गौर से देखा जाए तो NDTV जीत कर भी हार गया है!

Vishnu Gupt : एनडीटीवी के सामने मोदी सरकार ने किया समर्पण, प्रतिबंध किया स्थगित, एनडीटीवी के खिलाफ अभियान चलाने वाले ठगे गये… यह मोदी सरकार की वीरता नहीं है। मोदी सरकार की यह दूरदृष्टि नहीं है। मोदी सरकार ने उन लाखों देशभक्तों के प्रयास पर पानी फेर दिया जो एनडीटीवी के राष्ट्रविरोधी प्रसारणों और इसकी पाकिस्तान परस्ती के पोल खोलने में लगे थे। जब औकात नहीं थी तो फिर मोदी सरकार को यह कदम उठाना ही नहीं चाहिए था, अगर कदम उठाया था तो उस पर अमल करना चाहिए। लग रहा था कि पहली बार कोई सरकार हिम्मत दिखायी है। पर मोदी सरकार भी डरपोक, रणछोड़ निकली। हमारे जैसे लोग जिन पर विश्वास करता है वही रणछोड हो जाता है, वही डरपोक हो जाता है। अब एनडीटीवी सहित पूरे मीडिया का देशद्रोही और पाकिस्तान परस्ती पत्रकारिता सिर चढकर बोलेगी।

प्रकाश कुकरेती : जैसा कि मैं पहले भी व्यक्तिगत बातचीत में कहता रहा हूँ कि NDTV को सरकार के एक दिन के बैन के फैसले के खिलाफ अदालत नहीं जाना चाहिए था. बैन से NDTV को जबरदस्त सहानुभूति मिल रही थी. मगर NDTV ने अदालत जाकर गलती कर दी. इस कारण सरकार ने बैन स्थगित कर दिया. हां, बैन रद्द नहीं किया है. NDTV की याचिका भी ख़ारिज नहीं हुई है. मने अब अदालत में बहस इस बात पर होगी कि NDTV पर बैन लगाना सही था या नहीं. वहां पर NDTV को यह साबित करना होगा कि उसकी रिपोर्टिंग देश हित के खिलाफ नहीं थी. अगर वह यह साबित कर भी देता है तो इससे सरकार पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. अगर NDTV यह साबित नहीं कर पाता है तो वह यह साबित करने की कोशिश करेगा कि सभी चैनलों ने इसी तरह की रिपोर्टिंग की, मगर राजनैतिक कारणों से उसे ही निशाना बनाया गया. अगर अदालत में यह साबित हो जाता है तो सुप्रीम कोर्ट सरकार को आदेश दे सकता है कि वह सब चैनलों पर एक समान कार्यवाही करे. दोनों मामलों में गौर से देखा जाए तो NDTV जीत कर भी हार गया है.

दक्षिणपंथी विचारधारा के पत्रकार विष्णु गुप्त और प्रकाश कुकरेती की एफबी वॉल से.

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