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सियासत

क्या हाईकोर्ट में गोपनीय नोट पर आदेश पारित किये जाते हैं?

कपिल सिब्बल ने लगाए गंभीर आरोप, 12 से 20 के पैराग्राफ कट पेस्ट… क्या दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस गौड़ को सरकार द्वारा गुपचुप दिए गए नोट के आधार पर उन्होंने कट पेस्ट करके पूर्व मंत्री और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम की न केवल अग्रिम ज़मानत की याचिका खारिज की बल्कि मेरिट पर भी फैसला सुना दिया। अग्रिम ज़मानत की याचिका पर मेरिट से फैसला देकर जस्टिस गौड़ ने प्रोफेसनल मिसकंडक्ट किया है। आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने गंभीर आरोप भी लगाए। सिब्बल ने कहा कि बहस पूरी होने के बाद सॉलिसिटर जनरल ने हाईकोर्ट के जज को एक नोट दिया, हमें उस नोट पर जवाब देने का भी मौका नहीं दिया गया। कपिल सिब्बल ने कहा कि समय पर उच्चतम न्यायालय का रूख करने के बावजूद जिस तरह हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की याचिका नहीं सुनी गई, यह उनके मूलभूत अधिकारों का हनन है।

सिब्बल ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय की एक सदस्यीय पीठ द्वारा विभिन्न संस्थाओं के बीच कथित मनी लॉन्ड्रिंग सौदों के बारे में फैसले के 12 से 20 के पैराग्राफ में की गई टिप्पणियों को मौखिक सुनवाई के बाद मामले में उत्तरदाताओं द्वारा प्रस्तुत आर्ग्यूमेंट नोट से “कॉपी पेस्ट” किया गया था। सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम और उनके अधिवक्ताओं के पास नोट की सामग्री की कोई सूचना नहीं थी। सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम की दलील सुने बिना उन्हें जमानत से इनकार करना, जज की पक्षपाती मानसिकता को दर्शाता है। इस पर उच्चतम न्यायालय में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कपिल सिब्बल को बीच में टोकते हुए कहा कि झूठी बयानबाजी मत करिए, मैंने बहस पूरी होने के बाद नोट नहीं दिया था। सिब्बल ने आरोप लगाया कि जस्टिस गौड़ के फैसले में कई चीजें शब्दश: हैं।अल्पविराम, पूर्ण विराम, सब कुछ कॉपी है। इसलिए वह नोट चिदंबरम की जमानत खारिज करने का आधार बन गया।

डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी ने यह कहते हुए सिब्बल की दलीलों को आगे बढ़ाया कि उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीशजस्टिस गौड़ मामले में पक्षपाती थे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट जज ने इस मामले में जमानत से इनकार करने के लिए एयरसेल मैक्सिस के एक असंबंधित मामले का हवाला दिया है। इसमें मुझे अंतरिम संरक्षण प्राप्त है, लेकिन यह संबंधित मामला नहीं है। अत्यंत सम्मान के साथ, मैं कहना चाहता हूं कि यह ज़मानत के लिए इंकार करने के लिए यह न्यायाधीश की मानसिकता को दर्शाता है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि चिदंबरम अब गिरफ्तार हो चुके हैं, ऐसे में इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है। इस पर सिब्बल ने कहा कि हमने गिरफ्तारी से पहले याचिका दी थी इसलिए इस मामले में राहत मिलनी चाहिए। सिब्बल ने ईडी की गिरफ्तारी से राहत देने की मांग भी की।कपिल सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम घर गए, वह पूरी रात नहीं सोए थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सिब्बल ने आर्टिकल 21 का हवाला देते हुए कहा कि वह सिर्फ इतना चाहते थे कि उन्हें सुना जाए। सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है, अब उनकी बात नहीं सुनी जाएगी। हमने समय पर उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, आर्टिकल 21 के तहत मिले अधिकारों को कम नहीं किया जा सकता है।

उच्चतम न्यायालय के जस्टिस भानुमति और ए एस बोपन्ना की सुपीठ ने शुक्रवार को आईएनएक्स मीडिया घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तारी से 26 अगस्त तक के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी और चिदंबरम को राहत देते हुए ईडी मामले में सोमवार तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।

पीठ ने कहा कि चिदंबरम की गिरफ्तारी और ईडी मामले की याचिका पर सोमवार को सुनवाई की जाएगी। पीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि सीबीआई अदालत ने गुरुवार को चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया था। साथ ही, पीठ ने इस तथ्य पर विचार किया कि चिदंबरम को पहले उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम संरक्षण दिया गया था। पीठ द्वारा आदेश देने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत को पढ़ने के लिए कुछ दस्तावेज देना चाहते थे, जिन्हें कि प्रवर्तन निदेशालय ने इकट्ठा किया था। इसका सिब्बल और सिघंवी ने विरोध करते हुए कहा कि ऐसा पहले भी उच्च न्यायालय में हो चुका है। पीठ ने दस्तावेजों को लेने से इनकार करते हुए कहा कि सबकुछ सोमवार को लिया जाएगा।

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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