मुसलमानों के मामले में मीडिया ने अपने सिद्धांत और अक्ल, दोनों बेच खाए हैं!

उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनाव नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। दस्तूर के मुताबिक सोशल मीडिया से यह वीडियो मेन-स्ट्रीम मीडिया के पास पहुंचा और पिछले कुछ वक्त से जो  हमेशा होता चला आ रहा है, वही हुआ। एक फर्जी वीडियो के सहारे एक विशेष तबके को देश विरोधी बताने की कोशिश हुई। हां, मैं वीडियो को फर्जी कह रहा हूं क्योंकि वह फर्जी ही है। वीडियो के ऑडियो और विजुअल लेवल में जो फर्क है उसे देख कोई बच्चा भी बता देगा कि वीडियो असली नहीं हो सकता। न्यूज पोर्टल Alt News ने तो इसकी पड़ताल भी की और वीडियो के फर्जी होने की तरफ इशारा भी किया। बाकी, फॉरेंसिक जांच में तो सच सामने आ ही जाएगा।

बहरहाल, मैं बात कर रहा था मेन-स्ट्रीम मीडिया की। यह पहली बार नहीं है जब मेन-स्ट्रीम मीडिया के कुछ संस्थानों, चाहे वह टीवी हो या डिजिटल, ने ऐसी गलती की है। एक गलती एक बार होती है, लेकिन एक ही गलती बार-बार क्यों हो रही है? कन्हैया कुमार का फर्जी वीडियो वाला मामला तो देशभर में मशहूर है। इसकी वजह से तो मीडिया की काफी लानत-मलानत हुई थी। आखिर मामला क्या है? मीडिया ने अक्ल बेच खाई है या सिद्धांत? किसके लिए काम कर रहे हैं ये?  इस वीडियो के मामले में दो लोग गिरफ्तार भी हो गए। अगर फॉरेंसिक जांच में वीडियो फर्जी निकला तब क्या होगा?

मेन-स्ट्रीम मीडिया का काम क्या है? यह उसके मालिक और मठाधीश अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से तय करते रहें। लेकिन सबसे खतरनाक बात है कि इस काम की आड़ में मीडिया के एक बुनियादी सिद्धांत की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बुनियादी सिद्धांत यानी सच!

ज़ी टीवी 2000 रुपये के नोट में  नैनो जीपीएस चिप लगे होने का दावा कर देता है! इंडिया न्यूज कन्हैया कुमार के फर्जी वीडियो चला देता है। इनके सूत्र क्या हैं? क्या ये सब असली गलतियां लगती हैं? क्या इसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं? क्या ये सच में इतने मासूम हैं? हाल इतना बुरा है कि गलत खबर चलाने के बाद माफीनामा भी नहीं दिया जाता। मेन-स्ट्रीम मीडिया के ज्यादातर संस्थान किसके हित में काम कर रहे हैं? यह आप सब बखूबी जानते हैं।

इसी बीच फर्जीवाड़े की आड़ में एक और खतरनाक काम, वक्त-बेवक्त, जाने-अनजाने, मुसलमानों पर निशाना साधने का होता है। अररिया लोकसभा सीट से राजद उम्मीदवार सरफराज आलम की जीत पर “माननीय” गिरिराज सिंह कहते हैं कि अररिया अब आतंकवाद का गढ़ बन जाएगा। सिंह से पहले उपचुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के “प्रदेश अध्यक्ष”, ध्यान से पढ़िएगा- “प्रदेश अध्यक्ष” नित्यानंद राय ने सरफराज आलम के जीतने पर अररिया को ISI के लिए सुरक्षित स्थान बन जाने की बात कही थी। ऐसे बयान देकर यह कहना क्या चाहते हैं?

विवादित बयानों के माहौल के बीच एक वीडियो वायरल हो जाता है। टीवी के सामने बैठे दर्शक को परोसा जाता है कि अररिया के इस वीडियो में “पाकिस्तान जिंदाबाद” और “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे नारे लगाए गए। वीडियो में नारे न तो ठीक से सुनाई ही देते हैं, न ही दिखाई देते हैं। इसके बावजूद आजतक और टाइम्स नाउ जैसे प्रमुख टीवी न्यूज चैनल इसका प्रसारण करते हैं। प्रसारण करने से पहले वे एक बार भी इसके सोर्स की पुष्टि करना जरूरी नहीं समझते। उन्हें वीडियो के ऑडियो-विजुअल लेवल्स में फर्क देखकर भी शक नहीं होता! ऐसे ही कासगंज का मामला पुराना नहीं है। यहां 26 जनवरी के मौके पर मुस्लिम बहुल इलाके में लोग तिरंगा फहरा रहे थे। बेवजह एक गुट तिरंगे के साथ भगवा झंडा लेकर पहुंच जाता है। फसाद होता है और एक नौजवान चंदन गुप्ता की मौत हो जाती है।

इस मामले की आजतक पर रोहित सरदाना इस तरह कवरेज करते हैं मानो मुस्लिम बहुल इलाके में तिरंगा नहीं, पाकिस्तान का झंडा फहराया जा रहा था। ऐसा करके वह एक समुदाय के खिलाफ दूसरे समुदाय के लोगों के दिलों में कितनी नफरत भर रहे हैं, क्या इस बात का अंदाजा उन्हें नहीं है? ऐसे ही कई और मामले हैं जिनकी सूची बनने लगे तो शायद ही कभी खत्म हो पाए। मीडिया को यह हक नहीं कि वह एक कौम को जलील करता रहे। एक धर्म विशेष के लोगों पर बार-बार निशाना साधना गलत है। प्राथमिकताओं के लिए मीडिया को “एथिक्स” बेचने हैं तो बेचे, लेकिन मुसलमानों को देश का दुश्मन दिखाना बंद होना चाहिए।

नदीम अनवर
पत्रकार
nadeem.anwar7861@gmail.com

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इस बचकानेपन से कब बाहर निकलेंगे वाइज़…

वाइज़, निकाह करने दे ‘बैंकवालों’ से चाह कर… या वो रक़म बता जिसमें ‘सूद’ शामिल न हो..

डॉ राकेश पाठक
चार दिन पहले दारुल-उलूम, देवबंद से फ़त्वा जारी हुआ है कि मुसलमान बैंक में बैंक में नौकरी करने वालों के यहां कोई नाते रिश्तेदारी, ब्याह,शादी करने से परहेज़ करें। फ़त्वे में कहां गया है कि बैंक ब्याज़ या सूद का कारोबार करते हैं इसलिए उसकी कमाई हराम है। इससे चलने वाले घर का व्यक्ति अच्छा नहीं हो सकता। इस फ़त्वा को मुसलमानों ने किस तरह लिया इस पर बात करने से पहले यह जान लेना मुनासिब होगा कि आखिर फ़त्वा है क्या बला..? इसकी शरिया में क्या हैसियत है और मुसलमान इसे कितनी तवज्जो देते हैं?
दरअसल फ़तवा उसे कहते हैं जो क़ुरान या हदीस के मुताबिक़ निर्देश या आदेश ज़ारी किया जाए।

फ़तवा कोई मुफ़्ती ही ज़ारी कर सकता है जिसे इस्लाम,शरिया कानून और हदीस की गहन जानकारी हो। कोई इमाम या मौलवी फ़त्वा जारी नहीं कर सकता। वैसे फ़त्वा हुकुम नहीं होता, राय या मशविरा होता है। दारुल उलूम के फ़त्वा विभाग “दारुल इफ्ता” ने एक शख्स के सवाल पर यह फ़तवा ज़ारी किया है कि बैंक में नौकरी करने वाले के यहां कोई शादी ब्याह न करें। बैंक ब्याज़ का कारोबार करते हैं और शरिया कानून में ब्याज़ के लिए रक़म लेना देना हराम है।

फ़त्वे में कहा गया कि हराम दौलत (बैंक की तनख्वाह) से चलने वाले घर का व्यक्ति सहज प्रवृत्ति और नैतिक रूप से अच्छा नहीं हो सकता। मुसलमानों को चाहिए कि वे किसी ‘पवित्र’ घर से ही रिश्ता जोड़ें। इस फ़तवे पर सवाल उठ रहे हैं। पहला तो यह कि आज कौन सा ऐसा कारोबार होगा जिसका बैंक में खाता नहीं होगा। खाता होगा तो ब्याज़ भी लगता ही होगा। तो कोई भी नौकरी ऐसे नहीं हो सकती जिसमें मिलने वाली तनख्वाह में इस तरह ब्याज़ की रक़म शामिल न हो। अगर कोई मुसलमान छोटा मोटा कारोबार। भी करता है तो उसका बैंक में खाता भी होगा ही, तब वो ब्याज़ से कैसे बच सकता है?

इसके अलावा गौरतलब यह भी है कि सरकारी नौकरी करने वालों को जो तनख्वाह मिलती है वह भी तो किसी न किसी रूप में ब्याज़ या सूद से जुड़ी होती है। सरकारें को पूरा कारोबार जिस रक़म से चलता है वह बिना बैंकिंग सिस्टम के सम्भव ही नहीं है। तब तो सरकारी नौकरी वाले हर आदमी के घर “हराम”की ही रक़म पहुंचती है। कुछ इस्लामिक देश ही हैं जहां बैंक ब्याज़ रहित बैंकिंग करते हैं बाक़ी कोई नहीं। इसके अलावा ऐसी कोई रक़म कैसे होगी जिसमें कहीं, किसी तरह का ब्याज़ शामिल न हो!

Saundarya naseem लिखतीं हैं कि “इस बचकानेपन से कब बाहर निकलेंगे वाइज़.. जितनी दिमागी कसरत फ़त्वा ज़ारी करने पर करते हैं उसकी आधी भी खातूने-खान और खातून-महफ़िल की तालीम पर करें तो दुनिया शायद जन्नत बन जाये।”

एक और फ़त्वा ज़ारी हुआ है जिसमें कहा गया है कि औरतें डिजायनर और तंग बुर्के पहनकर घर से बाहर न निकलें। इस पर सौंदर्या नसीम लिखतीं हैं कि ” मेरे ख़याल से हर पैरहन डिजायन का पाबंद है। जैसे ही कपड़े को सुई धागे या सिलाई मशीन के हवाले करते हैं, डिजायन का काम शुरू हो जाता है।” वे सवाल करतीं हैं कि..” फिर उस अल्लाह पर कौन सा फ़त्वा ज़ारी करेंगे जिसने कि दुनिया की सारी औरतों को ही बेलिबास और बिना बुर्क़ा के धरती पर भेज दिया।”

उधर शिक्षा विभाग से रिटायर अधिकारी आई यू खान कहते हैं कि- “ब्याज़ या सूद की रकम हराम मानी गयी है।बैंक में काम करने वाले के घर यह हराम की रकम तनख्वाह के रूप में आती है। मुसलमानों को चाहिए कि वे इस फ़तवे पर गौर ज़रूर करें। उन्होंने कहा कि वैसे देवबंद का फ़त्वा एक मशवरा ही है, कोई पाबंदी नहीं।”

लेखक डॉ राकेश पाठक “कर्मवीर” के प्रधान संपादक हैं. संपर्क : rakeshpathak0077@gmail.com

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ये मुस्लिम लड़की भी है ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ (देखें वीडियो)

हापुड़ की इस ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ से मिलिए… सपने थे फैशन डिजायनर बनने के, बन गई जज… आमिर खान की फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में एक लड़की अपने मां के सपने पूरे करने और अपनी मंजिल पाने के लिए जीतोड़ प्रयास करती है और सफल हो जाती है. इसी किस्म की कहानी हापुड़ की इस ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ की है. यूपी के हापुड़ जिले की मुस्लिम लड़की जेबा रउफ जज बन गई है, मात्र 27 साल की उम्र में.

जेबा का ये पहला प्रयास था और उसने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज जूनियर डिविजन (पीसीएस-जे) में 35वी रैंक हासिल करने में कामयाबी पाई. जेबा रउफ फैशन डिजाइनर बनना चाहती थी लेकिन उसने अपने माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए जज बनने का फैसला लिया. जेबा रउफ हापुड़ के सिटी कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास के रहने वाले अब्दुल रउफ की बेटी है. 27 वर्षीय जेबा का सपना था फैशन डिजाइनर बनने का. पर माता पिता की इच्छा देख वह जज बनी.

जेबा ने डीयू से एलएलबी की है. फिर प्राइवेट कोचिंग ली. जेबा ने पीसीएस-जे 2016 की परीक्षा दी जिसमें सफल हुई. जेबा ने लड़कियों और महिलाओं को सन्देश दिया है कि वो पढ़ाई करें और अपने जीवन में कामयाबी प्राप्त करें।

देखें संबंधित वीडियो :

-हापुड़ से राहुल गौतम की रिपोर्ट.

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एनडीटीवी के मुस्लिम पत्रकार ने ‘जय श्री राम’ कहकर बचाई अपने साथ पूरे परिवार की जान!

28 जून 2017 के दिन बिहार सफ़र के दौरान समसतीपुर नेशनल हाईवे के मारगन चौक पर बजरंग दल के लोग ट्रक को रास्ते में रोककर रास्ता जाम कर रखा था. मैं कार लेकर खड़ा ही हुआ था कि केसरिया गमछा गले मे डाले कई लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते आ पहुंचे, मैंने पूछा क्यों रास्ता जाम है. पूछते ही कई लोगों ने मेरी कार के अंदर बैठी मेरे मां-पिता के साथ पत्नी पर नज़र डाली.  चूंकि मेरे पिताजी दाढ़ी रखे हुए हैं और पत्नी नक़ाब पहनती हैं तो इसको देखते हुए नारेबाज़ी तेज़ हो गई.

जब तक समझ पाता दो लोगों ने कार के शीशे के अंदर अपना अपना सिर घुसाकर कहा कि बोलो ‘जय श्री राम’ वरना कार फूंक देंगे. मैं दहशत में आ गया. वैसे मैं सभी मज़हबों का बहुत सम्मान करता हूं. मैं दिल से राम जी का सम्मान भी करता हूं. उनकी जय करने में मुझे कोई एतराज़ भी नहीं होता. लेकिन जिस दहशत में वह मुझे जय श्री राम कहलाना चाहते थे, अच्छा नहीं लगा. लेकिन दहशत में मुझे जय श्री राम कहकर अपने परिवार को बचाकर वापस भागकर जान बचानी पड़ी.

कुछ दूर जाने के बाद मैंने ट्विटर पर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को टैग करते हुए ट्वीट किया. जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार और राजद विघायक अखतरूल इस्लाम शाहीन को फोन करके मामले की जानकारी दी. अनुरोध किया कि तत्काल मामले में पुलिस मुस्तैदी के साथ सक्रिय हो ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे. बहरहाल मां को बहुत बीमार मामा से मिलाने के लिए किसी तरह रास्ता बदल कर मैं अपने ननिहाल रहीमाबाद पहुंचा. वापसी जल्द दिल्ली की होने वाली है. लेकिन नीतिश कुमार के राज में तांडव समझ में नहीं आया. किसी को नुक़सान ना हो, लेकिन इसके बाद भी आज भी मेरे दिल मे राम जी को प्रति आस्था कम नहीं हुई है.

एनडीटीवी के मीडियाकर्मी एम अतहरउददीन मुन्ने भारती की एफबी वॉल से.

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भटके मुस्लिम युवकों को सुधारने के लिए यूपी एटीएस का ‘डी-रेडिक्लाइजेशन’ अभियान!

संजय सक्सेना, लखनऊ

युवा अवस्था में भटकाव लाजिमी है। कभी गलत संगत तो कभी बिगड़ी सोच के कारण युवा अपने मार्ग से भटक जाता है। ऐसा नहीं है कि पूरा युवा समाज ही भटकाव से जूझ रहा हो, ऐसे युवा भी हैं जो अपनी स्पष्ट और लक्ष्य भेदी सोच के कारण सही राह पर चलते हुए अपने कुल और देश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन इससे इत्तर कड़वी सच्चाई तो यही है कि भटकने वाले युवाओं का ग्राफ काफी ऊपर है। शायद ही कोई ऐसा युवा होगा जो दावे के साथ कह सके कि उसकी जिंदगी में भटकाव वाला मोड़ कभी नहीं आया। हॉ,सच्चाई यह भी है कि समय के साथ परिपक्त होने पर कुछ युवा संभल जाते हैं और जो नहीं संभल पाते हैं, उनके पास ठोकरे खाने के अलावा कुछ नहीं बचता है। ऐसे भटके हुए युवा घर-परिवार के लिये तो मुश्किलें पैदा करते ही हैं समाज को भी इनसे खतरा रहता है। समाज में जो अपराध बढ़ रहा है उसके पीछे ऐसे ही भटके हुए युवा हैं, जिस देश की 65 प्रतिशत आबादी युवा हो, अगर वह गलत रास्ते पर चल पड़े तो उस देश को कोई बचा नहीं सकता है। यह बात हम-आप सोचते और समझते तो हैं, लेकिन इससे निपटने के लिये कभी उपाय नहीं तलाशे गये। अगर तलाशे भी गये तो वह सीमित  और कमजोर थे।

कल के भारत का भविष्य 20 से 30 वर्ष के जिन युवाओं के हाथ में हैं युवा आज हताश होकर घूम रहा है तो कल का भारत सशक्त हो ही नहीं सकता है। इसी हताशा में उसे कभी मोदी में आशा दिखती है तो कभी योगी में विश्वास नजर आता है। कभी अरविंद केजरीवाल अपना आईकॉन लगते है तो कभी नीतीश कुमार सुशासन बाबू नजर आते है। यहां तक तो सही रहता है, लेकिन जब इन युवाओं को बगदादी, बुरहावानी, अफजल गुरू, लादेन, जुनैद मुट्टू जैसे आतंकवादी आदर्श लगने लगते हैं तो फिर खतरा सामने खड़ा नजर आता है। ऐसे भटके युवा कभी धर्म के नाम पर बंदूक उठा लेते  है, तो कभी दूसरे धर्म का उपहास उड़ाते हैं। इनमें तमाम युवा ऐसे होेते हैं जिनको अपनी मंजिल तो पता होती है, परंतु उनका ब्रेनवाश करके आतंक के रास्ते पर भेज दिया जाता है। फिर तो इन्हें न अपने लक्ष्य की चिंता रहती है और न ही समाज के प्रति अपने दायित्व की। मगर ऐसे युवाओं को उनके हाल पर छोड़ देना भी तो सही नहीं है। यह बात पूर्ववर्ती सरकारों को भले ही न समझ में आई हों,लेकिन योगी सरकार को यह बात सौ दिनों के अंदर ही समझ में आ गई कि बिगड़े युवाओं को अगर सही राह पर ढकेल दिया जाये तो यह समाज और देश के लिये बेशकीमती हो सकते हैं। योगी सरकार ने इसके लिये एक रोड मैप तैयार किया है ताकि आतंकवाद की तरफ मुड़ गये युवाओं की घर वापसी हो सके।

योगी सरकार सैद्वातिक रूप से आतंकी मानसिकता से ग्रसित युवकों को सही रास्ते पर वापस लाने के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के ‘डी-रेडिक्लाइजेशन’ (कट्टरता से बाहर निकालना) अभियान को कानूनी मान्यता देकर अल्पसंख्यकों को एक बड़ा तोहफा प्रदान करने जा रही है। दरअसल, खुफिया जांच एजेंसियों द्वारा समय-समय पर आतंक की राह पकड़ चुके कई युवाओं से पूंछताछ में यह बाज जाहिर हुई थी,कुछ युवाओं को अपनी करनी पर पछतावा था। कच्ची उम्र और अनुवभवहीनता के कारण यह युवा धर्म के ठेकेदारों और कट्टरपंथियों के हाथ की कठपुतली बन गये थे,जिसका इन्हें पछतावा भी हो रहा था। एटीएफ ने पूछताछ में यह भी पाया कि आतंकी संगठनों के गुर्गे आर्थिक रूप से कमजोर, भटके युवकों को कट्टर बनाने का प्रयास करते हैं। उनके अंदर नफरत के बीज बोकर आतंकी भावना भरने का प्रयास करते हैं। हाल ही में यूपी एटीएस ने ऐसे युवकों को वारदात में शामिल होने से पहले उनकी पहचान कर उनको सही राह पर लाने का अभियान शुरू किया था।

गौरतलब हो, पिछले पांच महीनों में तमाम प्रदेशों की पुलिस ने साझा अभियान चलाकरं चार आतंकियों के साथ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के इल्जाम में छह युवकों को हिरासत में लिया था। पूछताछ में युवकों को पथभ्रष्ट किए जाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ था। मगर वे अपराध, आतंकी गतिविधि में शामिल नहीं पाए गए थे। इस पर एटीएस अधिकारियों ने युवकों पर निगरानी बनाए रखने के साथ छोड़ दिया। उसी समय एटीएस के आइजी असीम अरुण ने कहा था कि ‘युवकों के कट्टरता की जद में आने, राह भटकने के कारणों की पड़ताल कर उन्हें सही रास्ते पर लाने का प्रयास किया जाएगा। अपराधी, आतंकी पकड़ने में इनका इस्तेमाल नहीं होगा।’ एटीएस ने इस दिशा में प्रयास तेज किया। युवकों के परिवार, उनके मित्र और धर्म गुरुओं की मदद से उनकी काउंसिलिंग शुरू कराई जिसका नतीजा काफी सार्थक निकला।

‘डी-रेडिक्लाइजेशन’ यानी कट्टरता से बाहर निकालने के लिये ऐसे युवाओं को चिह्न्ति करकेे एटीएस अधिकारी लगातार संपर्क में रहते हैं। कुछ दिनों तक संबंधित को एटीएस कार्यालय बुलाकर बातचीत होती है। फिर बातचीत को साप्ताहिक और पाक्षिक में तब्दील किया जाता है। इस प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाता है। एक साल तक संपर्क के बाद मुलाकात सीमित की जाती है। रोजगार का इंतजाम व विवाह के बाद माना जा सकता है कि वह कट्टरता के प्रभाव से बाहर निकल गया है। आईजी ने बताया कि पिछले दो महीने में 125 से अधिक लोग उनसे सम्पर्क कर चुके है। अभी तक सात परिवारों के किसी न किस सदस्य को मुख्य धारा से जोड़ा जा चुका।

आईजी एटीएस कहते है कि अगर किसी युवक के गुमराह होने की खबर मिलती है या उसकी गातिविधियां संदिग्ध दिखाई देती है तो उसकी उनके परिवार, मित्र, धर्मगुरूओं के साथ मिल कर काउंसलिंग कराई जाती है। कभी-कभी परिवार के लोग यह मानने को तैयार नहीं होते है कि उनका बेटा गलत रास्ते पर जा रहा है। ऐसे परिवारों को इसके लिए सुबूत दिखाए जाते हैैं ताकि परिवार उसे सही रास्ते पर लाने के लिए प्रेरित कर सके।

लेखक संजय सक्सेना लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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Central government passed bill just before Ramzan to cause problems to Muslims!

Supreme court, President of India do Justice to Save India… Bismillah ir Rahman ir Rahim. One Country, two slaughter laws, Based on Religion is Pakistani Mentality, not Indian. Central gov passed a law that Cows and Buffallo cannot be traded for slaughter or transportation. Ok, MS Maneka Gandhi, if Central gov passed law which forbids sale or transportation of Cows and Buffallos for slaughter, then why are the 10 big butcher houses of india, which are owned by hindus, are slaughtering Lakhs  of Buffallo daily and sending  the beef to foreign countries.

Central gov passed this bill just before Ramzan to cause Problems to Muslims. But mr Modi, we Muslims wont die if we wont eat cow or Buffallo’s beef. I call upon the President of India, supreme court to Immediately order the closure of Butcher houses located in Mumbai, Up and rest of central and north India, which slaughter Buffallo and send beef to foreign country, if Indian laws are not bigotry.

Supreme court, if in UP or Mh or Rj someone possess 100 gms of beef, he would get 7 years of prison or mob lynching, under government’s supervision. But anyone in these same states should also get 7 years imprisonment, for using belt, Bags, purses, sofa covers, car seats made up of cow or buffalo Skin.

Supreme court ban leather industry in India which relies on Cow or Buffallo skin, Because according to Indian gov, cow or buffallo cant be slaughtered, then how can leather industry use their Skin to make bags, purses, belts, car seats etc etc.

MR President sir, honourable Supreme court, implement central gov law by banning Leather industry in India completely. This is India, this is not Bangladesh, that there should be two eating  laws for Muslims and hindus. Judges and gov of bangladesh are slaves of rich Bangladeshi businessmen.

But judges, courts and President of India are not slaves of rich indian businessmen , nor do they take bribe from rich businessmen, nor are they communally bigot, like bangladeshi  institutioons. Our Indian courts, judges, President are sincere, free from all sorts of bribes, influences and communal Fanaticism.

So my request our Country’s Courts and President to ban all big slaughter houses which send beef to foreign countries Immediately, plus ban leather industry in India Completely which relies on Cow or Buffallo skin. I also call upon Supreme court and President of India, National Human rights commission, to give rs 10 crore compensation per family per person killed ,  of all those Muslims who were Moblynched since bjp gov came to power in india. Why is Supreme court, Judiciary and President of India silent over Mob lynching of Muslim minority Men, why? I hope the reason is not dirty communal biase.

Jai hind. 

MD Rizwan S

mdrizwans.engineer@gmail.com

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तीन तलाक से मुक्ति के लिए हनुमानजी की शरण में मुस्लिम महिलाएं

तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के लिए किसी अभिशाप से कम साबित नहीं हो रहा। मुस्लिम समाज में जब जब तीन तलाक अमल में आया है तब तब एक महिला बेसहारा और बेघर हुई है। मुस्लिम समाज में तीन तलाक पुरुषों नें अपने सहूलियत के हिसाब से बनाया है। लेकिन अब देश में इस बेरहम मुस्लिम कानून के खिलाफ आवाज़ें बुलंद हो गयी हैं। अब मुस्लिम महिलाएं खुद ही तीन तलाक के विरोध में आगे आ रही हैं।

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में तीन तलाक के संकट से मुक्ति पाने के लिए मुस्लिम महिलाएं संकटमोचन हनुमान जी की शरण में पहुंच गई हैं। मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं ने बनारस के पातालपुरी मठ में 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया। मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम, मइया सीता, चारों भाईयों सहित संकटमोचन हनुमान की विधिवत् हवन पूजन कर हनुमान चालीसा पाठ की शुरुआत की।

मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा आज के ही दिन 10 मई 1857 को देश में अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति के लिए स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत हुई। इस घटना के ठीक 160 साल बाद तीन तलाक जैसी सामाजिक कुप्रथाओं से मुक्ति के लिए संघर्ष की शुरुआत हुई है।

नाजनीन ने कहा 11 मई को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ में तीन तलाक पर सुनवाई होनी है। इस तीन तलाक प्रथा से देशभर की मुस्लिम महिलाओं में बेचैनी है और सबकी निगाह सुप्रीम कोर्ट पर लगी हुई है। इसलिए सुनवाई से एक दिन पूर्व तुलसीदास जी द्वारा स्थापित हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा के पाठ का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक अमानवीय है। इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे है। नाजनीन अंसारी ने कहा कि तीन तलाक देकर बेघर करने वाले धर्म का हवाला न दें।

विकास यादव
वाराणसी
vikasyadavapn@gmail.com

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गंभीर रूप ले रहा मुस्लिमों के खिलाफ बन रहा माहौल

बहुत संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की कोशिश कर रहा हूं। आज की तारीख में यह लिखना बनता भी है। मैं बात कर रहा हूं पुरे विश्व में मुस्लिमों के खिलाफ बन रहे माहौल की। चाहे अमरीका हो, रूस हो, फ्रांस हो, नेपाल हो या फिर भारत या फिर गैर मुस्लिम अन्य कोई देश लगभग सभी देशों में मुस्लिमों के खिलाफ एक अजब सा माहौल बनता जा रहा है। यहां तक कि मुस्लिमों का साथ देते आ रहे चीन में भी। जो मुस्लिम देश हैं या तो वे दूसरे समुदायों से भिड़ रहे हैं या फिर आतंकवाद से जूझ रहे हैं। कहना गलत न होगा कि मुस्लिम समाज पर एक आफत सी आ गई है।

मैं इस माहौल का बड़ा कारण मुस्लिम समाज में पनपे आतंकवादी संगठनों को मानता हूं। चाहे आईएसआईएस हो, लस्कर ए तैयबा हो। या फिर अन्य कोई संगठन। लगभग सभी आतंकी संगठन किसी न किसी रूप में मुस्लिम समाज से संबंध रखते हैं। यही वजह है कि जब भी आतंकवाद पर कोई बड़ी बहस होती है तो मुस्लिम समाज को कटघरे में खड़ा किया जाता है। आतंकवाद मुद्दे पर मुस्लिम समाज की चुप्पी से गलत संदेश जा रहा है।

मुस्लिमों को समझना होगा कि आतंकवाद मुद्दे पर मुस्लिम देश के रूप में पहचान बना चुपे पाकिस्तान की खुलकर पैरवी करने वाले चीन में भी मुस्लिमों के लिए अच्छी खबर नहीं आ रही हैं। हाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हाफिज सईद की पैरवी करने तथा आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का साथ न देने वाले चीन में इन दिनों इस्लाम-विरोधी माहौल बन रहा है। हाल ही में केंद्रीय चीन स्थित शहर नांगांग में जब एक मस्जिद बनने का प्रस्ताव पारित हुआ तो स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर मुस्लिम-विरोधी संदेश पोस्ट करने लगे।

मुस्लिम बहुल शिनजांग प्रांत में चीन ने दाढ़ी रखने-बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही धार्मिक तरीके से शादी करने पर रोक लगा दी गई।  विश्व की बड़ी शक्ति माने जाने वाले अमरीका के राष्ट्रपति डोलाल्ड ट्रंप मुस्लिमों को लेकर कोर्ट से भी टकराने को तैयार हैं। सबसे महफूज जगह भारत में भी मुस्लिमों के खिलाफ बड़ा भयानक माहौल बना हुआ है।
अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज को इन सब पर मंथन करना होगा। एक देश समझ में आ सकता है। एक समाज समझ में आ सकता है। पूरे विश्व में यदि मुस्लिमों के खिलाफ माहौल बना है तो यह निश्चित रूप से बड़ी बहस का मुद्दा है।

मुस्लिम समाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंथन करना होगा कि आखिर उनके समाज में ऐसी क्या-क्या कमियां आ गईं कि सभी के सभी उनके पीछे पड़ गए। उनको संदेह की दृष्टि से देखने वाले लोगों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ सड़कों पर क्यों नहीं उतर रहे है? क्यों नहीं उन लोगों का विरोध करते जो आतंकवाद के मुद्दे पर पूरे के पूरे मुस्लिम समाज को घसीट लेते हैं।

मुझे लगता है कि आज फिर मुस्लिम समाज को उस भाईचारे को लेकर अभियान की जरूरत है, जिसके लिए इस समाज ने समय-समय पर लोकप्रियता बटोरी है। जो आतंकवाद पूरी मानव जाति का दुश्मन बना हुआ है, उसके खिलाफ मुस्लिम समाज को ही मोर्चा संभालना होगा। जो राजनीतिक दल वोटबैंक के रूप में उनका इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें मुंह तोड़ जवाब देना होगा। भटके बच्चों को हथियार और कलम का अंतर समझाना होगा। मुस्लिम समाज से हो रही नफरत को बड़ी चुनौती के रूप में लेना होगा। मुस्लिम समाज के प्रतीक माने जाने वाले दाढ़ी, बुर्के को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर जो संदेह व्यक्त किया जा रहा है उस पर बड़े स्तर पर मंथन की जरूरत है।

मुस्लिम समाज के साथ ही अन्य समाज के गणमान्य लोगों को भी आगे आकर पूरे विश्व में बने रहे घृणा, नफरत के माहौल को समाप्त कर भाईचारे के माहौल को बनाने की पहल करनी होगी। बात मुस्लिम समाज की ही नहीं है, पूरे विश्व में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि हर देश में नस्लीय हमले बढ़े हैं। जिससे विभिन्न देशों में रह रहे विभिन्न देशों के युवाओं के लिए खतरा पैदा हो गया है। इस सब के लिए कौन जिम्मेदार हैं ? कौन हैं इस तरह का माहौल बनाने वाले लोग ? कौन लोग हैं जो इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं ? इन सब लोगों को बेनकाब करना होगा।

चरण सिंह राजपूत
राष्ट्रीय अध्यक्ष फाइट फॉर राइट
charansraj12@gmail.com

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मुसलमानों, तुम राम मंदिर बनवा देते तो भाजपा की हुकुमते नहीं, कब्र बन चुकी होती

अरे भाई, अब तो राम मंदिर निर्माण में अपनी सहमति और सहयोग दे दो मुसलमानो, नहीं तो ..ऽऽऽ###ऽऽऽऽऽ  ####ऽऽऽ##….ऽऽऽऽऽ…##ऽऽऽ##…ऽऽऽ… अगर मंदिर बनवा दिया तो तम्हेँ भाजपा का सबसे बड़ा समर्थक और सहयोगी मान लिया जायेगा। तुम खुद और तुम्हारे चहीते धर्मनिरपेक्ष दल ही तो कहते हैं कि भाजपा राम मंदिर के मुद्दे को भुनाती रही है। राम मंदिर का मुद्दा ना होता तो भाजपा की हैसियत तीन-चार सीटों से ज्यादा नहीं होती। केन्द्र और प्रदेशों की सत्ता तो बहुत दूर की बात है। मुसलमानों, भाजपा पर तुम्हारे इल्जाम बराबर से तुम्हें भी घेरते हैं। राम मंदिर के मुद्दे को भुनाने में तुम (मुस्लिम कौम) भाजपा के सबसे बड़े सहयोगी / मददगार हो। अगर ऐसा ना होता तो तुम राम जन्म भूमि पर राम मंदिर बनने की सहमति और सहयोग दे चुके होते। और भाजपा खुद-ब-खुद आगे नहीं बढ़ पाती।

तुम्हारे पास क्या मस्जिदों की कोई कमी है? दुनिया का पहला ऐसा मुल्क है हिन्दुस्तान जहाँ सबसे ज्यादा मस्जिदेँ हैं। इस्लामिक मुल्कों में भी मुसलमानों को इतनी मजहबी आजादी नहीं जितनी मजहबी आजादी भारत में भारतीय मुसलमानों को है। मुसलमानों से इस तरह के सवाल और राम मंदिर बनावाने की सहमति की गुजारिश करना आजकल मेरा शगल (दिनचर्या) बन गया है। अयोध्या मसले पर अदालत ने दोनों समदाओँ से मिल-बैठ कर सुलह-समझौते की जब से सलाह दी है तब से मैं इस कोशिश में हूँ कि मुसलमान अपनी मर्जी  से राम मंदिर से अपना दावा छोड़ कर राम मंदिर निर्माण में अपनी सहमति और सहयोग देँ।

प्रतीकात्मक रायशुमारी से ये पता चला कि 60 फीसद मुसलमान राम जन्म भूमि पर राम मंदिर निर्माण के पक्षधर हैं जबकि बाकी अदालत के अंतिम फैसले पर इस मसले को छोड़ने की बात करते हैं।  लेकिन इस बात से किसी को इन्कार नहीं कि मुसलमानों ने राम जन्म भूमि से दावा छोड़ दिया होता तो भाजपा ना इस मद्दे को भुना पाती और ना ही गंगा-जमुनी तहजीब वाली भारतीय समाज में किसी किस्म की दरार पैदा होती। राम मंदिर निर्माण पर समझौते को राजी होने को तैयार मुसलमानों को इस बात का पछतावा है कि उनकी कौम को उस दौर में राम मंदिर पर सहमत हो जाना चाहिये था जब केन्द्र और यूपी में भाजपा की सरकार नहीं हो।

और, यदि अब मुसलमान राम मंदिर निर्माण पर राजी हो जाते हैं तो इसका क्रेडिट (श्रेय) भाजपा ना ले जाये। ये ना समझा जाये कि भाजपा की सरकारों के दबाव और डर से मुसलमानों को अयोध्या मसले पर झुकना पड़ा। एक मुस्लिम इदारे ने अपनी राय रखी कि मुसलमानों को इन्तेजार करना चाहिये है कि जिस दौर में केन्द्र और यूपी में भाजपा की सरकारे नहीं रहें तब मुसलमानों को राम मंदिर निर्माण पर अपनी सहमति दे देँ। एक मुस्लिम धार्मिक नेता ने ये कहा कि राम मंदिर पर सहमति देने के लिये ये शर्त रखी जाये कि भाजपा सत्ता छोड़ दे तो मुसलमान राम जन्म भूमि पर राम मंदिर के लिये राजी हो जायेँगे।

नवेद शिकोह
Navedshikoh84@gmail.Com
08090180256

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टीवी की बेमतलब की बहस से दूर रहें… जानिए क्यों…

एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है. बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है. दाँत ब्रश करता है. नहाता है. कपड़े पहनकर तैयार होता है. अखबार पढता है. नाश्ता करता है. घर से काम के लिए निकल जाता है. बाहर निकल कर रिक्शा करता है. फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है. वहाँ पूरा दिन काम करता है. साथियों के साथ चाय पीता है.

शाम को वापस घर के लिए निकलता है. घर के रास्ते में बच्चों के लिए टॉफी, बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है. मोबाइल में रिचार्ज करवाता है, और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है. अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई हिन्दू या मुसलमान मिला? क्या उसने दिन भर में किसी हिन्दू या मुसलमान पर कोई अत्याचार किया? उसको जो दिन भर में मिले वो थे.. अख़बार वाले भैया, दूध वाले भैया, रिक्शा वाले भैया, बस कंडक्टर, ऑफिस के मित्र, आंगतुक, पान वाले भैया, चाय वाले भैया, टॉफी की दुकान वाले भैया, मिठाई की दूकान वाले भैया..

जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं तो इनमें हिन्दू या मुसलमान कहाँ है? क्या दिन भर में उसने किसी से पूछा कि भाई, तू हिन्दू है या मुसलमान? क्या किसी ने कहा- अगर तू हिन्दू या मुसलमान है तो मैं तेरी बस में सफ़र नहीं करूँगा? तेरे हाथ की चाय नहीं पियूँगा? तेरी दुकान से टॉफी नहीं खरीदूंगा? क्या उसने साबुन, दूध, आटा, नमक, कपड़े, जूते, अखबार, टॉफी, मिठाई खरीदते समय किसी से ये सवाल किया था कि ये सब बनाने और उगाने वाले हिन्दू हैं या मुसलमान?

जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग हिन्दू या मुसलमान नहीं होते तो फिर क्या वजह है कि चुनाव आते ही हम हिन्दू या मुसलमान हो जाते हैं?

समाज के तीन जहर हैं, इनसे बचिए…

-टीवी की बेमतलब की बहस

-राजनेताओ के जहरीले बोल

-कुछ कम्बख्तों के सोशल मीडिया के भड़काऊ मैसेज

इनसे दूर रहे तो शायद बहुत हद तक समस्या तो हल हो ही जायेगी. इस बात को शेयर करें और छलावों से बचें….

(उपरोक्त मैसेज इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर ह्वाट्सअप पर बड़े पैमाने पर शेयर और प्रसारित किया जा रहा है)

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