रामबहादुर राय ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के चुनौतीपूर्ण दौर में वहां जाकर हिम्मत के साथ रिपोर्टिंग की : रमन सिंह

: सप्रे जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने रामबहादुर राय को माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान से किया सम्मानित : जॉन राजेश पॉल को चन्दूलाल चन्द्राकर पत्रकारिता पुरस्कार : रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि पंडित माधव राव सप्रे ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में छत्तीसगढ़ अंचल में पत्रकारिता की मशाल प्रज्जवलित की जब राष्ट्रीय चेतना अपने उफान पर थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस युग में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बोलना, लिखना या आवाज उठाना देशद्रोह माना जाता था। पंडित माधव राव सप्रे ने ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में सन 1900 में पेण्ड्रा जैसे दूरस्थ अंचल से मासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का सम्पादन और प्रकाशन शुरू करके हिम्मत और हौसले के साथ छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की बुनियाद रखी। पंडित माधव राव सप्रे ने अपनी साहित्य साधना और पत्रकारिता के जरिए छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण मध्य भारत में राष्ट्रीय चेतना का विस्तार किया।

 

मुख्यमंत्री कल यहां पंडित माधव राव सप्रे की जयंती के अवसर पर राज्य सरकार के जनसम्पर्क विभाग द्वारा आयोजित पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।  उन्होंने समारोह में देश के प्रसिद्ध लेखक, चिन्तक और पत्रकार, पदमश्री सम्मानित श्री रामबहादुर राय को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्थापित ‘माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान 2014’ से नवाजा। मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मान के रूप में ढाई लाख रूपए के चेक सहित शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट किया। उल्लेखनीय है कि पंडित माधव राव सप्रे के नाम पर राज्य शासन के जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्थापित पुरस्कार के लिए यह पहला समारोह था। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर जनसम्पर्क विभाग की ओर से राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री जॉन राजेश पॉल को ‘चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार 2014’ से सम्मानित किया। उन्हें पचास हजार रूपए की सम्मान राशि के साथ शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में पंडित माधव राव सप्रे और स्वर्गीय श्री चन्दूलाल चन्द्राकर के योगदान को विशेष रूप से याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित माधव राव सप्रे की लिखी कहानी ‘टोकरी भर मिटटी’ को हिन्दी की प्रथम मौलिक कहानी माना जाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2008 में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर में सप्रे जी की स्मृति में ‘पंडित माधवराव सप्रे राष्ट्रवादी पत्रकारिता शोधपीठ’ की स्थापना की गयी। डॉ. रमन सिंह ने जनसम्पर्क विभाग द्वारा सप्रे जी के नाम प्रदत्त राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान के लिए चयनित श्री रामबहादुर राय को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सप्रे जी ने हिन्दी जगत में पत्रकारिता की जो मशाल प्रज्जवलित की थी, उसे आगे ले जाने का कार्य श्री राय जैसे मनीषी और चिन्तक कर रहे हैं। श्री राय ने आपातकाल की पीड़ा झेली है। इसके बावजूद उन्होंने एक जुझारू पत्रकार के रूप में अभिव्यक्ति की मशाल थाम रखी है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि श्री रामबहादुर राय ने बांग्ला देश के मुक्ति संग्राम के चुनौतीपूर्ण दौर में वहां जाकर हिम्मत के साथ रिपोर्टिंग की है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज उन्हें सप्रे जी के नाम स्थापित सम्मान दिया जा रहा है। उन्हें सम्मानित करके यह सम्मान स्वयं सम्मानित हुआ है और हम सब स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। डॉ. रमन सिंह ने स्वर्गीय श्री चन्दूलाल चन्द्राकर को याद करते हुए कहा कि चन्द्राकर की छत्तीसगढ़ के माटी के सपूत थे। पत्रकारिता के साथ-साथ राजनीति और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वे वर्ष 1964 से 1980 तक हिन्दुस्तान टाइम्स से मुख्य सम्पादक रहे।

डॉ. रमन सिंह ने स्वर्गीय श्री चन्द्राकर के नाम पर स्थापित पुरस्कार से श्री जॉन राजेश पॉल को सम्मानित कर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री दयालदास बघेल ने कहा कि साहित्य कला-संस्कृति और पत्रकारिता के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की धरती काफी समृद्ध है। इन क्षेत्रों में कई महान विभूतियों ने अपने रचनात्मक कार्यों के जरिए देश और समाज की सेवा की है। उन्हीं महान विभूतियों में पंडित माधव राव सप्रे और श्री चन्दूलाल चन्द्राकर भी थे। श्री बघेल ने कहा कि पंडित माधव राव सप्रे ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का सम्पादन किया। स्वर्गीय श्री चन्द्रलाल चन्द्राकर वरिष्ठ पत्रकार और राजनेता होने के बावजूद बेहद सहज-सरल स्वभाव के थे। उन्होंने  हमेशा समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों की चिन्ता करते हुए उनकी बेहतरी के लिए प्रयास किया।

श्री दयाल दास बघेल ने कहा कि स्वर्गीय चन्दूलाल चन्द्राकर ने जिस छत्तीसगढ़ राज्य का सपना देखा था, उनके उस सपने को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरा किया। संस्कृति मंत्री श्री बघेल ने समारोह में पुरस्कृत और सम्मानित पत्रकारों सर्वश्री रामबहादुर राय और जॉन राजेश पॉल को बधाई देते हुए उनके प्रति अपनी शुभेच्छा प्रकट की। इस मौके पर श्री रामबहादुर राय ने पंडित माधव राव सप्रे की पत्रकारिता पर अपने विचार व्यक्त किए। श्री राय ने कहा कि सप्रे जी वास्तव में युग पुरूष थे और उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से देश के स्वतंत्रता आंदोलन को और देश की राजनीति को राह दिखाई। श्री राय ने कहा कि सप्रे जी की पत्रकारिता सम्पूर्ण पत्रकारिता थी। उनकी पत्रकारिता में स्वाधीनता की भावना के साथ-साथ राजनीति, अर्थनीति संस्कृति भी थी और समाज भी था। श्री जॉन राजेश पॉल ने भी समारोह में अपने विचार व्यक्त किए। श्री पॉल ने चंदूलाल चंद्राकर पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री जॉन राजेश पॉल इस मौके पर काफी भावुक हो गए। उन्होंने रूंधे गले से अपने पिता को याद किया और कहा कि वे मुझे ’पादरी’ बनाना चाहते थे, लेकिन मैं पत्रकार बन गया।

प्रारंभ में जनसम्पर्क विभाग के सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क श्री गणेश शंकर मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया। श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मार्गदर्शन में राज्य शासन द्वारा वर्ष 2014 में पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान की स्थापना की गयी है। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने विशिष्ट रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के प्रति सम्पर्ण भाव से रचनात्मक कार्य करके राष्ट्र का गौरव बढ़ाने वाले मनीषियों का चयन करने का प्रावधान इसमें किया गया है। इसी तरह छत्तीसगढ़ की संस्कृति, समृद्धि और विकास के संबंध में रचनात्मक लेखन के लिए वर्ष 2010 में हिन्दी/छत्तीसगढ़ी प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार तथा अंग्रेेजी प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए मधुकरखेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार की स्थापना की गयी है।

समारोह में छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के निदेशक श्री रमेश नैय्यर, पदमश्री सम्मानित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय, वरिष्ठ कवि श्री विनोद कुमार शुक्ल, वरिष्ठ समीक्षक डॉ. राजेन्द्र मिश्र, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र, पूर्व मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुशील त्रिवेदी, नई दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार और माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय कैम्पस नोएडा के निदेशक श्री जगदीश उपासने, दूरदर्शन केन्द्र रायपुर के पूर्व उप महानिदेशक श्री तेजिन्दर सिंह गगन, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के संसदीय सलाहकार श्री अशोक चतुर्वेदी, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया, श्री गिरीश पंकज, वरिष्ठ पत्रकार सर्वश्री गोविंदलाल वोरा सहित अन्य अनेक पत्रकार, साहित्यकार तथा प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।



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