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वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा के आंख का आपरेशन सफल, देखिए एक आंख से उनने क्या लिख दिया!

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार, विश्लेषक, घुमक्कड़, रंगकर्मी राजीव नयन बहुगुणा अपने फक्कड़ और मस्तमौला स्वभाव के लिए जाने जाते हैं. अपने अदभुत लेखन के कारण सोशल मीडिया पर वे लाखों लोगों के प्रिय हैं. उन्होंने एक आंख का आपरेशन कराया जो सफल रहा.

देहरादून के सरकारी अस्पताल में आपरेशन सर्जन डाक्टर चिराग बहुगुणा ने किया. बाद में सब कुछ सही से हो जाने पर राजीव नयन बहुगुणा ने एक आंख से एफबी पोस्ट लिख डाली…. पढ़ें..

Rajiv Nayan Bahuguna-

एकाक्षी सम दर्शन

चूंकि कल 5 राज्यों के चुनाव परिणाम आने पर मुझे अनेक चैनलों की ओर से विश्लेषण का अग्रिम आफर है , अतः मैंने आज ही अपनी एक आंख का चिर लंबित ओरेशन करवा दिया है । मेरी एक आंख में पट्टी बंधी रहेगी , इस तरह मैं यह दावा कर सकूंगा कि मैं सबको एक आंख से देख रहा हूँ ।

यह ऑपरेशन साल भर से लंबित था । पढ़ने लिखने में मेरी कोई खास रुचि नहीं है । किसान , चर्मकार , लोहार जुलाहे , सैनिक और कलाल बगैर चश्मे के अपना काम करते हैं । इनमें से कोई भी लेखक नहीं होता , फिर भी उनका अवदान समाज के लिए एक लेखक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है ।

फिर भी आंख का ऑपरेशन तो होना ही था । पहले मेरी समझ थी कि मुझे यह ऑपरेशन दिल्ली के सरकारी में करवाना चाहिए , जहां के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री दोनों मेरे हितैषी और मित्र हैं , और जहां की स्वास्थ्य सेवाओं का डंका दुनिया मे गूंज रहा है । लेकिन फिर मुझे विदित हुआ कि इस सुविधा का नैतिक अधिकार सिर्फ दिल्ली के नागरिकों को है ।

तब मैंने देहरादून के सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन कराने का फैसला किया । निजी अस्पताल में इस प्रयोजन में कम से कम 15 हज़ार रोकड़े का खर्च बताया गया , जो न तो मेरी हैसियत के अनुरूप था , और न आवश्यक । देहरादून के एक बड़े सर्जन डॉ Mahesh Kuriyal ने मुझे अपने प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में यह कार्य मुफ्त करवाने को आहूत किया , तो मैंने उन्हें भी यही जवाब दिया कि आखिर आपको भी इस रकम की भरपाई किसी न किसी रूप में करनी ही होगी । अतः मुझे शनैः यह रकम कभी कभार नकद ही दे देना , जैसे कि देते ही हो ।

आज देहरादून के सरकारी गांधी नेत्र चिकित्सालय में 28 रुपये की पर्ची पर बेहतरीन शल्य क्रिया सम्पन्न हो गयी । दवाइयां मुफ्त मिलीं । ऑपरेटर डॉ chirag bahuguna ऑपरेशन करते हुए मुझसे गढ़वाली में वार्तालाप करते रहे , और तनाव पास भी न फटकने पाया ।

मित्र के स्कूटर पर पीछे बैठ कर आराम से घर आ गया , तथा एक आंख से काम लेना शुरू कर दिया ।

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