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प्रेस काउंसिल पहुंचा असम का डिजिटल मीडिया बनाम न्यूज चैनल विवाद!

नवा ठाकुरिया-

असम में डिजिटल पत्रकारिता मुख्यधारा के समाचार चैनलों को चुनौती दे रही है। हाल ही में गुवाहाटी के सैटेलाइट न्यूज चैनल प्राग न्यूज के मालिक संजीव नारायण द्वारा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के संपादक को कथित तौर पर ‘साधारण पत्रकार’ कहकर अपमानित किए जाने का मामला चर्चा में आया है।

संजीव नारायण और घोष के बीच असमिया भाषा में हुई बातचीत की एक ऑडियो क्लिप व्हाट्सऐप पर प्रसारित हुई। इसके साथ एक छोटा वीडियो भी सामने आया, जिसमें फोन पर प्राग न्यूज के मालिक का नाम दिखाई दे रहा था।

ईशान न्यूज के संपादक सुशील पटवारी ने इस मामले को उठाते हुए पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राग न्यूज परिवार बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट करेगा और यह बताएगा कि इसका संबंध किसी अनैतिक गतिविधि से नहीं था।

संजीव नारायण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपों से इनकार किया, हालांकि उन्होंने घोष के साथ बातचीत होने की बात स्वीकार की। उनका कहना था कि बातचीत घोष की लग्जरी गाड़ी से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर थी, न कि किसी नुकसान पहुंचाने वाली खबर को रोकने के बदले पैसे लेने के बारे में।

नारायण ने यह भी कहा कि प्राग न्यूज पहले घोष को अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल व्यक्ति के रूप में रिपोर्ट कर चुका था। उन्होंने खबरों को गलत तरीके से पेश करने वाले न्यूज पोर्टलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।

इसके एक दिन बाद घोष सामने आए। उन्होंने दावा किया कि नारायण उनसे नुकसान पहुंचाने वाली खबर के दूसरे हिस्से को रोकने के लिए बार-बार पैसे मांग रहे थे। घोष ने खुद को कानून का पालन करने वाला कारोबारी बताया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बातचीत में नारायण और घोष के बीच अपनाए गए अनौपचारिक संबोधन ‘तुमि’ पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि जब चैनल कथित तौर पर घोष को अवैध कारोबार में शामिल बता रहा था, तो दोनों के बीच बातचीत का लहजा इतना सहज और दोस्ताना क्यों था?

सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने कथित असामाजिक तत्वों और अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार से संबंधों की जांच कराने की मांग की। 14 अक्टूबर 2026 को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के मालिक ने गुवाहाटी के पलटन बाजार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराकर इस बातचीत की जांच की मांग की।

लेख के मुताबिक, मुख्यधारा के अधिकांश समाचार संस्थानों ने इस मामले को नजरअंदाज किया, जबकि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने इसे व्यापक रूप से उठाया। इसके बाद अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार और मीडिया की नैतिकता को लेकर बहस तेज हो गई।

इस पूरे विवाद ने मीडिया की विश्वसनीयता, पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों और डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही यह मांग भी उठी है कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) में उचित स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी निगरानी की जा सके और उन्हें प्रोत्साहित भी किया जा सके।

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