तीन तलाक से मुक्ति के लिए हनुमानजी की शरण में मुस्लिम महिलाएं

तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के लिए किसी अभिशाप से कम साबित नहीं हो रहा। मुस्लिम समाज में जब जब तीन तलाक अमल में आया है तब तब एक महिला बेसहारा और बेघर हुई है। मुस्लिम समाज में तीन तलाक पुरुषों नें अपने सहूलियत के हिसाब से बनाया है। लेकिन अब देश में इस बेरहम मुस्लिम कानून के खिलाफ आवाज़ें बुलंद हो गयी हैं। अब मुस्लिम महिलाएं खुद ही तीन तलाक के विरोध में आगे आ रही हैं।

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में तीन तलाक के संकट से मुक्ति पाने के लिए मुस्लिम महिलाएं संकटमोचन हनुमान जी की शरण में पहुंच गई हैं। मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं ने बनारस के पातालपुरी मठ में 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया। मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम, मइया सीता, चारों भाईयों सहित संकटमोचन हनुमान की विधिवत् हवन पूजन कर हनुमान चालीसा पाठ की शुरुआत की।

मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा आज के ही दिन 10 मई 1857 को देश में अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति के लिए स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत हुई। इस घटना के ठीक 160 साल बाद तीन तलाक जैसी सामाजिक कुप्रथाओं से मुक्ति के लिए संघर्ष की शुरुआत हुई है।

नाजनीन ने कहा 11 मई को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ में तीन तलाक पर सुनवाई होनी है। इस तीन तलाक प्रथा से देशभर की मुस्लिम महिलाओं में बेचैनी है और सबकी निगाह सुप्रीम कोर्ट पर लगी हुई है। इसलिए सुनवाई से एक दिन पूर्व तुलसीदास जी द्वारा स्थापित हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा के पाठ का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक अमानवीय है। इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे है। नाजनीन अंसारी ने कहा कि तीन तलाक देकर बेघर करने वाले धर्म का हवाला न दें।

विकास यादव
वाराणसी
vikasyadavapn@gmail.com



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