क्या मेडविन अस्पताल वालों ने पत्रकार के इलाज का फाइल जला दी है!

साथियों,

मिडविन हॉस्पिटल के मालिक डॉ मनमोहन श्याम की घिनौने कृत्य और उपेक्षा से आज हिंदी दैनिक मान्यवर के वरिष्ठ पत्रकार राकेश गुप्ता की मौत हो गयी। उनके परिजनों ने डॉ मनमोहन पर आरोप लगाया कि 3 लाख देने के बाद भी और रुपयों की मांग करते रहे। अभी परिजन रुपयों का इंतजाम कर ही रहे थे कि हॉस्पिटल से सूचना आई कि आपके मरीज की मौत हो गयी। मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार वाले हॉस्पिटल पर पहुंच कर बवाल मचाने लगे तब कोतवाली इंस्पेक्टर एवं चौकी इंचार्ज के साथ फैंटम दस्ते वालों ने परिजनों को हाथ जोड़ कर व समझ बुझाकर मना लिया। साथियों इस हॉस्पिटल की इतनी ज्यादा शिकायत शासन प्रशासन में होने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई आश्चर्य की बात है। अब तो ये भी लगता है की इसकी पहुँच बहुत ऊपर तक है और इसके लूट में बहुत लोग शामिल हैं।

राकेश गुप्ता जी बेहद सरल और हर दिल अजीज इंसान थे। जब मैं हिंदुस्तान में था, तभी उनसे मुलाकात हुई थी। वह दैनिक मान्यवर से जुड़े थे। इस अखबार के संपादक से उनके करीबी रिश्ते भी थे। अखबार के दफ्तर में वो रोज जाया करते थे घंटे 2 घंटे के लिए। राकेश जी और उनकी शिक्षक पत्नी दोनों हमें मानते रहे हैं। दोनों दमा के मरीज थे और बीएचयू में मैंने इलाज कराया था। दोनों लोग ठीक हो गए थे। इनके घर परिवार में कोई भी समस्या आती थी तो राकेश मुझ से सलाह मशविरा करने भी आते थे। दैनिक मान्यवर में उनकी खबरें छपती थी तो यदा-कदा मुझे दिखाते भी थे।

राकेश गुप्ता

मुझे याद है कि 17 अगस्त को वह अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। पूरा परिवार रो रहा था। उनके बेटे अनुराग ने रात 11:00 बजे मुझे फोन किया। मेरी सलाह पर परिजन उन्हें लेकर कबीरचौरा अस्पताल पहुंचे। वहां कोरोना टेस्ट हुआ और वह संक्रमित पाए गए। अस्पताल वाले उन्हें बीएचयू भेजने जा रहे थे। रात 2:00 बजे सीएमओ से बातचीत के बाद उन्हें दीनदयाल अस्पताल भेजने का इंतजाम किया गया। वहां वह भर्ती भी हो गए।

अस्पताल में इनकी देखरेख के लिए इनका पुत्र अनुराग भी साथ साथ था। इस अस्पताल में जो चिकित्सक देख रहे थे उनसे मैंने कई बार बात की। यहां रात में रोज ऑक्सीजन खत्म हो जाया करती थी। वेंटिलेटर वगैरह का भी इंतजाम नहीं था। डॉक्टर दिन में सिर्फ एक बार आते थे। हालत बिगड़ने लगी तो 21 अगस्त को इनके पुत्र ने मेडविन अस्पताल के डॉक्टर से बात की। उसी दिन ₹200000 जमा कराने के बाद एहसान करते हुए दाखिला लिया। दो-तीन दिन बाद फिर ₹100000 जबरिया ले लिया। अस्पताल के डॉक्टर झूठी तसल्ली देते रहे कि सब ठीक हो जाएगा। रोज बताया जाता रहा कि हालत सुधर रही है।

राकेश के निधन से दो तीन रोज पहले मेडविन अस्पताल के डॉक्टर ने एबी+प्लाज्मा की डिमांड की, जो मरीज कॉविड से ठीक हुआ हो। जौनपुर के एक शख्स ने मदद की और बनारस आ कर अपना प्लाज्मा भी दिया। पता नहीं अस्पताल वालों ने प्लाज्मा चढ़ाया या नहीं? अस्पताल वाले झूठ पर झूठ बोलते रहे। एक रोज मैंने भी डॉक्टर से बात की तो बताया कि सब ठीक हो रहा है। कुछ दिनों में वह घर चले जाएंगे। कथित रूप से प्लाज्मा चढ़ाने के बावजूद हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। दूसरे दिन राकेश जी दुनिया से रुखसत हो गए।

आखिरी दिन डॉक्टर लाश देने के लिए भी तैयार नहीं थे और वह ₹170000 की डिमांड कर रहे थे। इसी बात पर बात बढ़ी। यही नहीं इलाज के दौरान एक इंजेक्शन लगाने के लिए ₹25000 अलग से भी जमा करवाए गए थे।

मेडविन अस्पताल वाले आज तक यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि साथी पत्रकार राकेश को किस दिन कौन-कौन दवाइयां चली और किस तरह से इलाज हुआ। अस्पताल वाले इलाज का हिसाब भी नहीं दे रहे हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। अब बताया जा रहा है कि उनकी फाइल जला दी गई।

व्यापारी नेता राकेश जैन ने कुछ रोज पहले मुख्यमंत्री से इसी अस्पताल की शिकायत की थी। तब इस अस्पताल को सीएमओ ने नोटिस भी दिया था, लेकिन आज तक ना कोई जांच हुई और न कार्रवाई।
इस अस्पताल में रोजाना मौतें हो रही हैं कोरोना मरीजों की। हम सब चुप बैठे हैं और अपने पत्रकार साथी को न्याय भी नहीं दिला पा रहे हैं। साथियों से विनम्र आग्रह है की पत्रकार साथी की मौत की जांच कराने के लिए सरकार और प्रशासन को चिट्ठियां भेजी जाए और कार्रवाई के लिए दबाव डाला जाए।

बनारस के वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की एफबी वॉल से।

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