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प्रसार भारती में गड़बड़ियां : अब तो ये आरटीआई से मांगे गए सवालों के जवाब तक नहीं देते!

भारत के लोक प्रसारक यानि दूरदर्शन और आकाशवाणी जो कि प्रसार भारती के तहत काम करते हैं, दोनों ही देश दुनिया को तमाम ख़बरों से रूबरू करवाते हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि दोनों ही संस्थाओं के लिए नियम कायदे बनाने वाले प्रसार भारती के पास खुद के ही कर्मचारियों और उनके लिए बनाए गए नियमों के बारे में ही जानकारी नहीं है। यह बात हाल ही में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद सामने आई है।

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भारत के लोक प्रसारक यानि दूरदर्शन और आकाशवाणी जो कि प्रसार भारती के तहत काम करते हैं, दोनों ही देश दुनिया को तमाम ख़बरों से रूबरू करवाते हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि दोनों ही संस्थाओं के लिए नियम कायदे बनाने वाले प्रसार भारती के पास खुद के ही कर्मचारियों और उनके लिए बनाए गए नियमों के बारे में ही जानकारी नहीं है। यह बात हाल ही में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद सामने आई है।

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इस आरटीआई में कुल 13 सवाल पूछे गए जिनमें से प्रसार भारती के सूचना अधिकारी ने सिर्फ एक सवाल का जवाब दिया। बाकी सवालों के जवाब यह कहते हुए नहीं दिए गए कि सूचना अधिकारी के पास मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं है। यह भी कहा गया कि हम आपके काल्पनिक सवालों के जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। अब बात करते हैं उन सवालों की जो पूछे गए हैं। पहला सवाल है कि प्रसार भारती के तहत आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग में समाचार वाचक सह अनुवादकों के कुल कितने पद स्वीकृत हैं।

इस बारे में प्रसार भारती को पता ही नहीं है। है न हास्यास्पद। सूचना अधिकारी ने कड़े सवालों के जवाब देने से बचने के लिए उत्तर में क़ानून का हवाला देते हुए कहा है कि जो सूचना मौजूद है वही दी जा सकती है। अब माना जाना चाहिए कि प्रसार भारती को खुद पता ही नहीं है कि उसके किस कॉडर में कितने पद हैं। हालांकि यह संभव नहीं है कि उसे पता न हो। सूचना अधिकारी ने सूचना जुटाने की कोशिश ही नहीं कि या फिर उसने जानबूझकर ऐसा किया है। सूचना मांगने वाले ने प्रथम अपील में जाने का फैसला किया है। असल में खुद की गड़बड़ियों को उजागर होने से बचाने के लिए ऐसा किया गया है।

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देश में जहां बेरोज़गार युवाओं की फौज़ नौकरी की राह देख रही है वहीं प्रसार भारती ने रिटायर अधिकारियों और कर्मचारियों को ही फिर से काम दे रखा है। एक ओर ये रिटायर्ड अधिकारी मोटी पेंशन उठाते हैं साथ ही रिटायरमेंट के बाद कंसल्टेंट के नाम पर प्रसार भारती में अपनी सेवाओं के बदले मोटा पारिश्रमिक पाते हैं। इसका सीधा नुकसान युवाओं को हो रहा है।

जिन अधिकारियों ने जिंदगीभर मोटी तन्ख्वाह और तमाम सरकारी सहूलियतों का लाभ लिया वो रिटायर होने से पहले ही अपना जुगाड़ सेट कर लेते हैं और रिटायर होने के कुछ दिनों के अंतराल के बाद फिर से लौट आते हैं। हाल ही में कई कसल्टेंट प्रसार भारती ने रखे हैं। इसकी जानकारी प्रसार भारती की वेबसाइट पर मौजूद है। प्रसार भारती चाहे तो बेरोज़गार युवाओं को नौकरी देकर भला कर सकती है। लेकिन संसाधनों का लाभ एक खास वर्ग ही उठाता रहता है जो कि ग़लत है।

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मांगी गई सूचनाएं

सूचना का अधिकार कानून 2005 के अंतर्गत कृपया निम्न बिंदुओं पर सूचना उपलब्ध कराएं…

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1- प्रसार भारती के अंतर्गत आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग में समाचार वाचक- सह अनुवादक के कुल कितने पद स्वीकृत हैं?

2- स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में कार्यरत समाचार वाचक- सह अनुवादकों की संख्या का भाषावार विवरण दें।

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3- क्या समाचार वाचक- सह अनुवादक का पद स्थाई प्रकृति का है?

4- वर्तमान में कार्यरत अनुबंध आधारित समाचार वाचक- सह अनुवादकों की कुल संख्या, कार्य आरंभ कि तिथि एवं देय पारिश्रमिक का विवरण दें।

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5- प्रसार भारती की UNIFORM CONTRACTUAL POLICY (27-09-2012) में उल्लिखित समाचार वाचक- सह अनुवादक, कॉपी एडीटर के लिए निर्धारित प्रतिमाह  पारिश्रमिक रुपये 23000/ – और रुपये 25000 का निर्धारण किस आधार पर किया गया है?  विवरण दें।

6- उपरोक्त निर्धारित पारिश्रमिक बढ़ते महंगाई भत्ते के आधार पर क्या प्रतिवर्ष संशोधित किया गया? यदि हां। तो प्रत्येक वर्ष संशोधित पारिश्रमिक का विवरण दें।

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7- दिनांक 28-05-2015 से पूर्व कार्यरत अनुबंध आधारित समाचार वाचक- सह अनुवादकों तथा कॉपी एडीटरों के कार्य आरंभ तिथि से एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर पारिश्रमिक में की गई वृद्धि का विवरण एवं वृद्धि की गणना का आधार बताएं।

8- दिनांक 28-05-2015 और उसके बाद से कार्यरत अनुबंध आधारित समाचार वाचक- सह अनुवादकों को एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर प्रति माह देय पारिश्रमिक  में  की गई वृद्धि एवं वृद्धि की गणना किस आधार पर की गई। विवरण दें।

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9- क्या  स्थाई समाचार वाचक- सह अनुवादकों और अनुबंध आधारित समाचार वाचक- सह अनुवादकों की कार्य प्रकृति और निर्धारित उत्तरदायित्व समान है? यदि नहीं। तो अंतर की जानकारी दें।

10- माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा STAE OF PUNJAB AND OTHERS  VS  JAGJEET SINGH AND  OTHERS मामले में दिनांक 26-10-2016 के फैंसले के अनुसार स्थाई प्रकृति और स्थाई पदों के विरुद्ध कार्यरत  अनुबंध आधारित (CONTARCTUAL)  कर्मचारियों को समान कार्य – समान वेतन देने संबधी आदेश का प्रसार भारती में अनुपालन किया जा रहा है। यदि नहीं, तो कब से प्रस्तावित है? (माननीय उच्चतम न्यायालय के फैंसले की प्रति संलग्न है)

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11- अनुबंध आधारित समाचार वाचक सह अनुवादक को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कौन- कौन से लाभ दिए जा रहे हैं। विवरण दें।

12-  स्थाई समाचार वाचक सह अनुवादक और अनुबंध आधारित समाचार वाचक सह अनुवादकों की चयन प्रक्रिया का  विवरण दें। 

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13- समाचार वाचक सह अनुवादक पद पर  स्थाई नियुक्ति कब की गई और  अपनाई गई चयन प्रक्रिया का विवरण दें।

उपरोक्त जानकारी प्रसार भारती के अंतर्गत आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग के संदर्भ में मांगी गई है।

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