सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड और टर्मिनेशन के लंबित मामले तय समयसीमा में निपटाने के आदेश दिए

देशभर के सभी हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को नोटिस जारी किए गए… देशभर में मजीठिया वेतनमान के लिए संघर्ष कर रहे प्रिंट मीडिया के साथियों के लिए नए साल में देश की सबसे बड़ी अदालत ने बड़ी राहत भरी खबर दी है। मजीठिया को लेकर दायर एक मिसलेनियस एप्लीकेशन पर सोमवार 28 जनवरी को प्रधान न्यायाधीश माननीय रंजन गोगोई व माननीय संजीव खन्ना की बेंच ने सुनवाई कर कर्मचारियों के हक में फैसला सुनाया है।

कर्मचारियों की ओर से देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण व उनके सहयोगी अधिवक्ता गोविंद जी ने पैरवी की। श्री भूषण ने कर्मचारियों के पक्ष में जोरदार दलीलें दीं। भूषण जी ने माननीय अदालत के सामने कई साल से लंबित पड़े मामले व साथ ही termination के लंबित पड़े मामलो को रखा।इसके बाद माननीय न्यायालय ने आदेश दिया कि देशभर में मजीठिया के मामलों का निराकरण श्रम न्यायालय निश्चित तय अवधि में करें। इस दौरान हाईकोर्ट के स्टे का मामला भी उठाया गया।

इस पर भी कोर्ट ने आदेश दिए कि हाईकोर्ट मजीठिया के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करे और स्टे देने से बचे। साथ ही वर्तमान में हाईकोर्ट में जो मामले लंबित हैं, उन्हें जल्द से जल्द निपटाया जाए। इसके अलावा सालों से चल रहे बर्खास्तगी और ट्रांसफर के मामलों में भी कर्मचारियों को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इन मामलों को भी श्रम न्यायालयों को निर्धारित समय सीमा में ही निपटाना होगा। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश कर्मचारियों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व के कटू अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार बिलकुल तय रणनीति के मुताबिक माननीय सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले को लड़ा गया। इससे सफलता मिली है।

इस मामले में दिल्ली से महेश कुमार मजीठिया क्रांतिकारी ने मुख्य भूमिका निभाई, नोएडा से विवेक त्यागी, रतनभूषण प्रसाद, राजेश निरंजन, मध्यप्रदेश से राजेंद्र मेहता संयोजक स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन एमपी, मौ फैजान खान महासचिव स्टेट वर्किग जर्नलिस्ट एमपी, हिमाचल प्रदेश से राजेश गोस्वामी, राजेश शर्मा, पंजाब जालंधर से मानसिंह, सुनील कुमार, विकास सिंह लुधियाना से धीरज सिंह साथियों का विशेष सहयोग रहा। यहां के सभी साथी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने पूरे मामले के लिए न केवल धन बल्कि दस्तावेज और अन्य माध्यमों से केस में अपना सहयोग किया।

प्रभावी रणनीति से मिली सफलता
ज्ञात हो कि देशभर के श्रम न्यायालयों में करीब दो साल से मजीठिया के प्रकरण विभिन्न् कारणों से लंबित हैं। अखबार प्रबंधन श्रम न्यायालयों के अंतरिम आदेशों को लेकर हाईकोर्ट जाकर मामले में स्टे लेकर लंबित करने का प्रयास कर रहा है। इससे मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है। इसके अलावा प्रबंधन की मंशा थी कि किसी भी श्रम न्यायालय से कोई अवार्ड पारित न हो सके। अखबार मालिकों की इस रणनीति से निपटने के लिए दिल्ली, नोएडा , पंजाब, से लेकर भोपाल के साथियों ने पूरी व्यूह रचना तैयार की।

इसके बाद अधिवक्ता गोविंद जी के माधयम से प्रख्यात अधिवक्ता प्रशांत भूषण जी को सारे मामले से अवगत कराया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे इस मामले को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखें, जिसके बाद नवंबर माह में एक आईए दाखिल हुई। अवमानना मामलों की गलतियों से सबक लेते हुए इस बार पूरा प्लान तैयार किया गया था ताकि कोर्ट में इस बार कानूनी रूप से किसी तरह की कोई कमी न रह जाए। सभी के साझा प्रयासों और सहयोग से इस बार कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से जीत मिली है। सभी साथियों को सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के अनुसार ही अपनी आगे की रणनीति तैयार करनी चाहिए।


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