Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान ने महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता के खिलाफ समन नहीं छापा

मुरादाबाद  : दूसरों के बारे में बड़ी बड़ी हांकने वाले प्रमुख मीडिया घराने अपनी करतूतें छापने से कैसे कतराने लगते हैं, इसकी ताजा मिसाल है मुरादाबाद के इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह राना का मामला। कोर्ट में दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्ता और प्रधान संपादक संजय गुप्ता के खिलाफ एक गलत खबर प्रकाशित करने का मामला चल रहा है। गत दिनो जब राना के वकील उस केस का समन प्रकाशित कराने जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान और आज अखबारों के दफ्तर पहुंचे तो चारो ने उसे प्रकाशित करने से साफ मना कर दिया। अंत में सिर्फ दैनिक केसरी ने समन को प्रकाशित किया।   

मुरादाबाद  : दूसरों के बारे में बड़ी बड़ी हांकने वाले प्रमुख मीडिया घराने अपनी करतूतें छापने से कैसे कतराने लगते हैं, इसकी ताजा मिसाल है मुरादाबाद के इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह राना का मामला। कोर्ट में दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्ता और प्रधान संपादक संजय गुप्ता के खिलाफ एक गलत खबर प्रकाशित करने का मामला चल रहा है। गत दिनो जब राना के वकील उस केस का समन प्रकाशित कराने जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान और आज अखबारों के दफ्तर पहुंचे तो चारो ने उसे प्रकाशित करने से साफ मना कर दिया। अंत में सिर्फ दैनिक केसरी ने समन को प्रकाशित किया।   

दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता और एमडी महेंद्र मोहन गुप्ता के खिलाफ दायर ये मामला तीन साल पुराना है। तीन साल पहले बिलारी क्षेत्र में एक युवक की लाश लटकी मिली थी। इस मामले में दायर कोर्ट केस में संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता को पार्टी बनाया गया है। कोर्ट सम्मन छपवाने के लिए अखबार का नाम अदालत से ही तय होता है। समन प्रकाशन के लिए अदालत से जागरण का नाम तय हुआ। 

सब इंस्पेक्टर राना के वकील संजीव चौधरी और नीतेश कुमार सबसे पहले दैनिक जागरण के मुरादाबाद में कांठ रोड स्थित कार्यालय पहुंचे। सम्मन में संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता का नाम और पद लिखा था, इसलिए जागरण आफिस में हड़कंप मच गया। संपादक ने ये कह कर समन प्रकाशित करने से मना कर दिया कि हम अपने ही खिलाफ इसे कैसे छाप सकते हैं। वहां से तुरंत नोएडा और कानपुर जागरण कार्यालयों को बताया गया। उधर से मामला कोर्ट के बाहर निपटाने को कहा गया तो संपादक ने जमकर जोर लगाया और जब सफलता हाथ नहीं लगी तो नोएडा कह दिया कि मामला उनसे पुराना है। इसलिए वो इसमें कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने बता दिया कि खबर ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रदीप शुक्ला के कार्यकाल में लिखी थी। ज्ञानेंद्र अब जागरण इलाहाबाद में और प्रदीप शुक्ला बरेली जागरण में तैनात हैं।

इसके बाद संजीव चौधरी और नीतेश कुमार समन लेकर हिंदुस्तान कार्यालय पहुंचे। हिंदुस्तान ने भी छापने से मना कर दिया। वहां से दोनो वकील अमर उजाला कार्यालय गए। रिसेप्शनिस्ट ने पहले तो छापने के लिए स्वीकारते हुए समन ले लिया। फिर बिलबुक लेने के बहाने आफिस के अंदर गया। लौट कर उसने भी समन लौटाते हुए छापने से मना कर दिया। दोनो वकीलों ने किसी के माध्यम से समन आज अखबार में छपवाना चाहा तो वहां से भी इनकार कर दिया गया। आखिर स्थानीय दैनिक केसरी ने समन को छापा।

Local News Community
1 Comment

1 Comment

  1. Ramesh

    July 15, 2015 at 6:41 am

    Sampadak ko sorf kmai se matlab hai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन