ये प्रियदर्शन पीडी नामक पत्रकार तो ‘आजतक’ के पत्रकार नवीन की पिटाई को ही जायज ठहराने लगा!

Samarendra Singh : कुत्ता कुत्ते का मांस नहीं खाता. लेकिन इन पत्रकारों की बात ही कुछ और है! ये भी पत्रकार हैं. दो-चार बार मैंने भी इनसे हाथ मिलाया है. लेकिन आज अफसोस हो रहा है. आप इनका लिखा पढ़िए. बस यह जानने और समझने के लिए पढ़ लीजिए कि ऐसे भी पत्रकार होते हैं. और पढ़ने के बाद … प्लीज कोई प्रतिक्रिया मत दीजिएगा. इनका लिखा प्रतिक्रिया देने लायक नहीं है.

प्रियदर्शन पीडी

Priyadarshan Pd : मित्रो! मन व्यथित है। आज दिल्ली पुलिस ने एक पत्रकार को पीटा। ये बात पीड़ित पत्रकार ने ख़ुद फ़ेसबुक पर सार्वजनिक की है। उन्होंने अपनी व्यथा-कथा की सप्रसंग व्याख्या की है जिसे पढ़कर किसी का मन खिन्न हो जाए। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के महान स्तंभकार के साथ दिल्ली पुलिस इतनी बर्बरता कैसे कर सकती है?

मित्रो! हम पत्रकार बिरादरी से आते हैं। ये सच है कि हमारी बिरादरी में कुछ लोग हैं जिन्हें अक्सर औकात से बाहर यानी पायजामे से बाहर जाने की लत है। पिटाई प्रकरण की सच्चाई भी ऐसी ही लगती है – मुझे पूरा विश्वास है। कोरोना के कारण देशभर की सरकारें सक्रिय हैं।

दिल्ली में लॉकडाउन है। सिर्फ़ आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को बाहर निकलने की छूट है। आवश्यक सेवाओं में मीडिया (पत्रकार) भी शामिल हैं। वो घर से निकल सकते हैं, दफ़्तर और रिपोर्टिंग के लिए कहीं जा सकते हैं। कोई बंदिश नहीं है- कोई नहीं रोक रहा, ऐसा मैंने नोएडा से दिल्ली और दिल्ली से नोएडा आने वाले कई पत्रकार मित्रों से बातचीत कर जाना है।

पुलिस की चेकिंग हो रही है। पत्रकार के आईकार्ड यानी पहचान-पत्र दिखाने पर पुलिस वाले आने-जाने दे रहे हैं। कई जगह तो पत्रकार की गाड़ी पर लगा स्टीकर देखकर ही पुलिसवाले आने-जाने से नहीं रोक रहे। ऐसे में – नामचीन पत्रकार बंधु क्यों पिट गए – ये आसानी से समझा जा सकता है।

आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कई जगह पुलिसवालों से बदतमीज़ी की गई। बदतमीजी करने वालों में कुछ पत्रकार भी थे। कुछ लोगों/पत्रकारों ने पुलिसवालों से बेवजह बहस भी की। अरविंद केजरीवाल ने ऐसे लोगों से सख़्ती से निपटने की अपील की।

मैं जानना चाहता हूं कि पुलिस से उलझने वाले पत्रकार कौन-कौन थे और क्यों ड्यूटी निभाने वाले पुलिसवालों से उन्होंने बहस की। आख़िर इन पत्रकारों की औकात क्या है? कहने के लिए ये पत्रकारिता की अलख जगाते हैं, असल में ये आत्ममुग्धता के स्वयंभू ठेकेदार हैं। ये समझते हैं कि इनकी समझ से ही देश चल रहा है, बाक़ी तो सब बेकार और तुच्छ हैं।

ये आत्ममुग्ध पत्रकार इतने आज़ादी-पसंद हैं कि ज़रा सी बंदिश – आईकार्ड दिखाने की – इन्हें बर्दाश्त नहीं। कोई पुलिसवाला इनसे पहचान-पत्र और घर से निकलने का प्रयोजन पूछ ले तो ये इनके स्वाभिमान की अट्टालिका में बारूद लगाने के बराबर है।

मेरा पुलिस और प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि कोरोना-संकट की घड़ी में मुस्तैद रहें और अपना कर्तव्य निभाएं। पूरा देश आपके प्रयासों के साथ है। कुछ असामाजिक लोग – जिसमें पत्रकार भी शामिल हैं – व्यवस्था को चैलेंज करें तो उनको रास्ते पर लाने का कोई मौक़ा न गंवाएं।

अभी सवाल देश के आमलोगों की जान का है- चंद बेजान, बदज़ुबान और बेहुदे लोग व्यवस्था को चुनौती दें तो उनकी उचित ख़ातिरदारी होनी चाहिए। ऐसे नामुराद पत्रकार #StayHome रहेंगे तो देश पर आफ़त नहीं आ जाएगी!

बाक़ी, यही कामना है कि ईश्वर हम भारतवासी को कोरोना से लड़ने की शक्ति दे।

जय हिंद!!!

इन्हें भी पढ़ें-

‘आजतक’ के पत्रकार नवीन कुमार को दिल्ली पुलिस ने बुरी तरह पीटा, मीडियाकर्मी स्तब्ध

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

One comment on “ये प्रियदर्शन पीडी नामक पत्रकार तो ‘आजतक’ के पत्रकार नवीन की पिटाई को ही जायज ठहराने लगा!”

  • भारत कुमार says:

    ये ठुकाई जरूरी थी, मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने साफ तौर पर बताया कि पहले नवीन कुमार ने पुलिस को अपशब्द कहे और वर्दी उठवाने की धमकी दी …बार बार मना करने के बाद भी जब वो नहीं माने तब पुलिस ने सेनेटाइजर डंडा चलाया जिससे लाल सलाम का पिछवाड़ा भी लाल हो गया हालांकि ये पहला मामला नहीं इससे पहले भी कई बार आम लोग और पुलिस उद्घाटन मैच खेल चुकी है ये पाखण्डी अधिकतर पिटता रहा है !!

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *