फोकस न्यूज़ नेशनल पर पहचान का संकट

लॉन्चिंग के बाद से ही जिंदल ग्रुप का फोकस न्यूज़ चैनल पहचान के संकट से गुज़र रहा है। चैनल पर भारी-भरकम खर्च और डिस्ट्रीब्यूशन पर पानी की तरह पैसा बहाए जाने के बाद भी ये चैनल टीआरपी में अपनी जगह नहीं बना पाया है। इस ग्रुप का एक चैनल फोकस हरियाणा जबरन तालाबंदी के चलते पहले ही विवादों में है। अब फोकस नेशनल पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। संजीव श्रीवास्तव के  नेतृत्व में लांच हुआ ये चैनल पूरी तरह से घाटे में चल रहा है। चैनल के कार्यक्रमों के स्तरीय ना होने की वजह से चैनल टीआरपी में कहीं नहीं है। जिसके चलते विज्ञापनों का भी अभाव है। चैनल पर हर ब्रेक में जिंदल समूह का अपना निजी विज्ञापन ही चलता है।

कभी ज़ी न्यूज़ से मुकाबला करने की बात कहने वाला ये चैनल मार्केटिंग और ब्रांडिंग के क्षेत्र में भी बुरी तरह पिट गया है। केबल टीवी की तर्ज पर प्रसारित हो रहे स्तरहीन कार्यक्रमों ने चैनल को तमाम संसाधनों के बावजूद बी और सी कैटगरी की पंक्ति में ला खड़ा किया है। ग्राफिक्स में ये चैनल पूरी तरह बीबीसी की नक़ल करते नज़र आता है। लेकिन कंटेंट के मामले में केबल टीवी की तर्ज पर कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं। अभी तक चैनल में एक भी ऐसा कार्यक्रम प्रसारित नहीं हुआ, जो चैनल को पहचान दिला सके। ऐसे में ज़ी या आजतक से मुकाबला संभव नहीं।

इन सबके पीछे कारण ये बताया जा रहा है कि चैनल में काम करने का माहौल नहीं है। चैनल में चर्चा है कि जिनपर ज़िम्मेदारी है वो अधिकारी अपना अधिकाँश समय  चाय की दुकानों या परिसर के उद्यानों में व्यतीत करते देखे जा सकते हैं। चैनल की प्रोग्रामिंग में मौलिकता का अभाव है। दूसरे चैनलों को कॉपी किया जा रहा है। ख़बरें भी कॉपी पेस्ट वाले अंदाज़ में परोसी जा रही हैं। पॅकेज स्तरीय नहीं होने के बावजूद दिन भर रिपीट होते हैं। न्यूज़ अपडेट, ब्रेकिंग न्यूज़, नई ख़बरें, अच्छे पॅकेज और चैनल पर बड़े चेहरों का अभाव दिखाई देता है। स्क्रिप्टिंग में गलतियों की भरमार होती है। ऐसे में क्या ये चैनल लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा, या फिर फोकस हरियाणा की तर्ज पर बंद कर दिया जाएगा,  इस बात में संदेह है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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Comments on “फोकस न्यूज़ नेशनल पर पहचान का संकट

  • Focus News is well known for the accumulation of the worst, rejected and moreover the inhuman kind of people .politics is here in air, Mr BBC lives like as if he is the superior to all TV Journalists in India. See his worst anchoring pronouncing KIYA as KARA.Fumbles like Ass,.He himself is a joke on the name of TV journalist. His so called favorite Anchor some Rizvi in his Anchoring has no depth at all.Most of the Anchors seems to have no idea about presentation. They have no command over the live anchoring. Can’t put even a single good questions. Many times commits blunders. I dont know how and why Mr. Jindal ihas been tolerating these nonsense guys for long time.

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  • चैनल की हालत तो अपने आप ही ख़राब होनी थी क्योकि एक ही रिपोर्टर अगर फोकस के साथ और अन्य चैनलों में काम करेगा तो कहा से exclusive खबरे देगा ये गंभीर और विचारणीय बात है पर आज कल भेड़ चाल है हर किसी को रिपोर्टर कम चापलूस ज्यादा चाहिए तो तभी ऐसा हाल होता है चैनलों का यही नहीं जब कोई नाम चीन चैनल कोई खबर प्रमुखता से चलता है तो अपने रिपोर्टर से मांगते है जब रिपोर्टर कहता है तो उसकी बात हलके में ले कर खबर को टाल देते है पर ये नहीं समझते की नक़ल के लिए भी अकल चाहिए

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