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गुजरात

केजरीवाल से डरी भाजपा यूपी के साथ गुजरात में भी विस चुनाव कराने के पक्ष में!

Sheetal P Singh : ब्रेकिंग न्यूज़… डेटलाइन गुजरात… गुजरात में एक साल पहले पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों के साथ हो सकते हैं विधानसभा चुनाव। TV चैनलों के “ब्लैक आउट” और राष्ट्रीय प्रिंट मीडिया की घबराई रिपोर्ट्स के बावजूद केजरीवाल की सूरत के योगी चौक पर पहली रैली लगभग पूरी शांति से कामयाब हो गई। कुछ युवकों ने काले झंडे लहराये पर उन्हे बिलकुल भी स्थानीय समर्थन नहीं मिला। इसके पहले आप विधायक और गुजरात प्रभारी गुलाब यादव को मंच पर गिरफ्तार करके टीवी की ख़बर बनाने का अमित शाह का प्लान (आप नेता अंकित लाल के ट्वीट के अनुसार) भी धरा रह गया।

Sheetal P Singh : ब्रेकिंग न्यूज़… डेटलाइन गुजरात… गुजरात में एक साल पहले पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों के साथ हो सकते हैं विधानसभा चुनाव। TV चैनलों के “ब्लैक आउट” और राष्ट्रीय प्रिंट मीडिया की घबराई रिपोर्ट्स के बावजूद केजरीवाल की सूरत के योगी चौक पर पहली रैली लगभग पूरी शांति से कामयाब हो गई। कुछ युवकों ने काले झंडे लहराये पर उन्हे बिलकुल भी स्थानीय समर्थन नहीं मिला। इसके पहले आप विधायक और गुजरात प्रभारी गुलाब यादव को मंच पर गिरफ्तार करके टीवी की ख़बर बनाने का अमित शाह का प्लान (आप नेता अंकित लाल के ट्वीट के अनुसार) भी धरा रह गया।

गुलाब यादव ने दिन में ही रैली के पाँच घंटे पहले सूरत पुलिस को खुद समर्पण कर इस स्कीम को फेल कर दिया। संयोग ही है कि गुजरात आप के अध्यक्ष कनु कलसारिया यादव हैं और गुजरात प्रभारी भी गुलाब यादव! हालाँकि गुजरात में यादव कुल तीन फ़ीसद ही हैं पर आप की गुजरात में ग़ैर ब्राह्मण छवि (सूरत बीजेपी के एक विधायक के आरोप के अनुसार) उसे एक नया राष्ट्रीय कलेवर दे सकती है। कनु कलसारिया गुजरात में सम्मानित नाम हैं।

गुजरात “आप” में बड़े रेडिकल क़िस्म के दलित और ग़ैर ब्राह्मण नेतागण हैं। ब्राह्मणों के एक संगठन ने इस कारण केजरीवाल का कड़ा विरोध भी किया। अहमदाबाद में काले झंडे दिखाने वाले इसी संगठन के थे। पाटीदार अनामत आंदोलन (पटेल समुदाय का) के साथ तो केजरीवाल ख़ास संबंध बनाते दिख रहे हैं। सूरत का योगी चौक (जहाँ सभा हुई) पाटीदारों का गढ़ है। यहाँ कोई भी नेता सभा करने से पहले सौ बार सोचता है। अमित शाह डर कर दो किलोमीटर दूर सभा करने गये थे पर केजरीवाल का यहाँ से गुजरात में श्रीगणेश करना (सफलतापूर्वक) बड़े दूर की कौड़ी है।

कांग्रेस के एक पार्षद महोदय के साथ कल दिन में बातचीत हो रही थी। उन्होंने माना कि “गुजरातियों में कारोबार में मंदी के कारण और तमाम कारणो से पाटीदार आंदोलन दलित आंदोलन और पिछड़ा वर्ग के आंदोलन में लोगों की भारी संख्या दर्ज हो रही है जिसे केजरीवाल कैस कर सकता है क्योंकि उनकी लीडरसिप के पास कोई प्रोग्राम ही नहीं है गुजरात में!”

भाजप (गुजराती भाजपा को भाजप ही कहते हैं) गुजरात में बहुत मज़बूत पार्टी है। २०१४ में इसे करीब ५९% वोट मिले थे। पर मोदी जी के दिल्ली पहुँचने के बाद इसके खिलाफ जन आक्रोश बहुत बड़े पैमाने पर ज़ाहिर हो रहा है। हालाँकि यूपी बिहार वालों / मराठियों और अन्य परप्रान्तियों में यह उतना गंभीर नहीं है।

सूरत शहर के दो भाजपा विधायकों (सूरत में सारे बारह के बारह विधायक भाजपा के हैं) से कल मुलाक़ात हुई। युवा मोर्चा के अध्यक्ष से भी और कुछ पार्षदों से भी। बातचीत में पता चला कि पार्टी इस संभावना की पड़ताल में लगी है कि गर यूपी के साथ साथ गुजरात में भी करीब एक बरस पहले विधानसभा चुनाव करा लें तो कैसा रहे? वजह है केजरीवाल। अब तीन महीने में तो केजरीवाल गुजरात में विकल्प बनने से रहे, कांग्रेस लुंज पुंज है ही! यह आइडिया भाजप में अंदर ही अंदर बहुत उच्च स्तर पर परवान चढ़ चुका है।

गुजरात दौरे पर गए दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह की रिपोर्ट.

मूल खबर….

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