लोग बार-बार फंस जाते हैं पर जान ही जाते हैं कि खांग्रेसी और हिन्दू पार्टी में कोई अंतर नहीं है

Sheetal P Singh : नई सरकार की असलियत सामने है… अब सरकार कभी भी किसी की भी जमीन कब्जा कर लेगी। ज़मीन अधिग्रहण पर आये अध्यादेश ने इसको पूरी तरह बेनक़ाब कर दिया है। हम जानते थे पर लोगों को समझाने में असफल थे क्योंकि सारे 24×7 चैनल, सारे अख़बार, सारी पत्र पत्रकायें, रेडियो FM और पेड सोशल मीडिया ने विचार विमर्श के सारे प्लेटफार्मों पर इकतरफ़ा क़ब्ज़ा किया हुआ था, क़ब्ज़ा आज भी है पर इक्का दुक्का आलोचना और विवेक झूठ और सिर्फ़ झूठ की मार्केटिंग से बजबजाती सच्चाइयों पर पर्दा हटाने में धीरे धीरे ही सही पर नज़र आना शुरू कर चुका है।

साबित हो गया है कि सीमाओं की रक्षा में रैम्बो की तरह पेश किये गये मोदी का सीना ५६ इंच नहीं बल्कि नवाज़ शरीफ़ या जियांग जेमिन जितना ही है। बार्डर पर मारे गये एक सैनिक के बदले उधर के दस सिर काट लाने के दावे की धज्जियाँ समर्थक चैनलों पर औंधी पड़ी हुई हैं और बयानवीर सुषमा स्वराज नेपथ्य में। मंहगाई किसी चीज़ की कम नहीं हुई न बिजली के दाम। तेल में सांकेतिक कमी के बारे में भक्तों के अलावा ज़्यादातर शहरी जान गये हैं कि यह भी “विकास अली” का किया धरा नहीं है, क्रूड में आई बेतहाशा गिरावट का अंश भर है।

आस्ट्रेलिया और अमरीकी दौरे से फुलाये गये बैलून की हवा भी निकली जा रही है क्योंकि लगातार दो तिमाही में अर्थव्यवस्था मनमोहन काल से बदतर हाल में है, न export बढ़ा न manufacturing न GDP, बढ़े सिर्फ़ अंबानी अडानी। FDI बाहर से ही ताक झाँक कर रहे हैं bold steps का! RSS इसे समझ रहा है। लोकसभा के तत्काल बाद के विधानसभाई चुनाओं में ब्रांड मोदी क़रीब बाइस तेइस परसेंट का गोता लगा चुका है। अगर केजरीवाल ने अश्वमेध का घोड़ा दिल्ली में पकड़ लिया तो पिछली सदी भर से देखें जा रहे “हिन्दू राष्ट्र” के स्वप्न का क्या होगा? “धोख” हमेशा कारगर नहीं होता । लोग बार-बार फँस जाते हैं पर जान ही जाते हैं कि खांग्रेसी और हिन्दू पार्टी में कोई फ़र्क़ नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के फेसबुक वॉल से.

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