IFWJ and DUWJ congratulate HT employees for their legal victory

New Delhi, 29 August : Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) and Delhi Union of Working Journalists (DUWJ) have lauded the verdict of the Hon’ble Delhi High Court, which reinstated 272 employees of the Hindustan times with consequential benefits from the date of their termination on 3rd October 2004. In a joint statement, the IFWJ Secretary General Parmanand Pandey and the DUWJ President A. S. Negi have expressed their happiness and said that ultimately the truth has triumphed. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

CONGRATS HT WORKERS : SUCCESS AFTER 14 YEARS OF STRUGGLE

Congratulations to the workers of the Hindustan Times for a great victory in their valiant fight for 14 years against their illegal termination of services. The success of their struggle came on August 27, 2018, when Delhi High Court ordered their reinstatement with continuity of service and on the same terms and conditions as availed by them before termination. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

एचटी से बर्खास्त 272 मीडियाकर्मियों को काम पर रखने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट में हिन्दुस्तान टाईम्स के कर्मियों की बड़ी जीत, निकाले गये 272 कर्मचारियों को वापस बकाये वेतन के साथ काम पर रखने का आदेश….

नयी दिल्ली के हिन्दुस्तान टाईम्स से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां हिन्दुस्तान टाईम्स से वर्ष २००४ में निकाले गये २७२ कर्मचारियों को दिल्ली हाईकोर्ट ने वापस काम पर रखने और उनकी सेवा व वेतन २००४ से ही बरकरार रखने का आदेश दिया है। इससे नौकरी से निकाले गये २७२ कर्मचारियों को चौदह साल का उनका बकाया वेतन भी मिलेगा। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

एचटी बिल्डिंग के सामने धरना देते हुए मरे मीडियाकर्मी का पुलिस ने लावारिस के रूप में किया अंतिम संस्कार

रविंद्र को नहीं मिल पाया अपनों का कंधा… साथियों का आरोप- HT प्रबंधन के दबाव में पुलिस ने लावारिस के रुप में किया अंतिम संस्‍कार… नई दिल्‍ली। 13 साल तक न्‍याय के लिए संघर्ष करने के बाद बुधवार की अंधेरी रात में मौत की आगोश में हमेशा-हमेशा के लिए सो जाने वाले हिंदुस्‍तान टाइम्‍स के कर्मी रविंद्र ठाकुर को ना ही परिजनों का और ना ही अपने संघर्ष के दिनों के साथियों का कंधा मिल पाया। मंगलवार धनतेरस के दिन दिल्‍ली पुलिस ने उसकी पार्थिव देह का अं‍तिम संस्‍कार कर दिया। उसके अंतिम संस्‍कार के समय न तो उसके परिजन मौजूद थे और न ही उसके संस्‍थान के साथी।

रविंद्र ठाकुर के साथियों का आरोप है कि पुलिस ने हिंदुस्‍तान प्रबंधन के दबाव में जानबूझकर ऐसे दिन और समय का चुनाव किया कि जिससे कि हम उसके अंतिम संस्‍कार में पहुंच ही ना सके। उन्‍होंने बताया कि मंगलवार दोपहर को उन्‍हें दिल्‍ली पुलिस की तरफ से फोन आया कि रविंद्र के शव को अंतिम संस्‍कार के लिए सराय काले खां स्थित श्‍मशान घाट ले जाया जा रहा है। ये वो समय था जब वे दिल्‍ली हाईकोर्ट में थे और उनके केस की सुनवाई किसी भी समय शुरु हो सकती थी। जब तक हमारी सूचना पर दूसरे साथी श्‍मशान घाट पहुंचते तब तक पुलिस रविंद्र का अंतिम संस्‍कार करवा कर लौट चुकी थी।

उन्‍होंने बताया कि हम पुलिस से पहले दिन से ही मांग कर रह रहे थे कि यदि रविंद्र के परिजन नहीं मिल पाते हैं तो उसकी पार्थिव देह को हमें सौंप दिया जाए, जिससे उसका अंतिम संस्‍कार हम खुद कर सके। ऐसे में अचानक ऐसे समय में फोन आना जब हम हिंदुस्‍तान प्रबंधन से चल रही न्‍याय की लड़ाई से संबंधित एक केस के सिलसिले में कोर्ट में थे, दाल में कुछ काला है कि ओर संकेत करता है। पुलिस चाहती तो हमें समय रहते सूचित कर सकती थी, जबकि हम लगातार पुलिस के संपर्क में थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रबंधन पर दबाव बनाती तो रविंद्र के हिमाचल प्रदेश स्थित गांव का पता मिल जाता और आज उसके शव का लावारिस के रुप में अंतिम संस्‍कार नहीं होता। उन्‍होंने बताया कि इससे हम सकते में है। हमें ऐसी कतई उम्‍मीद नहीं थी कि बिड़ला जी के आदर्शों पर खड़ा यह मीडिया ग्रुप अपने एक कर्मचारी की मौत के बाद भी उसके परिजनों को उसके अंतिम संस्‍कार से महरुम रखने में अपनी ताकत का बेजा इस्‍तेमाल करेगा।

2004 में रविंद्र ठाकुर को हिंदुस्‍तान टाइम्‍स ने लगभग 400 अन्‍य कर्मियों के साथ निकाल दिया था। कड़कड़डूमा कोर्ट से जीतने के बावजूद भी ये कर्मी अभी तक सड़क पर ही हैं और अपनी वापसी के लिए अभी भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रविंद्र कस्‍तूरबा गांधी स्थित हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की बिल्डिंग के बाहर ही रात को सोता था, जहां वह और उसके साथी अपने हक के लिए आंदोलन करते थे। बुधवार रात उसी धरनास्‍थल पर उसका निधन हो गया। समय के थपेड़ों ने रविंद्र को अंर्तमुर्खी बना दिया था। जिस वजह से वह अपने साथियों से अपने परिजनों के बारे में कुछ बात नहीं करता था।

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इसे भी पढ़ें…xxx xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते-लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…

Ashwini Sharma :  ”ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए…, अपनों ने झाड़ा पल्ला जो बनते थे ख़ुदा वो भी किनारे हो गए..” साल 2005 में मुंबई इन टाइम न्यूज़ चैनल के बंद होने के बाद मैंने ये पंक्तियां लिखी थीं..तब मेरे साथ इन टाइम के बहुत से पत्रकार बेरोज़गार हुए थे..कुछ को तो नौकरी मिल गई लेकिन कुछ बदहाली के दौर में पहुंच गए..वैसे ये कोई नई बात नहीं है कई चैनल अखबार बड़े बड़े दावों के साथ बाज़ार में उतरते हैं..बातें बड़ी बड़ी होती हैं लेकिन अचानक गाड़ी पटरी से उतर जाती है..जो लोग साथ चल रहे होते हैं वो अचानक मुंह मोड़ लेते हैं..जो नेता अफसर कैमरा और माइक देखकर आपकी तरफ लपकते थे वो भी दूरी बना लेते हैं..

कई बार तो अपनों को भी मुंह मोड़ते देखा है..आज मैं ये सब इसलिए लिख रहा हूं..क्योंकि कुछ दिन पहले ही देश के नामचीन अखबार हिंदूस्तान टाइम्स अखबार की ऑफिस के सामने ही एक पत्रकार ने तड़पते तड़पते दम तोड़ दिया..तेरह साल पहले चार सौ लोगों को नैतिकता की बात करने वाले अखबार ने एक झटके में निकाल दिया था..वो तेरह साल से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा था..मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता..आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर वो ज़िंदा था..

कोर्ट कचहरी मंत्रालय सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में होने के बाद भी सब आंखों में पट्टी बांधे थे..सो आखिरकार उस कमजोर हो चुके इंसान ने एचटी के ऑफिस के सामने ही दम तोड़ दिया..मैं यही कहूंगा कि ये घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो किसी न किसी मीडिया हाउस में तैनात हैं..मेरा मानना है कि हालात अच्छे भी हो तो मुगालता नहीं पालना चाहिए और हो सके किसी असहाय भाई की मदद अवश्य करें..

‘भारत समाचार’ चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

मूल खबर…

xxx

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

निष्ठुर एचटी प्रबंधन ने नहीं दिया मृतक मीडियाकर्मी के परिजनों का पता, अब कौन देगा कंधा!

नई दिल्ली। अपने धरनारत कर्मी की मौत के बाद भी निष्ठुर हिन्दुस्तान प्रबंधन का दिल नहीं पिघला और उसने दिल्ली पुलिस को मृतक रविन्द्र ठाकुर के परिजनों के गांव का पता नहीं दिया। इससे रविन्द्र को अपनों का कंधा मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है।

न्याय के लिए संघर्षरत रविन्द्र के साथियों का आरोप है कि संस्थान के गेट के बाहर ही आंदोलनरत अपने एक कर्मी की मौत से भी प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा और उसने प्रेस परिसर में शुक्रवार को आई दिल्ली पुलिस को रविन्द्र के गांव का पता मुहैया नहीं कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन के पास रविन्द्र का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, उसने जानबूझकर बाराखंभा पुलिस को एड्रेस नहीं दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी नए भर्ती होने वाले कर्मी का HR पूरा रिकॉर्ड रखता है। उस रिकॉर्ड में कर्मी का स्थायी पता यानि गांव का पता भी सौ प्रतिशत दर्ज किया जाता है। रविन्द्र के पिता रंगीला सिंह भी हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार से 1992 में सेवानिवृत्त हुए थे। ऐसे में उनके गांव का पता न होने का तर्क बेमानी है। रंगीला सिंह भी इसी संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत थे, जबकि रविन्द्र डिस्पैच में।

रविन्द्र के साथियों ने बताया कि रविन्द्र अपने बारे में किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। बस इतना ही पता है कि वह हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का रहनेवाला है और उसका घर पंजाब सीमा पर पड़ता है। वह दिल्ली में अपने पिता, भाई-भाभी आदि के साथ 118/1, सराय रोहिल्ला, कच्चा मोतीबाग में रहता था। कई साल पहले उसका परिवार उस मकान को बेचकर कहीं और शिफ्ट हो गया था। रविन्द्र की मौत के बाद जब उनके पड़ोसियों से संपर्क किया तो वे उनके परिजनों के बारे में कुछ भी नहीं बता पाए। उनका कहना था कि वे कहां शिफ्ट हुए, उसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है। रविन्द्र के परिजनों ने शिफ्ट होने के बाद से आज तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। रविन्द्र के संघर्षरत साथियों का कहना है प्रबंधन के असहयोग के चलते कहीं हमारा साथी अंतिम समय में अपने परिजनों के कंधों से महरूम ना हो जाए।

उन्होंने देश के सभी न्यायप्रिय और जागरूक नागरिको से रविन्द्र के परिजनों का पता लगाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर और फारवर्ड करने की अपील की। उनका कहना है कि अखबार कर्मी के दुःखदर्द को कोई भी मीडिया हाउस जगह नहीँ देता, ऐसे में देश की जनता ही उनकी उम्मीद और सहारा है। यदि किसी को भी रविन्द्र के परिजनों के बारे कुछ भी जानकारी मिले तो उनके इन साथियों को सूचना देने का कष्ट करें…
अखिलेश राय – 9873892581
महेश राय – 9213760508
आरएस नेगी – 9990886337

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

मूल खबर…

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बॉबी घोष के जाने के बाद सुकुमार रंगनाथन बनाए गए एचटी के नए एडिटर इन चीफ

बॉबी घोष के हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार से अलग हो जाने के बाद सुकुमार रंगनाथन को नया एडिटर इन चीफ बनाया गया है. एस रंगनाथन अब तक इसी समूह के बिजनेस अखबार ‘मिंट’ के एडिटर के रूप में कार्य कर रहे थे. चेयरपर्सन शोभना भरतिया ने एक मेल के जरिए इसकी जानकारी सभी एचटी कर्मियों को दी. मेल में कहा गया है कि हिन्दुस्तान टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ के रूप में 48 वर्षीय सुकुमार रंगनाथन की नियुक्ति की गई है और वह एचटी के सभी प्रिंट व डिजिटल ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे. मिंट से पहले रंगनाथन बिज़नेस टुडे मैग्जीन के मैनेजिंग एडिटर थे.

शोभना भरतिया का आंतरिक ई-मेल इस प्रकार है–

Dear Colleagues,

I am delighted to announce the appointment of Sukumar Ranganathan, 48, as the Editor-in-chief of Hindustan Times. He will oversee all the print and digital operations of HT and report to me.

Sukumar, who has post graduate degrees in Mathematics and Business Administration and has a graduate degree in Chemical Engineering, has been Editor of Mint, of which he was a co-founder, since late 2008. In his time as editor, Mint has become the most respected and awarded newsroom in the country, winning seven Society of Publishers of Asia awards, and 10 Ramnath Goenka awards. He joined HT Media in 2006 as part of the founding team of Mint. He has previously worked at the India Today Group and The Hindu Business Line.

Sukumar will also take over the leadership of the HT digital newsroom on 23 October.

Bobby, who has, in the short span of 14 months, managed to transform the HT digital newsroom into a truly integrated one, producing high-quality content, will be with the company till 31 October.

The company will shortly make an announcement on the editorial leadership of Mint.

Regards

Shobhana Bhartia

Chairperson and Group Editorial Director

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

कर्मचारी एचटी डिजिटल स्टीम्स लिमिटेड के, वेतन अभी भी दे रही एचएमवीएल

कई कर्मचारियों से त्यागपत्र लेने के बाद भी नहीं दिया गया पुराना बकाया… शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले अखबार हिन्दुस्तान से खबर आ रही है कि यहां कर्मचारियों को पुरानी कंपनी से इस्तीफा दिलाकर नयी कंपनी में भले ही ज्वाईन करा लिया गया है मगर पटना सहित कई जगह रिजाईन लेने के बाद भी कई कर्मचारियों को उनका पुराना हिसाब नहीं दिया गया है। यही नहीं, हिंदुस्तान अखबार की कंपनी का नाम कल तक हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड था मगर अब एक नयी कंपनी खोलकर अखबार प्रबंधन ने उसका नाम रख दिया एचटी डिजिटल स्टीम्स लिमिटेड। इस नई कंपनी में जबरिया कर्मचारियों को पुरानी कंपनी से त्यागपत्र दिलाकर 1 जनवरी 2017 से ज्वाईन करा दिया गया है।

पटना से तो ये भी खबर आ रही है कि यहां कई कर्मचारियों से त्याग पत्र लेने के बाद भी उनका पुराना हिसाब एक भी पैसे का नहीं दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों को संदेह हो रहा है कि उनकी पुरानी कंपनी का ग्रैच्युटी और फंड के पैसे क्यों नहीं दिये गये जबकि नियमानुसार कर्मचारी अगर त्यागपत्र देता है तो उसे उसके काम के साल के ग्रैच्युटी का भुगतान कंपनी करती है। फिर कंपनी ने ऐसा क्यों नही किया। यही नहीं हिन्दुस्तान के कुछ कर्मचारियों ने सूचना दी है कि कर्मचारियों का ट्रांसफर हिन्दुस्तान मल्टीमीडिया से नयी कंपनी में कर दिया गया है मगर वेतन अब भी पुरानी कंपनी से ही आ रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि दोनों कंपनी एक ही हैं और सिर्फ मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर देने से बचने के लिए नई कंपनी बना ली गयी है क्योंकि माह जनवरी और फरवरी का जो वेतन नई कंपनी के कर्मचारियों के बैंक खाते में आया है, वह एचएमवीएल की ओर से देना बैंक के मैसेज में दशार्या गया है। जाहिर है कि नई कंपनी सिर्फ कागजों में बना ली गई और सारे दायित्व व देनदारियां एचएमवीएल ही वहन करती रहेगी। ये सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और श्रम न्यायालय को धोखा देने के लिए हिन्दुस्तान के प्रबंधन ने रास्ता निकाला है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

प्रिंट मीडिया की अब तक की सबसे बड़ी डील : रिलायंस ने हजारों करोड़ रुपये में खरीदा हिंदुस्तान टाइम्स

मुकेश अंबानी होंगे एक अप्रैल से हिंदुस्तान टाइम्स के नए मालिक : शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिंदुस्तान टाइम्स के बारे में चर्चा है कि इस अखबार को हजारों करोड़ रुपये में देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस के मुकेश अंबानी को बेच दिया गया है। कुल डील कितने में हुई है, इसका पता नहीं चल पाया है। चर्चा है कि प्रिंट मीडिया की इस सबसे बड़ी डील के बाद शोभना भरतिया 31 मार्च को अपना मालिकाना हक रिलायंस को सौंप देंगी और एक अप्रैल 2017 से हिंदुस्तान टाइम्स रिलायंस का अखबार हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो एक अप्रैल 2017 से रिलायंस प्रिंट मीडिया पर अपना कब्जा जमाने के लिए मुफ्त में ग्राहकों को हिंदुस्तान टाइम्स बांटेगा।

ये मुफ्त की स्कीम कहां कहाँ चलेगी, इसका पता नहीं चल पाया है और इस हजारों करोड़ की डील में कौन-कौन से हिंदुस्तान टाइम्स के एडिशन है और क्या हिंदुस्तान हिंदी अखबार भी शामिल है, इसका पता नहीं चल पाया है लेकिन ये हिंदुस्तान टाइम्स में चर्चा तेजी से उभरी है कि हिंदुस्तान टाइम्स को रिलायंस ने हजारों करोड़ रुपये में ख़रीदा है। अगर ये खबर सच है तो हिंदुस्तान टाइम्स के कर्मचारी 1 अप्रैल से रिलायंस के कर्मचारी हो जाएंगे।

फिलहाल रिलायंस द्वारा प्रिंट मीडिया में उतरने और हिंदुस्तान टाइम्स को खरीदने तथा मुफ्त में अखबार बाटने की खबर से देश भर के अखबार मॉलिकों में हड़कंप का माहौल है। सबसे ज्यादा टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। शोभना भरतिया और रिलायंस के बीच यह डील कोलकाता में कुछ हुयी। फिलहाल इस डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

शशिकान्त सिंह

पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट

9322411335

इसे भी पढ़ें…

 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यह शख्स जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया!

Deshpal Singh Panwar : अगर ये खबर सच है कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह को मुकेश अंबानी खरीद रहे हैं तो तय है कि अच्छे दिन (स्टाफ के लिए पीएम के वादे जैसे) आने वाले हैं। वैसे इतिहास खुद को दोहराता है… कानाफूसी के मुताबिक एक शख्स जो इस समूह के हिंदी अखबार में चोटी पर है वो जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया।

बनारस के ‘आज’ से लेकर जागरण के आगरा संस्करण का किस्सा हो या फिर वो अखबार जिसके मालिकों की एकता की मिसाल दी जाती थी और एक दिन ऐसा आया कि भाई-भाई अलग हो गए, बंटवारा हो गया, पत्रकारिता के लिए सबसे दुखद दिन था वो, कम से कम हम जैसों के लिए। अगर ये बात सच है तो इतने पर भी इनको चैन पड़ जाता तो खैरियत थी, एक भाई को केस तक में उलझवा दिया, उसके बाद जो हुआ वो भगवान ना करे किसी के साथ हो, वो सब जानते हैं…लिखते हुए भी दुख होता है..

अब अगर हिंदुस्तान समूह के बिकने की बात है तो कानाफूसी के मुताबिक इस हाऊस को भी लगा ही दिया ठिकाने। अगला नंबर मुकेश अंबानी का होगा अगर उन्होंने इन्हें रखा तो, वैसे ये जुगाड़ कर लेंगे, पीएम की तरह बोलने की ही तो खाते हैं.दुख किसी के बिकने और खुशी किसी के खरीदने की नहीं है हां स्टाफ का कुछ बुरा ना हो बस यही ख्वाहिश है। वेज बोरड की वजह से बिक रहा है ये मैं मानने को तैयार नहीं हूं। जो हो अच्छा हो..

कई अखबारों में संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार देशपाल सिंह पंवार की फेसबुक वॉल से.

संबंधित खबरें…

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुंबई के बाद अब दिल्ली एचटी को भी रिलायंस को बेचे जाने की चर्चा

देश भर के मीडियामालिकों में हड़कंप, कहीं मुफ्त में ना अखबार बांटने लगे रिलायंस…

देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस वाले मुकेश अंबानी द्वारा मुंबई में एचटी ग्रुप के अखबार मिन्ट और फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स खरीदने की चर्चा के बाद अब यह चर्चा भी आज तेजी से देश भर के मीडियाजगत में फैली है कि मुकेश अंबानी ने दिल्ली में भी हिन्दुस्तान टाईम्स के संस्करण को खरीद लिया है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है। हिन्दुस्तान टाईम्स के दिल्ली संस्करण में कर्मचारियों के बीच आज इस बात की चर्चा तेजी से फैली कि रिलायंस प्रबंधन और हिन्दुस्तान टाईम्स प्रबंधन के बीच कोलकाता में इस खरीदारी को लेकर बातचीत हुयी जो लगभग सफल रही और जल्द ही हिन्दुस्तान टाईम्स पर रिलायंस का कब्जा होगा।

रिलायंस के प्रिंट मीडिया में आने और हिन्दुस्तान टाईम्स को खरीदने की चर्चा के बाद आज देश भर के नामी गिरामी अखबार मालिकों में हड़कंप मच गया। सभी बड़े अखबार मालिकों में इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं जिस तरह रिलायंस ने जियो को लांच कर लोगों को मुफ्त में मोबाईल सेवा प्रदान कर दिया या रिलायंस के आने के बाद जिस तरह मोबाईल फोन जगत में रिलायंस का सस्ते दर का मोबाईल छा गया कहीं इसी तरह प्रिंट मीडिया में भी आने के बाद रिलायंस लोगों को मुफ्त अखबार ना बांटने लगे। ऐसे में तो पूरा प्रिंट मीडिया का बाजार उसके कब्जे में चला जायेगा।

यही नहीं सबसे ज्यादा खौफजदा टाईम्स समूह है। उसे लग रहा है कि अगर रिलायंस हिन्दुस्तान टाईम्स को मुफ्त में बांटने लगेगा या कोई लुभावना स्कीम लेकर आ गया तो उसके सबसे ज्यादा ग्राहक टूटेंगे और उसके व्यापार पर जबरदस्त असर पड़ेगा। आज देश भर के मीडियाकर्मियों में रिलायंस द्वारा मुंबई में मिंट तथा फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स को खरीदने की खबर पर जमकर चर्चा हुयी।

कुछ लोगों ने जहां इस फैसले को खुशी भरा बताया वहीं कुछ इस बात से भी परेशान थे कि इस खरीदारी में क्या हिंदी वाले हिन्दुस्तान समाचार पत्र के संस्करण भी खरीदे गये हैं। फिलहाल हिन्दुस्तान के किसी भी संस्करण के रिलायंस द्वारा खरीदे जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है। रिलायंस के प्रिंट मीडिया जगत में आने से छोटे और मझोले अखबार मालिकों में भी भय का माहौल है। उनको लग रहा है कि रिलायंस उनके बाजार को भी नुकसान पहुंचायेगा। फिलहाल माना जा रहा है कि रिलायंस जल्द ही अपना पूरा पत्ता हिन्दुस्तान टाईम्स को लेकर खोलेगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्स्पर्ट
मुंबई
९३२२४११३३५


पत्रकार Praveen Dixit ने इस प्रकरण के बारे में एफबी पर जो कमेंट किया है, वह इस प्रकार है…

”The silent deal… Last week, HT chairperson Shobhana Bhartiya met up with Reliance supreme Mukesh Ambani. The idea was to sell Mint and eventually, the flagship, Hindustan Times. The second meeting between the merchant bankers in faraway Kolkata and the deal further cemented for Mint. Mint staffers in Mumbai have already moved into the office of CNBCNews18, some fired. This budget, the First Post and CNBC feeds went to Mint Live, an indication that things were working out to mutual benefit.”


इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

शोभना भरतिया ने एचटी ग्रुप को मुकेश अंबानी को बेचा!

मुंबई से एक बड़ी खबर आ रही है. हिंदुस्तान टाइम्स समूह को इसकी मालकिन शोभना भरतिया ने भारत के सबसे बड़े व्यापारी मुकेश अंबानी को बेच दिया है. हालांकि यह चर्चा कई दिनों से थी कि शोभना भरतिया एचटी समूह को बेच रही हैं लेकिन इस सूचना की पुष्टि नहीं हो पा रही थी. अब यह बात लगभग कनफर्म हो गई है कि मुकेश अंबानी सबसे बड़ा टीवी नेटवर्क खरीदने के बाद सबसे बड़ा प्रिंट नेटवर्क भी तैयार करने में लग गए हैं और इस कड़ी में एचटी ग्रुप को खरीद लिया है.

मुंबई से मीडिया एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने भड़ास4मीडिया को सूचना दी है कि शोभना भरतिया मिंट व हिंदुस्तान टाइम्स मुकेश अंबानी को बेच रही हैं. हिंदुस्तान टाइम्स से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक इसकी मालकिन शोभना भरतिया और रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी के बीच एक बड़ी डील हो गई है जिसके तहत मुकेश अंबानी अखबार मिंट और फ्लैगशिप हिंदुस्तान टाइम्स को खरीद रहे हैं. इन दोनों अखबारों के मुम्बई के कर्मचारी अब रिलायंस के कर्मचारी होंगे और मुंबई के सीएनबीसी न्यूज़ 18 के कार्यालय में बैठेंगे.

सीएनबीसी न्यूज़18 पर रिलायंस का कब्जा है. आपको बता दूँ कि हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान के सैकड़ों कर्मचारियों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर क्लेम भी लगा रखा है. कई मामलों में शोभना भरतिया को पार्टी भी बनाया गया है. बाजार में चर्चा है कि इस बड़ी डील में हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार समेत पूरे ग्रुप को खरीदने को लेकर भी मुकेश अंबानी और शोभना भरतिया के बीच बातचीत हुई है लेकिन फाइनल नतीजा क्या रहा, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

इनपुट : मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह. संपर्क  : 9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

IFWJ opens legal cell to help Hindustan Times employees

New Delhi : Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) condemns the  decision of the Hindustan Times Management for closing down the publication centers of Bhopal, Indore, Ranchi, Kanpur, Allahabad, Varanasi and Kolkata.

IFWJ President K Vikram Rao has urged the Prime Minister Sri. Narendra Modi intervene. He has asked the IFWJ state units to lodge a formal complaint with the Chief Ministers of Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Jharkhand and West Bengal to take note of the victimisation of journalists and non-journalist employees. It is an arbitrary closure of the six editions of the newspapers and removal of a large number of employees from many publication centers. This act is illegal and in violation of labour laws of India.

The Hindustan Times management is yet to implement the Majithia Wage Boards recommendations. The method of changing the designations and indiscriminately transferring the employees to far off places to deprive them the benefits of the Wage Boards.

The IFWJ appeals to employees of different editions that they should lodge complaints with the respective labour commissioners in their states and forward a copy to our official email ifwj.media@gmail.com.

IFWJ has formed a legal cell which is headed by IFWJ legal advisor Sri Ashwani Kumar Dubey. Sri Dubey is Advocate on Record in the Supreme Court of India, he is an expert on Labour laws, Trade Unions and Environment. He will be more than happy to advise the aggrieved employees regarding the right course of action. IFWJ Secretary Headquarters Vipin Dhuliya (Mob: 9818627033) and National Federation of Newspaper Employees General Secretary Com. C.M.Papni (Mob: 9871757316) will also be available for any help.

You may also contact IFWJ’s state units in the respective states:

Madhya Pradesh : Salman Khan President M.P.-W.J.U.: 8602420351

Uttar Pradesh: Com.Haseeb Siddiqui President U.P.W.J.U.: 9369774311

Jharkhand : Shahnawaz Hassan President J.J.A.:  9472752955

West Bengal : Ranjan Lahari President W.B.-W.J.U.: 9434861122

IFWJ has been working tirelessly for the rights of journalists since 1950. We are always there for our colleagues. As a Journalist Trade Union we are there to help not charge any fee or take undue favours, advantages from the distressed employees.

Vipin Dhuliya
Secretary HQ
IFWJ

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मीडियाकर्मियों ने मांगी छुट्टी तो ‘हिन्दुस्तान’ के संपादक ने दी गालियां!

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

सुरक्षागार्ड से भी कह दिया कि इनको गेट के अंदर मत आने देना। इन दो कर्मचारियों में एक डबल एमए है और एक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ सरकारी नौकरी छोड़कर पत्रकारिता में आया था। फिलहाल इस संपादक के खिलाफ दोनों कर्मचारियों ने ना सिर्फ श्रम आयुक्त से शिकायत की है बल्की दूसरे सरकारी महकमों और सुप्रीमकोर्ट को भी इत्तला कर दिया है।

बताते हैं कि २७ अक्तूबर २०१६ को वरीय स्थानीय संपादक दिनेश मिश्र ने छुट्टी नहीं देने के बहाने संपादकीय विभाग में वर्ष २००० से कार्यरत मुख्य उप संपादक अमित अखौरी को काफी जलील किया। उनका इतने से भी मन नहीं भरा तो गाली गलौज भी की। गाली का विरोध करने पर मीडियाकर्मी को बर्बाद करने की धमकी तक दे डाली। यह धमकी अमित अखौरी को १७ नवंबर को भारी भी पड़ गयी। चर्चा है कि पहले तो संपादक ने एचआर के माध्यम से काम करने से मना करा दिया, फिर संपादकीय विभाग में उनकी इंट्री रुकवा दी और तीसरे दिन गेट के अंदर आने से भी मना करवा दिया।

नौकरी से बाहर और वेतन नहीं मिलने से परेशान अमित अखौरी अब सचिव, श्रमायुक्त और उप श्रमायुक्त के यहां न्याय की गुहार लगाते फिर रहे हैं। अब तक न्याय नहीं मिलने से परेशान अमित अब दिल्ली में बैठे अपने वरीय अधिकारियों शोभना भरतिया, शशि शेखर, एचआर हेड राकेश गौतम से गुहार लगा रहे हैं। आशा है कि शायद उनकी पीड़ा का समाधान हो। संस्थान में काम नहीं करने देने से उनके सामने आर्थिक संकट आ गया है। चिंता है कि उनकी दो बेटियों की पढ़ाई कैसे होगी।

अब आइए जानते है कि दूसरे कर्मी शिव कुमार सिंह का क्या हुआ। शिव कुमार सिंह वर्ष 2000 से काम कर रहे हैं पर 1 अगस्त 2010 में कन्फर्म हुए। वह वर्तमान में वरीय उप संपादक के पद पर कार्यरत हैं। अपनी आदतों से लाचार वरीय संपादक दिनेश मिश्र ने अमित अखौरी को निपटाने के बाद टारगेट शिव कुमार सिंह को बनाया। छोटी-छोटी बातों को लेकर प्रताड़ित करना, सभी कर्मचारियों के सामने जलील करना वरीय संपादक ने रोजमर्रा में शामिल कर लिया। कर्मी शिव कुमार सिंह की गलती सिर्फ इतनी थी कि इन्होंने भी हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेतन बोर्ड के तहत वेतन भत्ता समेत अन्य सुविधाएं देने की मांग की थी।

एक कर्मी मजीठिया की मांग करे यह सांमती मानसिकता वाले दिनेश मिश्रा को काफी नागवार गुजरा। उन्होंने अब शिव कुमार को भी निपटाने की ठान ली। हुआ भी ऐसे ही। ६ दिसंबर २०१६ को रोज की तरह जब शिव कुमार अपने काम पर गए तो संपादक के निर्देश पर एचआर हेड हासिर जैदी ने मौखिक आदेश के तहत उन्हें कार्यालय में घुसने से मना कर दिया। शिव कुमार ने कार्यालय में काम करने देने के लिए काफी मिन्नतें कीं पर इसका असर जैदी पर तनिक नहीं पड़ा। शिव कुमार ने जब कहा कि मैं संपादक से इस मामले में बात करना चाहूंगा तो जैदी ने साफ कर दिया कि यह सारी कार्रवाई दिनेश मिश्र के निर्देश पर ही हो रही है।

रांची में किराए के मकान में रह कर हिन्दुस्तान में काम कर रहे शिव कुमार के सामने भी आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गयी है। आपको बता दें कि हिन्दुस्तान गोरखपुर में भी इसी तरह संपादक द्वारा सुरेन्द्र बहादुर सिंह को परेशान किया गया था। वजह साफ थी कि सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगा था। संपादक ने परेशान किया तो सुरेन्द्र ने मानवाधिकार आयोग और स्थानीय पुलिस तक की शरण ले ली। 

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
मुंबई
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘हिन्दुस्तान’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के साथियों से एक पत्रकार की अपील

“हिन्दुस्तान” और “हिन्दुस्तान टाइम्स” से पूरे देश में जुड़े साथियों से खुली अपील है कि आप मजीठिया वेज बोर्ड अवार्ड के लिये 17(1) के तहत जमकर क्लेम करें। अगर 11 नवम्बर 2011 के बाद कभी भी रिटायर हुये हैं या जबरन रिजाइन ली गई है तब भी आपका एरियर बनता है। एरियर बनवाने में कोई दिक्कत हो तो मुझसे सम्पर्क करें। अगर आप काम कर रहे हैं तो डरने की जरूरत नहीं है। कंपनी आपको ट्रांसफर करेगी, सस्पेंड कर सकती है, टर्मिनेट करेगी और इनके लोग धमकियां भी देंगे, जैसा कि इन दिनों पूरे देश में हो रहा है। लेकिन भरोसा रखें, ये बिगाड़ कुछ नहीं पाएंगे।

ये वही लोग हैं जो किसी खबर पर एक नोटिस (नाजायज नोटिस पर भी) पर सिर पकड़ लेते हैं। माफीनामा तक छापते हैं। ये लोग सिर्फ आपके डर का फायदा उठा रहे हैं। आप को भरोसा दिला रहा हूं कि अगर न्यूनतम वेतन (मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार) मांगने के बाद ये उत्पीड़न करते हैं, तो कोर्ट का ऐसा डंडा गिरेगा कि अक्ल ठिकाने आ जाएगी। अगर कोई धमकी देता है तो मुकदमे की तहरीर दें। पुलिस प्रभाव में मुकदमा नहीं लिखेगी, लेकिन कोर्ट से 156/3 में मुकदमा / परिवाद जरूर दर्ज होगा।

भरोसा रखिये, जब आप आंखों में विश्वास के साथ मैदान में होंगे तो इनकी रूह कांप जाएगी। रोजी-रोटी का भय मन से निकाल दें। कचहरी के बाहर चिट्ठी टाइप करेंगे तब भी हजार रूपया रोज लेकर जाएंगे। मंदिर के बाहर शादी-ब्याह की फोटो बनाएंगे तब भी बच्चे भूखे नहीं मरेंगे। कुछ नहीं कर सकते तो मुझसे मिलियेगा, आपके साथ आपके लिये भीख मांगेंगे। चाय भी बेच लेंगे। विश्वास करें, यह सब ज्यादा दिन नहीं करना पड़ेगा।

हमारे डर का लाभ कंपनी को नहीं मिलना चाहिये। हम कटोरा लेकर घूमेंगे लेकिन उन कथित नये नजरिये का दावा करने वाले क्रूर लोगों से लड़ेंगे, जो कद-पद में हमसे बहुत बड़े हैं, लेकिन कलेजा बहुत छोटा है। हमारे हक पर कुंडली मारकर बेठे हैं। ये वही लोग हैं जो योग्यतम पत्रकार और प्रोफेशनल्स की बात करते हैं और तनख्वाह देते हैं नगर निगम कर्मचारी के चतुर्थ श्रेणी के साथी से भी कम। ये चाहते हैं कि पत्रकार हमेशा समाज की सहानुभूति पर पलें और इनकी अपनी जेबें भरती रहें।

कुछ साथी यह भी सोच रहे हैं कि वे मीडिया में जो सम्मान पा रहे हैं, वह बाहर आने पर नहीं पाएंगे। आपकी सोच आंशिक सत्य हो सकती है। पूरा सच नहीं है। एक बात का विश्वास दिलाता हूं कि अगर आप मजीठिया की जंग लड़े तो भले ही कुछ दिनों के लिये अखबार से बाहर जाना पड़ेगा लेकिन आपकी कई पीढ़ियां सम्मान पाएंगी। समाज में लोग आपकी मिशाल देंगे और आपके बच्चों की तरफ हाथ दिखाकर कहेंगे कि इसके बाप/दादा हक के लिये बिड़ला जी की कंपनी से भिड़े थे।

अब डरिये मत। थोड़ा हिम्मत जुटाइये। क्लेम करिये। अगर क्लेम के बाद कार्रवाई हो तो साक्ष्य जुटाइये। हम सभी कोर्ट से बहाली पाएंगे। अगले विजयादशमी के पहले सारे रावण जलेंगे। अब तक एचएमवीएल और एचटी मीडिया के जिन साथियों ने क्लेम किया है और कार्रवाई हुई है, वे मुझसे सम्पर्क करें। हम उनका साथ देंगे।

दोस्त, जो साथी यह सोच रहे कि उन्हें घर बैठे लाभ मिल जाएगा, वे पूरी तरह सही नहीं हैं। ऐसा कोई चमत्कार नहीं होगा। अभी भी वक्त है, देर न करें। क्लेम लगाएं। दिक्कत हो तो फोन करें या कभी भी ई-मेल करें।

आपका साथी
वेद प्रकाश पाठक
पूर्व सीनियर स्टाफ रिपोर्टर
हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड (गोरखपुर यूनिट)
मोबाइल-8004606554
cmdsewa@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मांगने पर ‘हिंदुस्तान’ अखबार ने दो और पत्रकारों को किया प्रताड़ित

लगता है खुद को देश के कानून और न्याय व्यवस्था से ऊपर समझ रहा है हिंदुस्तान अखबार प्रबंधन। शुक्रवार को एक साथ उत्तर प्रदेश और झारखण्ड से तीन कर्मचारियों को प्रताड़ना भरा लेटर भेज दिए गए। इन कर्मचारियों की गलती सिर्फ इतनी थी की बिड़ला खानदान की नवाबजादी शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिन्दुस्तान मैनेजमेंट से उन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और अपना बकाया मांग लिया था।

गोरखपुर के हिंदुस्तान संस्करण में सीनियर कॉपी एडिटर के पोस्ट पर कार्यरत सुरेंद्र बहादुर सिंह और इसी पोस्ट पर कार्यरत आशीष बिंदलकर को कंपनी ने शुक्रवार को ट्रांसफर और टर्मिनेशान की तरफ कदम बढ़ाते हुए एक पत्र भेजा है। इन दोनों साथियों ने 17 (1) के तहत लेबर विभाग में अपने बकाये की रिकवरी के लिए कलेम लगा रखा था। इस पत्र से इन दोनों साथियों को ज़रा भी अचरज नहीं है। आशीष कहते हैं मुझे लेटर अभी नहीं मिला लेकिन कंपनी ने शुक्रवार को मुझे ऑफिस में काम नहीं करने दिया और बताया कि आपको एक पत्र घर पर भेजा गया है। उधर सुरेन्द्र बहादुर सिंह का ट्रांसफर देहरादून कर दिया गया है।

यही नहीं, झारखण्ड में हिन्दुस्तान समाचार पत्र में कार्यरत उमेश कुमार मल्लिक को हिंदुस्तान प्रबंधन के निर्देश पर एचआर डिपार्टमेंट की तरफ से शुक्रवार को एक मेल  भेजा गया है। उमेश का अपराध बस ये है कि उन्होंने कानून और न्याय के निर्देश का पालन करते हुए मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से एरियर व सेलरी देने की मांग अखबार प्रबंधन से कर दी थी। कंपनी टर्मिनेशन के पीछे बहाना खराब परफारमेंस को बना रही है। उमेश दैनिक हिंदुस्तान, रांची के मीडिया मार्केटिंग यानि सेल्स डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं।

इन तीनों साथियों के उत्पीड़न से देश भर में हिंदुस्तान में कार्यरत समाचार पत्र कर्मियों में प्रबंधन के खिलाफ जमकर आक्रोश है। सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने अपने प्रबंधन और संपादक के खिलाफ ना सिर्फ लोकल पुलिस को बल्कि मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत कर रखा है। आप तीनों साथियों से निवेदन है कि आप खुद को अकेले मत समझिये। आपको आपका अधिकार मिलेगा। ये अखबार मालिक सुप्रीम कोर्ट से कतई बड़े नहीं है। आप के साथ आज देश भर के समाचारपत्र कर्मचारी हैं। जल्द ही हिंदुस्तान अखबार की भी चूल हिलेगी।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिवेस्ट
मुंबई
9322411335

इसे भी पढ़ें…

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

खबर से भड़के डीएम ने जारी किया आदेश : ‘हिंदुस्तान’ अखबार के इस उगाहीबाज रिपोर्टर को आफिस में घुसने न दें!

Dinesh Singh : मैं नहीं जानता कि बाका के जिलाधिकारी के दावे में कितनी सच्चाई है। बिहार में हिन्दुस्तान की स्थापना के समय से जुड़े होने के चलते मैंने देखा है कि रिमोट एरिया में ईमानदारी के साथ काम करने वाले पत्रकार भी भ्रष्ट अधिकारियों के किस तरह भेंट चढ़ जाते हैं। मैं यह नहीं कहता कि सारे पत्रकार ईमानदार हैं मगर मैं यह भी कदापि मानने के लिए तैयार नहीं हूं कि सारे पत्रकार चोर और ब्लैकमेलर ही होते हैं।

सच यह है कि बिहार में मध्याह्न भोजन के नाम पर जहां भी हाथ डालिए और खास कर बाका, मुंगेर और जमुई जिले में, केवल लूट और बदबू ही मिलेगा। यदि किसी पत्रकार से शिकायत थी तो सबसे पहले संपादक से शिकायत करनी चाहिए थी। संपादक द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का रास्ता खुला था। मगर नहीं। डीएम ने सीधे तुगलकी फरमान जारी कर दी।

भागलपुर के संपादक बदले हैं और सुना है ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई भी करते हैं। किन्तु लगता है अनुभवहीन जिला अधिकारी ने भ्रष्ट अधिकारियों के प्रभाव में आकर कोई बड़ा बवंडर कर दिया हो। अखबार के संपादक से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि वे इस मामले मे तत्काल कार्रवाई करें ताकि पत्रकारिता की मर्यादा बिहार में अक्षुण्ण बनी रहें।

हिंदुस्तान अखबार के विशेष संवाददाता रह चुके पत्रकार दिनेश सिंह की एफबी वॉल से.

नीचे वो खबर है जिससे भड़के बांका के जिलाधिकारी ने रिपोर्टर को उगाहीबाज करार देते हुए आफिसियल लेटर जारी कर दिया…. खबर को साफ-साफ पढ़ने के लिए नीचे दी गई न्यूज कटिंग के उपर ही क्लिक कर दें :

उपरोक्त स्टटेस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Niraj Ranjan अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है. चौथे स्तंभ को हिलाना मुश्किल है.

Uday Murhan मीडिया संस्थानों और पत्रकारिता जगत पर भी सवाल है . दूसरे क्या करेंगे और करना चाहिये दूसरे जानें .मीडिया जगत सोचे .

Brajkishor Mishra सत्यप्रकाश जी को बधाई। एक जिला अधिकारी को आपके कारण इस ओछेपन पर आना पड़ा। डीएम द्वारा लिखे गए डिपार्टमेंटल लेटर के सेंटेंस से स्पष्ट है कि मामला मध्यान भोजन की रिपोर्टिंग का नहीं है। कही न कही आपकी किसी और रिपोर्टिंग से डीएम की फटी पड़ी है। जिसका खुन्नस वो मध्यान भोजन की रिपोर्टिंग के नाम पर निकल रहा है। यदि मामला उगाही का होता तो डीएम एफआईआर भी दर्ज करा सकता था। लेकिन शायद कोई सबूत नहीं। डीएम साहब मध्यान भोजन आप नहीं खाते। वो देश के भविष्य, बच्चो के विकास के लिए है। पत्रकार छोड़िये, यदि मध्यान भोजन के गुणवत्ता में किसी भी व्यक्ति को शक होता है तो रसोई देखना उसका अधिकार है। बांका के पत्रकार बंधुओ का आग्रह हैं की पता करें इस डीएम को मंथली उगाही कौन-कौन से विभाग से कितनी पहुँचती है। अखबार में खबर नहीं लग पाती तो इनकी ईमानदारी की सबूत सोशल मीडिया पर डालिये।

Jayram Viplav डीएम के लिखने का अंदाज दाल में काला है ।

Dinesh Singh उदय जी, सवालो के घेरे मे आज कौन नही है। कस्बाई पत्रकारिता की स्थिति जानिए । दस रुपये प्रति खबर पर काम करता है और महीने मे दस खबर नही छपती है। मिलता है एक खबर पर दस रुपये मगर खर्चा पड़ता है 50 रु। अखबार को उसी के माध्यम से विज्ञापन भी चाहिए । वह भ्रष्ट और चोरी नेताओ की चाकरी मे लगा रहता है कि कुछ ऐड मिलेगा । उसे परिवार भी चलाना है। कठिनाई तब हो जाती है जब ओहदा और सैलरी मिल जाने के बाद भी गंदगी फैलाते हैं। धुआं वही से उठता है जब कही आग लगा होता है । विशेश्वर प्रसाद के समय मे हिन्दुस्तान भागलपुर मे कंट्रोवर्सी मे रहा और खबर छापने के लिए पैसे मांगने के खिलाफ बहुत सारे होल्डिंग्स भी टंगे । मै नही जानता की उस आरोप मे कितनी सच्चाई थी मगर चुने हुए बदनाम पत्रकारो को मिला संरक्षण और शहर के धंधेवाजो से उनके रिश्ते उनकी बदनामी को हवा देता रहा। मगर आप ही बताइए विशेश्वर प्रसाद और अक्कु श्रीवास्तव जैसे लीग जो कभी -कभी संपादक बन जाते है वही पत्रकारिता के चेहरे बनेगे या ईमानदार संपादको की भी चर्चा होगी? मैं दावे के साथ कहा सकता हू की आज भी पत्रकारिता मे ईमानदारी अन्य सभी क्षेत्रो की तुलना मे ज्यादा बची हुई है।

Uday Murhan एकदम सहमत . मेरा आशय आप से भिन्न नहीं है .

Brajkishor Mishra दिनेश सर, पत्रकारिता में सबसे बड़ी दिक्कत है की एक पत्रकार ही दूसरे पत्रकार की लेने में लगा हुआ है … अपने गिरेबाँ देखना किसी को पसंद नहीं।
Jayram Viplav पत्रकारिता और राजनीति “सेवा” के क्षेत्र है यहाँ कदम कदम पर नैतिकता और मूल्यों का तकाजा है लेकिन जब लोग इसे पैशन की जगह प्रोफेशन बना लेंगे तो क्या होगा? और हां यदि जिला ब्यूरो से नीचे प्रखंडों में काम करना हो तो आर्थिक रूप से मजबूत हो।

Dinesh Singh जिला अधिकारी के खिलाफ सत्यप्रकाश मानहानि का मुकदमा करें । मैं हर तरह से मदद के लिए तैयार हूं ।

Brajkishor Mishra विशेश्वर कुमार सर के साथ 12 साल पहले मुझे 2 साल काम करने का मौका मिला था, बड़े ही खड़ूस संपादक थे। जर्नलिज्म को छोड़ कर अपनापन नाम की कोई चीज ही नहीं। बड़े ही सेल्फिश संपादक हैं। सिर्फ खबर से मतलब रखते हैं। एक बार तो दूसरे संस्थान में किसी कारण परेशान हो उनसे नौकरी मांगा था सीधे ना कर बैठे। भविष्य में भी उनसे किसी फेवर की उम्मीद नहीं। लेकिन ये दावे के साथ कह सकता हूँ उनके जैसे पत्रकार और संपादक होना आसान नहीं। अकेले वो दस पत्रकार पर भाड़ी हैं। पत्रकार के सम्मान की सुरक्षा के लिए हमेशा सबसे आगे रहे है। वो कभी-कभी नहीं मेरे सामने बीते डेढ़ दशक में तीन जगहों पर स्थानीय संपादक के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किये हैं। मैंने बोल्ड जर्नलिज्म उनसे ही सीखा है।

Dinesh Singh पत्रकारिता केवल खबरों का लेखन नहीं है। यह एक आन्दोलन भी है । भारत मे पत्रकारिता का जन्म ही राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन से हुआ है। शहर का एक बड़ा व्यापारी शहर मे होर्डिन्ग लगाकर पैसा माँगने का आरोप लगाए और संपादक खामोश रहे यह कैसा वोल्डनेस है? काम करना और स्वाभिमान के लिए चट्टान से टकरा जाना अलग -अलग बात है। पत्रकारिता मे ईमानदारी और निर्भिकता बाहर से भी दिखनी चाहिए। यह मानहानि का मुकदमा बनता था। कुछ नही होने से पूरी टीम का सर शर्म से झुका रहा। मै मानता हूं कि आरोप गलत थे जैसे सत्यप्रकाश पर लगे आरोप गलत हैं। मगर चुप रह जाओगे तो लोग तरह -तरह के मतलब निकालेगे ही।
अजय झा ऐसे पत्रकार को सलाम जिसके लेखन से प्रशाशन की….

Sanjay Kumar Singh मैं भी एक पत्रकार हूँ। दो दशक से अधिक समय से इससे जुड़ा हूँ। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पत्रकारिता कभी चाटुकारिता में बदलेगी लेकिन कुछ अपवादों को छोड़ दे तो यह अब इससे भी नीचे दलाली में बदल गई है। हर कोई अपना एजेंडा लेकर चल रहा है। जिसमे पत्रकारिता मुखौटा बना हुआ है। सिवान, छपरा, बांका से लेकर पटना तक ऐसे मुखौटाधारि बैठे हुए हैं। ऐसे लोगों को कौन बेनकाब करेगा, शायद कोई नहीं, क्योंकि ये लोग अब सिस्टम में शामिल हो चुके हैं। दिनेश जी को बधाई… सिवान की ईमानदारी भी सीबीआई जरूर सामने लाएगी

Hari Prakash Latta आँख मूँदकर किसी को समर्थन देना या झुटला देना गलत है। बिना सत्यता जाने किसी एक व्यक्ति , घटना को केंद्रित कर सैद्धान्तिक बहस का कोई अर्थ नहीं होता है। हिंदुस्तान के सम्पादक को इन्क्वारी कर उचित निर्णय लेना चाहिए

Kumar Rudra Pratap मैंने देवरे को जाना है गया कार्यकाल के दौरान, ईमानदार और निडर अब तक।

Omprakash Yadav दिनेश जी जिलाधिकारी बाँका का तुगलकी भी कह सकते है और महाराष्ट्रीय फरमान भी कह सकते है आज के दौर का।जिस तरह महाराष्ट् में उत्तर भारत के लोगो को घुसने पर पावंदी हो गया है, चुकी बाँका के जिलाधिकारी महाराष्ट्रा के हैं और बाँका में उसी तर्ज पर काम कर रहे हैं। दिनेश जी आपने सही अनुमान लगाया की मध्यान भोजन बाला मामला बहाना है। एक समाचार पर जिलाधिकारी भड़के हैं।

Neel Sagar यदि सत्यप्रकाश जी पर आरोप गलत लगा है जो सत्य से परे है तो तत्काल उन्हे राय दिजिए कि डी0एम0 के खिलाफ भा0द0सं0 की धारा 499 के आधार पर मान-प्रतिष्ठा के साथ खेलने के लिए 25 लाख रूपया का मानहानि दायर करें।-सम्पादक-नील सागर दैनिक पटना -9835482126

Dinesh Singh अब तुगलकी फरमान जारी करने वाले बाका के जिला अधिकारी का असलियत सामने आ चुका है। —खबर पढ़कर बौखलाए जिला अधिकारी और कुछ नहीं बल्कि अहंकार का नाजायज पैदाइस है। –बिहार मे रहकर बिहारी को गाली देने वाले को तत्काल प्रभाव से सरकार निलम्बित करे। — पूरा बिहार सत्यप्रकाश के साथ है। अब बात साफ हो गई है कि माजरा क्या है । हमारी पत्रकार विरादरी कुछ आदत से लाचार है। ईमानदारी का सार्टिफिकेट हम मुफ्त मे बाटते है। यार पहले अपनी विरादरी पर गर्व करना सीखो। मै पहले ही कह चुका हूं कि पत्रकार विरादरी मे आज भी ईमानदारी बहुत हद तक कायम है। तुम बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई पर पलते हो और बिहारी को ही गाली बकते हो। यहा का आदमी जब महाराष्ट्र काम की तलाश मे जाता है तो नपुंसको की परवरिश बनकर हमला करते हो और बिहार आकर बिहारी पर ही रोब गाठते हो। कम से कम सत्यप्रकाश जैसे पत्रकार के रहते यह नही चलने वाला है । सत्यप्रकाश की रिपोर्टिंग यह साबित करता है कि वह पत्रकारिता का हीरो है। सत्यप्रकाश को तुम सरकारी कार्यालय जाने से नही रोक सकते । तुम अपना देखो की तुम कैसे जाओगे । वक्त आ गया है पत्रकार विरादरी अपनी एकजुटता दिखाए।

Amit Roy सत्यप्रकाश जी दुर्गापूजा के बाद इस दिशा में कोई ठोस निर्णय ले।हमलोग आपके हर कदम पर साथ है।

Guddu Rayeen मेरा एक ही हिसाब है ऐसे कलकटर को बिहार से उठा कर बाहर फेक देना चाहिऐ

Himanshu Shekhar Hahaha sir ne article 19 Ni padhe Kya.??? Kabhi bihari word use krte hai kabhi Kuch ? Bhagwan bharose hai Banka zila soch samjhdar kr cmnt kijye sir PTA Ni it act me jail daal Diya jaye

Ashish Deepak इस प्रकार का फरमान पुर्वाग्रह से प्रेरित लगता है। कहीं पत्रकार महोदय ने कड़वा सत्य तो नही लिख डाला ।

Nabendu Jha इस बात को रखने का यह तरीका सही नहीं। बल्कि ,इसके लिए एक जिम्मेदार अधिकारी को बात रखने की सही जगह की जानकारी होनी चाहिए । इसे वापस ले।

Pushpraj Shanta Shastri जिलाधीश ने किसी साक्ष्य के बिना जो निर्देश जारी किया है, यह आश्चर्यजनक नहीं है। हमारी पत्रकारिता ने डीएम से लेकर सीएम की आलोचना की आदत छोड़ दी है। जिलाधीश के पास अगर संवाददाता के द्वारा रिश्वत मांगने के साक्ष्य थे तो उन्हें किसने प्राथमिकी दर्ज कराने से रोका था? मुझे इस फरमान की भाषा में जिलाधीश प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत हो रहे हैं। बिहार के वरिष्ठ पत्रकारों को इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेना चाहिए। मैं इस मसले के तथ्यान्वेषण में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हूँ, शर्त यह है कि अपने कुछ बंधु साथ शरीक हों। पत्रकारिता कथ्य के बावजूद तथ्य की मांग करता है। जिलाधीश के पक्ष-विपक्ष में तत्काल कोई राय प्रकट करना अनुचित है। महाराष्ट्र-बिहार के प्रदेशवाद की चर्चा फूहड़ता है। जिलाधीश का पत्र तथ्य के बिना कथ्य पर आधारित है इसलिए कथ्य के भीतर की हकीकत के पड़ताल की जरुरत है।

Dinesh Singh जिला अधिकारी किसी वजह से इस तुगलकी हरकत पर उतरे वह प्रकाशित खबर तथ्य बनकर सामने है।

Awadhesh Kumar arajak bihar ka namuna. Jab rajneeti fail karte hi to yehi hota hi.ek dm bihar mei…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पत्रकार राजदेव रंजन के हत्‍या आरोपी शूटर ने किया कोर्ट में सरेंडर

बिहार के हिंदुस्‍तान, सीवान के ब्‍यूरोचीफ राजदेव रंजन की हत्या के आरोपी शूटर मोहम्मद कैफ ने बुधवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया. कैफ पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या मामले में मुख्य आरोपी है. वह हत्या के बाद से फरार चल रहा था. पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं मिल पा रही थी और कैफ खुलेआम घूम रहा था. शहाबुद्दीन की रिहाई के दौरान उसकी फोटो सामने आने के बाद पुलिस पर दबाव बना, जिसके बाद उसको अरेस्‍ट किए जाने का ड्रामा शुरू किया गया. पुलिस को चकमा देते हुए कैफ ने फिरौती के एक मामले में सरेंडर कर दिया.

कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है. कैफ ने कुछ दिन पहले ही सामने आकर अपने ऊपर लगे आरोप को झूठा करार दिया था. उसने अपनी सफाई में कहा था कि वह क्रिकेटर है, बच्चों को क्रिकेट सिखाता है. उसने यह भी कहा था कि उस पर राजदेव रंजन की हत्‍या का झूठा आरोप है. राजदेव से उसके अच्‍छे संबंध थे. जिस दिन भागलपुर की जेल से शहाबुद्दीन की रिहाई हुई थी उस दिन शहाबुद्दीन के साथ पत्रकार राजदेव की हत्या का आरोपी मोहम्मद कैफ उर्फ बंटी भी भागलपुर जेल के बाहर शहाबुद्दीन के साथ दिखा था.

गौरतलब है कि 13 मई को बिहार के सीवान जिले में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या कर दी गई थी. हत्या में शहाबुद्दीन की भूमिका होने का आरोप है. पुलिस ने इस मामले में 5 शूटरों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने पूछताछ में लड्डन मियां नाम लिया था. पता चला था कि लड्डन मियां के कहने पर ही शूटरों ने पत्रकार को गोली मारी थी. लड्डन मियां को बाहुबली शहाबुद्दीन का करीबी माना जाता है. इसलिए शक की सुई शहाबुद्दीन की तरफ भी घूमी थी. बाद में लड्डन मियां ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मामला : प्रताड़ना से परेशान हिन्दुस्‍तान के पत्रकार ने की आयोग से शिकायत

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हिन्दुस्तान प्रबंधन  द्वारा परेशान किये जाने से तंग आकर गोरखपुर के पत्रकार सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने एक पत्र मानवाधिकार आयोग को भेजा है। इस पत्र की मूल प्रति श्रम आयुक्त कार्यालय और वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक को भी भेजी गयी है। पत्र को पढ़ने के बाद साफ तौर पर लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में अब भी श्रम आयुक्त  कार्यालय और उसके अधिकारी सुधरे नहीं हैं। नीचे सुरेंद्र का मानवाधिकार आयोग को भेजा गया पत्र…


 सेवा में

श्रीमान श्रमायुक्त
उत्तर प्रदेश
कापी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर व मानवाधिकार आयोग

महोदय,

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन निर्धारित किये जाने तथा इससे संबंधित अब तक का एरियर व अन्तरिम राहत पाने के लिए 19/07/2016 को जिला श्रम आयुक्त गोरखपुर को संबोधित पत्र लिखकर गोरखपुर स्थित श्रम कार्यालय में जमा किया था। पद की सही जानकारी न होने से मैंने जिला श्रम आयुक्त लिखा था, मेरा आशय उप श्रमायुक्त गोरखपुर को संबोधित करना था। इसके अलावा यूपी के चीफ सेक्रेटरी को एक जुलाई को मेल तथा दो जुलाई को स्पीड पोस्ट कर चूका हूँ

इस बारे में जानकारी होने के बाद से अखबार प्रबंधन मुझे किसी न किसी तरह से परेशान कर रहा है। माँ की  तबीयत ख़राब होने पर उसे देखने के लिए 24 और 25 जुलाई तथा पारिवारिक कारणों से दो से लेकर छह अगस्त तक छुट्टी पर जाने के लिए मैंने आवेदन किया था। डेस्क इन्चार्ज और एनई की सहमति से चला गया था। इन्होंने मेरा मेल भी फॉरवर्ड किया था। वहीं तबीयत ख़राब होने पर 19,20 और 21 अगस्त को नहीं आ सका था। इसके सम्बंध में छुट्टी के लिए आवेदन किया था। शुरुआती छुट्टियों के लिए कई बार मैंने रिमाइंडर भी भेजा पर आज तक उस पर विचार नहीं किया गया। इन दोनों मेल की कापी भी संलग्न कर रहा हूँ। 

मेरे द्वारा क्लेम किये जाने कि जानकारी होने पर आफिस से कई साथी  5 सितम्बर 2016 को उप श्रमायुक्त के पास 17(1) के तहत क्लेम करने गये थे। उप श्रमायुक्त ने कहा की हिंदुस्तान अख़बार मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों से ज्यादा पैसा दे रहा है। उल्टे श्रम कार्यालय के लोगों ने प्रबंधन को इसकी सूचना दे दी और एचआर मेनेजर मो. आसिक लारी मौके पर पहुँच  गये। उन्होंने स्थानीय संपादक सुनील द्विवेदी को सूचित कर दिया। संपादक ने एक-एक साथी को अलग-अलग केबिन में बुलाकर फटकार लगायी, जिससे वे इस मामले से पीछे हट गये और  अब वे मुझे देख कर दूसरी तरफ मुंह कर लेते हैं।

दूसरी यूनिटों में काम कर रहे  साथियों के माध्यम से पता चला कि वहां पर श्रम विभाग की ओर से मजीठिया वेजबोर्ड का लाभ दिलाने से संबंधित फार्म भराया गया है तो उसे मंगाकर मैं भी 12/09/2016 को भरकर श्रम कार्यालय के आफिस में जमा करने गया था। वहां पर एक महिला तथा छोटेलाल नाम के कर्मचारी ने फ़ार्म कि रिसीविंग देने की जगह पर श्रम कार्यालय के अधिकारी श्री सियाराम जी को फोन कर दिया। सियाराम जी ने फ़ार्म लेने से रोक दिया और बोले मैं आऊंगा तो देखूँगा, जिससे डरकर मैं वहां से चला गया और रजिस्ट्री के माध्यम से श्रम आयुक्त तथा उप श्रमायुक्त को इसे भेज दिया। इसके बाद मुझे हदस होने लगी कि संपादक जी शाम को मुझे किसी न किसी बहाने फटकार लगायेंगे।

शाम को आफिस में जाने पर संपादक किसी न किसी बहाने तीन-चार बार केबिन में बुलाते रहे व मेरी समीक्षा व पेज प्लानिंग पर मुझे भला बुरा कहते रहे।  इसी दौरान उन्होंने मेरे द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाने के लिए लड़ी जा रही लड़ाई कि खिल्ली उड़ाई। मेरे सामने ऐसी स्थिति पैदा की  जा रही है कि आत्महत्या कर लूं या रिजाइन दे दूं। इस परेशानी, नौकरी छुटने के डर तथा संपादक के दुर्व्यवहार से बहुत आहत हूँ। इस तनाव में मुझे 5,6 और 7 सितम्बर कि रात नींद न के बराबर आई। 5 तारीख से पहले मुझे 3 जिलों के पूल में सेकंड इन्चार्ज के तौर पर रखा गया था, पर व्यवहार में सेकंड इन्चार्ज नहीं समझा जाता था। खबरों से संबंधित किसी भी प्लानिंग में मेरी भूमिका नगण्य रहती थी। मुझे ज़रा भी महत्व नहीं दिया जाता था। कुछ पूछने के लिए पूल इन्चार्ज को बुलाते थे। स्टोरी प्लानिंग व पेज प्लानिंग चीफ कापी एडिटर से कराते थे। मीटिंग में भी मुझे नहीं बुलाया जाता था। यहाँ पर आठ घंटे काम लिया जाता है। नाइट शिफ्ट के लिए अलग से पैसे नहीं मिलते।

5 तारीख को मजीठिया के लिए 17(1) का फ़ार्म जमा करने के लिए साथियों के साथ जाने पर संपादक का व्यवहार बहुत आक्रामक हो गया है। उनकी कोशिश रहती है कि सारी गलतियां  मेरे सर मढ दी जायें। इसके चलते मुझे 5,6 7 सितम्बर को घबराहट होती रही। इन तीन दिनों में मुझे खाना अच्छा नहीं लगा। हर समय बुखार महसूस होता रहा और पतली दस्त कई बार हुई। 7 तारीख की रात ऐसा लगा कि मेरा सिर फट जायेगा। मेरी बेटी ने सिर दबाया तो कुछ राहत मिली। ऐसी स्थिति में संभव है कि मेरा हार्ट अटैक हो जाये। मजीठिया वेज बोर्ड के लिए क्लेम करने से नाराज़ प्रबंधन मुझे जान से मरवाने की कोशिश कर सकता है। मुझे अपने अख़बार के स्थानीय संपादक सुनील द्विवेदी व प्रधान संपादक शशिशेखर से जान का खतरा है।   

भवदीय

 सुरेन्द्र बहादुर सिंह

सीनियर कापी एडिटर
हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड,बरगदवा, सोनौली रोड    गोरखपुर (इम्प्लाई  कोड M77284)

मेरा पता
सुरेन्द्र बहादुर सिंह C/O डा० डी०एन० सिंह(पुलिस इंस्पेक्टर)
336 क्यूक्यू वैभव नगर कालोनी, भाटीविहार, नियर चंद्रा पेट्रोल पंप, गोरखपुर 273015

फोन न० – 8858371279
मेल ऐड्रेस sbjnp.singh@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पत्रकार राजदेव रंजन हत्‍याकांड में सीबीआई दर्ज की नई एफआईआर

सिवान।हिंदुस्‍तान के ब्‍यूरो चीफ रहे राजदेव रंजन हत्याकांड की जांच अब जल्द ही सीबीआई करेगी. सीबीआई एक नई एफआईआर दर्ज कर ली है. वह जल्‍द ही अपनी टीम को सीवान भेजेगी. इस बीच बुधवार को राजदेव की पत्नी आशा रंजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले का ट्रायल दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है. उधर,इस हत्याकांड केमुख्‍य आरोपी मोहम्‍मद कैफ के खिलाफ बुधवार की देर शाम गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया.

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि उन्हें इस हत्याकांड की जांच सौंपे जाने की जानकारी मिली है,लेकिन अभी तक कोई दस्तावेज नहीं मिल पाया है. दस्‍तावेज मिलने के बाद सीबीआई हत्याकांड को लेकर जांच शुरू करेगी.सूत्रों ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अब सीबीआई की एक टीम को सीवानभेजी जाएगी, जो विभिन्‍न पहलुओं को ध्‍यान में रखकर नए सिरे से अपनी जांच करेगी. आरोपी मोहम्‍मद कैफ के सहाबुद्दीन के साथ दिखने के बाद सरकार और पुलिस भी सवालों के घेरे में है.

बिहार सरकार ने राजदेव की हत्या के चार दिन बाद ही मामले की सीबीआई को सौंपने का फैसला किया था, लेकिन अभी तक इस बारे में जांच एजेंसी ने फैसला नहीं किया था. लंबे समय से यह मामला ठंडे बस्‍ते में चला गया था. पत्रकार राजदेव रंजन की पत्‍नी आशा रंजन ने 11 सितंबर को दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया था. इसके बाद उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट में इस जांच के लिए याचिका भी दायर की थी. 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मांगने का साइड इफेक्‍ट : आलोक पर लगा छेड़खानी का आरोप

हिंदुस्‍तान, लखनऊ में मजीठिया वेज बोर्ड मांगने वालों के खिलाफ साइड इफेक्‍ट शुरू हो गया है. प्रबंधन जब मनाने में नाकाम रहा तो अब साजिश में जुट गया है. प्रबंधन अब मजिठिया मांगने वालों के खिलाफ साम-दाम से पार नहीं पा सका तो दंड-भेद का रास्‍ता अपना शुरू कर दिया है. खबर है कि पूर्व चीफ रिपोर्टर आलोक उपाध्‍याय पर एक महिला स्ट्रिंगर ने छेड़खानी का आरोप लगाया है. उसने 1090 पर फोन करके आलोक उपाध्‍याय पर छेड़खानी करने का तोहमत मढ़ दिया.

गौरतलब है कि बुधवार को ही मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर आलोक उपाध्‍याय, संजीव त्रिपाठी समेत आठ लोगों ने मोर्चा खोल रखा है. पहले तो प्रबंधन ने दबाव की चाल चली, लेकिन जब ये लोग नहीं माने तो दूसरा लालच दिया गया. उल्‍लेखनीय है कि स्‍टेट ब्‍यूरो में कार्यरत रहे आलोक उपाध्‍याय को पहले लोकल इंचार्ज बनाया गया था, लेकिन बाद में प्रादेशिक डेस्‍क पर भेज दिया गया. बुधवार को आलोक को लालच दिया गया कि उन्‍हें फिर से स्‍टेट ब्‍यूरो में भेज दिया जाएगा तथा मनचाही बीट दी जाएगी. पर वे मजीठिया की अपनी शिकायत वापस ले लें, लेकिन आलोक नहीं माने और उनके साथी नहीं माने.

अब इनकार का साइड इफेक्‍ट भी दिखने लगा है. प्रबंधन ओछी हरकत पर उतर आया है. पहले इन लोगों को नौकरी से निकाला, अब एक महिला स्ट्रिंगर को मोहरा बनाकर आलोक के खिलाफ छेड़खानी की फर्जी शिकायत कराई गई है. सूत्र बताते हैं कि उक्‍त स्ट्रिंगर को स्‍टाफर बनाने का लालच दिया गया है. संभव है कि प्रबंधन मजीठिया मांगने वालों के खिलाफ कोई और बड़ी साजिश रच दे. इस समय ब्‍यूरोचीफ आनंद सिन्‍हा और उप ब्‍यूरोचीफ अजित खरे जैसे लोग प्रबंधन की आंख-कान बनकर काम करने में जुटे हुए हैं, जो मजीठिया मांगने वाले साथियों की बात प्रबंधन तक पहुंचा रहे हैं और मनचाहा निर्णय करा रहे हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

एचटी मीडिया को धूल चटाने वाले 315 कर्मियों की जीत से संबंधित कोर्ट आर्डर की कापी Download करें

हिंदुस्तान टाइम्स वालों ने अपने यहां सन 1970 से परमानेंट बेसिस पर काम कर रहे करीब 362 मीडिया कर्मियों को 2 अक्टूबर 2004 को बिना किसी वजह एकाएक बर्खास्त कर दिया था.  362 में से कई कर्मियों ने तो प्रबंधन के साथ सुलह कर लिया लेकिन 315 कर्मियों ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल कड़कड़डूमा में केस कर दिया. ट्रिब्यूनल ने 8 मार्च 2007 को एक अंतरिम आदेश पारित किया कि सभी 315 कर्मियों को मुकदमे के निपटारे तक एचटी मीडिया पचास फीसदी तनख्वाह गुजारे भत्ते के लिए दे. इसके खिलाफ एचटी वाले हाईकोर्ट चले गए.

बाद में यह मामला पटियाला हाउस कोर्ट ट्रांसफर किया गया जहां सभी कर्मियों की बहाली और बकाया भत्ते देने के आदेश पारित हुए. इसके खिलाफ एचटी मीडिया हाईकोर्ट गया तो हाईकोर्ट ने निचली आदेश के फैसले को सही ठहराया और मामला सेटल करने को वहीं जाने के लिए कहा. अब इस मामले में फाइनल फैसला आ गया है जिसमें एचटी मीडिया को अपने इन सैकड़ों कर्मियों को बहाल करने से लेकर सभी बकाया देने के आदेश हैं और ऐसा न करने पर एचटी मीडिया की संपत्ति जब्त करने के निर्देश है. इस प्रकरण से संबंधित खबर भड़ास पर पहले ही छप चुकी है. अब कोर्ट आर्डर की कापी भी आप डाउनलोड कर पढ़ सकते हैं. नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर कोर्ट आर्डर की कापी डाउनलोड करें:

Court Order Copy Download

इस प्रकरण से संबंधित भड़ास पर छपी शुरुआती खबर यूं है…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बड़ी खबर : एचटी के 400 लोगों ने मुकदमा जीता, होंगे बहाल, मिलेगा बकाया

मीडिया इंडस्ट्री की बहुत बड़ी खबर आ रही है. हिंदुस्तान टाइम्स समूह के मैनेजमेंट से 400 मीडियाकर्मियों ने मुकदमा जीत लिया है. ये चार सौ लोग वर्ष 2004 में हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया लिमिटेड से निकाल दिए गए थे. इन्हें एक झटके में प्रबंधन ने निकाल बाहर किया था. श्रम कानूनों से लेकर संविधान की मूल भावना तक की धज्जियां एचटी वालों ने उड़ाई. मजेदार ये कि एचटी मैनेजमेंट की तरफ से अरुण जेटली मुकदमा लड़ रहे थे. साथ ही दर्जनों बड़े वकीलों की फौज भी थी.

हालांकि मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली ने वकालत का काम छोड़ दिया है. उधर, चार सौ मीडियाकर्मियों की तरफ से प्रशांत भूषण और उनकी टीम थी. वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने भी मीडियाकर्मियों की लड़ाई को पूरा सपोर्ट दिया और प्रशांत भूषण को कोर्ट जाकर मीडियाकर्मियों का पक्ष प्रमुखता से रखने को प्रेरित किया. अदालत में लगभग साढ़े ग्यारह – बारह साल तक मुकदमा चला और अब जाकर जो फैसला आया वह मीडियाकर्मियों को खुश करने वाली है.

अदालत ने सभी चार सौ लोगों को वापस काम पर रखने का आदेश एचटी मीडिया को दिया है. साथ ही इनका जो बकाया, ग्रेच्युटी, प्रमोशन ड्यू है, वह सब देने को कहा है. माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद एचटी मीडिया पर सैकड़ों करोड़ रुपये की चपत पड़ने वाली है और इनके बड़े बड़े मैनेजरों की टाई सरकने वाली है. इस पूरी लड़ाई को सक्रिय तरीके से लड़ रहे मीडियाकर्मियों के साथी अखिलेश सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश की कापी जल्द ही भड़ास4मीडिया को मेल कर दी जाएगी ताकि पूरे देश के मीडियाकर्मी जान सकें कि ये बड़े बड़े मीडिया घराने भले करोड़ों खर्च करके नामी गिरामी वकीलों के जरिए अन्याय की लड़ाई लड़ते हैं लेकिन आखिरकार जीत न्याय की ही होती है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Blunder by HT : Mitali is not the only women gallantry awardee…

Dear Mr Singh,

Hope you doing well!

This mail is in regards to the misinterpretation of facts by HT which has defamed an army officer (Capt CR Leena) from being the first Indian lady to get a gallantry award in the Indian Army.

I came to know about this blunder by HT when i met Major Sanjay Dhadhwal, office manager for an MNC in India and also  defamed officer’s husband. He showed me the article written by Bhadra Sinha of Hindustan times on oct 16th 2015 stating “Lt Col Mitali Madhumita is the Army’s only woman gallantry awardee in the country”.  If going according to facts she is not the only women gallantry awardee in our country in-fact she is second to Capt (Miss)C R Leena.

Mails have been already sent to HT and also to the journalist seeking corrigendum but they are not replying back. I would be highly obliged if you can be of any help in this matter.

I am attaching with mails the link of the article by HT and some facts, which proves that Capt C R Leena was felicitated with the award before Lt Col Mitali.

Hope you will be help the officer in getting back her pride.

Thanks and Regards,

Darshan Pandey

dp1495@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिंदुस्तान अखबार के रिपोर्टर अजय शर्मा ने आरटीआई एक्टिविस्ट आरती सिन्हा के बारे में गंदी बातें छाप दी

Dear Sir, Please read the attached newspaper to find out how the media is insulting women openly. Case has been filed against Hindustan. I am a noted RTI activists and a social worker. from Jharkhand, I am carrying on fight against corruption in which i am successful also. One of the reporter from Hindustan named Ajay Sharma from Mihijam Dist Jamtara has published dirty things for me to malign my image in the society.

For that reason i have lost my courage and not able to lead a normal healthy life  he has done so to please my opponents from other parties who are throwing money to get safe from police action but for the sake of money the Hindustan has spoiled my career by publishing dirty/slang remarks in your newspaper, because of that i have lost my livelihood of taking tuition classes.

The said reporter is always hiding my names in the newspapers and publishing the news of those persons who are giving some favour and avoiding my name even if i do so many good things for the society,and raising corruption issues. Legal action should be taken against the persons involved in committing the crime. Find below the attachments of the news published on 24 May 2015 in the Hindustan.

Arti Sinha
Rajbari, Mihijam
Dist-Jamtara
Jharkhand-815354
Mob- 8092661244
mail- artisinha1384@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप की मालकिन शोभना भरतिया को हाईकोर्ट में तगड़ा झटका

: प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन की एचटी के साथियों को बधाई : हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड से 272 कर्मचारियों निकाले जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली आदलत के निर्णय को बहाल रखते हुए उसमें किसी भी तरह से दखल देने से इंकार कर दिया है। 14 तारीख को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने कर्मचारियों के हटाने के प्रबंधन के फैसले को अनुचित ठहारते हुए हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड और हिन्दुस्तान टाइम्स मीडिया लिमिटेड को दो अलग –अलग कंपनी मानने से भी इंकार कर दिया है क्योंकि दोनों की मालकिन एक ही है।

इस फैसले का मतलब यह हुआ कि अलग-अलग कंपनी बनाकर मजीठिया से बचने का गोरखधंधा करने वाले मालिकों की चाल पस्त हो जाएगी। इस फैसले से यह भी उम्मीद जगी है कि संघर्ष हमारा भले ही लंबा हो जीत पत्रकारों यानि सच की ही हेागी। झूठों का मुंह सुप्रीम कोर्ट में भी जरूर काला हेागा।  संघर्षरत हिंदुस्तान टाइम्स के साथियों को जीत के लिए प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन (PMJA) के प्रदेश अध्यक्ष महेश दीक्षित ने बधाई दी है।

अशरफ अली
प्रवक्ता एवं महामंत्री
PMJA


संबंधित पोस्ट…

DUJ Salutes High Court Judgment As Jolt to HT Management (पढ़ें पूरा फैसला)

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

DUJ Salutes High Court Judgment As Jolt to HT Management (पढ़ें पूरा फैसला)

The Delhi Union of Journalists has broadly welcomed  as ‘somewhat belated but historic’ Hindustan Times judgment in the Delhi High Court. It has saluted the workers of Hindustan Times who are fighting the struggle in the court and outside despite various pressures. It has taken note of the fact that over 12 workers of the Hindustan Times group have unfortunately lost their lives in this long struggle for their dues.

The judgment we feel is a jolt to the management and others seeking to browbeat the workers through a variety of strategies including the use of a battery of lawyers known for their espousal of management cases. It hopes that justice to the workers will not be delayed. Link to the judgment is given below: HC Order HT Media

Press Release

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतर आये हैं

रमन सिंह : हिन्दुस्तान में साइन कराने का सिलसिला शुरू… अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतार आये है. इसी का नतीजा है कि इन दिनों हिन्दुस्तान अखबार में कर्मचारियों से दूसरे विभाग में तबादले के कागज पर साइन कराने का दौर शुरू हो गया है. दिल्ली में तो खुद शशि शेखर जी साइन करा रहे हैं. साइन नहीँ करने वालों को निकालने की धमकी भी दी जा रही है.  मजीठिया से घबराया हिन्दुस्तान फिलहाल जिस कागज पर साइन करा रहा है उसमें भी कई फर्जीवाड़ा है. इसलिए नीचे के फोटो को आप ध्यान से पढ़िए. दो फोटो हैं, दोनों को ध्यान से देखिए. कई फर्जीवाड़े समझ में आएंगे. 

दोनों फोटो को आप अगर ध्यान से देखेंगे तो उसमें शशि शेखर का हस्ताक्षर अलग अलग है. अब आप पता लगाइये कि कौन सही है. दूसरा फर्जीवाड़ा ये है कि लैटर 29 मई 2015 को जारी हुआ है और लोगोँ से साइन सितम्बर में कराया जा रहा है. तीसरा फर्जीवाड़ा- जिस कागज पर साइन करा कर कर्मचारियों को हिन्दुस्तान अखबार से हटा कर इंटरनेट डिवीज़न में डाला जा रहा है उसका वितीय वर्ष 2014-15 है जबकि कागज 29 मई 2015 को जारी हुआ है.

फेसबुक पर सक्रिय किन्हीं रमन सिंह के वॉल से.

वो कौन सी दो तस्वीरें हैं जिनको ध्यान से देखने पर कई किस्म का फर्जीवाड़ा नजर आता है. उन दोनों तस्वीरों को देखने के लिए नीचे लिख कर आ रहे 2 या Next पर क्लिक कर दें>>

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिंदुस्तान अख़बार में आज सुबह से ही जबरन दस्तखत कराने की गहमागहमी चल रही है

मजीठिया डाल-डाल, अख़बार मालिक पात-पात। एक तरफ़ सुनाई दे रहा है कि इसी 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट पत्रकारों के पक्ष में मजीठिया वेतन आयोग लागू करने लिए दो-टूक फ़ैसला दे सकता है, तो दूसरी ओर अख़बार मालिकान एक बार फिर से इसकी तोड़ निकालने की जुगत में लग गए हैं। असल में अदालत ने राज्य सरकारों से 15 सितंबर तक रिपोर्ट माँगा है कि मजीठिया लागू करने के विषय में अख़बारों की स्थिति कहाँ तक पहुँची है।

इसी के मद्देनज़र अब अख़बार मालिक अपने कर्मचारियों से एक रजिस्टर पर दस्तख़त करवा रहे हैं, जिसे ही इस तरह की चिट्ठी के साथ सरकार को सौंप दिया जाएगा कि उनके कर्मचारियों को पर्याप्त वेतन या सुख-सुविधाएँ मिल रही हैं, सो उन्हें मजीठिया वेतनमान की ज़रूरत नहीं है।  हिंदुस्तान अख़बार में आज सुबह से ही जबरन दस्तख़त कराने की गहमागहमी चल रही है। किसी कर्मचारी को न तो बताया जा रहा है कि किसलिए दस्तख़त लिए जा रहे हैं और न तो उन्हें कोई चिट्ठी वग़ैरह ही दिखाई जा रही है। सिर्फ़ सामने एक रजिस्टर रख दिया गया है, जिस पर लोग एक-एक कर दस्तख़त कर दे रहे हैं बस। ज़्यादातर को बिलकुल गुमान नहीं है कि माज़रा क्या है। असल मामले की जानकारी तो अंदरूनी सूत्र दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस रजिस्टर के साथ ही पत्र नत्थी करके सरकार को सौंपा जाएगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मूल खबर:

हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स में हाहाकार, वेज बोर्ड नहीं चाहिए वाले फार्म पर प्रबंधन जबरन करा रहा हस्ताक्षर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स में हाहाकार, वेज बोर्ड नहीं चाहिए वाले फार्म पर प्रबंधन जबरन करा रहा हस्ताक्षर

इस वक्त हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में हाहाकार मचा हुआ है. नोएडा और दिल्ली से आ रही खबरों के मुताबिक दोनों अखबारों के कर्मियों से एक फार्म पर जबरन साइन कराया जा रहा है जिस पर लिखा हुआ है कि हमें मजीठिया वेज बोर्ड से अधिक वेतन मिलता है इसलिए हम मजीठिया वेज बोर्ड के लाभ नहीं लेना चाहते. सूत्रों के मुताबिक जो लोग फार्म पर साइन करने से मना कर रहे हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है.

जानकारी के अनुसार हिन्दुस्तान हिंदी के नोएडा आफिस में एच.आर. की ओर से सभी लोगों से उस रजिस्टर पर जबरन  साइन करवाए जा रहे हैं जिस पर उन्होंने लिखा है कि हमें मजीठिया बेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं चाहिए और हम सब अभी मिल रही तनख्वाह से संतुष्ट हैं. इस तरह साइन कराया जाना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि अमानवीय भी है. इसी तरह Hindustan Times Delhi के employees को भी sign करने के लिए फोर्स किया जा रहा है. भड़ास के पास आई एक सूचना यूं है: ”As I aware just a few minutes ago that the management of HT is forcing  his employees to sign a paper on which a matter is written means that The Employees of HT is satisfy with their salary and they do not want Wage Board (Majithiya). If any employee will refuse to sign …he has to leave his job. In this move a team of three person is working … 1. HR Head–Mr. Gautam 2. Chief Editor–Mr. Shashi Shekhar 3. Sr. Resident Editor—Mr. Sudhanshu Srivastava. Pls scroll this news on your portal asap so that no one can do injustice with the employees of HT and other media organizations.”

इसे भी पढ़ें:

हिंदुस्तान अख़बार में आज सुबह से ही जबरन दस्तखत कराने की गहमागहमी चल रही है

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: