भारतीय प्रेस परिषद ने 2018 का पत्रकारिता में उत्कृष्टता एवार्ड घोषित किया, देखें लिस्ट

ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार रूबी सरकार को…

भारतीय प्रेस परिषद ने ‘पत्रकारिता में उत्कृष्टता-2018’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। वरिष्ठ पत्रकार रूबी सरकार को ग्रामीण पत्रकारिता श्रेणी के पुरस्कार के लिए चुना गया है। सुश्री रूबी को महिलाओं के भूमि अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 14 अक्टूबर,2017 को ‘ज़मीन के पट्टे मिले, तो औरतों ने दिखाया जौहर’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के लिए चुना गया है। Continue reading

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प्रेस काउंसिल चेयरमैन ने संपादकों और मीडिया मालिकों के नामांकन खारिज किया

IJU और NUJ के अध्यक्ष तथा 16 अन्य पत्रकारों का भी निरस्त…. चेयरमैन न्यायमूर्ति का ऐतिहासिक निर्णय

नई दिल्ली: एक बड़े ऐतिहासिक निर्णय में भारतीय प्रेस कांउसिल के चेयरमैन न्यायमूर्ति सी. के. प्रसाद ने (15 फरवरी 2018) संपादकों के तीनों मान्य संगठन द्धारा 13वीं कांउसिल हेतु नामित सभी व्यक्तियों को खारिज कर दिया। इनमें प्रकाश दुबें (नागपुर), उत्तमचन्द्र शर्मा (मुजफ्फरनगर) तथा रमेश गुप्त (नई दिल्ली) शामिल है। इसी भांति समाचार पत्र स्वामियों के तीनों संस्थाओं के मनोनयन को भी निरस्त कर दिया है। इनमे एच. एन. कामा तथा कुन्दनलाल व्यास हैं।

श्रमजीवी पत्रकारों के वर्ग में काउंसिल अध्यक्ष ने फैसला किया कि नामित व्यक्ति को समाचारपत्र का पूर्णकालिक अथवा अंशकालिक कर्मी होना कानूनन अनिवार्य है। स्वतंत्र पत्रकार बिल्कुल अमान्य है। अतः इण्डियन जर्नलिस्ट्स यूनियन के अध्यक्ष एस. एन. सिन्हा, एनयूजे के अध्यक्ष रास बिहारी, गीतार्थ पाठक (गुवाहाटी) तथा 15 अन्य निरस्त कर दिए गये है। IFWJ द्धारा विरोध में दर्ज आपत्तियों को स्वीकारा गया है। इसी सूची में डी. अमर हैदराबाद तथा कु. सबीना इन्द्रजीत (दिल्ली) भी सम्मिलित है। भारतीय प्रेस कांउसिल ने 22 फरवरी तक उन्हें अवसर दिया है कि वे सिद्ध की कि वे श्रमजीवी पत्रकार है।

Chairman rejects claims of owners & Editors for 13th Press Council…. Presidents of I.J.U. and NUJ & others told to prove they are working journalists

NEW DELHI:  In a major historic decision, Mr. Justice C.K. Prasad (formerly of the Supreme Court), chairman of the Press Council of India, has on Thursday (15 February 2016) disqualified all the six nominees of the Editors Guild, All-India Newspapers Conference (AINEC) and Hindi Samacharpatra Sammelan for the 13th Press Council. Those found ineligible include Mr. Prakash Dube (Nagpur), Mr. Ramesh Gupta (New Delhi), and Mr. Uttamchand Sharma (Muzaffarnagar), who is now seeking another term for three more years, totaling 18 years so far.

The list of owners, which now stands invalid, includes Mr. H.N. Cama, Mr. Ashok Navratnatan. Mr. L.C. Bharatiya and Kundanlal R. Vyas etc. In the journalist lists, those held ineligible for nomination are Mr. S. N. Sinha (IJU), Mr. Ras Bihari (NUJ), Mr. Geetarth Pathak (Assam), among others. The Chairman noted that IJU’s nominee Mr. D. Aamar is in fact a Sakshi television employee but has claimed to be a Sakshi newspaper staffer. Only print mediapersons are eligible for nomination. Similarly is the name of Ms. Sabina Inderjit who owns and manages a news agency Indian News and Features Agency (INFA) and is not employed by any newspapers.

However, the disputed nominees of the category of Working Journalists other than Editors, have been asked to submit proofs before 22 February that they are employed full-time or part time in newspapers. About nominees of working journalist, the Chairman ruled:  “From a plain reading of the aforesaid provision it is evident that to come within the definition of Working Journalist one has to Fulfill the following requirements:
a) The person’s principal   avocation should  be that of the journalist;
b) Such person should be employed as such i.e. journalist;
c) Such employment has to be either whole-time or part time;
d) The  Whole-time and part-time employment has to be in, or in relation to, one or more newspaper establishments;

The Chairman said:

“According to the assertion of the nominating Associations themselves Mr. Joginder Singh Chawla, Mr. S. N. Sinha, Mr. Ras Bihari, Mr. Geetartha Pathak, Mr. Harish Chand Tiwari, Mr. Jagdish Chandra Verma, Mr. Pradeep Sharma and Mr. Suresh Kumar V. S are freelancer and it is not their claim that they are employed as journalists either whole-time or part-time in, or in relation to, one or more newspaper establishment. Some of these persons claim to be the Working Journalist on the basis of the identity cards issued by the Press Information Bureau. Further some of the freelancers have subsequently filed few ‘clippings’ of their publication in different newspapers to claim nomination under the ‘Working Journalist category’. However, nothing has been placed on record to show that they are employed as journalist, either whole-time or part-time. Further it is not their claim that any such employment is in, or relation to one or more newspaper establishment. This question came up for consideration before the Delhi High Court in the case of Suraj Prakash v/s Union of Indian & Others, dated 15-11-1990, and on review of the relevant provision of the Prees Council Act, held as follows;

“Two conditions must be fulfilled to qualify a person to be a working journalist. First, that he must be a journalist whose principal avocation is that of a journalist. Secondly, that he must be employed as such in, or in relation to, any newspaper establishment (See the Management of Express Newspaper Ltd v. B. Somayajulu and others, AIR 1984 S.C. 279 (7). The Press Council Act provides for nomination of persons who are ‘Working journalist’ as defined under the Act. The rule of the Press Information Bureau may allow any journalist, to be accredited with it but that itself shall not be enough to make him eligible for nomination under Section 5(3) (a) of the Press Council Act. It has to be borne in mind that section 5 (3) (a) of the Press Council Act mandates that the number of Working Journalists other than Editors of newspaper published in Indian language shall be not less than four. The freelancers do not claim to be employed with any newspaper either whole-time or part-time and in the absence of these of it shall not be possible to ascertain the language in which they are to be nominated.”

For all these reasons I am of the opinion that the freelancers not employed as journalists either whole-time or part-time in or in relation to one or more newspaper establishment are ineligible for nomination under the category of Working Journalist other than Editors.

Applying this principle, I hold that freelancers named above are not eligible for nomination under this category.”

Signed: C.K. Prasad
Chairman: Press Council

Vipin Dhuliya, Secretary HQ

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संपादकों ने घरेलू सेवक को प्रेस काउंसिल के लिये चुना, अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रसाद ने जांच बैठाई

नई दिल्ली: नामी गिरामी संपादकों ने एक निजी परिचारक को अपना प्रतिनिधि बनाकर तेरहवीं प्रेस काउंसिल हेतु नामित किया है। मीडिया जगत मे इस अजूबे को प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी. के. प्रसाद ने जांच हेतु रोक लिया है। इन गरिष्ठ एवं वरिष्ठ प्रधान संपादकों में दि ट्रिब्यून के समूह संपादक तथा इण्डिया टुडे के पूर्व संपादक राज चेंगप्पा जो एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष तथा उनके महासचिव एवं भास्कर (नागपुर) के संपादक प्रकाश दुबे भी हैं। इसमें आल इण्डिया न्यूजपेपर्स (AINEC) कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष रमेश गुप्ता तथा हिन्दी समाचार पत्र सम्मेलन के शीतला सिहं (फैजाबाद) भी हैं।

मनोनीत व्यक्ति का नाम है जुनैद अहमद जिसका पत्रकारिता से कभी कोई नाता नहीं रहा। वह संपादक उत्तमचन्द्र शर्मा का निजी सहायक रहा है। शर्मा ने अहमद को बिजनौर से प्रकाशित स्थानीय सांध्य हिन्दी दैनिक “चिंगारी” का मुज़फ्फरनगर में समाचार संपादक बनवाया है। तथ्य यह है कि मुज़फ्फरनगर में न तो चिंगारी का प्रकाशन होता है। न वहां कोई कार्यालय या संस्करण है। जहां कोई भी संपादकीय कर्मी नहीं है, तो वहां समाचार संपादक किस बात का? अटैची ढोने हेतु? उत्तमचन्द शर्मा संपादक हैं मुजफरानगर बुलेटिन के, जिसकी प्रकाशक तथा मालकिन का नाम है श्रीमती लाजवंती उत्तमचन्द्र शर्मा। शर्मा 15 वर्षों से प्रेस कांउसिल के नामित सदस्य रहे हैं। अब फिर तीन वर्षों के लिये चयन के लिये प्रयासरत हैं।

प्रेस कांउसिल की जांच समिति के संयोजक के रोल में शर्मा ने उन संगठनों को मान्यता दे दी है जो न तो विधिवत पंजीकृत है, न बही खाता, न वैध चुनाव। कारीगारी तो उत्तमचन्द शर्मा की रही जो स्वंय जांच समिति के सदस्य बनकर अपने निजी संगठन (हिन्दी समाचार पत्रकार सम्मेलन) की मान्यता खुद अपने वोट से करा दी। लखनऊ के राज्य पंजीकरण मुख्यालय में इस संगठन का नाम रजिस्टर में नही है। प्रेस कांउसिल की वेबसाइट (www.presscouncil.nic.in ) पर अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रसाद ने लिखा है कि एडिटर्स गिल्ड, आल इण्डिया न्यूजपेपर एडिटर्स कान्फ्ररेंस तथा हिंदी समाचार पत्रकार सम्मेलन ने केवल आधी-अधूरी सूची जमा की है। मनोनयन भी पूरी संख्या में नहीं है। इन तीनों संगठनों की संयुक्त सूची में मानिनी चटर्जी सीधा जुनैद अहमद संपादक नही हैं।

न्यायमूर्ति प्रसाद ने लिखा कि इंण्डियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU), नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्र (NUJ), प्रेस एसोसिएशन, नई दिल्ली, और वर्किगं कैमरामैन  एसोसिएशन की संयुक्त सूची में उन लोगों का नाम है जो किसी भी समाचारपत्र में पूर्णकालिक अथवा अंशकालिक रूप् से कार्यरत नहीं हैं। अर्थात् वेतन भोगी नहीं हैं। इनके नाम है: एस. एन. सिन्हा, रास बिहारी, गीतार्थ पाठक, जोगिन्दर सिंह चावला, हरीश चन्द्र तिवारी, प्रदीप शर्मा तथा वी. एस. सुरेश कुमार। IFWJ ने प्रेस कांउसिल अध्यक्ष से इस अवैधता की तहतक जांच कराने और कानूनी कारिवाही करने का अनुरोध किया है।

Editors choose domestic help for Press Council, Chairman holds back nomination

NEW DELHI: Premiere media bodies like the Editors Guild of India, the All-India Newspaper Editors Conference and the Hindi Samachar Patra Sammelan have nominated jointly one Junaid Ahmed, who is a personal attendant of editor Uttamchand Sharma. Junaid Ahmed is described as “News Editor” of a Hindi eveninger (Chingari) of Bijnor at Muzaffarnagar. Press Council chairman Justice C.K. Prasad has held back Junaid’s nomination.A probe is ordered.

The Editors Guild is headed by Mr. Raj Changappa, group editor of the Tribu and formerly of India Today. Prakash Dubey (Nagpur) is his general secretary. The AINEC is led by the Guptas (Ramesh and brother Vishwabandhu). Hindi Samachar Patra Sammelan is led by Shitala Singh (Faizabad) and Uttamchand Sharma, who calls himself Editor of the Muzaffarnagar Bulletin, whose owner and publisher is Ms. Lajwanti Uttamchand Sharma. He is in the Press Council for 15 long years and is once again seeking a three-year term. He was the convener of the disputed PCI scrutiny committee in which claimant associations had themselves approved by vote their own nominees. Prosecutor in the role of a judge.

In the website of the Press Council (www.presscouncil.nic.in ) the Chairman, Mr. Justice C.K. Prasad says: “On perusal of the record I find that the panels, submitted by Editors Guild of India, Hindi Samachar Patra Sammelen and All India Newspaper Editors Conference for the nomination of Editors, among the working journalist categories, do not contain twice the number of members to be nominated under the said category. Further Ms. Manini Chaterjee and Mr. Juned Ahamad do not claim to be the Editors.”

The panels of names, filed by the Indian Journalists Union, National Union of Journalists (India), Press Association and Working News Cameramen’s Association, for nomination under the category of Working Journalists other than Editors, contain the names of Shri Joginder Singh Chawla, Shri S N Sinha, Shri Ras Bihari, Shri Geetartha Pathak, Shri Harish Chand Tiwari, Shri Jagdish Chandra Verma, Shri Pradeep Sharma and Shri V.S. Suresh Kumar They do not claim to be employed as journalists, either whole time or part-time in or in relation to one or more newspaper establishments. The aforesaid in infirmities shall have bearing  on the nominations.

Sent By

(Mohan Kumar)

Secretary: IFWJ

(Patna, Bihar)

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प्रेस क्लब आफ इंडिया प्रबंधन ने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय की सदस्यता सस्पेंड की

प्रेस क्लब आफ इंडिया का चुनाव बस दो दिन बाद है यानि पच्चीस नवंबर को. उसके ठीक पहले एक बड़ी खबर आ रही है. प्रेस क्लब आफ इंडिया के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय की सदस्यता सस्पेंड कर दी है. साथ ही उन्हें वोट न डालने देने का भी फैसला ले लिया है. इससे आहत जाने-माने पत्रकार और अपनी बेबाक बयानी के लिए मशहूर राम बहादुर राय ने घोषणा की है कि वह चुनाव के दिन प्रेस क्लब आफ इंडिया जाएंगे और अपना ड्यूज क्लीयर करने के बाद वोट देने की कोशिश करेंगे. अगर वोट देने से रोका गया तो वो विरोध स्वरूप वहीं पर खड़े रहेंगे.

मालूम हो कि प्रेस क्लब आफ इंडिया के उन्हीं सदस्यों को वोट डालने दिया जाता है तो अपना सालाना फीस जमा कर देते हैं. पिछले तीन वर्षों से ऐसा संयोग रहा कि राम बहादुर राय को चुनाव के दिन दिल्ली से बाहर रहना पड़ा. इस बार वह चुनाव के दिन दिल्ली में हैं. उन्होंने अपने एक करीबी को प्रेस क्लब आफ इंडिया भेजकर ड्यूज वगैरह के बारे में पता करवाया ताकि वोट डालने के दिन कोई दिक्कत न आए. तब पता चला कि राम बहादुर राय समेत सैकड़ों पत्रकारों की सदस्यता निलंबित कर दी गई है.

अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए चर्चित वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय का आरोप है कि प्रेस क्लब प्रबंधन की तरफ से उनसे कहा जा रहा है कि वो वोट डालने न आएं क्योंकि उनका ड्यूज तीन साल तक जमा न होने और उस पर पेनाल्टी लगे होने के कारण सदस्यता निलंबित कर वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है. राम बहादुर राय का कहना है कि प्रेस क्लब प्रबंधन तीन साल का सदस्यता शुल्क ले ले और पेनाल्टी माफ कर दे. इसके बाद स्वत: वोट देने का रास्ता खुल जाएगा लेकिन प्रेस क्लब प्रबंधन इस पर राजी नहीं है. ऐसे में वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने दुखी और आहत मन से विरोध करने का फैसला कर लिया है. श्री राय चुनाव के दिन वोट देने जाएंगे और ड्यूज चुकाने के बाद भी वोट न डालने देने पर विरोध स्वरूप वहीं खड़े रहकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे.

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह, जो प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में सेन-फरीदी-गांधी पैनल की तरफ से मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए प्रत्याशी हैं, इस प्रकरण पर कहते हैं :

अगर हमारा प्रेस क्लब आफ इंडिया का प्रबंधन अपने बुजुर्ग पत्रकारों, अपने अग्रजों, अपने वरिष्ठों, अपने माननीयों का सम्मान नहीं कर सकता, इनके प्रति संवेदनशील नहीं हो सकता तो इस प्रेस क्लब के क्या मायने हैं. राम बहादुर राय जैसे जाने-माने और वरिष्ठ पत्रकार को हर हाल में वोट का अधिकार न सिर्फ दिया जाना चाहिए बल्कि सदस्यता निलंबन जैसी हरकत के लिए प्रेस क्लब आफ इंडिया के वर्तमान प्रबंधकों को माफी मांगनी चाहिए. वरिष्ठों से जुड़े मामलों में प्रेस क्लब को संवेदनशील होना चाहिए और स्वयं पहल करके किसी भी तकनीकी दिक्कत को दूर कर चीजों को आसान बनाए रखना चाहिए. नौकरशाही और तानाशाही वाली मानसिकता से काम करने वाला प्रबंधन अक्सर अहंकार से भरा होता है और वह अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता. यही अहंकार एक दिन विनाश का कारण बनता है. राय साहब जैसे बड़े पत्रकार के साथ प्रेस क्लब प्रबंधन के इस अपमान जनक हरकत को कोई भी पत्रकार उचित नहीं मानेगा और इसका बदला जरूर वोटिंग के दिन बैलट पेपर के जरिए वर्तमान प्रबंधकों / पदाधिकारियों को सबक सिखा कर लेगा.

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प्रेस क्लब का विवादित सत्ताधारी पैनल जीतने के लिए हर किस्म के हथकंडे आजमाने को मजबूर

प्रेस क्लब आफ इंडिया में पच्चीस नवंबर को होने वाले चुनाव में आठवें बरस भी जीतने के लिए सत्ताधारी पैनल के लोग लगे हुए हैं और इन लोगों ने अब हर किस्म के हथकंडे आजमाना शुरू कर दिया है. सात साल पहले पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए जिस किस्म की बड़ी गोलबंदी हुई थी, वैसी ही गोलबंदी इस दफे दिख रही है. विवादित और कदाचारी सत्ताधारी पैनल वालों को पत्रकार इस बार विराम देने के मूड में हैं.

बादशाह-शाहिद-जतिन पैनल की तरफ चल रही हवा और इस पैनल की जीत पक्की देखकर अब सत्ताधारी पैनल किसिम किसिम के दुष्प्रचार करने में जुट गया है. बाकायदे मैसेज भेजकर प्रेस क्लब सदस्यों को बरगलाया जा रहा है. कभी प्रेस क्लब सदस्यों को उनकी सदस्यता खत्म कर दिए जाने का भय दिखा कर बादशाह-शाहिद-जतिन पैनल को वोट न देने के लिए कहा जा रहा है तो कभी फर्जी कागजातों और झूठे तथ्यों के आधार पर बादशाह-शाहिद-जतिन पैनल के वरिष्ठ सदस्य पर अनर्गल आरोप सोशल मीडिया में दुष्प्रचारित किया जा रहा है.

यह सब दिखाता है कि सत्ताधारी पैनल के पास क्लब के सदस्यों को बताने-दिखाने के लिए कुछ नहीं है. वह भेड़िया आया भेड़िया आया वाली कहावत के जरिए खुद के शरण में रहने का दबाव क्लब के सदस्यों पर डाल रहा है. ऐसी नकारात्मक किस्म की राजनीति को पत्रकार खूब समझते हैं और वे चाहते हैं कि प्रेस क्लब को आधुनिक युवाओं के हाथों में सौंपा जाए जो इसे क्रिएशन और पाजिटिविटी का अड्डा बना सकें. खासकर प्रेस क्लब के सभी सदस्यों को हेल्थ इंश्योरेंस कराने का जो वादा भड़ास के संपादक यशवंत ने किया है, वह क्लब के सदस्यों के बीच चर्चा का विषय है. प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में मैनेजिंग कमेटी सदस्य पद के प्रत्याशी यशवंत का कहना है कि अगर बादशाह-शाहिद-जतिन पैनल जीकर प्रेस क्लब का संचालन अपने हाथ में लेता है तो सबसे पहले क्लब के सभी सदस्यों और उनके परिजनों का मामूली रेट पर हेल्थ बीमा कराया जाएगा ताकि उनके मुश्किल के दिनों में किसी के आगे किसी को हाथ न फैलाना पड़ा.

इसके अलावा प्रेस क्लब में एक हेल्प डेस्क बनाई जाएगी जो आम पत्रकारों की समस्याओं को टैकल करेगी. छंटनी, वेजबोर्ड, लीगल हेल्प समेत ढेरों मसलों पर प्रेस क्लब संपूर्ण समर्थन देगा. प्रेस क्लब आगे से सिर्फ किसी मीडिया मालिक के दुख में ही नहीं दुखी होगा बल्कि आम पत्रकारों की चिंता-दुख को महसूस करते हुए उसके त्वरित निदान के लिए कार्य करेगा. यशवंत ने प्रेस क्लब के सदस्यों से अपील की कि अबकी लेफ्ट राइट के चक्कर में न पड़ें क्योंकि दोनों ही पैनल में लेफ्ट और राइट दोनों किस्म के लोग हैं. इस बार असल लड़ाई ट्रेडीशनल थिंकिंग बनाम सरोकारी सोच की है. जो लोग सात साल से प्रेस क्लब की सत्ता में हैं और उनके मुंह में जो करप्शन का खून लग चुका है, वे किसी हाल में इसे नहीं छोड़ना चाहते.

ये वही लोग हैं जो कभी पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के जमाने में लोकतंत्र और पारदर्शिता की बातें करके झंडा उठाया करते थे लेकिन जब खुद सत्ता में आए तो लगातार पतित होते रहे. प्रेस क्लब का सदस्य बनाने में पारदर्शिता बिलकुल नहीं है. लाबिंग और चिरौरी के जरिए ही प्रेस क्लब सदस्यता दी जाती है. यह बेहद फूहड़ और अलोकतांत्रिक परिपाटी है जो बंद नहीं की गई. दिल्ली में हजारों जेनुइन जर्नलिस्ट हैं जिन्हें प्रेस क्लब की सदस्यता नहीं दी गई लेकिन ढेरों प्रापर्टी डीलरों, लाबिस्टों और दलालों को सदस्य बना दिया गया. प्रेस क्लब में विकास के नाम पर केवल कुर्सी मेज बदले जाने से लेकर बार-बार बाथरूम तोड़े जाने का काम किया गया.

अब भी पूरे प्रेस क्लब कैंपस में यानि किचन से लेकर कामन हाल तक में चूहे क्राकोच दौड़ते रहते हैं. खाने का स्तर बेहद घटिया हो चुका है. क्लब में अराजकता का आलम दिखता है. जिम के सामान और इसके रूम को तो जैसे डस्टबिन में तब्दील कर दिया गया है. इसके बावजूद इस सत्ताधारी पैनल के लोग अपने राज में खूब विकास किए जाने बात कर सदस्यों को बरगलाते हैं. सच तो ये है कि इनके पास क्लब और इसके सदस्यों की बेहतरी को लेकर कोई आइडिया, विजन, प्लान नहीं है. ये लोग क्लब के सदस्यों में फूट डालकर क्लब को राजनीति का अखाड़ा बनाए रखना चाहते हैं ताकि फूट डालो राज करो वाली अंग्रेजों की नीति के जरिए क्लब की सत्ता हर दम अपने हाथ में रख सकें और दोनों हाथों से क्लब के संसाधन-धन को लूट सकें.   

भड़ास के संपादक और प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में मैनेजिंग कमेटी पद के लिए प्रत्याशी यशवंत का कहना है कि बदलाव फ्रेश वाटर की तरह है. यथास्थिति सड़े पानी की तरह. सत्ताधारी पैनल को नमस्ते करें और प्रेस क्लब की बागडोर बादशाह-शाहिद-जतिन के पैनल को सौंपे.  इस पैनल के सभी प्रत्याशियों और इसके मैनेजिंग कमेटी के सदस्य पद के लिए लड़ रहे उम्मीदवारों को भारी वोटों से जिताएं.

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कौन हैं शाहिद फरीदी, क्यों लड़ रहे प्रेस क्लब चुनाव, देखें ये वीडियो

प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में शाहिद फरीदी सेक्रेट्री जनरल के पद पर चुनाव लड़ रहे हैं. उनके जीवन और करियर से लेकर प्रेस क्लब के तमाम मसलों पर विस्तार से बात की भड़ास के संपादक यशवंत ने. यशवंत भी इस चुनाव में मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए मैदान में हैं. देखें वीडियो… नीचे क्लिक करें:

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प्रेस क्लब आफ इंडिया के नाकारा प्रबंधन से नाराज भड़ास संपादक यशवंत ने चुनाव लड़ने का दिया संकेत

Yashwant Singh : गजब है प्रेस क्लब आफ इंडिया. दूर के ढोल सुहावने वाला मामला इस पर पूरी तरह फिट बैठता है. दिल्ली के रायसीना रोड पर स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया का नाम सुनने पर वैसे तो दिमाग में एक अच्छी-खासी छवि बनती-उभरती है लेकिन अगर आप इसके मेंबर बन गए और साल भर आना-जाना यहां कर दिया तो आपको यह किसी मछली बाजार से कम न लगेगा. हर साल चुनाव होते हैं. प्रेस क्लब को अच्छे से संचालित करने के वास्ते पदाधिकारी चुने जाते हैं लेकिन लगता ही नहीं कि यहां कोई संचालक मंडल भी है या कोई पदाधिकारी भी हैं. दो उदाहरण देते हैं. प्रेस क्लब आफ इंडिया का चुनाव डिक्लेयर हो गया है. इस बाबत कुछ रोज पहले प्रेस क्लब के सूचना पट पर नोटिस चिपका दिया गया. लेकिन यह सूचना मेल पर नहीं भेजी गई. मुझे तो नहीं मिली. अब तक नहीं मिली है.

हर रविवार खाने में नया क्या है, इसकी जानकारी तो भाई लोग भेज देते हैं लेकिन साल भर में एक बार होने वाले चुनाव और इसकी प्रक्रिया को लेकर कोई मेल नहीं जारी किया. क्यों भाई? क्या सारे मेंबर जान जाएंगे तो चुनाव लड़ने वाले ज्यादा हो जाएंगे?

दूसरा प्रकरण आप लोगों को पता ही होगा. प्रेस क्लब आफ इंडिया के मेन गेट पर  मुझ पर हमला हुआ. यह जगह गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे के दायरे में आता है. लेकिन फुटेज गायब है. क्या तो उस दिन सीसीटीवी कैमरा खराब था. क्यों खराब था भाई? और, खराब होने की जानकारी मुझे दसियों दिन बाद तब मौखिक रूप से दी जाती है जब मैं प्रेस क्लब के कार्यालय सचिव जितेंद्र से पूछता हूं. मैंने घटना के फौरन बाद लिखित शिकायत कार्यालय सचिव जितेंद्र को दिया था. उन्होंने तब कहा था कि फुटेज मिल जाएगा. कल देख लेंगे. पर बाद में पता चला कि फुटेज ही गायब है. मैंने जो लिखित कंप्लेन दी, उस पर क्या फैसला हुआ, इसकी कोई जानकारी अब तक नहीं दी गई. बताया गया कि पदाधिकारी लोग बहुत व्यस्त हैं. किसी के पास टाइम नहीं है इस अप्लीकेशन पर विचार करने के लिए. मुझे लगता है कि प्रेस क्लब के गेट पर दिल्ली पुलिस के दो जवान हमेशा तैनात रखे जाने चाहिए और सीसीटीवी कैमरे हर हाल में आन होने चाहिए. ऐसे ही कई और बड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि यह क्लब अराजकता का अड्डा न बनकर एक वाकई देश भर के प्रेस क्लबों का मॉडल प्रेस क्लब बन सके.  

प्रेस क्लब के टेबल्स पर काक्रोच चलते हैं. इससे संबंधित एक वीडियो भी मैंने एक बार पोस्ट किया था. उसका लिंक फिर से नीचे कमेंट बाक्स में डाल रहा हूं. खाने की क्वालिटी दिन ब दिन खराब होती जा रही है. वेटर आधे-आधे घंटे तक अटेंड नहीं करेंगे. वह शक्ल देखते हैं मेंबर की. नया हुआ और अपरिचित सा लगा तो उसे टेकेन एज ग्रांटेड लेते हैं.

मतलब सब कुछ भगवान भरोसे. फिर फायदा क्या है चुनाव कराने का और नए पदाधिकारी बनाए जाने का.

ऐसा लगता है कि यह संस्था भी देश के दूसरे भ्रष्ट संस्थाओं की तरह होने की राह पर है. जो जीत गया, वह गदगद होकर सो गया.. चाहें आग लगे या बिजली गिरे. उनकी तो बल्ले-बल्ले है. अब जो कुछ बात बहस होगी, वह अगले चुनाव के दौरान होगी. चुनाव आ गया है. फिर से लेफ्ट राइट वाली दुंदुभी बजेगी. ध्रुवीकरण होगा. पैनल बनेंगे. क्रांतिकारी और अति-क्रांतिकारी बातें होंगी. मुख्य मुद्दे हवा हो जाएंगे. फर्जी और पाखंडी वैचारिक लबादों को ओढ़े नक्काल फिर चुन लिए जाएंग. इस तरह एक और नाकारा प्रबंध तंत्र को झेलने के लिए प्रेस क्लब के सदस्य अभिशप्त होंगे.

प्रेस क्लब आफ इंडिया की हालत देख और इसके नाकारा प्रबंधन से खुद पीड़ित होने के कारण सोच रहा हूं इस बार मैं भी चुनाव लड़ जाऊं. जीत गया तो इतना हल्ला मचेगा कि चीजें ठीक होंगी या फिर मुझे ही ठीक कर दिया जाएगा, क्लब से निष्कासित कर के. और, अगर हार गया तो सबसे अच्छा. तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे जो मेरा है… टाइप सोचते हुए अपना रास्ता धर लूंगा और गुनगुनाउंगा- ”गुन तो न था कोई भी, अवगुन मेरे भुला देना…”  वैसे, ये डायलाग भी बीच वाला मार सकता हूं, कि कौन कहता है साला मैं जीतने के लिए लड़ा था. मैं तो बहरों नक्कालों के बीच अपनी बात धमाके से कहने के वास्ता परचा दाखिल किया था, आंय….

वैसे आप लोगों की क्या राय है? अंधों की दुनिया में हरियाली के बारे में बतियाने का कोई लाभ है या नहीं? चुनाव लड़ जाएं या रहने दें…?

भड़ास एडिटर यशवंत की एफबी वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com

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प्रेस क्लब आफ इंडिया सिर्फ धनी पत्रकारों के लिए है?

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दैनिक जागरण और टाइम्स आफ इंडिया सहित 51 अखबारों को डीएवीपी ने किया सस्पेंड

पेड न्यूज़ समेत कई शिकायतों को लेकर की बड़ी कार्रवाई…  पेड न्यूज और अन्य कई शिकायतों के मामले में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के आदेश पर डीएवीपी ने देशभर के 51 समाचार पत्रों को दो महीने के लिए सस्पेंड करते हुए विज्ञापन पैनल से बाहर कर दिया है।

इन समाचार पत्रों में टाइम्स ऑफ इंडिया का भुवनेश्वर संस्करण, दैनिक जागरण दिल्ली संस्करण, आज समाज दिल्ली संस्करण और राज एक्सप्रेस समेत कई अखबार शामिल हैं। जो अखबार पहले से ही पैनल में नहीं हैं वे इन दो महीने की अवधि में पैनल में शामिल नहीं किए जाएंगे. देखें 51 अखबारों की पूरी लिस्ट….

 

 

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‘गौ आतंकी’ शीर्षक से कार्यक्रम प्रसारित करने पर इंडिया टुडे ग्रुप को विहिप ने लीगल नोटिस भिजवाया

विश्व हिंदू परिषद ने इंडिया टुडे ग्रुप को एक लीगल नोटिस भिजवाया है. यह नोटिस ‘गौ आतंकी’ नाम से एक कार्यक्रम ‘इंडिया टुडे’ पर प्रसारित करने को लेकर था. लीगल नोटिस में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के जरिए विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल की छवि को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया गया है. लीगल नोटिस की एक कापी सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी भेज दिया गया है.

लीगल नोटिस की एक प्रति भड़ास के पास भी है, जिसे नीचे दिया जा रहा है….

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अखबार ऐसे विज्ञापन नहीं प्रकाशित कर सकते जो अश्लील या महिला विरोधी हों

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि प्रेस की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने की नीति के अनुकरण में भारत सरकार प्रेस की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करती है, फिर भी स्वनियमन के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए भारतीय प्रेस परिषद की स्थापना की गई है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सूचना एवं प्रसारण मांत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘एक वैधानिक स्वायत्त निकाय के रूप में भारतीय प्रेस परिषद को प्रेस परिषद अधिनियम 1978 के अधीन स्थापित किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य देश में समाचारपत्रों एवं समाचार एजेंसी के मानकों को सुधारना एवं प्रेस के स्वनियमन के सिद्धांत को स्थापित करना है।’ मंत्रालय ने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद ने ‘पत्रकारिता के आचरण के मानक’ बना रखे हैं जिनके तहत पत्रकारिता के सिद्धांत एवं नीति शास्त्र आते हैं। अश्लील सामग्री के प्रकाशन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर परिषद द्वारा चेतावनी दी जा सकती है और उनकी भर्त्सना या निंदा की जा सकती है।

परिषद ने अश्लीलता और अशिष्टता से बचाव के संबंध में मानक बनाए है। इसमें कहा गया है कि समाचारपत्र या पत्रकार ऐसी कोई बात प्रकाशित नहीं करेंगे जो अश्लील, अशिष्ट अथवा जनता की सुरूचि के प्रतिकूल हो। पत्रकारिता के आचरण मानक में कहा गया है कि समाचारपत्र ऐसे विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेंगे जो अश्लील हो अथवा किसी महिला का ऐसा चित्रण हो जैसे कि वह कोई वाणिज्यिक वस्तु हो। इसमें कहा गया है कि कलाकार अपनी कृतियों में कलात्मक छूट का उपयोग करता है तथापि यह समझना होगा कि कला संबंधी कार्य का उपयोग, परख और सराहना पारखियों द्वारा की जाती है। एक समाचारपत्र के पृष्ठ ऐसी पेंटिंग के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान नहीं हो सकते।

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पड़ोसी से विवाद में पद का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति को प्रेस कौंसिल का अध्यक्ष बनाना ठीक नहीं

जस्टिस सी के प्रसाद को प्रेस कौंसिल का नया अध्यक्ष बनाया गया है पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने उनकी नियुक्ति पर गहरी आपत्ति जाहिर की है. उन्होंने भारत के राष्ट्रपति को पत्र भेज कर 01 जनवरी 2014 को उनके कृष्णा नगर, पटना स्थित शुभाशीष सेन गुप्ता नामक पड़ोसी के साथ विवाद में अपने पद का खुलेआम दुरुपयोग करने सम्बंधित अपनी शिकायत की प्रति संलग्न किया है.

शिकायत के अनुसार जस्टिस प्रसाद पर अपने परिवार वालों के साथ “जानबूझ कर एक आपराधिक षडयंत्र करने, एक झूठे केस में उन्हें फंसाने के लिए गवाह बनने, उनकी संपत्ति पर गलत कब्जा करने, पडोसी की जमीन पर अतिक्रमण करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. अपने पत्र में डॉ ठाकुर ने कहा है कि पद के दुरुपयोग के इन गंभीर शिकायतों की जांच कराये बिना उन्हें प्रेस कौंसिल अध्यक्ष नियुक्त करना उचित नहीं दिखता है और इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता जान पड़ती है.

संलग्न- मेरे द्वारा राष्ट्रपति को भेजा पत्र और जस्टिस प्रसाद के खिलाफ भेजी पूर्व की शिकायत


मूल खबर…

काटजू की जगह पूर्व न्यायाधीश सीके प्रसाद होंगे पीसीआई प्रमुख


To,                                                                                                 The Hon’ble President of India

Government of India,

New Delhi

Subject:  An important request regarding appointment of Justice Chandramauli Kumar Prasad as Chairman, Press Council of India

Your Lordship,

I am Dr Nutan Thakur r/o 5/426, Viram Khand, Gomti Nagar, Lucknow, a social activist who works primarily in the field of transparency and accountability in public life. It has come to notice that Justice Chandramauli Kumar Prasad, ex Judge of the Hon’ble Supreme Court has been appointed as the Chairman of Press Council of India under the Press Council Act 1978.

It is kindly prayed that a very serious complaint of blatant misuse of authority are pending against Justice Prasad.  It is as regards the complaint sent by me dated 01/01/2014 to the Hon’ble Chief Justice of India with a copy to you about Mr Shubhashish Sen Gupta son of late Dr. Jamini Mohan Sen Gupta of “ Yamini ” L / 3 and 3A, Road No. 17, Sri Krishna Nagar,  P. S. Buddha Colony, Patna about which Sri Sen Gupta had previously sent to Your Lordship a complaint dated 25/12/2013 along with an Affidavit.

The complaint says that Mr Sen Gupta has been repeatedly demanding before various authorities for enquiries against certain personal misdeeds and improper acts of Hon’ble Justice Prasad in his individual capacity as Mr Sen Gupta’s neighbor but so far no authority has heeded to his complaint. The complaint says that Hon’ble Justice Prasad along with his brother Mr. Pinakpani Kumar Prasad and other members of his family are repeatedly misbehaving with Mr Sen Gupta, now himself a senior citizen and his wife. The complaint also says that previously a police officer in Patna Mr. Kumar Amar Singh, who had been entrusted this matter, had actually gone into the details and after having looked into the concerned issues had promised good behavior on part of the other side but things remain the same.

The complaint alleges “consciously plotting a criminal conspiracy, hating minority communities, willing to become a witness in a false case wholly plotted by him, trespassing others properties and injuring and beating up inmates and alike” etc against Hon’ble Justice Prasad. It also says that Hon’ble Justice Prasad’s son Mr Ardhendumauli Kumar Prasad is representing Bihar and UP as a lawyer in the Hon’ble Supreme Court.

Mr Sen Gupta has attached a huge list of documents to show that Hon’ble Justice Prasad and his family member, are misusing the extremely high constitutional authority conferred on him for petty personal gains and to belittle, humiliate and threaten an old neighbor.

As per Sri Sen Gupta, the neighbourhood dispute goes as far back as Hon’ble Justice Prasad’s father late Mr. K. K. Prasad being continued till today. It says that Hon’ble Justice Prasad himself hatched a criminal conspiracy to get Sri Sen Gupta’s family members arrested by the help of a new neighbor, Mr. Deo Sharan Shukla, who bought a vacant land at the adjacent west to their plot where he even assured them that, he would stand eye witness if such a case is anyhow lodged but later back tracked seeing danger of getting arrested himself for creating a false drama.

It is alleged that Hon’ble Justice Prasad and his family had criminally encroached a big chunk of their land on the intervening night of 23/24-12-1979 while recently, he directly took active part in getting their northern drain chamber quite criminally removed and constructing a new gate over it, blocking their water outlet causing damage to their property with the water logging in their drive-way at the time of rainfall.

Mr Sen Gupta alleges that it is Hon’ble Justice himself who got the recent illegal block of construction made over the set off area on the southern side of their house after illegally blocking their air light and view after jumping the Building By-laws of the PMC (earlier the PRDA) where they have even encroached upon a portion of the Main Road No. 17 of Sri Krishna Nagar, Patna on the southern side which the Housing Board had long marked as encroachment.

The complaint presents instance of a previous FIR against Hon’ble Justice himself which was later compromised by these two parties through Criminal Misc. No. 573 of 1986 (Chandramauli Kumar Prasad and another …. Petitioner Vs Tripti Sen Gupta………Opposite Party) through Order dated 3 / 8.8.91. It presents Order Sheet dated 8.8.91 of the Hon’ble High Court of Patna (being attached), various F I Rs presented to the local PS and other public authorities and the photographic depictions of alleged unauthorized and improper parking of official cars. It also shows photographs of alleged illegal construction in the house of Hon’ble Justice and throwing of garbage and other material on the pathway.

These are definitely extremely serious allegations against an ex Judge of the Hon’ble Supreme Court. Unfortunately neither the complaint sent by me nor that of Justice Prasad’s neighbor were ever enquired into and meanwhile Justice Prasad has been appointed as Chairman, Press Council which does not seem proper because it can be easily seen that any person against whom allegations of misuse of authority for neighbourhood dispute is found established, would never be deemed fit for getting appointed to us an important post.

Hence, it is being prayed that the appointment of Justice Prasad to Chairman, Press Council be withheld for the time being and an enquiry be undertaken as regards my complaint dated 01/01/2014 and the complaint dated 25/12/2013 sent by Sri Sen Gupta and to finally direct Justice Prasad to hold his position only after the enquiry, if the allegations are established to be true.

Yours
Nutan Thakur
5/426, Viram Khand,
Gomti Nagar,
Lucknow- 226010
# 94155-34525
nutanthakurlko@gmail.com

 
To,                                                                                                                        
The Hon’ble Chief Justice of India                                                                           
Hon’ble Supreme Court of India,                                                                                           
New Delhi.

Subject:  An important request regarding Hon’ble Justice Chandramauli Kumar Prasad

Your Lordship,

I am Dr Nutan Thakur r/o 5/426, Viram Khand, Gomti Nagar, Lucknow, a social activist who works primarily in the field of transparency and accountability in public life. I present before you a copy of the complaint sent recently by Mr Shubhashish Sen Gupta son of late Dr. Jamini Mohan Sen Gupta of “ Yamini ” L / 3 and 3A, Road No. 17, Sri Krishna Nagar,  P. S. Buddha Colony, Patna to the Hon’ble President of India against his neighbour, Hon’ble Justice Chandramauli Kumar Prasad, one of the sitting Hon’ble Supreme Court Judges of India along with an Affidavit to the same effect.

The complaint says that Mr Sen Gupta has been repeatedly demanding before various authorities for enquiries against certain personal misdeeds and improper acts of Hon’ble Justice Prasad in his individual capacity as Mr Sen Gupta’s neighbor but so far no authority has heeded to his complaint. The complaint says that Hon’ble Justice Prasad along with his brother Mr. Pinakpani Kumar Prasad and other members of his family are repeatedly misbehaving with Mr Sen Gupta, now himself a senior citizen and his wife. The complaint also says that previously a police officer in Patna Mr. Kumar Amar Singh, who had been entrusted this matter, had actually gone into the details and after having looked into the concerned issues had promised good behavior on part of the other side but things remain the same.

The complaint alleges “consciously plotting a criminal conspiracy, hating minority communities, willing to become a witness in a false case wholly plotted by him, trespassing others properties and injuring and beating up inmates and alike” etc against Hon’ble Justice Prasad. It also says that Hon’ble Justice Prasad’s son Mr Ardhendumauli Kumar Prasad is representing Bihar and UP as a lawyer in the Hon’ble Supreme Court.

Mr Sen Gupta has attached a huge list of documents to show that Hon’ble Justice Prasad and his family member, are misusing the extremely high constitutional authority conferred on him for petty personal gains and to belittle, humiliate and threaten an old neighbor.

As per Sri Sen Gupta, the neighbourhood dispute goes as far back as Hon’ble Justice Prasad’s father late Mr. K. K. Prasad being continued till today. It says that Hon’ble Justice Prasad himself hatched a criminal conspiracy to get Sri Sen Gupta’s family members arrested by the help of a new neighbor, Mr. Deo Sharan Shukla, who bought a vacant land at the adjacent west to their plot where he even assured them that, he would stand eye witness if such a case is anyhow lodged but later back tracked seeing danger of getting arrested himself for creating a false drama.

It is alleged that Hon’ble Justice Prasad and his family had criminally encroached a big chunk of their land on the intervening night of 23/24-12-1979 while recently, he directly took active part in getting their northern drain chamber quite criminally removed and constructing a new gate over it, blocking their water outlet causing damage to their property with the water logging in their drive-way at the time of rainfall.

As per the complaint, the sitting Justice of the Hon’be Supreme Court of India was himself present in person at the time of fixing of the gate and giving directions to the mason and the labourers to his satisfaction after getting Mr Sen Gupta’s drain chamber removed without any fear of law so as to erect a big wide gate improperly.

Mr Sen Gupta alleges that it is Hon’ble Justice himself who got the recent illegal block of construction made over the set off area on the southern side of their house after illegally blocking their air light and view after jumping the Building By-laws of the PMC (earlier the PRDA) where they have even encroached upon a portion of the Main Road No. 17 of Sri Krishna Nagar, Patna on the southern side which the Housing Board had long marked as encroachment.

The complaint also says that the official cars of the Hon’ble Patna High Court is parked on and off for hours together at Mr Sen Gupta’s narrow northern entrance and exit hindering their movement knowingly when Hon’ble Justice’s house is already situated right on the main road having an all time benefit of 70 feet length of openness compared to their 15 feet road.

The complaint presents instance of a previous FIR against Hon’ble Justice himself which was later compromised by these two parties through Criminal Misc. No. 573 of 1986 (Chandramauli Kumar Prasad and another …. Petitioner Vs Tripti Sen Gupta………Opposite Party) through Order dated 3 / 8.8.91. It presents Order Sheet dated 8.8.91 of the Hon’ble High Court of Patna (being attached), various F I Rs presented to the local PS and other public authorities and the photographic depictions of alleged unauthorized and improper parking of official cars. It also shows photographs of alleged illegal construction in the house of Hon’ble Justice and throwing of garbage and other material on the pathway.

These are definitely extremely serious allegations against a sitting Judge of the Hon’ble Supreme Court. The recent allegations against other senior members of Higher Judiciary clearly shows that all is not well here and this kind of alleged personal conduct (or misconduct) is bound to give extremely bad message in the society. A sitting Judge of the Hon’ble Supreme Court being alleged for this kind of open misuse of authority for such small personal gains and petty activities, is something the Higher Judiciary is least prepared for.

With due regards the kind of evidences and proof presented by Mr Sen Gupta are so many and look so apparent that they seem to establish his allegations beyond any reasonable doubt. As stated earlier, there is the copy of the compromise made before the Hon’ble Patna High Court, there is the copy of the FIR presented by a neighbor Mr Shukla which has Hon’ble Justice’s name as a witness, there are photographs of official and personal vehicles on the entrance road, there are photographs of the alleged illegal construction and there are copies of the innumerable number of previous complaints sent by Mr Sen Gupta. All these facts make it prima-facie quite apparent that something is going seriously wrong with Mr Sen Gupta so as to force him to write such a long letter for Justice to none else than the Hon’ble President himself, along with a host of documents and evidences. Otherwise, why would an old man try to fight with the immediate neighbor, that too Judge of the Hon’ble Supreme Court unless compelled to do so? 

Hence it is humbly prayed that being the administrative head of the Hon’ble Supreme Court, Your Lordship may kindly personally advise and ensure that Hon’ble Justice Prasad does not get involved in such personal conduct and neighbourhood disputes because it is bound to be extremely counterproductive for him, for the entire Judiciary and the entire nation. A Hon’ble Judge of the Hon’ble Supreme Court has much better and much higher things to do than to fight and quarrel with a neighbor because the entire episode puts him in an extremely awkward and uncharitable position.

PRAYER

 

1. To kindly direct and ensure as the Head of the Indian Judiciary and as the administrative head of Hon’ble Justice Chrandramauli Kumar Prasad to get personally completely detached from the neighbourhood dispute of all kinds with Mr Shubhashish Sen Gupta and his family and if possible, to direct all his family members to refrain from any such further dispute and misuse of authority like parking the official/unofficial car in his pathway, obstructing his pathway, any illegal construction etc because the matter concerns not only Hon’ble Justice Prasad as an individual but also willingly or unwillingly gets involved the fact that he is a sitting Judge of the Hon’ble Supreme Court

2. To kindly look into the allegation of Hon’ble Justice Prasad’s son learned Mr Ardhendumauli Kumar Prasad being an advocate of Bihar and Uttar Pradesh government in the Hon’ble Supreme Court itself, particularly in the light of the fact that Hon’ble Justice Prasad has been a Judge of the Hon’ble Patna High Court and the Chief Justice of the Hon’ble Allahabad High Court as regards its propriety and appropriateness and to issue directions accordingly

Yours
Nutan Thakur
5/426, Viram Khand,
Gomti Nagar,
Lucknow- 226010
# 94155-34525
nutanthakurlko@gmail.com

—-

Extremely Urgent

To,                                                                                                                        
The Hon’ble President of India                                                                               
Rastrapati Bhawan                                                                                                
Vijaya Chawk                                                                                                            
25.12.13
New Delhi.

Hon’ble President,

Re  : A serious complaint against Justice Chandramauli Kumar Prasad, (a sitting Judge of the Hon’ble Supreme Court of India).

With quite a heavy heart I am hereby compelled to reveal once again, the ongoing deep and intrinsic criminal propensities of the person named Mr. Chandramauli Kumar Prasad who later managed to get into the levels of the highly respected class of judiciary of this great nation who is now most unfortunately, one of the sitting Supreme Court Judges of India.

A copy of my earlier complaint dated 01.07.07 addressed to The Hon’ble Chief Justice of India, a copy of which was also sent to Your Excellency by Registered Post No. 3711 on 10.10.07 is attached herewith for your quick reference. Following to my said complaint, an enquiry was demanded by Your Excellency from Kotwali Police of Patna, but the matter was fully covered up by the officer named Kumar Amar Singh who conducted the enquiry.

Mr. Kumar Amar Singh did call me at Kotwali and had a formal discussion pertaining to your enquiry when I showed him many evidences against Justice Chandramauli Kumar Prasad at which, he was very surprised and tried to pacify me by ensuring me that, the said Justice won’t do anything like this again and accordingly, I stopped pursuing the matter further,  the mistake which I now severely lament.

It was the same Mr. Kumar Amar Singh who earlier on 28.06.07 came to my house at the request of the other party to settle an issue when we had to  lodge an F I R against Mr. Pinakpani Kumar Prasad one of the brothers of the said Justice Chandramauli Kumar Prasad for his utter misbehavior with my wife. That time also, I reconciled with what the said Mr. Kumar Amar Singh promised me if I showed my good gesture by not pursuing the FIR anymore.  I did follow Mr. Singh with all humility hoping things would improve but, in vain. 

Later, when I  again had to complain to the CJI and Your Excellency under a compulsory situation and when your enquiry came, it was the same Mr. Kumar Amar Singh who once again managed to convince me not to pursue my complaint despite the evidences shown, probably as because then it was believed that, Justice Chandramauli Kumar Prasad was almost about to become a Supreme Court Judge and such a complaint can ruin his chances for managing a place at a further height.

We all know that, we live in one of the most corrupt nations of the world where dishonesty, unscrupulousness, nepotism and “ might is right ” is rife but still,  things are changing for better though in a snail’s pace yet it should be welcomed. But here comes, yet another example of a Justice so corrupt by nature, propensity, practice, and what not and as a reason, we expect Your Excellency to take a stern and adequate action in this respect.

Can it be at all imagined that, a person consciously plotting a criminal conspiracy, hating minority communities, willing to become a witness in a false case wholly plotted by him, trespassing others properties and injuring and beating up inmates and alike, knowingly torturing and  harassing people by his cruel and silly activities only to project power and status including instigating people against us, yet still can most surprisingly, manage to infiltrate in the high and the most respected class of the judiciary where only god alike people are expected to exist ?

Is it not an intense shame and terrible disgrace for a noble country like India who has gained independence over six decades ago and yet such things happen ?  I have lived in England for around twelve and a half years or so but, never could imagine a judge so cruel by instinct. Even an ordinary person can put a serious complaint against any judge if found involved in corrupt practices. That is what now happening in India as well. People are openly discussing about the serious corruption within the judiciary and it has now become common place with no exception altogether.

Justice Chandramauli’s son Ardhendumauli is representing Bihar and UP as a lawyer is no surprise. It seems that, there are no better lawyers than Mr. Ardhendu in all over Bihar and Uttar Pradesh. How he got there one can easily imagine with a question of whether his father has made deals with the State Governments to oblige the officials later in time of need. Not to forget that, despite such despicable background,  most surprisingly enough,  Justice Chandramauli Kumar Prasad was further elevated to the Apex Court when Mr. K. G. Balakrishnan was the CJI who had been termed as the most corrupt Chief Justice of India.

What people can learn from the disgraced ex-Justices Saumitra Sen and A. K. Ganguli and now the other one as well ? If scrutinised, then many such Justices like Justice Chandramauli Kumar Prasad would be exposed who are sitting on a high chair of Justice god-alike when they are just the opposite and Justice Chandramauli Kumar Prasad’s case won’t take any time to be fully proven beyond any reasonable doubt. I am fully prepared to vigorously testify in any court of law to prove what he is been into since decades together.

Attaching herewith a list of documents which will sufficiently, categorically and lucidly prove that, the inclusion of Justice Chandramauli Kumar Prasad in the group of judges anywhere,  is just a shame for the nation and no way it can be a matter of pride to the least. I after all, feel terribly melancholy and sad to bring about such a matter perpetrated by a sitting Supreme Court Judge and feel what a kind of judgment he might be coming up with, when he himself remains engrossed with so many dangerous demerits of unprecedented proportion within himself. It is a stupendous disgrace for all the law-loving citizens of India, no doubt.

To us,  Justice Chandramauli and his family members have individually and jointly created a hell since we have taken the possession of our land next to the Justice ’s house who then had no pedigree at all, nor by ethics, nor by status, nor by education nor by family and not by any other background      as such. The house was one of the filthiest house in our area to which we used to get  terribly disturbed,  the description Your Excellency would find in the F I R in HINDI given to the Buddha Colony Police Station but, with no action till date.

Every family member of Mr. Chandramauli to this day believes and behaves exactly what the Karta of Plot No. L / 4 the late Mr. K. K. Prasad used to behave and believed in. Justice Chandramauli’s father used to despise us thoroughly and used to vehemently pass nasty comments on our community and repeatedly warned us not to take possession of our land as we are members of a minority community. Then how can Justice Chandramauli grow up with noble ethics is a very simple matter to comprehend.

It was Chandramauli himself who hatched a criminal conspiracy to get we family members arrested by the help of a new neighbour who bought a vacant land at the adjacent west to our plot after six years of coming here. Justice Chandramauli even assured them that, he would stand eye witness if such a case is anyhow lodged but later back tracked seeing danger of getting arrested himself for creating a false drama and becoming a false eyewitness with an act of perjury to his credit.  Mr. Deo Sharan Shukla our neighbour, once murmered that, it was solely Mr. Chandramauli’s idea to lodge the false case in which he wanted to give witness.

It is true to its bone that, had Chandramauli got chances to the least, he would have crushed us under his feet which  he kept on longing for, but we started winning most of the court cases with the neighbour who quite criminally encroached a big chunk of our land on the intervening night of 23 and 24th  December of 1979 at the advice of Chandramauli himself.  Mr. Chandramauli very eagerly kept an eagle’s eye on the court developments to see us devastated but after seeing that we are winning in all circumstances he back tracked and started causing damage to us indirectly as far as possible which is going on even today.

Justice Chandramauli didn’t leave even a stone unturned to harass us whenever he could and even today what he is doing is mentioned in my FIR in Hindi Language sent to the Buddha Colony Police Station but the officers never dare to take action against any member of the Justice’s family nor the Kotwali wants to listen any complaint against them. I have sent letters to both the Police Stations under the RTI Act but, they have failed to answer despite sending reminder when Kotwali even refused to accept my Registered Post making  a query under the RTI Act, the same unopened packet which is now being sent to Your Excellency for you kind perusal and necessary action. Your Excellency can well imagine what is going on in our country. Law is being flouted by the persons who are supposed to protect it but, in vain.

Recently, Justice Chandramauli directly took active part in getting our northern drain chamber quite criminally removed and constructing a new gate over it, blocking my water outlet causing damage to our property with the water logging in our drive-way at the time of rainfall, which is clearly evident even now which had already been shown to the police but, with no action again. A fresh enquiry is needed by a top level IPS officer with an impeccable background from outside Bihar or again the matter will be brushed up aside as usual.

It has clearly been observed that, the sitting Justice of the Hon’be Supreme Court of India himself present in person at the time of fixing of the gate and giving directions to the mason and the labourers to his satisfaction after getting my drain chamber removed without any fear of law as he himself is a judge and he knows that, no one can dare to ask him questions. To erect a big wide gate after 40 years ( despite having their own two gates on the main road ) just at our northern entrance and exit is to take an old revenge by regularly subjugating us as the Justice’s late father was ordered by the administration to remove their illegal construction just made on the substantial part of our said road.

It is Justice Chandramauli himself who got the recent illegal block of construction made over the set off area on the southern side of their house after illegally blocking our air light and view after jumping the Building By-laws of the PMC ( earlier the PRDA ) by showing foot to the law of the land himself when he should be protecting the same being a judge of the country that too, of the highest court of our great nation.

There are colossal examples of Justice Chandramauli’s delinquent behavior including most of the members of his family as well who remain fully charged with ego and pride as one of their family members is a judge. The other members of family of the said Justice Chandramauli Kumar Prasad have long asserted that, they would teach us a good lesson for the rest of our lives. They have even encroached upon a portion of the Main Road No. 17 of Sri Krishna Nagar, Patna on the southern side which the Housing Board had long marked as encroachment. The said encroachment also hinders our easy movement at the corners by the illegal encroachment made by the Prasad family which is amply evident at any time.

A complaint was made to the local Police Station and the Senior SP of Patna in this respect on dumping building materials and garbages quite knowingly at our northern exit and entrance blocking our way to and fro making our lives difficult in every possible way for more than two years, but the administration doesn’t dare to take action whether it is the Commissioner of Patna Municipal Corporation, or SHO of the local PS, or Kotwali Police or the Senior SP of Patna.

Further to the above, the official cars of the High Court is parked on and off for hours together at our narrow northern entrance and exit hindering our movement knowingly, is almost a common practice for Justice Chandramauli Kumar Prasad whenever he is here. Time and time again we have to blow horn in order to draw attention of the inmates of Plot No. L / 4 to remove their carx parked but to no avail when their house is already situated right on the main road having an all time benefit of 70 feet length of openness compared to our only 15 feet that too, half encroached by the Justice’s family and then cars are dumped in the remaining space on and off. Any sensible person would know the reason.

At the strength of Justice Chandramauli, rest of the members also purposefully disturb and torture us on a regular basis which can be proven with the help of photographs and physical evidences. For the past two years, they are not removing the said garbages and building materials making our lives even more traumatic and difficult. The access road is precisely meant for two plots falling at the back including ours but, after fully endorsing the cruel actions of the Justice, the rest members of the family also keep on doing the same on a very regular basis. But, we will not take it anymore.

Still, many things are yet to be told which is not possible to add on to this complaint any further to make this complaint even more hefty. But yes, the other family members of Justice Chandramauli Kumar Prasad are desperately looming forward to become Judges at the strength of the stature of Justice Chandramauli himself so that, they can also plunge into a elegant life style of a privileged person alike Justice Chandramauli Kumar Prasad himself doing anything without any fear of law while always trying to subjugate us . Whatever we are suffering today is a calculative effect of no other than Justice Chandramauli Kumar Prasad himself but, we have been painfully enduring ever since as usual due to many reasons which could be understood by any person with a common sense.

In fact, Justice Chandramauli Kumar Prasad has not only betrayed my innocent parents many times but also, has ruined our lives to a greater extent which cannot be compensated by any means.  Needles to say that, the credibility of the collegium goes down to zero by unlawfully supporting Justice Chandramauli Kumar Prasad concealing all the criminality he has been most willingly indulging into after misleading the Law Ministry altogether. Nothing could be more betraying, frustrating and unfortunate than this for our great motherland India for whom millions of patriotic people selflessly shed their blood for emancipating us from the shackles of slavery.

However, I quite anxiously look forward to get an answer directly from Your Excellency to see if at all, actions are taken against the offenders of law no matter where they are sitting or have managed to reach anyhow. Just to recall here that, once I needed to write letters to Her Majesty, The Queen of England and Tony Blair (ex-PM of UK) and can proudly reveal that, I got quick replies from both the offices. Our motherland India may also not be far behind as I can believe after enjoying many decades of true independence and expect alike to get a quick answer from You’re Kind Excellency as well.

 
Thanking you,

Yours truly ever,

Shubhashish Sen Gupta                                                                                                                                  

B.Com. Hons. (Pat), DMS (London), Dip M  (CIM, England),                                    

B. Award ( New York ),    Exe. MBA Yr.3 ( London ).         

L / 3,  Road No. 17
Sri. Krishna Nagar,
Patna  –  800 001
I N D I A
Tel / Fax :  00-91-612-523971
Mob :  808  4900  858   /   938  685  3730
mail :  author_hhbj@yahoo.co.uk    

cc :  CJI
:  Ministry of Law
: Times Now, NDTV and Hindustan Times.                            

Encl : My Affidavit and A list of documents with evidences.

If necessary, I am fully prepared to put my full signature on such a document constituting to be an Affidavit.

Affidavit

I, Shubhashish Sen Gupta  (of around 60 years)  son of late Dr. Jamini Mohan Sen Gupta of   “ Yamini ” L / 3 and 3A, Road No. 17, Sri Krishna Nagar,  P. S. Buddha Colony, Patna,  do hereby solemnly affirm and declare as follows that :-

1).   I have myself drafted the Complaint of four pages ( to which this Affidavit is attached ) against Justice Chandramauli Kumar Prasad who along with his family members have jointly and individually inflicted endless injuries on the mind and body of our family members  since around four decades which we have been suffering from as being the members of a minority community.

2).     The statements made in the different paragraphs of the four paged Complaint dated 25th December 2013 is absolutely true to my belief and understanding and whatever has been depicted herewith  has been done under no fear or pressure of any kind from any quarter. The attached list of documents proves everything.

3).     I fully assert here that, long before becoming Justice, the said Mr. Chandramauli Kumar Prasad trespassed our compound and beat me up badly after coming onto our southern side verandah of our Sri Krishna Nagar residence of Patna along with his brother Mr. Yahanvi Kumar Prasad and injured me as much as possible precisely to terrorise me permanently and we family members as an act of       deep-rooted vengeance.  A similar incident was also perpetrated by Chandramauli Kumar Prasad along with an accomplice with another family of a minority community in our vicinity to which we were the eye witnesses.

4).     The compromise between Chandramauli Kumar Prasad and we family members was done under pressure and threatening so that, the prosecution charges against Chandramauli and another may be easily quashed on  a later date  as like  in

Criminal Misc. No. 573 of 1986

Chandramauli Kumar Prasad and another …. Petitioner

Vs

Tripti Sen Gupta………Opposite Party

Order dated 3 / 8.8.91              ( Annexure No.  1 )

5). I can testify all such matters and can vividly explain the incidences taking place here at any court of law for seeking justice including giving the descriptions of the persons involved in all round criminal activities perpetrated against us in different manners by the said Justice Chandramauli Kumar Prasad and his delinquent family including the lady members who individually and jointly have been settling a big score even today which if required, can be divulged in any court of law giving full explanation in front of the toughest lawyers of the country.

6). Many other incidences have also taken place here which have not been included in the written complaint but can be disclosed with full honesty whenever required.    I believe that, following this complaint there is bound be violent retaliations later, but I am prepared for all eventuality.

7). Even lately, Justice Chandramauli Kumar Prasad is harassing us in different ways as an act of deep-rooted vengeance by his ill-gotten power and status. Copies of this set of papers would likely be sent to different places for information.

Deponent

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काटजू की जगह पूर्व न्यायाधीश सीके प्रसाद होंगे पीसीआई प्रमुख

खबर है कि जस्टिस मार्कंडेय काटजू की जगह प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के नए चेयरमैन जस्टिस सीके प्रसाद बनाए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीके प्रसाद का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नए प्रमुख के रूप में चयन उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की अध्यक्षता वाली समिति ने किया है. इस संबंध में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आदेश मिल चुका है.

जस्टिस सीके प्रसाद जस्टिस मार्कण्डेय काटजू की जगह लेंगे जो फिलहाल पीसीआई के चेयरमैन है. काटजू सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रह चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रमोट होने से पहले काटजू दिल्ली और मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. काटजू इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके हैं.

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