मध्यप्रदेश में ‘जनसंपर्क’ विभाग को बंद करने की तैयारी!

: 58 पेज का टेंडर जारी : अखबार एवं टीवी चैनल मालिकों को करनी पड़ेगी चरण वंदना : मध्य प्रदेश सरकार का जनसंपर्क विभाग सरकार की उपलब्धियों और योजनाओ के प्रचार प्रसार का कार्य करता है। इसके अलावा जनता के बीच से आ रहे फीडबैक से सरकार को अवगत करने का कार्य भी यही विभाग करता है। लेकिन, कुछ अधिकारियो ने जनसंपर्क विभाग को बंद करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए जनसंपर्क विभाग के उपक्रम म. प्र. माध्यम ने बकायदा टेंडर जारी कर दिए है। सरकार की ब्रांडिंग, पीआर और विज्ञापन प्रदान करने का काम अब तक जनसंपर्क विभाग ही करता आया है। इस टेंडर के अखबार, टीवी चैनल, रेडियो और वेब साइट मालिको को विज्ञापन के लिए इन कंपनियों की चरण वंदना करनी पड़ेगी।

म. प्र. माध्यम ने सरकार की ब्रांडिंग, पीआर और विज्ञापन प्रदान करने के लिए 58 पेज का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर में पीआर एजेंसियों से ब्रांडिंग, पीआर और विज्ञापन प्रदान करने के लिए प्रपोजल मांगे गए हैं। जारी किए गए टेंडर में कुछ विशेष शर्ते चहेती पीआर कम्पनियो के लिए डाली गई है। इस टेंडर के लिए अधिकारियो द्वारा कम्पनियों का चयन पहले से ही कर लिया गया है। इनमे से एक कंपनी द्वारा लोकसभा चुनावो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रांडिंग का कार्य कर चुकी है। दूसरी कंम्पनी में ‘माध्यम’ एवं जनसंपर्क के दो अधिकारियो के पुत्र एवं दामाद बड़े पदो पर काम कर रहे हैं और जुड़े हुए है। ये अधिकारी जल्द ही जनसंपर्क और माध्यम से रिटायर होकर अपने पुनर्वास के रूप में इन कंपनियों को ज्वाइन करेंगे, ये तय है। बता दें कि इनमें से एक सर्वाधिक विवादास्पद अधिकारी सुरेश तिवारी हैं, जो इसी साल के अंत में रिटायर हो रहे हैं। 

टेंडर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

http://mpmadhyam.in/prf_2014.pdf



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Comments on “मध्यप्रदेश में ‘जनसंपर्क’ विभाग को बंद करने की तैयारी!

  • Shankar Singh says:

    सुरेश तिवारी पर सरकार की मेहरबानियाँ जगजाहिर है। वे इसी साल 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं, पर सरकार उन्हें एक साल का एक्सटेंशन देने की तैयारी कर चुकी है। जनसंपर्क मंत्री ने नोटशीट भी लिख दी है। ख़ास बात ये कि ‘माध्यम’ को ऑउटसोर्स करने की जिन अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें सुरेश तिवारी भी हैं। इस सबके पीछे सुरेश तिवारी के दामाद की पीआर कंपनी को ‘माध्यम’ देने की साजिश है। एक पूर्व युवक कांग्रेस अध्यक्ष पर भाजपा क्यों मेहरबान है, ये अपने आपमें ख़ास बात है!

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