला नहीं होने वाला है और न ही उनके इस ‘पीठ खुजाऊ अभियान’ से मध्यप्रदेश में कोई सुधार होगा। बार बार भोपाल और मध्यप्रदेश की बात इसलिए कर रहा हूं कि इससे मुझे इस बात की परेशानी हो रही है कि मेरे पढ़ने की सामग्री गायब कर दी जा रही है। केजरीवाल के इस ‘पीठ खुजाऊ अभियान’ में मेरी कोई रूचि नहीं है।

Like a ponzi scheme, Kejriwal bubble will burst sooner or later

The Aam Admi Party (AAP) won a landslide victory in Delhi in 2015 because people were disgusted with the other parties and wanted a radical change. Its leader Arvind Kejriwal projected himself as an epitome of honesty, a modern Moses, a Superman who will lead Delhi into a land of milk and honey. But his popularity started to rapidly decline as people started seeing the reality. He has no solutions to the problems facing the people — massive poverty, unemployment, lack of healthcare and good education, etc.

केजरीवाल और उनके सम-विषम की असलियत बता रहे हैं जस्टिस काटजू

The Truth about the Odd Even Scheme

By Justice Katju

AAP had won a landslide victory in the Delhi elections in Februaary, 2015, because people were disgusted with the other parties, and wanted a radical change. Kejriwal had projected himself as an epitome of honesty, a modern Moses, a Superman (as Modi had done earlier) who will lead Delhi into a land of milk and honey. Later, his popularity started to rapidly decline as people started seeing the reality. There is really nothing in the man, he has no solutions to the real problems facing the people— massive poverty, unemployment, malnourishment, lack of healthcare and good education, farmers suicides, etc.

उतर गया चोला… अमीरों का आदमी साबित हुआ केजरीवाल, समझा रहे हैं यशवंत सिंह

Yashwant Singh  : कई लोग कहते मिले कि दिल्ली सुधर गई, केजरीवाल का फार्मूला पास हो गया, दिल्ली वाले बिना चूं चपड़ किए हंसते खेलते नया नियम मान लिए, प्रदूषण घट गया, ट्रैफिक स्मूथ हो गया… ब्ला ब्ला ब्ला…

टीवी टुडे ग्रुप के वरिष्ठ पत्रकार संजय सिन्हा ने सम-विषम पर अरविंद केजरीवाल को दिखाया आइना, आप भी पढ़ें..

Sanjay Sinha : आदरणीय अरविंद केजरीवाल जी, नया साल मंगलमय हो। मैं संजय सिन्हा, दिल्ली का एक आम नागरिक, आज खुद को बहुत लाचार और त्रस्त महसूस कर रहा हूं। मैं पत्रकार हूं और रोज सुबह फेसबुक पर एक पोस्ट लिखना मेरा शौक है। मैं आम तौर पर रिश्तों की कहानियां लिखता हूं। मैं स्वभाव से खुश और अपनी ज़िंदगी से संतुष्ट व्यक्ति हूं। मैं दफ्तर में राजनीति की ख़बरें लिखता हूं, लेकिन कभी निज़ी ज़िंदगी में राजनीति की बातें नहीं करता।

odd-even : केजरीवाल जैसा मूर्ख मुख्यमंत्री इस देश में दूसरा नहीं देखा…

Nadim S. Akhter :  अरविन्द केजरीवाल जैसा मूर्ख मुख्यमंत्री इस देश में दूसरा ने नहीं देखा, जिसन वाहवाही बटोरने के चक्कर में बिना सोचे-समझे पूरी जनता को odd-even की खाई में धकेल दिया। पहले से ही मरणासन्न दिल्ली का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम इतनी बड़ी आबादी के सफ़र को कैसे झेलेगी, इस पर एक पल भी नहीं सोचा। ऊपर से ये महामूर्ख मुख्यमंत्री स्कूल में बच्चों के बीच जाकर कह रहे हैं कि बेटे, अपने मम्मी-पाप को इस नियम का पालन करने की सीख देना, उनसे जिद करना। लेकिन ये नहीं बता रहे कि जब टाइम से ऑफिस न पहुचने पे पापा की सैलरी कटेगी और ऑटो लेकर जाने में उनकी जेब से दोगुने नोट ढीले होंगे, घर का बजट बिगड़ेगा, तो पापा घर कैसे चलाएंगे?

केजरीवाल पर निशाना साध प्रशांत भूषण ने काटजू के तर्क को गलत बताया तो जवाब में काटजू ने लिखा लंबा चौड़ा मेल…

Markandey Katju : Mr. Shanti Bhushan’s response to my article in scroll.in in which I said that the Delhi Govt. is a state, and is empowered to constitute a Commission of Inquiry. I have taken his permission to post his email to me…