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सुख-दुख

अबकी कोर्ट रिसीवर की आड़ में फ्लैट बॉयर्स के साथ शुरू हुआ खेला, एंट्री फी वसूलने की तैयारी!

यशवंत-

आम्रपाली समेत कई बिल्डर्स के भाग जाने या दिवालिया हो जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में लंबी सुनवाई चली. सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट आर वेंकटरमणी की कोर्ट रिसीवर के रूप में तैनाती कर काम आगे बढ़वा दिया. लोगों को अब फ्लैट मिलने लगे हैं. चाभी पाकर कुछ लोग अपने फ्लैट में रहने भी लगे हैं. पर इसी बीच कोर्ट रिसीवर सीनियर एडवोकेट आर वेंकटरमणी को भारत सरकार का एडवोकेट जनरल बना दिया जाता है. इस कारण वे पहले की तरह टाइम नहीं दे पाते. सो, उन्होंने भी अपने अधिकार अपने से नीचे वालों को सौंप दिया. कोर्ट रिसीवर के प्रतिनिधि का नाम है पी पद्मनाभन. इसी के बाद खेला शुरू हो गया.

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कोर्ट रिसीवर के अलोकतांत्रिक और अपारदर्शी रैवये को लेकर मीडिया में सवाल उठने लगे हैं.

कोर्ट रिसीवर आफिस के लोग अब मनमानी पर उतर आए हैं. सबसे बड़ा सवाल पारदर्शिता को लेकर उठाया जा रहा है. कोर्ट रिसीवर आफिस के लोग फ्लैट बायर्स में से बिना चुने हुए और यस मैन टाइप पांच दस लोगों को अपनी तरफ कर तदर्थ अपार्टमेंट आनर्स एसोसिएशन (एढॉक एओए) को मंजूरी दे देते हैं. इस बारे में बाकी फ्लैट बायर्स को अंधेरे में रखा जाता है. फ्लैट बायर सवाल करते हैं तो उन्हें बिजली पानी काटने की धमकी दे दी जाती है. अब इसी एढॉक एओए को आगे कर लंबी चौड़ी वसूली की तैयारी की जाने लगी है. फ्लैट बायर्स से पैसे लेने को लेकर एक तरफ कोर्ट रिसीवर आफिस खुद कई सवालों के घेरे में है. वहीं अब नए किस्म के टैक्स लगाने की तैयारी चल रही है. ज्यादातर फ्लैट बॉयर इस सब कुछ से असहमत हैं, वे अपने विरोध को लिखते हैं, मेल कर पहुंचाते हैं, बैठकें सभाएं करते हैं, पर कहीं सुनवाई नहीं है.

फ़्लैट खरीदार साफ साफ कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के रिसीवर अब पहले वाले नहीं रहे. वे भी किसी अन्य बिल्डर की तरह हो गए हैं जो मजबूर फ्लैट बायर्स को निचोड़ रहे हैं. अपने यस मैन लोगों को आगे कर तरह तरह की मनमानी करा रहे हैं.

उदाहरण की बात करें तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली गोल्फ होम्स सोसायटी और आम्रपाली लेजर पार्क को ले लीजिए. गोल्फ होम्स में तदर्थ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का गठन मनमाने और तानाशाही तरीके से कर दिया गया. कोर्ट रिसीवर की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा गया कि जब तक स्वतंत्र और वैधानिक एओए का गठन नहीं हो जाता, तब तक एक तदर्थ एओए का गठन करना होगा. यह तदर्थ एओए पंजीकृत और वैधानिक एओए के अस्तित्व में आने तक यह सारे कामकाज देखेगी. तदर्थ एओए को सोसाइटी के रखरखाव के अलावा बैंक अकाउंट ऑपरेट करने, सरकारी-ग़ैर सरकारी एजेंसियों के साथ व्यवहार करने और वसूली-भुगतान जैसे महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं.

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कोर्ट रिसीवर सीनियर एडवोकेट आर वेंकटरमणी की ओर से 8 जुलाई 2023 को जारी किए गए इस पत्र के अंत में लिखा गया है, “इस पत्र में वर्णित सभी सूचनाएं आम्रपाली गोल्फ होम्स और किंग्सवुड प्रोजेक्ट के सभी फ़्लैट बायर्स के संज्ञान में ला दी जाएं, जिससे इस उद्देश्य की प्रक्रिया को पूरा करवाया जा सके।”

आम्रपाली गोल होम्स और आम्रपाली लेजर पार्क के निवासियों का कहना है कि लोगों ने तदर्थ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का चयन करने के लिए कोर्ट रिसीवर से मीटिंग का समय मांगा. उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई. जब कोर्ट रिसीवर के कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया तो ई-मेल किए गए. किसी ई-मेल का जवाब कोर्ट रिसीवर की ओर से नहीं दिया गया. अब अचानक कोर्ट रिसीवर की वेबसाइट पर एक नया पत्र जारी किया गया जिसमें तदर्थ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के गठन की जानकारी दी गई है. ऐसा गोल्फ होम्स और लेजर पार्क, दोनों मामले में किया गया. ये बेहद आपत्तिजनक बात है. कोर्ट रिसीवर मनमर्जी पर उतारू हैं. कोर्ट रिसीवर का नियंत्रण अपने लोगों पर नहीं रह गया है. उन्होंने अपने से नीचे वालों को जो अधिकार दिए हैं, उसका दुरुपयोग शुरू हो चुका है. साफ साफ पता चलता है कि सारा खेल अब पैसे कमाने के लिए किया जा रहा है. आखिर कोर्ट रिसीवर आम्रपाली गोल्फ होम्स, आम्रपाली लीजर पार्क और किंग्सवुड हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों के साथ मीटिंग करना क्यों नहीं उचित समझते. क्या वे खुद को सुप्रीम कोर्ट से उपर समझ बैठे हैं? यह पूरी तरह मनमानी, तानाशाही रवैया और अलोकतांत्रिक है. जिन्हें फ्लैट बायर्स का हित देखना चाहिए वे अब फ्लैट बायर्स की नजर में शोषक बनते जा रहे हैं.

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फ्लैट बायर्स को अंधेरे में रखकर पहले गुपचुप ढंग से एढॉक एओए का गठन कराया गया और अब एस्क्रो एकाउंट भी खुल गया. फ्लैट बायर्स चिंतित हैं कि एंट्री फी समेत कई किस्म के फीस लगाकर उनसे अनाप शनाप वसूली करने की तैयारी तो नहीं है ये! ऐसे में वे चाहते हैं कि आम सहमति से उनके चुने हुए लोग ही एओए का हिस्सा बनें जो फ्लैट बायर्स की चिंताओं को समझ सकें.

कोर्ट रिसीवर आर रमणी और उनके लोग मनमानी करके और ग़लत ढंग से तदर्थ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन बनाने के आरोपी हैं. इस डमी एढाक एओए के जरिए फ्लैट बायर्स पर कई किस्म के दबाव बनाए जा रहे हैं. इसमें सबसे बड़ा मुद्दा फ्लैट में रहने के लिए शिफ्ट होने पर 12 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से टैक्स देना है. इस प्रस्ताव को एक बैठक कर फ्लैट बायर्स खारिज कर चुके हैं. बैठक में पारित प्रस्ताव का विवरण नीचे देखें. इसी टाइप के कई भयानक प्रस्ताव एढाक एओए की तरफ से बायर्स में चर्चा हेतु लाया जा रहा है. बायर्स हैरान परेशान हैं. कोर्ट रिसीवर का कभी उनकी नजर में सम्मान था, लेकिन अब ये लोग बायर्स के दुश्मन लगने लगे हैं.

एंट्री फी के खिलाफ मीटिंग करते आम्रपाली लेजर पार्क के फ्लैट बायर.

आम्रपाली लीजर पार्क के फ्लैट बायर्स का कहना है कि उनसे पहले ही एक बार पच्चीस हजार और एक बार साढ़े छह हजार रुपये लिए जा चुके हैं जिसका कोई हिसाब नहीं दिया गया. डुअल मीटर और अन्य के नाम पर पैसे देने के बाद भी फ्लैट बायर्स को अपने अपने फ्लैट के लिए बिजली कनेक्शन लेते वक्त नए सिरे से पैसे देने पड़ रहे हैं. अब एढाक एओए को आगे कर अब फिर से नए किस्म की वसूली के प्रस्ताव लाए जा रहे हैं. जो लोग फ्लैट में रह रहे हैं, उन्हें सुविधा के नाम पर जिल्लत भरी जिंदगी मिल रही है. बार बार लिफ्ट का खराब होने सबसे बड़ी समस्या है. कूड़ा निस्तारण के लिए अब तक कोई व्यवस्था न किया जाना बहुत बड़ी समस्या है. लिफ्ट में इंटरकाम न लगना और इमरजेंसी की स्थिति में बात करने के लिए फोन नंबर न दिया जाना बड़ी समस्या है. ऐसी मूलभूत बड़ी समस्याओ की काफी बड़ी लिस्ट है जिस पर कोई बात करने को तैयार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने आर रमणी को अटॉर्नी जरनल ऑफ़ इंडिया नियुक्त किए जाने के वक्त पूछा था कि क्या वे अब समय दे पाएंगे या नहीं. इस पर आर रमणी ने अदालत से कहा था कि वह पूरा समय देंगे. लेकिन अब जब फ्लैट बायर्स उनसे मीटिंग के लिए समय मांगते हैं तो वे कहते हैं कि उनके पास समय नहीं है. फ्लैट बायर सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट रिसीवर के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं.

आम्रपाली लीजर पार्क में बीते रविवार की दोपहर तीन से पांच बजे तक बैठक कर फ्लैट बायर्स ने ये प्रस्ताव पास किया है-

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MOM By All Respected Home Buyers

Date: 23-07-23, Time- 3-5 PM

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Place: Club House, Leisure Park

Following Point Discussed Democratically n accepted by all Present Buyers.

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1.A meeting with the CR must be promptly scheduled during the upcoming week, and the coordination responsibility shall be entrusted to Mr. Deepak and Mr. Rawat.

  1. Ad hoc AOA is hereby advised against making any financial decisions, as doing so will render them null and void according to the consensus of the majority of owners.

3.The finalization of the Maintenance agency should take place after the General Body Meeting (following the formal AOA formation through election).

4.Having been selected as a temporary body on 07.07.2023, the Ad hoc AOA must ensure the election of a permanent body on or before 6th October 2023.

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5.The Ad hoc AOA is required to inform all flat owners about any upcoming meetings four days in advance, with the meetings scheduled exclusively between 3 PM to 5 PM on Sundays to maximize buyer participation.

6.The proposal made by the Ad hoc team member regarding a one-time entry fee of Rs. 10 to 12 per sq. ft. has been unanimously rejected by the majority of buyers. Financial decisions of this nature should only be considered after the election of the permanent owner Association of Leisure Park Society.

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7.To serve the greater interests of the Leisure Park Society, all owners, including residents and non-residents, must be treated impartially. Their rights and privileges shall be held to the same standards.

  1. Equality is a fundamental principle we uphold here, and any form of discrimination is highly objectionable and unacceptable.

9.In future meetings, additional members will be considered for inclusion in the core committee on a voluntary basis, with preference given to senior citizens, females, and those willing to dedicate sufficient time to the society to foster future leadership opportunities.

10.Lastly, it is essential to take into account the perspectives and viewpoints of the larger buyers. Ignoring their concerns may lead to strong protests for the protection of our rights, and we may pursue legal action to seek justice.

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On All Present Buyers signature below


आम्रपाली लेजर पार्क के फ्लैट बायर्स के वाट्सअप ग्रुप में प्रसारित कुछ संदेश पढ़ें-

वर्तमान CR महोदय द्वारा चयनित ALP adhoc committee अपनी गुप्त सभाओं में शेष किसी को शामिल भी नहीं करते है और अपने मंसूबों (एकाकी) को अंजाम देने में गुप-चुप तरीके से सक्रिय रहते हैं और अपनी सार्वजनिक सभा में स्वयं आते भी नहीं हैं, सामूहिक चर्चा और प्रश्नों का उत्तर देने हेतु. ऐसे लोग कैसे बेड़ा पार कर पाएंगे?

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Dear Mr president of Adhock AOA, Please note that when your team members could not spare some time to attend a meeting called by a larger group of Buyers/Owners , how you can expect buyers/owners to have faith in a self-made AOA. People have doubts on self made committee’s function. As you know, AOA members do not have mandates for formation of AOA and this is not an elected body. If you wish to lead the group, you have to gain the confidence of owners/buyers, failing which larger group of buyers will not support you.


सभी बहन भाई को नमस्कार। आज सुबह से या कल रात से जो इस ग्रुप में उथल पुथल मचा हुआ है, उसके लिए सबके ओर से सबसे पहले माफ़ी। लेकिन आज जो कुछ भी हम सबके सामने देखने को मिल रहा है उसके लिए कहीं न कही हम सब ही जिम्मेदार है। हमलोग जनवरी से लगातार एडहॉक AOA के विरुद्ध लेजर पार्क के बायर्स को आगाह करते आए थे, और कहते थे कि फिलहाल जबतक एनबीसीसी के द्वारा सभी कंस्ट्रक्शन का काम खत्म न हो जाए, एक एक करके सभी बायर्स को अपने फ्लैट का हैंडओवर न मिल जाए, बिल्डर बायर्स एग्रीमेंट के तहत सभी सुविधाओं का हैंडओवर न हो जाए, तब तक सारा काम एनबीसीसी ही देखे, लेकिन कुछ अति उत्साही बायर्स ने अपने निजी हित में पूरे सोसाइटी को आज दांव पर लगा दिया है। और अब यहां उन स्वघोषित एडहॉक AOA बनाने वाले स्वंभू बायर्स क्या क्या कर रहे और आगे क्या क्या करेंगे वह सब कुछ सबको दिख रहा है। और अब अधिकतर एडहॉक AOA को बनाने के समर्थन करने वाले मित्र भी खुलकर इनके विरोध में उतर आए है। खैर जो हुआ सो हुआ, अब हम सब लार्जर बायर्स के हित में साथ साथ है। हम सभी एक एक फ्लैट मालिक का उतना ही अधिकार है जितना वहां रहने वाले फ्लैट मालिकों का। इसलिए वह लोग इस तरह का भेद भाव की राजनीति न करे, और सिर्फ 6-7 बायर्स ही गुपचुप कोई फैसला न ले, जिससे लार्जर बायर्स और सोसाइटी के लिए सही न हो। इसलिए दोस्तों, अगर जल्दी ही इन सब समस्याओं का समाधान न हुआ और मेजोरिटी बायर्स के द्वारा कुछ कड़ा विरोध और कड़े फैसले नही हुए तो फिर लेजर पार्क को खोड़ा कॉलोनी में तब्दील होते समय नही लगेगा। इसलिए इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए बायर्स के द्वारा चुने गए एडहॉक कोर कमेटी के बैनर तले कल दोपहर 3 बजे लेजर पार्क क्लब हाउस में एक “महाविरोध बैठक ” करने जा रहे है। सभी मनमानी करने वाले सभी अथॉरिटी को बताना होगा कि चुप रहने वाले बायर्स को कमजोर न समझे। हम अपना सभी अधिकार ले कर रहेंगे। जय हिंद।

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Entry fees किसी society में नहीं ली जाती। ये किस हिसाब से मांगी जा रही है। ये 2.5 करोड़ का मामला है भाईयो.. “1 रुपया नही देंगे। AoA के सब लोग 3 बजे आकर बताएं की ये पैसा क्यों चाहिए, कौनसे account में रहेगा। किसके नाम। Use कहां करोगे। कैश निकालोगे या चेक पेमेंट होंगी”। और महाविरोध क्यों करना पड़ रहा है। यही काम रह गया क्या हमे। अगर गुपचुप तरीके से फैसले करोगे तो आपको हटाना ही उचित है। एक बार धूल थम जाए, फिर election करते हैं। या फिर खुलके सामने आओ। आपकी मंशा पर संदेह नहीं कर रहा हूं लेकिन politicians पैसा खाते हैं लेकिन सामने तो आते हैं। और आप तो सिर्फ सेवा करना चाह रहे हो। फिर आकर बात क्यों नहीं करते!


CR cannot impose an association on buyers if majority of the buyers refuse to accept it. If there are lawyers in our group they may advise the course of action. Otherwise, we may prepare a Consent Form for the buyers for agreeing to form an association. We then form an association and apply for registration at the right time. We may also consider challenging this ‘sarkari agent’ legally. After receiving the consent form from larger number of buyers, we may elect an adhoc committee for further representation

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कोर्ट रिसीवर को विश्वास अर्जित करने के लिए तत्काल थोपे हुए एढाक एओए को भंग कर चुने हुए फ्लैट बायर्स का एढॉक एओए बनाना चाहिए ताकि फ्लैट बायर्स खुद को ठगा हुआ महसूस न करें.


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