योगी सरकार के इन अफ़सरों से बहुत ग़ुस्से में हैं पत्रकार, प्रदेश भर में फैल गया आंदोलन

बलिया के पत्रकारों को ज़बरिया जेल भेजे जाने की घृणित घटना के ख़िलाफ़ पूरे यूपी में पत्रकारों में रोष है। देखें बलिया के एक पत्रकार की भड़ास…



इस बीच ग़ाज़ीपुर, मऊ, आज़मगढ़, लखनऊ के बाद अब देवरिया, बरेली, कानपुर में भी पत्रकारों ने सड़क पर निकल कर विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। ये खबरें तस्वीरें नीचे हैं। उसके पहले अमर उजाला बलिया के पत्रकार अजित ओझा के जेल जाने के बाद उनके परिजनों का हाल जानिए…

मनीष दुबे-

6 अप्रैल 1980 को अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी आज अपना स्थापना दिवस मना रही है. इधर आज ही के दिन बलिया में दो मासूम बेटियां अपने पिता के लिए कीमती आंसू बहाने को मजबूर हैं. ये दोनों बेटियां पत्रकार अजीत ओझा की हैं.

इमेज साभार : UP Tak

इन बच्चियों की बात सुनने और वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://twitter.com/chandanmedia/status/1511608959089922050

अजीत ओझा को बलिया पुलिस ने पेपर लीक मामले में जेल भेजा है. दरअसल 30 मार्च को बलिया में बारहवीं कक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने तीन पत्रकारों दिग्विजय सिंह, मनोज कुमार गुप्ता और अजीत ओझा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इन तीनों पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगा है.

खबरों के मुताबिक अजीत ओझा के घर की माली हालत बहुत ठीक नहीं है. पत्रकारों की गिरफ्तारी के विरोध में जगह जगह प्रदर्शन हो रहे हैं. यूपी तक के पत्रकारों के सवाल पर बिटिया फफककर रोने लगती है. कहती हैं, ‘प्लीज हमारे पापा को छोड़ दीजिए’.

हैरानी तो इस बात की होती है कि एक तरफ तो सरकार पत्रकारों को परेशान न करने की प्रशाशन को चेतावनी देती है तो दूसरी तरफ जब प्रशाशन परेशान करता है तब सरकार चूं तक नहीं करती. ये दोहरा मापदंड क्यों है?

बलिया प्रशासन ने पत्रकारों को सरकारी काम में बाधा डालने की बाबत जेल भेजा है. तो क्या सरकारी काम में नकल कराना शामिल था? जिनका इन पत्रकारों ने खुलासा किया था. सवाल यह भी की क्या सूबे के मुखिया तक, अब तक आवाज नहीं पहुंची होगी? अगर पहुंची तो पत्रकारों को अरेस्ट करने वालों पर सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की?

आज 6 दिन हो गए. बेटियां अपने पिता से दूर हैं. मैं भी दो बेटियों का पिता हूं. पता है, जब घर पहुंचता हूँ तो बेटियां दौड़कर लिपट जाती हैं. गोद में उठाते ही जो अहसास मिलता है उसे कहने को शब्द नहीं हैं. इन बेटियों के लिए जितना दुख है उतनी ही सरकार और प्रशाशन पर खीझ आती है. इसके अलावा और एक बात जो याद आती है….

अंधेर नगरी चौपट राजा
टके शेर भाजी टके शेर खाजा…


इस बीच प्रदेश भर में पत्रकारों का धरना प्रदर्शन ज्ञापन का अभियान जारी है…

ये बरेली है…

बलिया में पत्रकारों पर हुई कार्यवाही को लेकर बरेली में पत्रकारों ने प्रदर्शन किया और पत्रकारों को न्याय दिलाने की मांग की। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसएसपी बरेली को सौपा। देखें ज्ञापन-

विषय: बलिया जिला प्रशासन दुवारा पत्रकारों के उत्पीड़न के संबंध में

विनम्र निवेदन के साथ अवगत कराना है कि यूपी बोर्ड पनपत्र लीक मामले में बलिया जनपद के तीन निर्दोष पत्रकार अजीत ओझा (अमर उजाला), दिग्विजय सिंह (अमर उजाला) व मनोज गुप्ता (राष्ट्रीय सहारा) को जेल भेजा गया है। जिला प्रशासन शिक्षा विभाग ने अपनी गर्दन बचाने के लिए यह कार्रवाई की है। बलिया में यूपी बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्र लगातार आउट हो रहे थे। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को थी। आपको बताना जरूरी है कि हाईस्कूल संस्कृत विषय की परीक्षा शुरू होने के पहले ही उसकी हल कापी होने की जानकारी जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की थी, फिर भी उसी प्रश्न पत्र पर कराई गई। संस्कृत का प्रश्न पत्र आउट होने की खबर को सभी प्रमुख समाचार पत्रों आदि ने प्रकाशित प्रसारित किया था। इसी बीच, 29 मार्च की रात को इंटर अंग्रेजी का भी प्रश्न पत्र आउट हो गया। इसकी परीक्षा 30 मार्च को दूसरी पाली में होनी थी। 30 मार्च को ही अमर उजाला ने आउट प्रश्न पत्र के चित्र के साथ समाचार प्रकाशित कर दिया। समाचार प्रकाशित होने पर शासन ने संज्ञान लिया और 24 जिलों में परीक्षा रद्द कर दी। बलिया जिला प्रशासन से शासन सवाल-जवाब करने लगा।

नतीजा यह हुआ कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए जिला प्रशासन ने 30 मार्च को दोपहर 12 बजे के करीब अमर उजाला के बलिया कार्यालय से शिक्षा विभाग की बीट देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री अजीत ओझा को पुलिस से जबरदस्ती उठवा लिया और सायंकाल मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। अगले दिन अमर उजाला अखबार से जुड़े नगरा के रिपोर्टर दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय सहारा के मनोज गुप्ता को भी पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आलम यह है कि जिला प्रशासन आज तक यह नहीं बता सका है कि गिरफ्तार पत्रकारों का क्या दोष है।

हम कलमकारों की मांग है कि :

निर्दोष पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता को तत्काल रिहा किया जाए। निर्दोष पत्रकारों पर दर्ज मुकदमें वापस लिए जाए।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दमन किए जाने की नियत से की गई कार्रवाई के लिए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। पेपर आउट मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, ताकि आगे से कोई भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके। जांच में जिले के पत्रकार शासन का पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।

बलिया के डीएम, एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाए।

बरेली के समस्त पत्रकार

आशीष गुप्ता, इंडिया न्यूज
कृष्ण गोपाल राज, आज तक
कुमार विनय सहारा समय
अनूप मिश्रा एबीपी न्यूज़
दीपक शर्मा, भारत समाचार
नीरज आनंद, न्यूज़ 24
सुनील सक्सेना, ईटीवी भारत
विकास साहनी इंडिया टीवी
हरीश शर्मा, न्यूज़ 18 यूपी
अंश माथुर, सिटी न्यूज़
अजय मिश्रा, सिटी न्यूज़
अजय कश्यप, जी न्यूज
मनोज शर्मा, न्यूज़ नेशन
अरुण मौर्या, अम्रत विचार
मयंक शर्मा, पीटीपी न्यूज़
रंजीत शर्मा, न्यूज़ टुडे
भीम मनोहर, सी 10
दीपक चतुर्वेदी, जेके न्यूज़
अभिषेक कुमार, न्यूज़ 1 इंडिया
अवनीश पांडेय, हिंदुस्तान अखबार
अनुज मिश्रा, दैनिक जागरण
संजय शर्मा, अम्रत विचार
दानिश , अमर उजाला
राहुल सक्सेना, विधान केसरी
अशोक गुप्ता, पीटीआई
अजय शर्मा, न्यूज़ 18 यूपी
विकास सक्सेना, न्यूज़ 18
पुष्कर, एफएम न्यूज़
अयाज खान, न्यूज़ 1 इंडिया
अंकुर, हिंदी खबर


ये है कानपुर देहात के पत्रकारों की तरफ़ से दिया गया ज्ञापन…


देवरिया से खबर….

बलिया जनपद में पेपर लीक मामले को लेकर जेल में बंद पत्रकारों के समर्थन में पत्रकारों ने धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

माध्यमिक शिक्षा परिषद हाईस्कूल व इंटर मीडिएट की बोर्ड परीक्षा में नकल माफियाओं के आगे बलिया जिला प्रशासन ने घुटने टेक दिया है। बलिया जनपद के पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए उनके समर्थन में जिले के विभिन्न पत्रकार संगठनों के पत्रकारों ने मंगलवार को सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। पत्रकारों का जुलूस कलेक्ट्रेट से शुरू होकर सुभाष चौक तक और फिर वहां से बलिया जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। पत्रकारों ने जिलाधिकारी देवरिया को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। जिलाधिकारी देवरिया आशुतोष निरंजन ने पत्रक को शीघ्र ही मुख्यमंत्री तक भेजने का आश्वासन दिया।

पत्रकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता एनडी देहाती ने कहा कि बलिया में नकल माफियाओं और जिला प्रशासन का सांठ-गांठ है।तभी तो संस्कृत एवं अंग्रेजी का पेपर लीक होने के बाद जब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था उस समय जिला प्रशासन नकल माफियाओं पर नकेल कसने की बजाय अखबारों में इसका खुलासा करने वाले पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। नेशनल प्रेस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष विपुल तिवारी ने कहा कि बलिया के तीन पत्रकारों अजित ओक्षा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता ने अपने अखबार में खबर प्रकाशित कर जिला प्रशासन की कलई खोल दिया।

पत्रकार एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जिलाधिकारी बलिया अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निर्दोष पत्रकारों को फर्जी मुकदमे में जेल भेज कर पत्रकारों में सच्चाई लिखने से परहेज़ करने का भय पैदा कर रहे हैं। पत्रकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक सत्य प्रकाश पाण्डेय एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप चौरसिया ने कहा कि बलिया में यह लोकतंत्र की हत्या है। अखबार की खबर से बलिया जिला प्रशासन की प्रदेश स्तर पर हो रही किरकिरी से बचने के लिए जिलाधिकारी बलिया ने खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है। दिलीप कुमार मल्ल,सीपी शुक्ला, वरूण मिश्रा, गोविंद मिश्रा, पुनित पाण्डेय, मकसूद अहमद भोपतपुरी, सुभाष मिश्रा, विरेन्द्र पाण्डेय, शैलेश उपाध्याय व करन यादव ने कहा कि नकल माफियाओं और जिला प्रशासन बलिया की सांठ-गांठ की उच्चस्तरीय जांच हो। लापरवाह और निक्कमे जिलाधिकारी बलिया को बर्खास्त किया जाए।

दीपक दिक्षित, मोहित शुक्ला, फैज़ खान, दिलीप भारती,सोनू, विनोद यादव, अग्रसेन विश्वकर्मा, मनीष मिश्रा, भगवान उपाध्याय,रामभरोसा चौरसिया ने कहा कि बलिया जिले के जिलाधिकारी के अवैध सम्पत्ति की जांच हो और पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय जांच होने तक उन्हें जेल भेज दिया जाए।

पत्रकार समन्वय समिति के संस्थापक अध्यक्ष सरदार दिलावर सिंह,कमल पटेल, प्रेम यादव, ने कहा कि बलिया में निर्दोष पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजे जाने की घटना निंदनीय है और इसकी कटु आलोचना करता हूं।
बलिया के उत्पीड़ित पत्रकारों के समर्थन में जिलाधिकारी देवरिया कार्यालय पर रमाशंकर राव,केपी गुप्ता, डॉ अजय बरनवाल, श्याम नारायण मिश्रा, पवन पाण्डेय, डॉ वीवी तिवारी, चंद्रकेश चौरसिया, सिद्धेश्वर तिवारी, मिथिलेश कुमार, राजेश कुमार तिवारी, अंकित वर्मा, प्रमोद गुप्ता, राकेश त्रिपाठी,जवाहर लाल गुप्ता, रामनाथ विद्रोही, राघवेंद्र पाण्डेय सहित सैकड़ों पत्रकार सम्मिलित रहे।


एक पत्रकार संगठन का बयान…

इस बीच उत्तर प्रदेश श्रमजीवीपत्रकारयूनियन द्वारा बलिया के जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह की तानाशाही के कठोर निंदा करते हुए इस भ्रष्ट जिलाधिकारी के खिलाफ जांच कराते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश त्रिवेदी एवं महामंत्री रमेश शंकर पांडे ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक होने का समाचार प्रकाशित करने वाले बलिया के पत्रकार अजीत कुमार ओझा दिग्विजय सिंह व मनोज कुमार गुप्ता के विरुद्ध षड्यंत्र रचकर जिला प्रशासन द्वारा उन्हें जेल में भेजने तथा मानसिक प्रताड़ना देने की उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन पंजीकृत कड़ी निंदा करती है तथा अपने कुकृत्य पर पर्दा डाल डीएम वा उसके गुर्गों के भ्रष्ट क्रियाकलापों का पर्दाफाश करने वाले निर्दोष पत्रकार साथियों के विरूद्ध की गई दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लेकर दोषी जिलाघिकारी इन्द्र विक्रम सिहं व पेपर लीक मामले में संलिप्त उनके साथियो के विरुद्ध उच्चस्तरीय जॉच कराये जाने तथा दण्डात्मक कार्यवाही करने की प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य ऩाथ से माँग की है। दोनो नेता द्वय ने पत्रकारो का अनावश्यक उत्पीड़न न रोके जाने पर कड़े सघर्ष की चेतावनी दी!



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One comment on “योगी सरकार के इन अफ़सरों से बहुत ग़ुस्से में हैं पत्रकार, प्रदेश भर में फैल गया आंदोलन”

  • आशीष says:

    स्वतंत्र प्रेस की कार्यक्षमता काम नहीं होने दी जाएगी
    दोसी अधिकारी में बर्खास्तगी से कम मंजूर नहीं
    प्रदेश की जनता आपके साथ है

    जनहित बचाओ सभा
    आशीष

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