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नए अखबारों के एम्पैनलमेंट अब मुफ्त में नहीं, दस हजार रुपये लगेगी फीस

अब नए अखबारों के एम्पैनलमेंट मुफ्त में नहीं होंगे, बल्कि इसके लिए जेब ढीली करनी होगी। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इसके लिए 10,000 रुपए तक की फीस लगाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में निर्देश डीएवीपी के पास पहुंच गए हैं और जिन पर अमल करने की प्रक्रिया पर कार्रवाई शुरु हो गई है। संभावना है कि अगली बार जब भी एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया होगी, निर्धारित फीस के साथ ही होगी।

अब नए अखबारों के एम्पैनलमेंट मुफ्त में नहीं होंगे, बल्कि इसके लिए जेब ढीली करनी होगी। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इसके लिए 10,000 रुपए तक की फीस लगाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में निर्देश डीएवीपी के पास पहुंच गए हैं और जिन पर अमल करने की प्रक्रिया पर कार्रवाई शुरु हो गई है। संभावना है कि अगली बार जब भी एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया होगी, निर्धारित फीस के साथ ही होगी।

जानकारी के अनुसार इस संबंध में तीन श्रेणी तय की गई हैं, बड़े अखबारों से 10,000, मध्यम श्रेणी से 5,000 और लघु श्रेणी अखबारों से 2,000 रुपए की धनराशि वसूली जाएगी। हालांकि एम्पैनलमेंट को लेकर डीएवीपी पहले भी विवादों में रहा है। हालांकि कोशिश की जाती है कि प्रक्रिया पारदर्शी दिखाई दे, लेकिन फिर भी यहां के अफसरों पर आरोप लगते रहे हैं। उपर के अफसरों के तबादले तो होते हैं, लेकिन नीचे के स्तर पर छोटे अफसर, एक ही शाखा में लंबे समय से जमे हुए हैं, जिनका आचरण संदिग्ध है।  मनमाने तरीके से कई अखबारों का एम्पैनलमेंट करने और कई के निरस्त किए जाने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं।

योगेश जोशी की रिपोर्ट.

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