जयंत सिंह तोमर-
‘दैनिक भास्कर’ भोपाल के आखिरी पेज पर आज यह खबर छपी है। अखबार को आधिकारिक स्रोतों ने बताया है कि छब्बीस साल पहले जब अमिताभ ठाकुर देवरिया के एसपी थे तब उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए जिला उद्योग केन्द्र से पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्लाट आवंटित कराया था। बाद में यह प्लाट बेच दिया गया।
छब्बीस साल पुराने इस प्रकरण में आरोपित को पकड़ने में इतनी देर क्यों लग गई? न्यायालय इस प्रकरण में अब उचित कार्यवाही और कार्रवाई करेगा ही। लेकिन पुलिस हिरासत में अमिताभ ठाकुर पास में खड़े मीडिया कर्मियों से यह क्यों कह रहे हैं कि उनकी हत्या कराई जा सकती है। इसका वीडियो कल सोशल मीडिया पर देखा गया है।
आर्थिक अनियमितता में जितना उचित समझा जाये उतने गुना ज्यादा आर्थिक दंड लगाकर या उचित सजा देकर न्याय किया जा सकता है। क्या यह इतना बड़ा प्रकरण है कि पुलिस मय दल-बल के सफर करते हुए अचानक किसी को धर दबोचे?
पिछले दिनों मध्यप्रदेश के दो पत्रकारों को भी राजस्थान पुलिस इसी अंदाज़ में पकड़ कर जयपुर ले गयी थी।
छब्बीस साल पुराने प्लाट के प्रकरण में अगर इस तरह दहशत भरी कार्रवाई की जा रही है तो उन लोगों को पकड़ पाने में व्यवस्था क्यों नाकाम है जो बैंकों का हजारों करोड़ रुपया डकारकर भी चैन में हैं।
एक साधारण व्यक्ति भी अपना सम्मान और जीवन बचाने के लिए आर्थिक अनियमितता के प्रकरण में हर तरह का हर्जाना अदा करने को तैयार रहता है। बैंकें जिस तरह गांवों में जाकर कुर्की करती हैं और किसानों की इज्ज़त से खेलती हैं वह दृश्य सब की आंखों के सामने होगा ही।
अमिताभ ठाकुर जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को एक प्लाट के मामले में घर से भी हिरासत में लिया जा सकता था। लेकिन कहानी शायद कुछ और ही है।
बताया जा रहा है कि अमिताभ ठाकुर उत्तरप्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली के मुखर आलोचक हैं इसलिए उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।



jishan journalist
December 12, 2025 at 6:39 am
पुरकाजी,मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में सेनेमी कंपनी लोगों का करोड़ों रुपए लेकर बैठ गई लेकिन मुख्य आरोपियों का कुछ नहीं हुआ। इस कंपनी के द्वारा कंपनी के संचालको ने करोडो रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली है। इन जैसों का कुछ नहीं होता