अखबार ऐसे विज्ञापन नहीं प्रकाशित कर सकते जो अश्लील या महिला विरोधी हों

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि प्रेस की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने की नीति के अनुकरण में भारत सरकार प्रेस की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करती है, फिर भी स्वनियमन के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए भारतीय प्रेस परिषद की स्थापना की गई है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सूचना एवं प्रसारण मांत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘एक वैधानिक स्वायत्त निकाय के रूप में भारतीय प्रेस परिषद को प्रेस परिषद अधिनियम 1978 के अधीन स्थापित किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य देश में समाचारपत्रों एवं समाचार एजेंसी के मानकों को सुधारना एवं प्रेस के स्वनियमन के सिद्धांत को स्थापित करना है।’ मंत्रालय ने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद ने ‘पत्रकारिता के आचरण के मानक’ बना रखे हैं जिनके तहत पत्रकारिता के सिद्धांत एवं नीति शास्त्र आते हैं। अश्लील सामग्री के प्रकाशन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर परिषद द्वारा चेतावनी दी जा सकती है और उनकी भर्त्सना या निंदा की जा सकती है।

परिषद ने अश्लीलता और अशिष्टता से बचाव के संबंध में मानक बनाए है। इसमें कहा गया है कि समाचारपत्र या पत्रकार ऐसी कोई बात प्रकाशित नहीं करेंगे जो अश्लील, अशिष्ट अथवा जनता की सुरूचि के प्रतिकूल हो। पत्रकारिता के आचरण मानक में कहा गया है कि समाचारपत्र ऐसे विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेंगे जो अश्लील हो अथवा किसी महिला का ऐसा चित्रण हो जैसे कि वह कोई वाणिज्यिक वस्तु हो। इसमें कहा गया है कि कलाकार अपनी कृतियों में कलात्मक छूट का उपयोग करता है तथापि यह समझना होगा कि कला संबंधी कार्य का उपयोग, परख और सराहना पारखियों द्वारा की जाती है। एक समाचारपत्र के पृष्ठ ऐसी पेंटिंग के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान नहीं हो सकते।

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