Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

इटारसी रेल अग्निकाण्ड : जरा सी चूक, हजारों करोड़ स्वाहा

रेल्वे सेफ्टी महकमा और जबलपुर जोन कार्यालय के बीच तालमेल की कमी के चलते लगभग उम्र पूरी कर चुके जले आरआरआई सिस्टम की जगह लेने पहले से तैयार नए आपग्रेडेड सिस्टम को ट्रायल की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। अब तक 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। केवल पहले 14 दिनों में 600 से ज्यादा पैसेन्जर ट्रेन कैंसल हो चुकी हैं और 350 से ज्यादा के रूट डायवर्ट कर दिए गए हैं। रेल परिचालन को सामान्य करने में 35 दिन लगेंगे और इसकी समय सीमा 22 जुलाई तय की गई है।

रेल्वे सेफ्टी महकमा और जबलपुर जोन कार्यालय के बीच तालमेल की कमी के चलते लगभग उम्र पूरी कर चुके जले आरआरआई सिस्टम की जगह लेने पहले से तैयार नए आपग्रेडेड सिस्टम को ट्रायल की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। अब तक 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। केवल पहले 14 दिनों में 600 से ज्यादा पैसेन्जर ट्रेन कैंसल हो चुकी हैं और 350 से ज्यादा के रूट डायवर्ट कर दिए गए हैं। रेल परिचालन को सामान्य करने में 35 दिन लगेंगे और इसकी समय सीमा 22 जुलाई तय की गई है।

इटारसी रेल हादसे को पखवाड़ा होने को आ रहा है लेकिन रेलों का परिचालन पटरी पर आता नहीं दिख रहा। देश के बड़े स्टेशन और जंक्शन में शुमार इटारसी में 17 जून की तड़के रुट रिले इण्टरलॉकिंग सिस्टम जो रेलों के परिचालन का मस्तिष्क होता है, में आग लग जाने से पूरे देश की रेल यातायात व्यवस्था कुछ इस तरह से चरमराई कि पखवाडा़ होने को है,  सैकड़ों गाड़ियां बेपटरी हैं। रेल्वे को अब तक 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। केवल पहले 14 दिनों में 600 से ज्यादा पैसेन्जर ट्रेन कैंसिल हो चुकी हैं और 350 से ज्यादा के रूट डायवर्ट कर दिए गए हैं। सैकड़ों मालगाड़ियां भी अटकी पड़ी हैं। हालत इस कदर बदतर हो गई कि कई स्टेशनों पर तो टिकट रिफंड के भी पैसे खत्म हो गए हैं। ये सिलसिला कब तक जारी रहेगा, इसका जवाब खुद रेल्वे के पास नहीं है। 

गर्मियों में वैसे भी भारी भीड़ रहती है साथ ही शादियों का मौका भी था और अब स्कूल खुल गए हैं तो छुट्टियां बिताकर लौटने वालों को जबरदस्त और अकल्पनीय दिक्कतें हो रही हैं। पूरा देश इस त्रासदी को भोग रहा है। इटारसी से होकर हर कोने के लिए ट्रेन हैं, जो सबकी सब प्रभावित हैं। महत्वपूर्ण जंक्शन होने के कारण हर ओर आने-जाने वालों को खासी दिक्कतें हो रही हैं। इतना ही नहीं, जो ट्रेन किसी कदर मैन्युअली चलाई  भी जा रही हैं तो वो घिसट-घिसट कर चल रही हैं। 

शुरू में लगा कि यह एक आपदा है लेकिन जब बातें खुलने लगीं तो मामला अलग रंग लेता दिखा और कई चीजें सामने आईं। यह भी बात सामने आयी कि रेल्वे सेफ्टी महकमा और जबलपुर जोन कार्यालय के बीच तालमेल की कमी के चलते लगभग उम्र पूरी कर चुके जले आरआरआई सिस्टम की जगह लेने पहले से तैयार नए आपग्रेडेड सिस्टम को ट्रायल की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। ऐसा सच है तो हादसे की नौबत ही नहीं आती। कुछ छोटी छोटी बेहद चौंकाने वाली बातें भी सामने आई। जैसे जले आरआरआई सिस्टम केन्द्र में बैटरियों से एसिड रिस रहा था जो फर्श पर फैलता था और गर्मी पैदा करता था, तारों की कोटिंग को भी खराब करता था। पॉवर सप्लाई के लिए सिस्टम को भेजी जाने वाली लो वोल्टेज सप्लाई; जिनमें आग की संभावना कम होती है और 220 वोल्ट की सप्लाई के फैलाए गए तार एक ही जगह से साथ साथ गए थे जिससे बिजली के पुराने हो चुके तार गर्म हो जाते थे और बाद में इन्हीं में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। 

ज्यादातर एयरकंडीशनर या तो बंद थे या खराब थे जो चल रहे थे वो भी पर्याप्त कूलिंग नहीं करते थे। सुरक्षा में सबसी बड़ी चूक इस लिहाज से भी कही जाएगी कि जिस सिस्टम पर सैकड़ों गाड़ियों के परिचालन की जिम्मेदारी है और जो हजारों बारीक तारों के जंजाल में गुथा हुआ है, वहां पर स्मोक स्कैनर जैसा जरूरी उपकरण नहीं था। 

आग लगने के बाद जैसा होता है विभागों की रस्साकशी और आरोप प्रत्यारोपों का भी दौर चला। भारतीय रेल्वे के इतिहास की अब तक की इस सबसे बड़ी घटना ने तकनीक से उन्नत इस दौर में भी जहां जानबूझकर बरती गई लापरवाही और मानवीय चूक जो भी होए उजागर किया है वहीं सिस्टम की खामियों को बेपर्दा किया है। इस अग्निकाण्ड के फौरन बाद रेल्वे के डीआरएम ने कहा था कि दूसरा अपग्रेडेड सिस्टम तैयार है जो 10 दिनों में चालू हो जाएगा। लेकिन दावा कोरा था, कोरा ही निकला। बाद में दिल्ली में इस बारे में रेल्वे बोर्ड सदस्य, यातायात अजय शुक्ला ने कहा – उत्तर-दक्षिणए-पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाले देश की सबसे बड़े और महत्वपूर्ण जंक्शन पर यह हादसा रेल्वे के लिए विनाशकारी है और इससे रेल परिचालन 100 साल पीछे की स्थिति में पहुंच गया है। रेल्वे के इतिहास की अभूतपूर्व आपदा है। रेल परिचालन को सामान्य करने में 35 दिन लगेंगे और इसकी समय सीमा 22 जुलाई तय की गई है। 

वजह कुछ भी हो लेकिन इतना तो है कि जब सिस्टम की उम्र पूरी हो चुकी थी और सिस्टम कक्ष की हालत भी खस्ता थी,  ऐसे में रेल परिचालन और सुरक्षा की दृष्टि से इस बेहद संवेदनशील मामले को सबसे पहली प्राथमिकता के तौर पर लिया जाना था। इस अग्निकाण्ड के बाद रेल मंत्रालय भी चौकन्ना हुआ जबलुपर जोन के महाप्रबंधक को जहां दिल्ली तलब किया गया, वहीं रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने देश भर के सभी बड़े आरआरआई केन्द्रों के सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए। पूरे देश के 17 रेल जोन में करीब 350 ऐसे केन्द्र हैं। निश्चित रूप से यह एक एहतियाती कदम है, पर सवाल फिर वही कि क्या यह इटारसी रेल अग्नि काण्ड लापरवाही है, मानवीय चूक है या सिस्टम का खामियाजा। इसकी जिम्मेदारी कब तक तय होगी और देश को हजारों करोड़ की चपत लगाने वाली जरा सी असावधानी से कारित बड़े हादसे क्या भविष्य में भी नहीं होंगे, कौन गारण्टी देगा?

लेखक ऋतुपर्ण दवे से संपर्क : 8989446288, [email protected]

 

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन