बनारस के इस महालुटेरे अस्पताल ‘मेडविन’ से बच कर रहिए, पढ़िए कैसे एक वरिष्ठ पत्रकार को मार डाला

सेवा में,

माननीय मंत्री जी

उत्तर प्रदेश सरकार (स्वतंत्र प्रभार)

विषय- कोविद -19 की श्रेणी में प्रशासन द्वारा मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल की लापरवाही के चलते वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार (सदस्य) यू0पी0 जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) की मृत्यु एवं आर्थिक मदद के सम्बन्ध में।

महोदय,

प्रार्थिनी कंचन गुप्ता वाराणसी की रहने वाली हूँ.

आपको सूचित करना चाहती हूँ कि मेरे पति श्री राकेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार सदस्य यू0पी0 जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) को दिनांक 16/08/2020 सायं 11:00 बजे अचानक तबीयत खराब होने पर श्री शिव प्रसाद गुप्त जिला चिकित्सालय (SSPG) कबीरचौरा वाराणसी के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। यहां COVID-19 टेस्ट पाजिटिव आने पर उन्हें जिला चिकित्सालय Pt. DDU Varanasi के लिए रेफेर किया गया।

अंदर कोविद सेंटर में अटेंडेंट की कमी होने के कारण मेरा पुत्र देख रेख के लिए उनके साथ-साथ ही था। इस अस्पताल में जो चिकित्सक देख रहे थे उनसे मैंने कई बार बात की। यहां रात में रोज ऑक्सीजन की कमी व वेंटिलेटर वगैरह लगाने वाले डॉक्टर की टीम न होने और संतोषजनक इलाज न मिलने के कारण हमने उन्हें अच्छे इलाज के लिए दिनांक 21/08/2020 सायं 5:00 बजे निजी अस्पताल मेडविन (कोविड-19 पंजीकृत) में शुरुआती 1,50,000 रूपया जमा करके भर्ती करा दिया।

यहाँ कुछ दिनों तक इलाज के दौरान मेरे पति से वीडियो कॉल तथा फोन कॉल से बात होती रही और वह बिलकुल स्वस्थ हो रहे थे परंतु कुछ दिनों बाद अस्पताल की लापरवाही और ऑक्सीजन बंद होने के कारण मेरे पति की हालत बिगड़ती गई और अस्पताल के डॉक्टर झूठी तसल्ली देते रहे कि सब ठीक हो जाएगा।

रोज बताया जाता रहा कि हालत सुधर रही है। दिनांक 02/09/2020 को मुझे सूचित किए बिना उन्हें वेंटिलेटर पर रख दिया गया। इसी बीच अस्पताल वालों ने मुझसे कुल 3,00,000 रूपया (तीन लाख) जमा करवा लिया जो मैंने कर्ज लेकर दिया। निधन से दो तीन रोज पहले मेडविन अस्पताल के डॉक्टर मनमोहन श्याम व अंजना गुप्ता ने तत्काल कोरोना से ठीक हुए मरीज के AB+ प्लाज्मा की डिमांड की।

सोशल मीडिया के माध्यम से जौनपुर निवासी 26 वर्षीय, रौनक गुप्ता बनारस आ कर IMA ब्लड बैंक वाराणसी में दिनांक- 03/09/2020 को प्लाज्मा अस्पताल को सौंपा और कहा कि CCTV में हमारे समक्ष प्लाज्मा चढ़ाया जाए परन्तु उनके द्वारा बिना CCTV फुटेज दिखाए आधा घंटे के भीतर प्लाज्मा चढ़ा देने की बात बोली गयी। यह मेडिकल साइंस के हिसाब से स्वतः असत्य व संदेह जनक बात है।

इससे पता चलता है कि मेरे पति को प्लाज्मा नहीं चढ़ाया गया जिसकी पुष्टि दिनांक 03/9/2020 के सायं 5 बजे के बाद के CCTV फुटेज से किया जा सकता है। इसके बाद दिनांक 06/09/2020 को सुबह में ही मृत्यु हो जाने के बाद भी हमें शाम को 4 बजे बताया गया जिसकी पुष्टि CCTV फुटेज से किया जा सकता है।

इसके बाद उनके हाथ में पहनी हुई बहुमूल्य नीलम की अंगूठी को भी वापस नहीं किया गया तथा 1,68,000 रूपया का बिल भी शव देने के पूर्व मांगा गया।

सरकार के आदेश अनुसार कोरोना से मृत्यु होने पर अस्पताल को खुद अपनी एम्बुलेंस से शव को घाट तक पहुँचाना होगा लेकिन इसके लिए भी अस्पताल से डॉक्टर मनमोहन श्याम जी ने निजी रक्षा एम्बुलेंस सर्विस वालों को बुला लिया जिसने हमसे जबरन तीन किमी दूरी का 8000 /- रूपया ले लिया। मेडविन अस्पताल वाले आज तक यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि मेरे पति को किस दिन कौन-कौन दवाइयां चलीं और किस तरह से इलाज हुआ।

सत्रह दिनों में इलाज के दौरान एक बार भी कोरोना टेस्ट नहीं करवाया गया। यह गंभीर चिंता का विषय है।

अतः आपसे निवेदन है कि दिनांक 21/8/2020 से 06/09/2020 तक का CCTV फुटेज उपलब्ध कराते हुए अपने स्तर से सत्यता की जांच करायें। मेरे पति ही जीविकापार्जन का एकमात्र साधन थे। उनके स्वर्गवास के उपरांत मैं और मेरे दो पुत्र जो अभी अध्ययनरत हैं, वो बेसहारा हो गए।

मैं आपसे निवेदन करती हूं कि मेरे जीविकोपार्जन के लिए मुझे कुछ आर्थिक मदद की जाए जिससे मैं कर्ज मुक्त हो सकूं एवं मेरे किसी पुत्र को उसके योग्यता अनुसार रोजगार देने की कृपा करें ताकि मैं जीवन निर्वाह कर सकूं।

इसके लिए मैं जीवन भर आपकी आभारी रहूंगी।

प्रार्थिनी

कंचन गुप्ता
पत्नी स्व राकेश कुमार
जगतगंज वाराणसी

प्रतिलिपि:-
माननीय प्रधानमंत्री नई दिल्ली।
माननीय मुख्यमंत्री लखनऊ।
जिलाधिकारी, वाराणसी।
मुख्य चिकित्साधिकारी वाराणसी।

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इसे भी पढ़ें-

क्या मेडविन अस्पताल वालों ने पत्रकार के इलाज का फाइल जला दी है!

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