इस पुलिस कप्तान ने महाकवि नीरज के साथ मनाई दीपावली

अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने दिवाली के दिन महाकवि नीरज के आवास पर पहुंचे और उनके साथ त्योहार की खुशियां साझा की. इस मौके पर पदम भूषण नीरज ने कुछ कविताओं की चंद लाइनें भी सुनाईं. इस मुलाकात के बारे में तफसील से राजेश पांडेय ने जो कुछ बताया, वह यूं है :

आज पदम भूषण महाकवि नीरज के आवास पर दीपावली मिलने और उनका कुशल क्षेम लेने गया। श्री गोपाल दास “नीरज” आज स्वस्थ एवं प्रसन्नचित लगे। दीपावली की मिठाई खिलाने के लिए प्रयास करने पर उन्होंने जिद करके मुझे पहले मिठाई खिलाई। उनकी इस आत्मीयता से मैं भाव विभोर हो गया मैंने नीरज जी से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मेरे बेटे व बहू आये हुए हैं बातचीत करते करते उन्होंने दो लाइनें पढी…

सिर्फ बिछड़ने के लिए
ये है मेल-मिलाप
एक मुसाफिर हम यहां
एक मुसाफिर आप।

मैं नीरज जी से अलीगढ़ जनपद में तैनाती के दौरान 7-8 बार मिल कर आशीर्वाद ले चुका हूँ, किंतु यह पहली बार था कि उन्होंने ये दो लाइनें सुनाई… मुझे पता नहीं कि ये उनकी किसी पुरानी कविता की लाइनें हैं या फिर आज ही उनके मन में आई हैं। फिलहाल मैं कविता के इस अंश को समझने का प्रयास कर रहा हूँ। काफी देर उनके पास बैठने के बाद जब मैं चलने को हुआ तो उन्होंने चलते चलते फिर दो लाइनें सुनाई…

हम सबका है एक ठिकाना
लेकिन अलग-अलग है जाना।

आज नीरज जी के मुखारविंद से निकली ये दो कविताएं सुनकर मैं भाव विभोर ,प्रसन्न, आश्चर्यचकित तथा किंकर्तव्यविमूढ़ था। जाने क्या कह गए नीरज जी, इसका क्या अर्थ निकाला जाय… ईश्वर नीरज जी को स्वस्थ प्रसन्नचित तथा दीर्घायु करें।



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