अलीगढ़ जागरण के सिटी चीफ ने छुट्टी दे दी होती तो शायद मयंक त्यागी की जान नहीं जाती!

अलीगढ़ (उ.प्र.) : दैनिक जागरण के रिपोर्टर मयंक त्यागी की कल आकस्मिक मौत शायद नहीं हुई होती, यदि सिटी चीफ रिपोर्टर नवीन पटेल ने उन्हें छुट्टी दे दी होती। नवीन पटेल की मनमानी को लेकर पूरे शहर के पत्रकारों में रोष है। उनकी दुष्टतापूर्ण हरकत का खामियाजा एक युवा रिपोर्टर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। मयंक त्यागी के बड़े भाई मृदुल त्यागी मेरठ जागरण में इस समय कार्यरत हैं। मयंक का शव परिजन मेरठ ही ले गए। आज उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। 

पता चला है कि मयंक त्यागी को कल सुबह से ही सीने में मीठा-मीठा दर्द हो रहा था। ऑफिस पहुंचकर उन्होंने सिटी चीफ रिपोर्टर नवीन पटेल से अवकाश की दरख्वास्त की थी लेकिन उसने एक न सुनी और मयंक को रिजल्ट की कवरेज करने के लिए मौके पर भेज दिया। मयंक दरअसल, छुट्टी लेकर कल अपना इलाज कराना चाहते थे। नवीन की हरकत से उन्हें चिकित्सक से मिलने तक की मोहलत नहीं दी गई। 

यदि मयंक का अवकाश मंजूर हो गया होता तो उन्हें अकाल मौत नहीं मरनी पड़ती। गौरतलब है कि कल सोमवार को एक स्कूल में सीबीएसई बोर्ड के रिजल्ट की कवरेज के दौरान उन्हें अचानक हार्ट अटैक का दौरा पड़ा था और मेडिकल कालेज में उन्होंने दम तोड़ दिया था। इसके बाद परिजन उनका शव गृहनगर मेरठ ले गए। 

बताते हैं कि अलीगढ़ जागरण में संपादकीय प्रबंधन के लिए ये कोई नहीं बात नहीं। उसका रवैया पहले भी अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा ही रहा है। शीर्ष पद पर बैठे संपादकीय प्रमुख की एक कारस्तानी बयान करते हुए एक पत्रकार ने बताया कि यहां कार्यरत संजीव सक्सेना के चार परिजनों की एक ही साथ कुछ साल पूर्व हादसे में मौत हो गई थी। उनकी शोक संवेदना तक नहीं छापी गई। खबर में सिर्फ इतना लिख दिया गया कि मृतक संजीव सक्सेना के परिजन थे। बाद में घटना के तीसरे दिन एक शोक संवेदना छपी भी तो तत्कालीन मंत्री जयवीर सिंह की, जो संजीव सक्सेना के घर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। 

आज अलीगढ रीजन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एसोसिएशन की एक बैठक कार्यालय विष्णुपुरी में हुई, जिसमें आरीमा के सदस्यों ने दैनिक जागरण के पत्रकार मयंक त्यागी के आकस्मिक निधन पर शोक जताया और दो  मिनट का मौन रखकर मयंक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अध्यक्ष प्रदीप सारस्वत ने कहा की ये पत्रकारों के लिए बहुत दुखद है।सचिव अलोक सिंह ने कहा की मयंक बहुत ही जुझारु पत्रकार थे। मीडिया प्रभारी आतिफ उर रहमान ने कहा की सरकार को मयंक के परिवार को 50 लाख का मुवाज़े देना चाहिए। बैठक में पंकज सारस्वत , काके , मीडिया प्रभारी अभिषेक माथुर , अर्जुन देव वार्ष्णेय , मुबारक अली , अकरम खान , विवेक वार्ष्णेय ,आदि भी उपस्थित रहे। 

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Comments on “अलीगढ़ जागरण के सिटी चीफ ने छुट्टी दे दी होती तो शायद मयंक त्यागी की जान नहीं जाती!

  • Rajeev Sharma says:

    Naveen Ne pahle bhi ek bimar employ ko editor mukesh ji se pareshan karaya tha. isliye naveen ke bare me aap us employ se adhik to nahi jante honge mr. ram.

    Reply
  • मयंक की मौत उन लोगों के लिए सबक है जो मीडिया जगत मीडिया जगत से जुड़े है। यहाँ पर ऐसा ही हो रहा पता नहीं अगला टारगेट कौन हो।

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