जो खाने पर टूटें, उन्हें पत्रकार ना माना जाये!

तुम्हें पत्रकारिता की कसम! पत्रकार संगठनो!!! ऐलान करो..आह्वान करो.. अपील करो.. अहद करो :- कवरेज के दौरान पत्रकार फ्री के पत्तल नही चाटें… जो खाने पर टूटें, उन्हे पत्रकार ना माना जाये। पठनीय सामग्री जरूर लें। गिफ्ट, बैग, फाइल, फोल्डर या कोई भी डग्गा ना लें। डग्गा बटोरने और खाने-पीने वाले कथित पत्रकारो को चिन्हित करो। इनका बहिष्कार करो। इन्हे फर्जी साबित करो। इससे लालची/फर्जी/डग्गामार कथित पत्रकारो की भीड़ भी छट जायेगी। कार्यक्रमों, प्रेस मीट, प्रेस वार्ताओ के सरकारो गैर सरकारी आयोजको को पत्र लिखें। जो खाने-पीने या गिफ्ट का इन्तजाम करेगा, सम्पूर्ण मीडिया कर्मी उसका बहिष्कार करेंगे।

पत्रकार संगठनों, वरिष्ठ पत्रकारों, जिम्मेदार और सक्रिय पत्रकारों, विधानसभा सत्र के दौरान तुम्हारी बिरादरी के लोगो के हाथो से खाने की प्लेट छीन ली गयीं। इससे ज्यादा अपमान क्या होगा! गलती सरकारी तंत्र की ही नहीं आपकी बिरादरी के बेगैरत लोगों की भी है। प्रायश्चित करने का एक ही तरीका है। विभिन्न पत्रकार संगठनो ऐलान करो- विधानसभा मे प्लेट छीनने की घटना के बाद कोई भी पत्रकार कवरेज के दौरान कुछ-खायेगा नही। किसी प्रेस कांफ्रेंस या कही भी कवरेज के लिये आये पत्रकार ना सूक्ष्म जलपान ना विशाल जलपान, ना रात्रिभोज ना दोपहर भोज, कुछ भी नहीं करेंगे।

कोई गिफ्ट, फाइल, बैग, किसी किस्म के डग्गे या खाने-पीने की परम्परा खत्म हो। इसे असंवैधानिक माना जाये। इसे पत्रकारिता के उसूल के खिलाफ माना जाये। इसे रिश्वत माना जाये। पत्रकार संगठोनो यदि तुम ये अहद नही करोगे। ये अपील और आह्वान नही करोगे, तो तुम्हे पत्रकारिता और पत्रकारों के इस अशोभनीय अपराध का जिम्मेदार माना जायेगा। गिफ्ट और खाने-पीने को लेकर पत्रकारिता की धूमिल होती छवि का गुनाहगार माना जायेगा। ये तुम्हाया फर्ज भी है और जिम्मेदारी भी।

नवेद शिकोह
लखनऊ
Navedshikoh84@rediffmail.com
9918223245

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