सैलरी मांगने पर पत्रकारों को नौकरी से निकाला, नाराज कर्मी धरने पर बैठे, देखें वीडियो

भोपाल : बीटीएस न्यूज़ में कर्मचारियों को सैलरी मांगने पर टर्मिनेट कर दिया जा रहा है। लगभग 85 कर्मचारी 3 महीने की सैलरी के लिए दरदर भटक रहे हैं। BTS न्यूज़ के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर नीरद निश्छल हैं। इन पर आरोप है कि ये सेलरी मांगने वालों को धमका रहे हैं। कृपया हमें अनुसरण करें …

‘नेशन लाइव’ चैनल वाले काम कराने के बाद नहीं देते सेलरी, कई पत्रकार पहुंचे थाने

नीचे दिया गया मेल अंजली सिंह ने नेशन लाइव चैनल के प्रबंधन को थी, पर वहां से कोई जवाब नहीं आया. इस चैनल के कर्ताधर्ता इशिका सिंह और अजय शाह नामक दो प्राणी बताए जाते हैं. आजकल के वक्त में दर्जनों फर्जी चैनल चल रहे हैं. झूठ और आडंबर के दम पर चलाए जा रहे …

पत्रकार राहुल जैमन समेत कई मीडियाकर्मियों की सेलरी दाबे बैठा है जयपुर का ‘खास खबर’

पत्रकार राहुल जैमन ने सूचित किया है कि वे 9 महीने पहले तक खास खबर, लाजपत मार्ग, सी स्कीम, जयपुर में एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते थे। उन्होंने 1 मई, 2016 को ज्वॉइन किया था। जनवरी, 2017 से आफिस में करीब-करीब सभी कर्मचारियों को सैलेरी के लिए परेशानी आने लगी। कृपया हमें …

‘प्रतिनिधि’ न्यूज चैनल में सेलरी के लिए बवाल, एडिटर इन चीफ घिरे, पुलिस आई (देखें वीडियो)

‘प्रतिनिधि’ न्यूज चैनल वैसे तो दिन भर उपदेश देता रहता है, नैतिकता पिलाता रहता है, सिस्टम ठीक करने के लिए कमर कसे दिखता रहता है लेकिन बात जब खुद के चैनल के भीतर शोषण की आती है तो यहां भी हाल बाकियों जैसा ही दिखता है. खबर है कि इस चैनल के इंप्लाई कई महीने से बिना सेलरी काम कर रहे हैं. एक रोज उनका धैर्य जवाब दे गया. कहा जा रहा है कि चैनल के एडिटर इन चीफ जब बिना सैलरी दिए सामान लेकर जा रहे थे तो कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया और खुद के बकाया पैसे की बात की.

रिपोर्टरों का पैसा खा गया यह चैनल!

सेवा में,
सम्मानित चैनल हेड / सीनियर्स / रिपोर्ट्स / स्टाफ
नेशनल वायस चैनल

आप और हम लोगों ने नेशनल वायस न्यूज़ चैनल को बड़ी मेहनत से आगे बढ़ाया और कम समय में मेहनत के बलबूते पर आगे तक लेकर गए और उस मेहनत की मलाई किसी ओर को समर्पित की गई। हमने दिन रात मेहनत कर लगभग दो साल तक चैनल को अपने खून पसीने से सींचा मगर हमारे सीनियर्स, चैनल के उच्चाधिकारियों ने हमारी मेहनत की मलाई खूब अच्छे से खाया और अपना पेट भरा। साथ ही उनका भी भरा जो उनके चाटुकार थे। मैंने अपनी मेहनत से चैनल को खूब काम करके दिया। खुद भूखा रहा। मगर चैनल को भूखा नहीं रहने दिया। उसका पेट भरता रहा। अपने करियर को देखते हुए घर में झूठा दिलासा देता रहा कि मैं एक अच्छे चैनल में काम कर रहा हूँ। मुझे अच्छा मेहनताना मिलता है। दिल टूट गया जब मेरे पिताजी ने एक दिन कहा कि अपनी कमाई से कुछ घर भी लेकर आया कर। मगर उन्हें कहाँ पता था कि मेरी मेहनत की कमाई तो चैनल के बड़े लोगों में बंट रही है।

नेशनल वॉइस न्यूज़ चैनल पर टिहरी रिपोर्टर का 43800 रुपये बकाया!

उत्तराखंड के जनपद टिहरी गढ़वाल के नेशनल वॉइस के रिपोर्टर को नहीं मिला सितम्बर 2016 से स्टोरी का कोई भी पैसा… सितम्बर 2016 से जून 2017 तक 43800 रुपये बकाया… काफी समय से नेशनल वॉइस के bureau chief प्रखर प्रकाश मिश्रा के आश्वासन के बाद भी उत्तराखंड के सभी रिपोर्टर नेशनल वौइस चैनल में कार्य करते रहे… लेकिन कुछ समय पहले bureau chief प्रखर प्रकाश मिश्रा जी को उनके पद से हटा दिया गया है…

गुटका किंग के अखबार में 7 अगस्त तक सेलरी न मिलने का क्या है राज?

खबर आ रही है कि इंदौर में सबसे अधिक धनी अपने आपको मानने वाले एक अखबार दबंग दुनिया में 7 अगस्त तक कर्मचारियों को सेलरी नसीब नहीं हुई है। यानी 1 या 2 तारीख को वेतन देने वाले इस लखपति अखबार में इतने दिनों तक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। वैसे रक्षाबंधन पर्व पर कर्मचारियों के हाथों में वेतन नहीं आने से कई मायूस दिखाई दिए। इधर ईमेल से मिली खबरों के अनुसार यह बात सामने आ रही है कि अखबार में इनकम टैक्स का डंडा चला है इस कारण 7 अगस्त तक कर्मचारियों के अकाउंट में वेतन नहीं पहुंचा है।

इंडिया वॉयस चैनल और जनसंदेश अखबार में सेलरी नहीं मिल रही

इंडिया वॉयस न्यूज चैनल में, जो यूपी और उत्तराखंड की खबरें प्रसारित करता है,  पिछले 2 महीने से ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की सेलरी नहीं मिली है. हालात ये हैं कि कर्मचारियों के पास घर का किराया देने तक के पैसे नहीं है… यहां तक की 2017 विधानसभा चुनाव के बाद कई स्टॉफ को बाहर का रास्ता दिखाया गया, उनकी भी सेलरी अभी तक नहीं दी गई है…

न्यूज नेशन के मालिकों-प्रबंधकों! अप्रेजल फार्म तो पहले ही भरवा लिए, बढ़ी हुई सेलरी कब तक दोगे?

न्यूज नेशन की चिंदी चोरी… एक तरफ तो पत्रकार दुनिया में हो रहे अन्याय की आवाज उठाते हैं वहीं दूसरी ओर खुद पर हो रहे अन्याय को चुपचाप सह लेते हैं। इसके उदाहरण तो कई हैं मगर आज यह बात मीडिया के एक बहुत बड़े संस्थान से जुड़ी है। बात हो रही है न्यूज़ नेशन न्यूज़ चैनल की। प्रबंधन के 2 चैनल (न्यूज नेशन, न्यूजस्टेट) हैं। न्यूज नेशन टॉप 5 का चैनल है और न्यूज स्टेट यूपी-उत्तराखंड में काफी समय से पहले पायदान पर काबिज है। साथ ही तीसरे चैनल (न्यूजस्टेट MP-CG) की तैयारियां भी जोरों पर हैं। इससे साफ है कि संस्थान के पास पैसों की कमी नहीं है।

‘चक दे’ में काम कराते हैं लेकिन सेलरी नहीं देते

मेरा नाम रणजीत कौर है और मैंने ‘चक दे’ में 8 जून 2016 को ज्वाइन किया था, बतौर न्यूज़ एंकर इन पंजाबी. स्टार्टिंग में बड़ी बड़ी बातें की गयी थीं. पर था कुछ नहीं. नाईट ड्यूटी थी और सिक्योरिटी के नाम पर कुछ नहीं था. एक छोटी सी बिल्डिंग में इसका ऑफिस है, फरीदाबाद में. वहीं कॉल सेंटर चलते हैं. वहीं न्यूज़ चैनल भी है. इस चैनल का मालिक एनआरआई है.

Re-open the case against Dr. B. N. Goswami and Chabi Bardhan

atrocity, conspiracy, harassment, robbery of my salary… Misuse of government property and Power

To,
The Commissioner of Police,
Near Pune Station, Pune 411001

Subject: Re-open the case against Dr. B. N. Goswami (retired director of IITM, Pune) and Chabi Bardhan for atrocity, conspiracy, harassment, robbery of my salary, Misuse of government property and Power

Respected sir,

सहारा मीडिया में सेलरी संकट से त्रस्त कर्मियों ने शुरू किया मेन गेट पर धरना-प्रदर्शन (देखें वीडियोज)

सहारा मीडिया के नोएडा स्थित मुख्य आफिस के गेट पर सहारा कर्मियों ने सेलरी के लिए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कई महीने की सेलरी दबाए बैठे सहारा प्रबंधन ने अपने कर्मियों को भूखे मरने के लिए छोड़ दिया है. इससे परेशान कई कर्मचारी अब गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं. दूसरे मीडिया हाउसेज इस आंदोलन को इसलिए कवर नहीं कर रहे क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई के तहत वे एक दूसरे के घर में चलने वाले उठापटक को इग्नोर करते हैं. धरना प्रदर्शन सात जनवरी से चल रहा है. धरने में करीब 25 कर्मचारी खुल कर हिस्सा ले रहे हैं.

चैनल वन प्रबंधन ने सेलरी मांगने पर अपने मीडियाकर्मी की जमकर पिटाई की

चैनल वन नामक न्यूज चैनल से सूचना है कि यहां कार्यरत मीडियाकर्मी आयुष तिवारी ने जब दो महीने की रुकी हुई सेलरी की मांग की तो प्रबंधन ने बुरी तरह पिटाई करवा दी. Channel One का संचालन पिता-पुत्र जहीर अहमद और काशिफ अहमद करते हैं. इन दोनों पर पहले भी कई तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं. जानकारी के अनुसार करीब 2 महीनों से रुकी सेलरी की मांग करने पर चैनल प्रबंधन ने अचानक आयुष तिवारी को सभी दस्तावेज़ किसी नए कर्मचारी को सौंपने के लिए कह दिया. 

हरियाणा में अमर उजाला ने मारा सर्वेयरों का वेतन!

नमस्कार सर

मैं अपना नाम पहचान छिपा कर यह पत्र लिख रहा हूं. मैं रोहतक हरियाणा का रहने वाला हूं. मैंने कई महीनों से अमर उजाला रोहतक का सर्वे ज्वाइन कर रखा था लेकिन पिछले तीन महीनों से सर्वे बंद है. वजह है कि अमर उजाला ने आखिरी दो महीनों का हमारा आधा आधा वेतन नहीं दिया. दरअसल अमर उजाला में सर्वेयर की सैलरी 7500 है, बिना किसी छुट्टी के. लेकिन अचानक से सितंबर महीने में हमारी सैलरी ये कहकर पूरी नहीं दी गई कि बाद में देंगे.

‘ओके इंडिया’ न्यूज चैनल नहीं दे रहा अपने पत्रकारों को पैसा

‘ओके इण्डिया’ नामक न्यूज चैनल कर रहा पत्रकारों का शोषण. आठ महीनों से नहीं दिए न्यूज का पेमेंट. अपने आपको नेशनल न्यूज चैनल बताने वाला ओके इण्डिया न्यूज चैनल फरवरी से आनएयर   हो गया था और तभी से न्यूज पत्रकारों से ली जा रही थी. पहली मीटिंग में जोगिन्द्र दलाल जो मालिक हैं, ने 200 रूपये पर न्यूज की बात की थी परन्तु आज आठ महीनों से हरियाणा के स्ट्रिंगरों को एक भी पैसा नहीं दिया.

यूनीवार्ता में बिना सेलरी के काम करते हैं मीडियाकर्मी!

एक ऐसा संस्थान जहां लोग पैसे कमाने के लिए नहीं जाते. दिल्ली में एक मीडिया संस्थान ऐसा है जहां कर्मचारियों को हर महीने सैलरी नहीं मिलती. इसके बावजूद न कोई कर्मचारी छुट्टी करता है और न ही मजबूती से सेलरी न दिए जाने का विरोध ही करता है. एक एडमिन विभाग है लेकिन वहां सैलरी के बारे में नहीं पूछ सकते. अकाउंट्स विभाग भी है लेकिन वहां बैठे साहब महीना पूरा होने के बाद ‘इस हफ्ते इस हफ्ते’ कहकर हफ्तों निकाल देते हैं.

सेलरी न मिलने पर राष्ट्रीय सहारा अखबार की कई यूनिटों में हड़ताल

सहारा मीडिया से बड़ी खबर आ रही है कि साल भर से सेलरी न मिलने से नाराज राष्ट्रीय सहारा अखबार के कर्मियों ने हड़ताल कर दिया है. हड़ताल से नोएडा, लखनऊ, बनारस, कानपुर यूनिटें प्रभावित हैं. बताया जा रहा है कि गोरखपुर और पटना की यूनिटों में हड़ताल नहीं हुआ है. कार्य बहिष्कार के कारण सहारा मीडिया के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भागदौड़ तेज कर दी है. किसी तरह हड़ताल खत्म कराने की कोशिशें हो रही हैं.

एकजुट होने लगे सहारा कर्मी, सेलरी के लिए किया प्रबंधन का घेराव

सहारा कर्मी अपनी सेलरी के लिए एकजुट होने लगे हैं. सहारा मीडिया में सेलरी संकट और कर्मचारियों की अंदरखाने एकजुटता की खबर भड़ास पर प्रकाशित होने के कुछ घंटे के बाद ही सहारा के नोएडा आफिस में कई महीने से सेलरी न मिलने से नाराज सहारा कर्मियों ने प्रबंधन का घेराव कर लिया. आंदोलनकारी कर्मियों ने भड़ास को एक मेल के जरिए जानकारी दी कि कर्मचारियों की एकजुटता और घेराव देखकर वहां मौजूद सभी एचओडी अपनी अपनी केबिन में भाग निकले.

सुब्रत राय जेल में प्रसन्न, सहारा मीडिया कर्मी जेल के बाहर भीषण सेलरी संकट से खिन्न

क्या कांट्रास्ट है. जो जेल में है वो प्रसन्न है. जो आजाद है वह खिन्न है. यह तीसरा महीना चल रहा है सहारा मीडिया में बिना सेलरी काम कराए जाने का. सुब्रत राय तिहाड़ जेल में दबा कर किताबें लिख रहे हैं, बाहर अखबारों में करोड़ों अरबों का विज्ञापन अपनी किताब से संबंधित छपवा रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके पास अपने कर्मियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं. सुब्रत राय खुद को रिहा कराने के लिए होटल जमीन सब बेचने का प्रस्ताव कोर्ट के सामने कर रहे हैं लेकिन अपने कर्मियों को सेलरी देने के नाम पर चुप्पी साधे हैं.

जानिये अगर आप दैनिक भास्कर में हैं तो कितना होना चाहिये आपका वेतन

दूसरे समाचार पत्रों के पत्रकार भी वेतन तालिका बनाने में ले सकते हैं बिस्तर पर पड़े जुझारू पत्रकार हेमंत की मदद

प्रिय मित्रों,

मैं जब से मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में भड़ास के यशवंत सर के आशीर्वाद से आप सबके साथ शामिल हूआ हूं, आप सबका लगातार समर्थन और उत्साह मिल रहा है। देश भर के पत्रकारों के फोन लगातार आ रहे हैं और लोग मुझसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जमा किये जाने वाले एफिडेविट के बारे में पूछ रहे हैं। साफ कहूं तो लगभग २०० फोन मेरे मोबाईल पर आये जिसमें लगभग १८० फोन दैनिक भास्कर के अपने पत्रकार भाईयों और भास्कर से जुड़े देश भर के लोगों के थे। उससे साफ है कि सबसे ज्यादा प्रताड़ना के शिकार लोगो में भास्कर के पत्रकारों की संख्या सबसे ज्यादा है।

‘दक्षिण मुंबई’ नामक अखबार की नीचता के खिलाफ युवा पत्रकार पहुंचा लेबर आफिस और पुलिस स्टेशन, पढ़ें शिकायती पत्र

मुंबई से एक अखबार निकलता है ‘दक्षिण मुंबई’ नाम से. इस अखबार में एक युवा पत्रकार ने पांच महीने तक काम किया. जब उसने सेलरी मांगी तो उसे बेइज्जत करके भगा दिया गया. इस अपमान से नाराज युवा पत्रकार ने लेबर आफिस में पूरे मामले की शिकायत की और भड़ास के पास पत्र भेजा. जब प्रबंधन को यह सब बात पता चली तो युवा पत्रकार को बुरी तरह धमकाया गया. इससे डरे युवा पत्रकार ने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई है.

पांच महीने बिना सेलरी काम कराया और बेइज्जत करके निकाल दिया

माननीय संपादक जी
भड़ास4मीडिया

सर

मेरा नाम श्याम दांगी  है और मैं मुंबई में पत्रकारिता से जुड़ा हूँ। सर नौकरी के दौरान मैं कुछ कठिनाईयों का सामना कर रहा हूँ जिसके लिए आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता है। मैं पिछले पांच महीने से मुंबई से प्रकशित होने वाले  दैनिक अखबार दक्षिण मुंबई में बतौर सब एडिटर कार्यरत था। लेकिन मुझे इस दौरान कभी सैलरी नहीं मिली।

न्यूज वर्ल्ड इंडिया के कर्मियों का वेतन दस फीसदी घटा, पढ़ें आंतरिक मेल

न्यूज वर्ल्ड इंडिया के सभी कर्मचारियों के वेतन में से दस फीसदी की कटौती की जा रही है… एचआर ने मेल भेज कर सूचना दी है… मेल के मुताबिक कंपनी पर आर्थिक दबाव की वजह से ये कदम उठाया गया है… ये है आंतरिक मेल…

पिता की तेरहवीं में छुट्टी लेकर गए फोटो जर्नलिस्ट की चार दिन की तनख्वाह काट ली

राजस्थान पत्रिका समूह में उत्पीड़न और प्रताड़ना की ढेर सारी कहानियां सामने आती रही हैं. एक ताजे घटनाक्रम के मुताबिक पत्रिका ग्वालियर के फोटो जर्नलिस्ट शशि भूषण पाण्डेय अपने पिता की तरेहवीं में हिस्सा लेने के लिए अवकाश पर गए थे. जब वे लौटकर आए तो पता चला उनका अवकाश मंजूर नहीं किया गया है और उनके वेतन से चार दिन की सेलरी काट ली गई है. इससे आहत पांडेय ने प्रबंधन को पत्र लिखकर न्याय करने की गुहार की है.

बकाया वेतन के लिये यूएनआई के पूर्व मीडियाकर्मियों की कानूनी लड़ाई तेज हुई, मदद की अपील

सरकार ने अखबारों एवं संवाद समितियों के कर्मचारियों एवं पत्रकारों के लिये मजीठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं को लागू कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने भी इन अनुशंसाओं को अक्षरश लागू करने का निर्देश दिया है लेकिन इसके बावजूद दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान टाइम्स, स्टेसमैन, यूएनआई जैसे मीडिया संगठनों ने सरकार एवं उच्चतम न्यायालय के आदेशों को धत्ता बताकर या तो मजीठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं को लागू ही नहीं किया है या मनमाने तरीके से लागू किया है। यही नहीं जिन पत्रकारों ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन वृद्धि लागू किये जाने की मांग की उनके प्रबंधकों ने उनका तबादला करने और उन्हें नौकरी से निकालने के हथकंडे अपनाये।

के.न्यूज वाले बकाया पैसा नहीं दे रहे… इस दिवाली अपनी तीन माह की बिटिया को क्या दूंगा?

संपादक

भड़ास मीडिया

मैं प्रहलाद गुप्ता वाराणसी में के.न्यूज वैनल का रिर्पोटर हूं। मुझे एक साल हो गया के.न्यूज चैनल के लिए रिपोर्टिंग का काम करते। इस दौरान मुझे वेतन के नाम पर चैनल ने वालों ने बस दस हजार रूपये दिए हैं, जब कि मैने अब तक सैकड़ों खबरें चैनल वालों को भेजा है।

सहारा और जागरण के हजारों मीडिया कर्मियों के इतने बड़े-लंबे आंदोलनों को कवरेज नहीं दे रहे बड़े मीडिया हाउसों को अब बेशर्मी छोड़ने की जरूरत

आउटलुक मैग्जीन को धन्यवाद जो उसने सहारा मीडिया के हजारों कर्मियों की बड़ी पीड़ा को आवाज दी. साल भर से बिना सेलरी काम कर रहे और लगभग भुखमरी के शिकार हजारों मीडियाकर्मियों के सड़क पर उतरने और प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखने के बावजूद देश के बड़े मीडिया हाउसों की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली है. लगता है सहारा चिटफंड से अरबों खरबों का पैसा विज्ञापन के नाम पर डकारने के कारण ये मीडिया हाउस नमक का कर्ज अदा कर रहे हैं.

सहारा कर्मियों की तकलीफ को ‘आउटलुक’ मैग्जीन ने भी दी आवाज, पढ़िए भाषा सिंह की रिपोर्ट

आमतौर पर मीडिया वालों की पीड़ा को दूसरे मीडिया हाउस तवज्जो नहीं देते. सहारा मीडिया के कर्मियों की तकलीफ को मुख्य धारा के मीडिया हाउस नहीं उठा रहे क्योंकि हर किसी के यहां कर्मियों का किसी न किसी रूप में शोषण-उत्पीड़न है. यही वजह है कि दैनिक जागरण के सैकड़ों कर्मियों की बर्खास्तगी और उन कर्मियों का आंदोलन किसी मीडिया हाउस के लिए खबर नहीं है.

लोकसभा टीवी : सबसे कम सेलरी प्रोडक्शन स्टाफ की, सबसे ज्यादा काम इन्हीं से करवाया जाता है..

सरकारी चैनल यूँ भी अपने काम के रवैये को लेकर बदनाम है और उनमे होने वाली भर्तियां कैसे होती हैं यह आप सभी जानते हैं.. लोकसभा टीवी को लगभग 10 साल हो गए है लेकिन सीमित संसाधनों में लोगों ने अच्छा काम किया है.. मगर भर्ती प्रक्रिया हमेशा सवालों के घेरे में रही है और कार्य प्रणाली भगवन भरोसे.. बहुत से लोग हैं जो वहां पिछले 9-10 साल से प्रोडक्शन असिस्टेंट या असिस्टेंट प्रोड्यूसर का काम कर रहे हैं.. तजुर्बा अच्छा खासा है लेकिन नियमों के अभाव में शोषण के शिकार हैं..

सात सौ रुपये, हजार रुपये, ढाई हजार रुपये… ये है सेलरी… बदले में 50 लाख से अधिक की विज्ञापन की वसूली

दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े रामगढ जिला अन्तर्गत गोला संवाददाता मनोज मिश्रा ने हिंदुस्तान अखबार को अलविदा कह दिया है. श्री मिश्रा ने इस बाबत एक आवेदन प्रधान संपादक श्री शशिशेखर और झारखण्ड के वरीय संपादक श्री दिनेश मिश्र को प्रेषित किया है. मनोज ने कहा कि सन 2000 से हिन्दुस्तान से जुड़ा. पत्रकारिता में काफी उतार-चढ़ाव देखे. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले पत्रकारों का आज भी काफी शोषण किया जा रहा है. उन्हें अखबार प्रबंधन से सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिलता है. इस कारण पत्रकार आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं. सभी का परिवार है. खर्चे भी काफी हैं. पारिवारिक दायित्व होने और आर्थिक तंगी के कारण ही अखबार को अलविदा कह दिया.