‘प्रदेश टुडे’ की हालत खस्ता!

धूम-धड़ाके के साथ कुछ साल पहले भोपाल से शुरू हुए अखबार ‘प्रदेश टुडे’ की हालत इन दिनों खस्ता है। बताते हैं कि अखबार में काम करने वाले पत्रकारों और कर्मचारियों को दो-दो महीने से वेतन भी नहीं मिला! भोपाल ही नहीं जबलपुर, ग्वालियर संस्करणों और ब्यूरो दफ्तरों में भी यही हालत है। इसका असर अखबार के स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। हर दो-तीन महीनों में नेताओं और अभिनेताओं को इकट्ठा करके बड़ा लवाजमा करने वाले ‘प्रदेश टुडे’ के मालिक अभी भी इवेंट तो कर रहे हैं, पर पत्रकारों को वेतन नहीं दे रहे!

अखबार के अलावा और भी कई तरह के कारोबार से जुड़े ‘प्रदेश टुडे’ के संचालक दीक्षित बंधुओं के बारे में कहा जा रहा है कि पिछले दिनों उनके राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरण गड़बड़ा गए, जिससे उनकी हालत बिगड़ी है। अपनी राजनीतिक पकड़ को अखबार के इवेंट्स में दर्शाकर उसका अपने तरीके से फ़ायदा लेने वाले दीक्षित बंधु इन दिनों जिस तरह की परेशानी महसूस कर रहे हैं, वो भोपाल में चर्चा का विषय बन रहा है।

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Comments on “‘प्रदेश टुडे’ की हालत खस्ता!

  • Masoor Ahmed says:

    ‘प्रदेश टुडे’ से उम्मीद थी, वो इनके ही एक गुर्गे सतीश पिम्पले के कारण धराशाही हो गई! पहले नागपुर में ‘नव महाराष्ट्र’ की लुटिया डुबोने के बाद ‘राज एक्सप्रेस’ के काम लगा दिए और अब यही आदमी ‘प्रदेश टुडे’ का बँटाढाल करने में लगा है। देवेश कल्याणी जैसे दोयम दर्जे के पत्रकारों को संपादक बनाकर हृदेश दीक्षित ने सही फैसला नहीं किया है। यही कारण है कि ‘प्रदेश टुडे’ की आज ये हालत हुई है।

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  • प्रदेश टुडे की हालत तो एक साल से ख़राब है ब्रस्टाचारा और फर्जी तरीके से दौलत कमा कर खड़ा किए इस अखबार का काम सिर्फ ब्लैकमेल करना है कर्मचारियो को वेतन नहीं मिले तो कया , दिक्षित बंधु तो मोज मस्ती मे लगे है

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