मध्य प्रदेश में अभिव्यक्ति की आजादी पर सत्ता के अहंकार का निर्लज्ज हमला

नईदुनिया समूह के भोपाल दैनिक नवदुनिया पर भाजपा पार्षद और उनके गुर्गों का हमला कहीं अभिव्यक्ति की स्वाधीनता पर पार्टी की अभिव्यक्ति तो नहीं है..! अपना मानना है की ऐसा नहीं है। यह दरअसल यह सत्ता के अहंकार का निर्लज्ज प्रदर्शन है जिसमे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के जिम्मेदार लोग भी आकंठ डूबे हुए हैं। जरा याद करें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का यह दंभी डायलाग –पत्रकार-वत्रकार क्या होता है ,हमसे बड़ा कोई है क्या..! चिंता की बात यह है की सरकार ने मीडिया मालिकों को तो खूब मैनेज कर रखा है जिससे इस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ खबरें कभी-कभार ही छपती हैं। इसे भी सत्ताधीश और उनसे जुड़े लोग पचा नहीं पाते और उनके कोप का शिकार पत्रकारों को होना पड़ता है।

मेरा अनुरोध है की कम से कम ऐसे अवसरों पर तो मीडिया हाउसों को व्यावसायिक प्रतिद्वंदिता बिसरा कर साथ खड़े होना चाहिए। दैनिक भास्कर ने इस हमले की खबर तो छापी है पर आधी-अधूरी, जिसे पढ़ने पर पता ही नहीं चलता की किस अखबार पर हमला हुआ है। जो पाठक केवल एक अखबार ही खरीदता है वह इस जानकारी से वंचित रह गया। बताते चलें की जिस शीर्ष पर आज दैनिक भास्कर बिराजमान है वहाँ कभी नईदुनिया का कब्जा था। बहरहाल अभिव्यक्ति की आजादी पर अहंकार के आत्मघाती आक्रमण का सिर्फ मीडिया नहीं बल्कि सभी  एक्टिविस्टों और एनजीओ को एकजुट होकर जवाब देना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्रकुमार सिंह ने सही कहा है की पार्टी को भी इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.



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