हम कश्मीर क्यों दें कश्मीरियों को?

बुद्धिजीवी होने का मतलब शुतुरमुर्ग होना नहीं है। हमेशा अपनी थ्योरी से ही चीजों का विश्लेषण मत कीजिये। क्या होता और क्या होना चाहिये से ज्यादा महत्वपूर्ण है..क्या हो रहा है। सैकड़ो वर्षों से वास्तव में क्या हो रहा है, पूरे विश्व मे क्या हो रहा है? उसको आंखों से देखा जा सकता है। उसके …

आतंकवाद से न अमेरिका लड़ पाया और न मोदी लड़ पाएंगे….

Tabish Siddiqui : ये आपको लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकवादी डर जायेंगे.. ये आपको लगता है कि जम के गोला बारूद चल जाए तो वो सब डर जायेंगे.. और जैसी आपकी समझ है वैसी ही आपके राष्ट्रवादी नेताओं की है.. तभी आप इन्हें चुनते हैं और आप सोचते हैं कि ये आतंकवाद से …

हमको-आपको इस्लामिक देशों की ताक़त का शायद अंदाज़ा नहीं है!

Tabish Siddiqui : आप जो देखने को आतुर होते हैं बस आपको वही दिखता है… लिट्टे/LTTE की मिसाल मत दीजिये.. ये मुट्ठी भर लोग थे जिन्हें आराम से एक सरकार दबा सकती थी.. खालिस्तानी मूवमेंट वाले भी मुट्ठी भर थे और जिस धर्म से वो आते थे उस धर्म की यानि सिख धर्म की कुल …

दलित-मुस्लिम मीडियाकर्मियों के उत्पीड़न की एक सच्ची कहानी…सुनेंगे तो रोंगेट खड़े हो जाएंगे…

…अंततः फर्जी केस से बरी हुये पत्रकार योगेंद्र सिंह और अब्दुल हमीद बागवान ! सत्य प्रताड़ित हुआ पर पराजित नहीं! 10 मार्च 2007 वह मनहूस दिन था , जब मेरे दो पत्रकार साथियों अब्दुल हमीद बागवान और योगेंद्र सिंह पंवार को भीलवाड़ा पुलिस द्वारा कईं गंभीर धाराओं में दर्ज कराए गए एक मुकदमे में गिरफ्तार …

आखिर औरतों के मामले में ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की नींद क्यों टूटती है?

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे…. पाकिस्तान की एक लेखिका हैं तहमीना दुर्रानी…. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पूर्व गवर्नर गुलाम मुस्तफा खर से शादी और तलाक के बाद 1991 में उन्होंने एक उपन्यास लिखा था माय फ्यूडल लॉर्ड… यानी मेरे आका… यह उनकी आत्मकथा थी… इससे पाकिस्तान की सियासत में भूचाल आ गया था… …

मुसलमानों के मामले में मीडिया ने अपने सिद्धांत और अक्ल, दोनों बेच खाए हैं!

उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनाव नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। दस्तूर के मुताबिक सोशल मीडिया से यह वीडियो मेन-स्ट्रीम मीडिया के पास पहुंचा और पिछले कुछ वक्त से जो  हमेशा होता चला आ रहा है, वही हुआ। एक फर्जी वीडियो के सहारे एक विशेष तबके को देश विरोधी बताने की कोशिश हुई। हां, मैं वीडियो को फर्जी कह रहा हूं क्योंकि वह फर्जी ही है। वीडियो के ऑडियो और विजुअल लेवल में जो फर्क है उसे देख कोई बच्चा भी बता देगा कि वीडियो असली नहीं हो सकता। न्यूज पोर्टल Alt News ने तो इसकी पड़ताल भी की और वीडियो के फर्जी होने की तरफ इशारा भी किया। बाकी, फॉरेंसिक जांच में तो सच सामने आ ही जाएगा।

इस बचकानेपन से कब बाहर निकलेंगे वाइज़…

वाइज़, निकाह करने दे ‘बैंकवालों’ से चाह कर… या वो रक़म बता जिसमें ‘सूद’ शामिल न हो..

डॉ राकेश पाठक
चार दिन पहले दारुल-उलूम, देवबंद से फ़त्वा जारी हुआ है कि मुसलमान बैंक में बैंक में नौकरी करने वालों के यहां कोई नाते रिश्तेदारी, ब्याह,शादी करने से परहेज़ करें। फ़त्वे में कहां गया है कि बैंक ब्याज़ या सूद का कारोबार करते हैं इसलिए उसकी कमाई हराम है। इससे चलने वाले घर का व्यक्ति अच्छा नहीं हो सकता। इस फ़त्वा को मुसलमानों ने किस तरह लिया इस पर बात करने से पहले यह जान लेना मुनासिब होगा कि आखिर फ़त्वा है क्या बला..? इसकी शरिया में क्या हैसियत है और मुसलमान इसे कितनी तवज्जो देते हैं?
दरअसल फ़तवा उसे कहते हैं जो क़ुरान या हदीस के मुताबिक़ निर्देश या आदेश ज़ारी किया जाए।

ये मुस्लिम लड़की भी है ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ (देखें वीडियो)

हापुड़ की इस ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ से मिलिए… सपने थे फैशन डिजायनर बनने के, बन गई जज… आमिर खान की फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में एक लड़की अपने मां के सपने पूरे करने और अपनी मंजिल पाने के लिए जीतोड़ प्रयास करती है और सफल हो जाती है. इसी किस्म की कहानी हापुड़ की इस ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ की है. यूपी के हापुड़ जिले की मुस्लिम लड़की जेबा रउफ जज बन गई है, मात्र 27 साल की उम्र में.

एक साल बाद भी ‘नजीब’ का पता नहीं, चुल्लू भर पानी में डूब मरें मुसलमान नेता!

–जियाउर्रहमान–

देश के इतिहास में सोमवार को ऐसा पहली बार हुआ है जब एक बेबस, लाचार मां अपने लाडले की बरामदगी के लिए सीबीआई मुख्य्यालय पर इन्साफ मांगने के लिए बैठी हो और पुलिस उसे इन्साफ देने की बजाय जबरन उठाकर गाडी में दाल देती है। एक पीडिता को इस तरह खींचा जाता है जैसे इस देश में इन्साफ माँगना भी गुनाह हो? खैर, देश में लोकतंत्र को खत्म करने की हर रोज साजिशें हो रही हैं, न्याय मांगने वालो को दबाया जा रहा है और विपक्ष खामोश है? विशेष बात यह है कि जहाँ भी पीड़ित मुस्लिम है वहां कथित सेक्युलर नेता भी बोलने से बाख रहे हैं।

मुसलमानों के इस छोटे वाले आसाराम बापू से मिलिए!

Shamshad Elahee Shams : इस बकरमुंह से मिलिए. नाम है इसका हाजी सादिक. उम्र ८१ साल. ये मुसलमानों का छोटा वाला आसाराम बापू है.

इंग्लैण्ड में कार्डिफ मस्जिद का इमाम भी रहा है और कुरआन पढ़ाने का पेशा भी करता था. १३ साल से कम उम्र की ४ बच्चियों के यौन शोषण के मामले में इसे १३ बरस की जेल हुई है. पश्चिम में अक्सर इसाई मुल्लेह, बाल यौन शोषण की ख़बरों में सुर्खियाँ बनाते हैं. ऐसा इसलिए है कि पश्चिमी समाज में वह सामाजिक दिक्कते नहीं कि पीड़ित अपने दुःख को छिपा जाए.

भटके मुस्लिम युवकों को सुधारने के लिए यूपी एटीएस का ‘डी-रेडिक्लाइजेशन’ अभियान!

संजय सक्सेना, लखनऊ

युवा अवस्था में भटकाव लाजिमी है। कभी गलत संगत तो कभी बिगड़ी सोच के कारण युवा अपने मार्ग से भटक जाता है। ऐसा नहीं है कि पूरा युवा समाज ही भटकाव से जूझ रहा हो, ऐसे युवा भी हैं जो अपनी स्पष्ट और लक्ष्य भेदी सोच के कारण सही राह पर चलते हुए अपने कुल और देश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन इससे इत्तर कड़वी सच्चाई तो यही है कि भटकने वाले युवाओं का ग्राफ काफी ऊपर है। शायद ही कोई ऐसा युवा होगा जो दावे के साथ कह सके कि उसकी जिंदगी में भटकाव वाला मोड़ कभी नहीं आया। हॉ,सच्चाई यह भी है कि समय के साथ परिपक्त होने पर कुछ युवा संभल जाते हैं और जो नहीं संभल पाते हैं, उनके पास ठोकरे खाने के अलावा कुछ नहीं बचता है। ऐसे भटके हुए युवा घर-परिवार के लिये तो मुश्किलें पैदा करते ही हैं समाज को भी इनसे खतरा रहता है। समाज में जो अपराध बढ़ रहा है उसके पीछे ऐसे ही भटके हुए युवा हैं, जिस देश की 65 प्रतिशत आबादी युवा हो, अगर वह गलत रास्ते पर चल पड़े तो उस देश को कोई बचा नहीं सकता है। यह बात हम-आप सोचते और समझते तो हैं, लेकिन इससे निपटने के लिये कभी उपाय नहीं तलाशे गये। अगर तलाशे भी गये तो वह सीमित  और कमजोर थे।

Central government passed bill just before Ramzan to cause problems to Muslims!

Supreme court, President of India do Justice to Save India… Bismillah ir Rahman ir Rahim. One Country, two slaughter laws, Based on Religion is Pakistani Mentality, not Indian. Central gov passed a law that Cows and Buffallo cannot be traded for slaughter or transportation. Ok, MS Maneka Gandhi, if Central gov passed law which forbids sale or transportation of Cows and Buffallos for slaughter, then why are the 10 big butcher houses of india, which are owned by hindus, are slaughtering Lakhs  of Buffallo daily and sending  the beef to foreign countries.

तीन तलाक से मुक्ति के लिए हनुमानजी की शरण में मुस्लिम महिलाएं

तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के लिए किसी अभिशाप से कम साबित नहीं हो रहा। मुस्लिम समाज में जब जब तीन तलाक अमल में आया है तब तब एक महिला बेसहारा और बेघर हुई है। मुस्लिम समाज में तीन तलाक पुरुषों नें अपने सहूलियत के हिसाब से बनाया है। लेकिन अब देश में इस बेरहम मुस्लिम कानून के खिलाफ आवाज़ें बुलंद हो गयी हैं। अब मुस्लिम महिलाएं खुद ही तीन तलाक के विरोध में आगे आ रही हैं।

दलाल और धार्मिक माफियाओं का संगठित गिरोह है ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’!

इसको बर्खास्त कर आयोग का हो गठन… तलाकशुदा महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों एवम उनको मुख्य धारा में लाने के अधिकारों की आवाज़ बुलंद कर रहे हुदैबिया कमेटी के नेशनल कन्वेनर डॉ. एस.ई.हुदा ने एक बयान जारी कर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर जाम कर निशाना साधा। डॉ. हुदा ने कहा कि मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं की बदहाली और नरकीय ज़िंदगी का पूरी तरह से ज़िम्मेदार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है।

क्या अब किसी भी डेमोक्रेटिक-सेक्युलर समाज में इस्लाम को accomodate करने की जगह नहीं है?

Rajeev Mishra : किसी भी डेमोक्रेटिक सेक्युलर समाज में इस्लाम को accomodate करने की जगह नहीं है… क्यों? जानने के लिए इतिहास का यह सबक फिर से पढ़ें. मूर्तिभंजक इस्लामिक समाज का एक बहुत बड़ा विरोधाभास है – ईरान में तेरहवीं शताब्दी के एक यहूदी विद्वान् राशिद-उद-दिन की एक विशालकाय मूर्ति. राशिद-उद-दिन ने मंगोल सभ्यता का इतिहास लिखा, और उनका अपना जीवन काल समकालीन इतिहास की एक कहानी बताता है जो भारत के लिए एक बहुत जरुरी सबक है.

गंभीर रूप ले रहा मुस्लिमों के खिलाफ बन रहा माहौल

बहुत संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की कोशिश कर रहा हूं। आज की तारीख में यह लिखना बनता भी है। मैं बात कर रहा हूं पुरे विश्व में मुस्लिमों के खिलाफ बन रहे माहौल की। चाहे अमरीका हो, रूस हो, फ्रांस हो, नेपाल हो या फिर भारत या फिर गैर मुस्लिम अन्य कोई देश लगभग सभी देशों में मुस्लिमों के खिलाफ एक अजब सा माहौल बनता जा रहा है। यहां तक कि मुस्लिमों का साथ देते आ रहे चीन में भी। जो मुस्लिम देश हैं या तो वे दूसरे समुदायों से भिड़ रहे हैं या फिर आतंकवाद से जूझ रहे हैं। कहना गलत न होगा कि मुस्लिम समाज पर एक आफत सी आ गई है।

मुस्लिम बहुल क्षेत्र में 30 वर्ष रहने के बाद स्वीडन की पूर्व सांसद नलिन पेकगुल इलाका क्यों छोड़ गईं?

अमेरिकी साम्राज्यवाद और इस्लामी फासीवाद- दोनों जनता के दुश्मन हैं…. नलिन पेकगुल स्टाकहोम (स्वीडन) के सबअर्ब हस्बी टेंस्टा वाले मुस्लिम बहुल इलाके में 30 साल रहने के बाद किसी दूसरे शहर में चली गयी हैं. नलिन पेकगुल कुर्दिश मूल की सोशल डेमोक्रेट नेता हैं और सांसद भी रही हैं वर्ष 1994 से 2002 तक. उनके इलाके में प्रवासी मुसलमानों ने सामाजिक स्पेस को लगभग नियंत्रण में ले लिया है. ऐसे में वह खुद को महफूज़ नहीं समझतीं. पेकगुल स्त्री विमर्श में स्वीडन का जाना पहचाना नाम है.

(नलिन पेकगुल)

टीओआई के राजशेखर झा बताएं, किसके कहने पर नजीब-आईएस वाली ख़बर प्‍लांट की थी?

जेएनयू के लापता छात्र नजीब के बारे में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में इसके पत्रकार राजशेखर झा ने फर्जी खबर प्‍लांट की. इस खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया है कि नजीम यूट्यूब और गूगल पर आईएस (इस्लामिक स्टेट) के बारे में वीडियो आदि खोज देखा करता था, साथ ही वह आईएस की कार्यप्रणाली, विचारधारा, भर्ती आदि के बारे में अध्ययन करता था. खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने नजीब की लैपटाप के जांच के बाद यह जानकारी हासिल की है. उधर, इस खबर के छपने के बाद दिल्ली पुलिस ने खंडन भेज दिया कि उसने ऐसी कोई जांच लैपटाप की नहीं की और न ही ऐसा कोई नतीजा निकला है.

हिन्दू और मुसलमान दोनों पानीपत की तीसरी लड़ाई के घाव आज तक सहला रहे हैं

किसी व्यक्ति परिवार या समाज में कुछ घटनाएं ऐसी हो जाती हैं कि वे सब कई पीढियों तक उस घटना से प्रभावित होते रहते हैं। ये प्रभाव अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। ऐसी ही एक घटना है सन १७६१ में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई। इस लड़ाई के बारे में जानने से पहले लड़ाई क्यों हुई, यह जानना दिलचस्प होगा। इतिहास की एक धारा के मुताबिक उत्तर भारत में अंतिम महान हिन्दू सम्राट हर्ष वर्धन और दक्षिण भारत में रायरायान कृष्णदेव राय थे। मुस्लिम आक्रांताओं के हमले भारत पर आठवीं-नवीं शताब्दी से ही शुरू हो गए थे। लेकिन ११वीं शताब्दी में कुतुबुद्दीन ऐबक के साथ ही भारत में उनके साम्राज्य की शुरूआत हो गई।

किसी हिंदू की मौत पर ‘RIP’ लिखना गलत, जानिए क्या कहा जाना चाहिए

Sarjana Sharama : What is Rest in Peace ( ‪#‎RIP‬) ये “रिप-रिप-रिप-रिप” क्या है? आजकल देखने में आया है कि किसी मृतात्मा के प्रति RIP लिखने का “फैशन” चल पड़ा है, ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि कान्वेंटी दुष्प्रचार तथा विदेशियों की नकल के कारण हमारे युवाओं को धर्म की मूल अवधारणाएँ या तो पता ही नहीं हैं, अथवा विकृत हो चुकी हैं… RIP शब्द का अर्थ होता है “Rest in Peace” (शान्ति से आराम करो), यह शब्द उनके लिए उपयोग किया जाता है जिन्हें कब्र में दफनाया गया हो, क्योंकि ईसाई अथवा मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार जब कभी “जजमेंट डे” अथवा “क़यामत का दिन” आएगा, उस दिन कब्र में पड़े ये सभी मुर्दे पुनर्जीवित हो जाएँगे…

रसूल को मुहम्मद लिखने पर लखनऊ नदवा के एक मौलाना ने मुझे जान से मारने की धमकी दी थी :

Tabish Siddiqui : अमजद साबरी, पाकिस्तान के क़व्वाल, जिनकी कल गोली मार कर ह्त्या कर दी गयी थी, उन पर पहले से एक ईशनिंदा का केस चल रहा था.. ईशनिंदा इस वजह से उन पर लगाई गयी थी क्यूँ कि उन्होंने पाकिस्तान के Geo टीवी पर सुबह के वक़्त आने वाले एक प्रोग्राम में क़व्वाली गायी.. और उस क़व्वाली में पैग़म्बर मुहम्मद के चचेरे भाई अली और बेटी फ़ातिमा की शादी का ज़िक्र था.. ज़िक्र कुछ ज़्यादा डिटेल में था जो कि मौलानाओं को पसंद नहीं आया.. और Geo टीवी समेत अमजद साबरी पर ईशनिंदा का मुक़दमा कर दिया गया.. और फिर एक आशिक़-ए-रसूल ने अदालत से पहले अपना फैसला दे दिया क्यूंकि उनके हिसाब से ईशनिंदा की सज़ा सिर्फ मौत थी जो पाकिस्तान की अदालत शायद ही देती एक क़व्वाली के लिए किसी को…

मुसलमानों ने मस्जिद के अंदर योग करके प्रतिमान कायम किया (देखें वीडियो)

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यूपी के हाथरस जिले के गांव अल्हैपुर चुरसैन के मुलमानों ने मस्जिद के अंदर योग करके उन लोगों को आइना दिखाया है जो ओम उच्चारण और सूर्य नमस्कार का बहाना बनाकर योग को धर्म से जोड़ने का काम कर रहे हैं। साथ ही यह संदेश भी दिया है कि योग से धर्म का कोई लेना देना नहीं है और भागदौड़ की जिंदगी में शरीर की हिफाजत के लिए योग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मूर्ख पत्रकार अवनींद्र कमल ने मुस्तकीम को रोजे में चाय पीते हुए बताया और इसे दैनिक जागरण ने छाप दिया!

Wasim Akram Tyagi : दैनिक जागरण का एक पत्रकार अवनीन्द्र कमल कैराना पहुंचा. लौटकर अपने हिसाब से ‘बेहतरीन’ रिपोर्ताज लिखा. शीर्षक है- ”फिलहाल कलेजा थामकर बैठा है कैराना”. यह रिपोर्ताज जागरण के 20 जून के शामली संस्करण में प्रकाशित भी हो गया. अब जरा इन महोदय की लफ्फाजी देखिये…

आजतक में कार्यरत शम्स ताहिर खान, रेहान अब्बास, मुहम्मद अनस जुबैर और शादाब मुज्तबा की फेसबुक पर क्यों हो रही है तारीफ, आप भी पढ़िए

Vikas Mishra : मेरे दफ्तर में शम्स ताहिर खान, रेहान अब्बास, मुहम्मद अनस जुबैर, शादाब मुज्तबा हैं, उच्च पदों पर हैं ये लोग, बेहद जहीन। जानते हैं कि इनमें एक समानता क्या है, इन सभी की एक ही संतान है और वो भी बेटी। वजह क्या है, वजह है इनकी तालीम, इनकी शिक्षा। क्योंकि इन्हें पता है कि जिस संतान के दुनिया में आने के ये जरिया बने हैं, उसके पालन-पोषण में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इन्हें नहीं रटाना है कम संतान-सुखी इंसान।

खाड़ी देशों की मजबूरी थी औरतों को ढंकना, गलती से बिना ढंकी स्त्री दिख जाती तो वो कामोत्तेजक हो जाते

Tabish Siddiqui : पहले हमारे यहाँ ब्लैक एंड वाइट टीवी होता था “बेलटेक” कंपनी का जिसमे लकड़ी का शटर लगा होता था जिसे टीवी देखने के बाद बंद कर दिया जाता था.. चार फ़ीट के लकड़ी के बक्से में होता था वो छोटा टीवी.. शटर बंद करने के बाद उसके ऊपर से एक पर्दा और डाला जाता था क्रोशिया से बुना हुवा.. लोगों के यहाँ फ्रिज टीवी और हर उस क़ीमती चीज़ पर पर्दा डाल के रखा जाता था जो उन्हें लगता था कि धूल और गर्मी से खराब हो जाएगा.. बाद में जब बिना शटर के टीवी आया तो वो मुझे बहुत अजीब सा नंगा नंगा दिखता था.. क्यूंकि मुझे उसी शटर में बंद टीवी की आदात थी.. फ्रीज़ से कपड़ा हट जाता तो वो भी नंगा दिखने लगता था…

पैगम्बर के घर पर बुलडोजर क्यों चला?

अभी हाल में सऊदी अरब का दौरा करके लौटे हैं। सुना है उन्होंने अरब के बादशाह सलमान बिन अब्दुल अजीज को एक गजब का तोहफा दिया। वह केरल में दुनिया में अरब के बाहर बनी दुनिया की पहली मस्जिद की प्रतिकृति थी। इस मस्जिद को केरल के एक हिंदू राजा ने मुहम्मद साहेब के जीवनकाल में ही 629 ईसवी में बनवाया था। 14वीं सदी में मशहूर यात्री इब्नाबतूता वहां गया था और उसने लिखा कि मुसलमान वहां कितने सम्मानित हैं।

विवाद के बाद बंद हुए ‘उर्दू टाइम्स मुंबई’ अखबार को ‘मुम्बई उर्दू न्यूज़’ नाम से लाने की तैयारी!

मुम्बई । उर्दू टाइम्स मुंबई का पिछले 3 महीने से प्रकाशन बन्द हो गया है। इसकी वजह चाचा भतीजे के बीच पारिवारिक सम्पत्ति का बटवारा बताया जा रहा है। सईद अहमद और इम्तेयाज के बीच चल रहे विवाद में मुम्बई का एक पुराना उर्दू अखबार लगभग 3 महीना पहले से पूरी तरह बन्द हो गया है। अभी तक दोनों फरीक किसी नतीजे पर नही पहुँचे है। अब उर्दू टाइम्स के पार्टनर सईद अहमद के भतीजे इम्तेयाज मुम्बई उर्दू न्यूज़ नामक अखबार लाने की जुगत में हैं।

देश के मुसलमानों को दलितों से सीखना चाहिए राजनीति का सबक

इमामुद्दीन अलीग

इतिहास के अनुसार देश के दलित वर्ग ने सांप्रदायिक शोषक शक्तियों के अत्याचार और दमन को लगभग 5000 वर्षों झेला है और इस इतिहासिक शोषण और भीषण हिंसा को झेलने के बाद अनपढ़, गरीब और दबे कुचले दलितों को यह बात समझ में आ गई कि अत्याचार, शोषण,सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और भेदभाव से छुटकारा पाने का एकमात्र तरीका यही है कि राजनीतिक रूप से सशक्त बना जाए। देश की स्वतन्त्रता के बाद जब भारत में लोकतांत्रिक शासन की स्थापना की गई तो दलितों ने इसे  अपने लिए एक बहुत बड़ी नेमत समझा। इस शुभ अवसर का लाभ उठाते  हुए पूरे के पूरे दलित वर्ग ने सांप्रदायिक ताकतों के डर अपने दिल व दिमाग से उतारकर और परिणाम बेपरवाह होकर अपने नेतृत्व का साथ दिया, जिसका नतीजा यह निकला कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जनसंख्या के आधार 18-20% यानी अल्पसंख्यक में होने के बावजूद भी उन्होंने कई बार सरकार बनाई और एक समय तो ऐसा भी आया कि जब दलितों के चिर प्रतिद्वंद्वी मानी जाने वाली पार्टी भाजपा को भी दलित नेतृत्व के सामने गठबंधन के लिए सिर झुकाना पड़ा।

मुस्लिम लड़के से प्यार में धोखा खाई तो मरने के पहले पूरे कौम को कमीना बता गई (पढ़ें पत्र)

Sanjay Tiwari : वह दलित होकर भी वेमुला नहीं थी। न ही अखलाक हो पायी थी। आनंदी होती तो टीवी रोता। सोशल मीडिया भी निंदा ही करता लेकिन उसका दुर्भाग्य यह था कि वह न रोहित थी, न टीवी की आनंदी, इसलिए बिहार के एक जिले में सिंगल कॉलम की खबर बनकर रह गयी। लेकिन पूनम भारती की मौत का एक संदेश है। उसी तरह का संदेश जैसे रोहित वेमुला की मौत में एक संदेश था। पूनम भारती एक ऐसे झूठे फरेब का शिकार हुई जिससे वह प्यार के आवेग में बच नहीं पायी।

धार्मिक जनगणना के डाटा पर टीओआई और द हिंदू के इन शीर्षकों को गौर से पढ़िए

See how two of India’s leading newspapers have today reported the same data (of the latest Census)

Nadim S. Akhter : इसे देखिए, पढ़िए और समझिए. देश के दो प्रतिष्ठित अखबारों निष्ठा. किसकी निष्ठा पत्रकारिता के साथ है और किसकी चमचई में घुली जा रही है, खबर की हेडिंग पढ़ के समझा जा सकता है. मैंने कल ही फेसबुक की अपनी पोस्ट में लिखा था कि अलग-अलग चम्पादक, माफ कीजिए सम्पादक धार्मिक जनगणना के इस डाटा का अपने अपने हिसाब से इंटरप्रिटेशन करेंगे. आज फेसबुक पर एक ही खबर के दो एंगल, बिलकुल जुदा एंगल तैरता हुआ देखा तो आपसे साझा कर रहा हूं.