मल्टी टैलेंटेड विजुअली चैलेंज्ड मोनिका-अंकिता पर कोई मां-पिता क्यों न करे गर्व…

मोनिका और अंकिता के साथ करीब 4 घंटे का समय बिताने का मौका मिला और उस समय उनसे बातचीत कर अहसास हुआ कि हम जैसे रोशन आंखों वालों की दुनिया से कहीं ज्यादा रोशनी है उनकी दुनिया में। मासूमियत, सच्चाई, इंसानियत की रोशनी। ये हमसे कहीं ज्यादा संवेदनशील हैं समाज के प्रति, इंसानियत के प्रति। हम लोग हर दर्जे में इनसे कमतर हैं। पढिय़े मोनिका और अंकिता की रोचक, सुरीली और साहसी कहानी मध्य प्रदेश की पत्रकार ममता यादव की जुबानी….

लेखिका ममता यादव

हमें सिम्पैथी नहीं चाहिये, हमें चाहिये सपोर्ट और सराहना। यह कहना है 23 वर्षीय मोनिका झा का। मोनिका से जब आप पहली बार मिलेंगे तो आपको अहसास भी नहीं होगा कि आंखों की रोशनी से वंचित यह लड़की मल्टी टैलेंटेड,मल्टी टास्किंग और साहस से भरी होगी। सामान्य इंसानों को भी मात देता है मोनिका का सिक्स सेंस। अगर यह कहें कि विजुअली चैलेंज्ड मोनिका ने कुदरत की नाइंसाफी को चुनौति देते हुये खुद को साबित किया है सौ फीसद से भी ज्यादा तो अतिशंयोक्ति नहीं होगी। राष्ट्रीय विरजानंद राष्ट्रीय स्कूल दिल्ली से अपनी स्कूली पढ़ाई खत्म करने के बाद मोनिका ने भोपाल के सरोजनी नायडू(नूतन) कालेज से संगीत में स्नातक डिग्री ली है।

मोनिका की मां श्रीमती निर्मला झा एवं पिता श्री सुरेश कुमार झा यह बताते हुये गर्व से भर जाते हैं दिल्ली स्कूली पढ़ाई खत्म करने के बाद नूतन कॉलेज में मोनिका को एडमीशन उसकी काबिलियत के दम पर ही मिला। हायर सेकेंडरी की परीक्षा में मोनिका 77.40 प्रतिशत नंबर लेकर प्रथम श्रेणी में आई थी। इसके अलावा मोनिका के साहस और टैलेंट ने भी कॉलेज को प्रभावित किया। मोनिका की संगीत की ज्यादा रुचि है और क्लासिकल फोक से लेकर सुगम संगीत में भी वे माहिर हैं। फोक यानी लोकसंगीत की बात करें तो मोनिका को बुंदेलखंडी लोकसंगीत में ज्यादा रुचि है। उनकी फेवरेट सिंगर लता मंगेशकर हैं। यहां बात चूंकि मोनिका के सिंगिंग टैलेंट की हो रही है तो आपको यह भी बता दें कि आवाज की दुनिया यानी रेडियो से भी जुड़ी हुई हैं। मोनिका इंटरनेट रेडिया स्टेशन रेडियो उड़ान में बतौर आरजे काम कर रही हैं और इस पर वे लेट्स इंज्वाय 20-20 प्रोग्राम पेश करती हैं। उड़ान रेडियो वेलफेयर सोसायटी की तरफ से मोनिका को अवार्ड भी मिल चुका है। मोनिका के संगीत के टैलेंट के किस्से यहीं खत्म नहीं होते उन्होंने हिंदुस्तानी आर्ट एंड म्यूजिक सोसायटी कोलकाता से भाव संगीत और वोकल क्लासीकल में डिग्री ली है। संगीत भूषण की पढ़ाई उन्होंने प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ से की है। और संगीत विशारद की डिग्री प्रयाग संगीत समीति इलाहाबाद से लेने के बाद उन्होंने अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय से लोकसंगीत में डिप्लोमा किया है।

ये तो हुई मोनिका के म्यूजिक और सिंगिंग टैलेंट की बात अभी बहुत कुछ बाकी है जो उन्हें स्पेशल बनाता है। मोनिका ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आयोजित किये गये सेल्फ डिफेंस प्रोग्राम में हिस्सा लिया और इसी के अंतगर्त आने वाले दिनों में वे कराते का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। इसके अतिरिक्त उन्होंने एक जर्मन फाउंडेशन के ट्रेनिंग प्रोग्राम जो कि विजुअली और फिजीकली चैलेंज्ड महिलाओं के लिये आयोजित किया गया था में हिस्सा लिया। 50 मीटर और 100 मीटर की म्यूजिकल चेयर रेस के अलावा वे मैराथन दौड़ में तो आगे रही हैं। अन्य फिजीकल एक्टिविटीज और स्पोट्र्स में न सिर्फ उनका इंट्रेस्ट है बल्कि इसी प्रकार के कई क्षेत्रों में झंडे गाड़े हैं।

मोनिका के टैलेंट की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वे कम्प्यूटर पर ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर में काम कर लेती हैं। इंटरनेट का पूरा इस्तेमाल करना जानती हैं। स्काईपी, फेसबुक वे बराबर यूज करती हैं और उनके ही जैसे उनके सैकड़ों की संख्या में दोस्त हैं स्काईपी पर। नेट पर जावा और एनवीडीए भी रन कर लेती हैं। अभी मोनिका एबाकस की क्लास ले रही हैं। मोनिका की मां बताती हैं कि उसकी टीचर ने मोनिका के हिसाब से टे्रनिंग का पैटर्न बदला है, जिसमें उन्हें भी मजा आता है सिखाने में। खाली समय में मोनिका किताबें पढऩा, म्यूजिक सुनना और फिल्में देखना पसंद करती हैं। फिक्शन नॉवेल में मोनिका की रुचि ज्यादा है और साहित्य में वे प्रेमचंद के उपन्यास और कहानियां पढ़ चुकी हैं। मोनिका ने हाल ही में पीकू देखी है। ।

दोस्ती बनी प्रेरणा

चूंकि मोनिका के सबसे ज्यादा फ्रेंड्स स्काईपी पर हैं तो यहां उनके जीवन की एक सबसे खास बात बताते चलें दिल्ली स्कूल टाईम के दोस्त और भी कई सारे दोस्त उन्हें स्काईपी पर मिले। इन्हीं दोस्तों में मोनिका को मिलीं अंकिता सोनी। मनिंद्रगढ़ छत्तीसगढ़ की रहने वाली अंकिता भी मोनिका की तरह विजुअली चैलेंज्ड हैं। अभी कुछ ही समय पहले अंकिता का सिलेक्शन बैंक पीओ में हुआ है।जब मेरी मुलाकात इन दोनों से हुई थी तो अंकिता बैंक पीओ का एक्जाम देने भोपाल आई हुई थीं मोनिका बताती हैं कि अंकिता ही उनके म्यूजिक की प्रेरणा हैं और उन्होंने ही मुझे संगीत में आगे बढऩे के लिये प्रेरित किया और बताया कि कहां से कोर्स करूं।

बैंकिग में कैरियर का सपना

अंकिता का सपना बैंकिंग सेक्टर में कैरियर बनाना है और उनका प्रिय विषय इतिहास है। इत्तेफाक ये हुआ कि जब हम मोनिका से मिलने पहुंचे तो अंकिता भी उनके घर आई हुईं थीं क्योंकि उनका भोपाल में बैंक पीओ के लिये आज साक्षात्कार है। अंकिता ने एसबीआई,आईबीपीएस ऐबीआई क्लैरिकल ओर पी ओ के एक्जाम क्लीयर किये हैं। मोनिका और अंकिता एक दूसरे के साथ नेट और मोबाइल सॉफ्टवेयर के बारे में या किसी और विषय के बारे में बात करती हैं तो खुद में खो जाती हैं।

सेल्फ कॉन्फीडेंस और माता-पिता का साथ

उनकी एक्टिविटीज को देखकर आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि भगवान ने उनमें क्या कमी रखी है, लेकिन उनकी अपनी स्ट्रेंथ, सेल्फ कॉन्फीडेंस और कैचिंग पॉवर इतना स्ट्रांग है कि उन्हें किसी सहारे की जरूरत नहीं पढ़ती। इनकी इस पॉवर का सबसे ज्यादा श्रेय जाता है इनके माता-पिता को। मोनिका की मां निर्मलाजी कहती हैं कि मैने इसे कभी अहसास नहीं होने दिया कि इसके पास कुछ कमी है उसे उसके काम खुद करना सिखाया और मोनिका के पिता श्री सुरेश कुमार जहां भी वह बाहर जाती है उसके साथ साये की तरह साथ रहते हैं। श्री सुरेश कुमार बताते हैं कि मोनिका को फ्री रहना अच्छा नहीं लगता। जब छुट्टियों का समय होता है तो वह कुछ न कुछ सीख रही होती है। इलाहाबाद से म्यूजिक की डिग्री उसने स्कूली छुट्टियों के दौरान कम्प्लीट की थी। मोनिका के अभी तक के जीवन का सबसे यादगार लम्हा था पृथ्वी थियेटर मुंबई में गुलजार साहब के सामने उन्हीं के लिखे हुये नाटक कप्तान चाचा में अभिनय करना और रेखा भारद्वाज के साथ लाईव स्टेज परफार्मेंस देना। तो मोनिका थियेटर में भी दखल रखती हैं। इसे सिर्फ आप कुदरत का करिश्मा कह सकते हैं और मोनिका कहती हैं कि किसी भी चीज में इंट्रेस्ट,उसे पाने पूरा करने की महत्वाकांक्षा ओर दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मेरे परिवार का साथ मेरी सबसे बड़ी शक्ति है जो मेरे लिये चीजों को आसान बनाती है। हालांकि मोनिका मल्टी टैलेंटेउ हैं लेकिन उनका सपना म्यूजिक में कैरियर बनाने का है।

बेटी पर गर्व समाज पर गुस्सा

मोनिका की मां कहती हैं कि समाज में अन्य परिवारों में भी मोनिका जैसी बच्चियां हैं, लेकिन उनके परिवारों का उनके साथ व्यवहार उपेक्षा भरा है। ऐसे बच्चों को उनके ही माता-पिता न सिर्फ बोझ समझते हैं बल्कि शर्मिंदा भी रहते हैं। मैं पूछती हूं अपनी ही संतान के लिये शर्मिंदगी कैसी? मेरी बेटी मेरा गर्व है। मोनिका के पिता बताते हैं कि मोनिका को दूसरों के लिये कुछ करना अच्छा लगता है। मोनिका कहती है कई बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लोग सिम्पैथी जताते हुये बैठाते हैं, जो मुझे अच्छा नहीं लगता। मोनिका तब लोगों से कहती हैं कि वो जो बुजुर्ग अंकल खड़े हैं आप उनका बैठाओ पहले। मोनिका अपने आसपास के लोगों का अंदाजा शतप्रतिशत लगा लेती हैं। मोनिका और अंकिता जैसे बच्चों के माता-पिता को मल्हार मीडिया का सलाम और गुजारिश उन माता-पिता से जो अपने ऐसे स्पेशल बच्चों को शर्मिंदगी मानते हैं। आप उन्हें सपोर्ट करें सही दिशा दिखायें फिर देखिये वो कोई मौका नहीं छोड़ेंगे आपको खुद पर गर्व करने का।

मध्य प्रदेश की पत्रकार ममता यादव की रिपोर्ट.

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